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डॉलरके मुकाबले रुपयेमें भारी गिरावट

मुंबई। तुर्की के आर्थिक संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने की आशंका से आज दुनियाभर में मुद्राओं की स्थिति डांवाडोल रही। भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज 1.08 रुपए अथवा 1.57 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 69.91 रुपए प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। तुर्की मुद्रा लीरा में लगभग आठ प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान अमेरिकी मुद्रा अन्य वैश्विक मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो गई। एक सरकारी बैंक के कोषाध्यक्ष ने कहा, रुपए में मुख्य तौर पर जो गिरावट आई है वह तुर्की की मुद्रा लीरा की वजह से आई है। उन्होंने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) की ओर से प्रवाह में कमी और बढ़ती तेल कीमतों से भी रुपया प्रभावित हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, डॉलर के मुकाबले रुपए के इन स्तरों पर आरबीआई सहज स्थिति में नहीं होगा। उसे हर स्तर पर रुपए का बचाव करते देखा गया। उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपया जल्द ही 70 रुपए के स्तर तक गिर सकता है। कारोबार की शुरूआत में आज रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 41 पैसे की तेजी के साथ 68.42 रुपए प्रति डॉलर पर मजबूत खुला। हालांकि, यह जल्द ही घरेलू शेयर बाजार की गिरावट और वैश्विक बाजार की मंदी के रुख के अनुरूप 69.62 रुपए तक नीचे लुढ़क गया।समझा जाता है कि रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप के कारण रुपया अपने आरंभिक भारी नुकसान की स्थिति से उबर गया लेकिन डॉलर की भारी मांग ने कारोबार की समाप्ति पर रुपए को 1.08 रुपए अथवा 1.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ अब तक के सर्वकालिक निम्न स्तर 69.91 रुपए प्रति डॉलर तक पहुंचा दिया।  
इंडियन ऑयल शहरी गैस परियोजनामें 20,000 करोड़ निवेश करेगी

नयी दिल्ली। देश की सबसे बड़ी खुदरा तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) अपने पारंपरिक तेल शोधन और विपणन कार्यक्रम की तरह गैस कारोबार पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है। इंडियन ऑयल की शहरी गैस वितरण परियोजनाओं में अगले 5 से 8 वर्षों में 20,000 करोड़ रुपए निवेश की योजना है। कंपनी के चेयरमैन संजीव सिंह ने आज यह बात कही। कंपनी को उम्मीद है कि सीएनजी ने आज वाहनों में पेट्रोल और डीजल के इस्तेमाल को कुछ हद तक बदला है। इसी तरह घरों में भी एलपीजी की जगह पाइप रसोई गैस का उपयोग होने लगेगा। बाजार में अपनी स्थिति को बरकरार रखने के लिये कंपनी इस कारोबारों में प्रवेश करना चाहती है। आईओसी चेयरमैन ने कहा, कंपनी ने हाल में शहरी गैस वितरण (सीजीडी) के लिए आयोजित बोली प्रक्रिया में लाइसेंस के लिए अन्य सार्वजनिक कंपनियों की तुलना में अधिक आक्रामक तरह से बोली लगाई। कंपनी को करीब 20 शहरों में वाहनों के लिए सीएनजी और घरों एवं उद्योगों में पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस (पीएनजी) की आपूर्ति के लिए खुदरा लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। यह पहले से कंपनी को मिले करीब 10 लाइसेंसों के अलावा हैं। उन्होंने कहा कि हमने 9वें दौर की बोली में 86 शहरों या भौगोलिक क्षेत्रों में से 57 के लिए बोली लगाई है। इनमें से हमें 20 शहरों में गैस की आपूर्ति करने के लिए लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। इसमें एक या दो की बढ़ोत्तरी या कमी हो सकती है। सिंह ने कहा कि इन शहरों में 5 से 8 सालों में कम से कम 20,000 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। इसमें सीएनजी स्टेशन स्थापित करने के साथ-साथ घरों में रसोई गैस पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाना शामिल हैं।
गोल्ड पॉलिसी बनानेके लिए सरकारने बढ़ाया कदम
मुंबई। सरकार ने व्यापक गोल्ड पॉलिसी तैयार करने की तरफ अपना पहला कदम बढ़ा दिया है। उसने एक दर्जन इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स की अस्थायी कमेटी बनाई है, जो वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु के सुझाव के मुताबिक गोल्ड और जूलरी के लिए डमेस्टिक काउंसिल का स्ट्रक्चर तय करेगी। इस काउंसिल का सबसे अनूठा हिस्सा हैंडमेड और कस्टमाइज्ड आभूषणों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सबसे छोटे साझीदारों-कारीगरों और सुनार से लेकर सबसे बड़े स्टेकहोल्डर्स- जूलर और बुलियन डीलर का व्यापक रूप से प्रतिनिधित्व होगा, जिससे नौकरियों के ज्यादा मौके बनेंगे।  पिछले गुरुवार को इंडिया इंटरनैशनल जूलरी शो मुंबई में हुआ था, जिसमें चीफ गेस्ट के तौर पर आमंत्रित प्रभु ने कहा था, हम भारत में पहली बार एक गोल्ड काउंसिल बना रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री का विजन है कि गोल्ड एक कमोडिटी बने, जिसका वैश्विक स्तर पर निर्यात किया जा सके। हमारे पास करीब हरेक गांव में जूलर हैं। वे कस्टमाइज्ड जूलरी बना सकते हैं।

निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिश
उनका कहना था, 'हमारे पास हैंडमेड जूलरी बनाने वाले सुनार हैं। इस बात की कल्पना कीजिए कि कस्टमाइज्ड और हैंडमेड जूलरी के लिए ग्लोबल मार्केट में अपार संभावनाएं हैं। हमें उन्हें बढ़ावा देना चाहिए और उनसे देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। डमेस्टिक गोल्ड काउंसिल बनाने के अलावा हम निर्यात को बढ़ावा देने की भी कोशिश कर रहे हैं, जिसके लिए हमने एक रणनीति भी बनाई है।'

सूत्रों के अनुसार कमेटी में इंडिया बुलियन ऐंड जूलर्स असोसिएशन (आईबीजेए), जेम ऐंड जूलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी), भारत डायमंड बोर्स (बीडीबी), तमिलनाडु जूलर्स फेडरेशन और इंडिया जूलर्स फोरम का प्रतिनिधित्व रहेगा। इंडस्ट्री सूत्रों ने बताया कि इसके अलावा ऑल इंडिया जेम ऐंड जूलरी डमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) और रिफाइनरीज के असोसिएशन भी कमेटी का अहम हिस्सा हो सकते हैं। जीजेईपीसी के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने बताया था कि उन्हें कमेटी की मेंबरशिप के बारे में जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि एक-दो दिन में इसके बारे में पता चल जाएगा।