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जीएसटीसे 97 हजार करोड़से अधिक की कमाई

नयी दिल्ली। नवंबर महीने में केंद्र व राज्य सरकारों को गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) से 97 हजार करोड़ की कमाई हुई। हालांकि, यह अक्टूबर के मुकाबले 3 हजार करोड़ रुपए कम रही। अक्टूबर में जीएसटी से कुल कमाई एक लाख करोड़ रुपए के पार चली गई थी। इससे पहले सितंबर में 94,442 करोड़ रुपए की कमाई केंद्र व राज्य सरकारों को हुई थी। जीएसटी से कुल कमाई 97,637 करोड़ रुपए रही, जिसमें सीजीएसटी 16812 करोड़ रुपए, एसजीएसटी 23,070 करोड़ रुपए और आईजीएसटी 49,726 करोड़ रुपए रहा। वहीं, सेस से 8031 करोड़ रुपए सरकार को प्राप्त हुए। वित्त मंत्री अरुण जेतली ने कहा कि इस कलेक्शन के पीछे बहुत बड़ी वजह है। उन्होंने अपने ट्वीट मंा कहा है कि टैक्स दरों में कमी और टैक्स चोरी पर लगाम लगाने से यह सफलता मिली है। अगस्त में जीएसटी कलेक्शन 93,690 करोड़ रुपए रहा था। केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून के तहत स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) तथा स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) प्रावधानों को एक अक्टूबर से लागू कर दिया है। केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) अधिनियम के मुताबिक, अधिसूचित कंपनियों को 2.5 लाख रुपए से अधिक की वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के भुगतान पर एक फीसदी टीडीएस काटना जरूरी होगा। साथ ही, राज्य कानूनों के तहत राज्य एक फीसदी टीडीएस वसूलेंगे।
किलोग्राम के बाद अब बदलेंगे मीटर-सेकंड के मानक

नयी दिल्ली।  पिछले महीने दुनियाभरॅ के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक किलोग्राम का मापक पैमाना बदल कर पूरी दुनिया में हलचल मचा दी थी। इसके बाद अब वैज्ञानिक मीटर और सेकंड का मानक भी बदलने की तैयारी में है। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, साल 2019 में इस संबंध में फैसला लिया जा सकता है। किलोग्राम के बाद कुछ और इकाइयों को मापने के लिए भी प्राकृतिक वस्तुओं का आधार लिया जाएगा। मई 2019 के बाद मीटर और सेकंड के साथ-साथ कुछ और इकाइयों के मानकों की परिभाषा में भी बदलाव होगा। वैज्ञानिकों ने  फैसला किया है कि अब माप के लिए प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।  बता दें कि फ्रांस में दुनिया के 60 वैज्ञानिकों ने वोटिंग करके किलोग्राम के सबसे बड़े पैमाने या मानक को रिटायर कर दिया है। इस बदलाव का आम लोगों पर कोई असर नहीं होगा, लेकिन विज्ञान के प्रयोगों में इसका काफी असर होगा, क्योंकि वहां सटीक माप की जरूरत होती है। वैज्ञानिकों ने हाल में सर्व-सम्मति से वोट देकर ये फैसला किया है कि किलोग्राम को परिभाषित करने के लिए विद्युत धाराओं से पैदा की गई ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मतलब है कि बिजली द्वारा पैदा की गई ऊर्जा से तौल के मानक की परिभाषा तय होगी। दरअसल, किलोग्राम को मापने वाली वस्तु फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक तिजोरी के अंदर रखी है। ये प्लेटिनम से बनी एक सिल है, जिसे 'ली ग्रैंड के' कहा जाता है। एक सिलेंडर है और इसे ही इंटरनेशनल प्रोटोकॉल किलोग्राम माना जाता है। अब तक इसे एक किलो के सबसे सटीक बाट के रूप में जाना जाता था। फ्रांस के वर्साइ में आयोजित एक सम्मेलन में ज्यादातर वैज्ञानिकों का कहना था कि किलोग्राम को यांत्रिक और विद्युत चुंबकीय ऊर्जा के आधार पर परिभाषित किया जाना चाहिए और फिर वोटिंग के जरिए इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई।