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समानीकरण कर बेहद स्पष्ट

नयी दिल्ली। सरकार ने बाहरी ई-वाणिज्य कंपनियों पर हाल ही में लगाये गये दो प्रतिशत समानीकरण कर के बारे में 'बार बार पूछे जाने वाले सवाल (एफएक्यू)Ó लाने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया। सरकार ने कहा कि संसद से पारित कानून बिल्कुल स्पष्ट है। वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में केंद्र सरकार ने दो प्रतिशत समानीकरण कर का प्रस्ताव किया था, जो एक अप्रैल 2020 से प्रभावी हुआ है। यह कर किसी बाहरी ई-वाणिज्य कंपनी के द्वारा माल या सेवा की आपूर्ति के बदले प्राप्त राशि पर लगता है। इसकी पहली किस्त जमा करने की समयसीमा सात जुलाई है। कई कर विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि इस शुल्क के बारे में शंकाओं का निवारण करने के लिये सरकार को एफएक्यू पेश करना चाहिये। वित्त सचिव अजय भूषण पांडेय ने कहा कि एफएक्यू तब लाया जाता है, जब आपको किसी ऐसे को समझाना होता है जो कर कानूनों से अवगत नहीं है और आप तब सरल शब्दों में ऐसा करने का प्रयास करते हैं। पांडेय ने उद्योग एवं वाणिज्य संगठन फिक्की द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, ''यहां कानून बहुत स्पष्ट है। यदि आप पूरे डिजिटल कर कानून को देखते हैं, तो वे बहुत लंबे या जटिल नहीं हैं। डिजिटल कर के दायरे में आने वाली हर कंपनी के पास कर सलाहकार होते हैं। वे अपनी व्याख्या कर सकते हैं और निर्णय ले सकते हैं। अत: संसद द्वारा मंजूर किसी चीज पर एफएक्यू आदि के माध्यम से कुछ आरोपित करना ठीक चलन नहीं है।ÓÓ उन्होंने कहा कि कई बार कंपनियों की ओर से कुछ इस तरह के सवाल आते हैं कि 'यदि कोई लेन-देन ऐसा है, तो क्या मुझे डिजिटल कर देना होगा?Ó उन्होंने कहा, ''सवाल यह है कि यह लगभग वैसा ही है जैसे मैं एक अग्रिम निर्णय दे रहा हूं, जो कि राजस्व विभाग का काम नहीं है।
 यदि कोई अग्रिम फैसला किया जाना है, तो सामने वाले को कर सलाहकार से बात करनी होगी। हमारे अनुसार यह कानून बहुत स्पष्ट है।ÓÓ