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नीति आयोग गवर्निंग काउन्सिल महत्वपूर्ण नीतियोंको लागू करनेपर चर्चा करेगी-मोदी

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि नीति आयोग की गवर्निंग काउन्सिल विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण नीतियों को लागू करने पर चर्चा करेगी। मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, ''नीति आयोग की गवर्निंग काउन्सिल की कल होने वाली चतुर्थ बैठक का इंतजार है। विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण नीतियों को लागू करने पर बैठक में चर्चा की जाएगी।ÓÓ एक आधिकारिक वक्तव्य में कल बताया गया था कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिये उठाए गए कदमों और सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर हुई प्रगति समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। वक्तव्य के अनुसार 'न्यू इंडिया 2022Ó के लिये विकास के एजेंडा को भी बैठक में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। नीति आयोग के शीर्ष निकाय परिषद में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, कई केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल होते हैं। वक्तव्य के अनुसार गवर्निंग काउन्सिल की बैठक में सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं यथा आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय पोषाहार मिशन और मिशन इंद्रधनुष, जिलों के विकास के अतिरिक्त महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती समारोह जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
2.25 लाख शेल कंपनियोंको नोटिस

नयी दिल्ली। मोदी सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर बड़ा एक्शन किया है। इसके तहत ऐसी 2.25 लाख मुखौटा कंपनियों को नोटिस दिया जा चुका है, जिनमें इलीगल एक्टिविटी का आशंका है। इस बारे में केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने जानकारी दी है। इस बारे में केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने गड़बड़ी करने वाली कंपनियों को कठोर चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी कंपनी की स्वायत्तता निवेशकों के हितों की कीमत पर नहीं हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इन कंपनियों की स्क्रूटनी में कुछ बड़े खुलासे हो सकते हैं।
असल में यह केंद्र सरकार द्वारा मुखौटा कंपनियों के खिलाफ अभियान का अगला चरण है, जिसमें इन 2.25 लाख मुखौटा कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस कदम से मुखौटा कंपनियों के जरिए कालेधन को सफेद करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा लगा सकेगा। सरकार की ओर से कहा गया है कि उद्देश्य है कि कंपनियों के फंक्शनिंग में यह तय किया जा सके कि मनी लॉन्ड्रिंग या दूसरे अनैतिक गतिविधियों के लिए इनका मिसयूज न हो सके।  सरकार की ओर से कहा गया है कि जो 2.25 लाख कंपनियां सरकार के निशाने पर हैं, उनमें लंबे समय से बिजनेस एक्टिविटीज नहीं हो रही हैं। इन कंपनियों ने लंबे समय तक फाइनेंशियल स्टेटमेंट या एनुअल रिटर्न फाइल नहीं किया है। ऐसे में आशंका है कि इनका इस्तेमाल काले धन को सफद करने के लिए किया जा रहा है। इससे पहले वित्त वर्ष 2017-18 में रजिस्ट्रार्स ऑफ कंपनीज (आरओसी) मुखौटा कंपनियों की पहचान कर 2,26,166 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर चुकी है। मुखौटा कंपनियों के खिलाफ यह कदम कंपनीज एक्ट, 2013 के तहत उठाया गया। उन्होंने कहा , ''मैं सुनिश्वित हूं। निजी तौर पर मुझे लगता है कि जब हम खारिज की जा चुकी कंपनियों की जांच करेंगे, कुछ जानकारियां जरूर बाहर आएंगी। ये जानकारियां राजनीतिक दलों के बारे में हो सकती हैं यह निजी लोगों के बारे में हो सकती हैं, यह लेकिन तय है कि ये जानकारियां उन लोगों से जुड़ी होंगी जिन्होंने लंबे समय तक देश में शासन किया है।Ó केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद मुखौटा कंपनियों की पहचान कर उनके खिलाफ एक्शन लेने का अभियान शुरू किया था। सरकार का मानना है कि मुखौटा कंपनियों के जरिए कालेधन को सफेद करने का काम किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कालेधन के खिलाफ अभियान के तहत मुखौटा कंपनियों का नेटवर्क खत्म करने की बात कही है।
डॉलरके मुकाबले रुपया टूटकर 68 के पार पहुंचा
नयी दिल्ली। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को रुपया एक बार फिर टूटकर 68 के स्तर पर पहुंच गया है। इसमें 40 पैसे की भारी गिरावट दिखी है। शनिवार दोपहर 1 बजकर 45 मिनट के करीब रुपया डॉलर के मुकाबले 68.01 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। बीते बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है, जिसके चलते डॉलर में मजबूती दिख रही है। रुपये के कमजोर होने से तेल कंपनियों के लिए कच्चा तेल आयात करना महंगा साबित होगा। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढऩी शुरू हो सकती हैं। पेट्रोल और डीजल के अलावा मोबाइल फोन, टेलीविजन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आयातित उत्पाद महंगे हो सकते हैं।

रुपया कमजोर हुआ तो क्या होगा फायदा?

हालांकि रुपये में गिरावट का फायदा यह होगा कि भारतीय कंपनियों को निर्यात के बदले बेहतर दाम मिलेंगे। भारत से ज्यादातर इंजीनियरिंग सामानों, जेम्स एंड ज्वैलरी, टेक्सटाइल समेत दर्जनों अन्य उत्पादों का निर्यात होता है।