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वोडाफोन-आइडियाके विलय प्रस्तावको मंजूरी आज संभव

नयी दिल्ली। वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्यूलर की विलय योजना को दूरसंचार विभाग की मंजूरी कल मिल सकती है।विलय के बाद कंपनी का नाम वोडाफोन आइडिया लि. होगा और मौजूदा ग्राहक संख्या के हिसाब से यह देश की सबसे बड़ी मोबाइल दूरसंचार सेवा कंपनी हो जाएगी। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, 'वोडाफोन - आइडिया के विलय को दूरसंचार विभाग की मंजूरी सोमवार को मिल सकती है।Ó दोनों कंपनियों के विलय के बाद आज के हिसाब से नयी कंपनी की संयुक्त आय 23 अरब डालर (1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक) होगी और उसके ग्राहकों का आधार 43 करोड़ होगा। इस तरह यह देश की सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी। इस बढ़ी हुई ताकत से दोनों कंपनियों को बाजार प्रतिस्पर्धा से निपटने में काफी मदद मिलने की उम्मीद है। नयी कंपनी रिलायंस जियो के प्रवेश के बाद टेलीकॉम बाजार आकर्षक पैकेज दे कर ग्राहकों को तोडऩे - जोडऩे की जबरदस्त प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रहा है। इससे मोबाइल इंटरनेट और कॉल सेवाओं की दरें काफी कम हो गयी हैं। विलय में जा रही इन दोनों कंपनियों पर इस समय कर्ज का संयुक्त बोझ 1.15 लाख करोड़ रुपये के करीब बताया जा रहा है। सूत्र ने कहा कि विलय योजना की मंजूरी के लिए विभाग आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी आइडिया सेल्यूलर से बैंक गारंटी लेगा। इसके अलावा कंपनी को यह भी भरोसा देना होगा कि ब्रिटेन के वाडाफोन समूह की कंपनी वोडाफोन इंडिया पर आगे भी कोई देनदारी निकलती है तो उसकी जिम्मेदारी आइडिया को पूरी करनी होगी। दूरसंचार विभाग आईडिया सेल्यूलर के स्पेक्ट्रम के एकबारगी शुल्क के लिए 2100 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी मांग सकता है। इसके अलावा उसे यह भरोसा भी देना होगा कि वह अदालती आदेश के अनुसार स्पेक्ट्रम संबंधी सभी बकायों का निपटान करेगी।  स्पेक्ट्रम शुल्क टुकड़ों में भुगतान के लिए वोडाफोन इंडिया की एक साल की बैंग गारंटी की जिम्मेदारी आइडिया को लेनी होगी। सूत्रों के अनुसा विभाग दोनों कंपनियों से यह भी वचन लेगा कि वे न्यायालय में लंबित मामलों से उत्पन्न किसी भी देनदारी को चुकायेंगी। विलय के बाद नयी कंपनी में वोडाफोन की हिस्सेदारी 45.1 प्रतिशत और कुमारमंगलम बिड़ला के नेतृत्व वाले आदित्य बिड़ला समूह की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत तथा आईडिया के शेयरधारकों की हिस्सेदारी 28.9 प्रतिशत होगी। प्रस्तावों के मुताबिक कुमारमंगलम बिड़ला नयी कंपनी के गैर कार्यकारी चेयरमैन होंगे और बालेश शर्मा को कंपनी का मुख्यकार्यपालक अधिकारी बनाया जा सकता है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जुटानेमें भारतसे आगे निकला अमेरिका

नयी दिल्ली। ग्रीनफील्ड यानी नई परियोजनाओं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हासिल करने के मामले में अमेरिका ने 2017 में भारत को पीछे छोड़ दिया है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। 'द फाइनेंशियल टाइम्सÓ की एफडीआई रिपोर्ट- 2018 में कहा गया है कि 2017 में भारत में नई एफडीआई परियोजनाएं 21 प्रतिशत घटकर 637 रह गईं। यह रिपोर्ट एफडीआई इंटेलिजेंस ने तैयार की है। उल्लेखनीय है कि ग्रीनफील्ड एफडीआई निवेश के मामले में भारत 2015 और 2016 में दुनिया में पहले स्थान पर था। 2017 में अमेरिका पहले स्थान पर पहुंच गया। वर्ष के दौरान अमेरिका को 87.4 अरब डॉलर का एफडीआई मिला। एशिया प्रशांत क्षेत्र में विदेशी निवेश वाली नई परियोजनाओं और कुल प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी पूंजी निवेश के मामले में चीन पहले स्थान पर और भारत दूसरे स्थान पर रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन को 2017 में नई परियोजनाओं के लिए 50.8 अरब डॉलर का विदेशी पूंजी निवेश मिला जबकि भारत का आंकड़ा 25.1 अरब डॉलर रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन को इस दौरान कुल 681 नई एफडीआई परियोजनाओं के लिए और भारत को 637 नई एफडीआई परियोजनाओं के लिए निवेश मिला। एफडीआई रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर 2017 में ग्रीनफील्ड एफडीआई परियोजनाओं की संख्या 1.1 प्रतिशत घटकर 13,200 रह गई। इस दौरान पूंजी निवेश 15.2 प्रतिशत घटकर 662.6 अरब डॉलर रहा।
ऐसी परियोजनाओं में रोजगार सृजन भी 9.4 प्रतिशत घटकर 18.3 लाख रहा।