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दैनिक मंडी समीक्षा

नयी दिल्ली। देशी चने की आवक घट जाने एवं डिब्बा 125 रुपए प्रति क्विंटल बढ़कर बंद होने से यहां खड़ी मोटर में 75/100 रुपए की वृद्धि हो गयी। दाल के भाव भी 50/75 रुपए बढ़ाकर बोले गये। बीकानेर, चूरू एवं नोहर-भादरा लाइन में आवक टूट जाने से 100/125 रुपए बढ़ाकर बोलने लगे हैं। उधर इंदौर लाइन में भी दाल की चालानी मांग बढ़ गयी है। इसे देखते हुए 200 की और तेजी का अंदेशा बन गया है। इसके अलावा मसूर भी बिल्टी में 35/40 रुपए बढ़ गयी। चीनी का कोटा कम आने से अंदरूनी मजबूती दर्ज की गयी। अधिकतर मिलों ने नई चीनी की सेल नहीं दी। खाद्य तेलों में सोया एवं सरसों में आज भी 50/100 रुपए का मंदा आ गया। किराने में घबराहटपूर्ण बिकवाली से सौंठ 1000 रुपए प्रति क्विंटल और टूट गयी। जीरे में भी 200 रुपए और निकल गये। अनाज-दाल-नई दिल्ली, 1 दिसम्बर (एनएनएस) देशी चने में लोकल व चालानी मांग निकलने से यहां 75/100 रुपए बढ़कर एमपी-राजस्थान का चना 4740/4750 रुपए प्रति क्विंटल बिक गया। दाल के भाव भी 50/75 रुपए बढ़कर 5300/5500 रुपए हो गये। $गौरतलब है कि चूरू, नोहर, भादरा, सवाईमाधोपुर लाइन में आवक घटकर 50 प्रतिशत रह गयी है। दूसरी ओर डिब्बे में 125 रुपए क्विंटल चना बढ़कर बंद हुआ। इसके प्रभाव से महाराष्टï्र के साथ-साथ कर्नाटक का चना भी पकडऩे लगे हैं। इधर इंदौर लाइन की दाल मिलें भोपाल, सागर, बीनागंज के साथ-साथ ग्वालियर लाइन से लगातार माल खरीद रही हैं क्योंकि उनकी दालें 15 दिसम्बर तक चालानी में बिकी हुई हैं। इसे देखते हुए इसमें 200 रुपए की और तेजी शीघ्र लगने लगी है। मसूर की बिल्टी भी फसल में सूखे का खतरा मंडराने से 35/40 रुपए बढ़कर बिल्टी में 4190/4200 रुपए हो गयी। अन्य अनाज-दाल में स्थिरता रही। तेल-तिलहन- सरकार द्वारा सीपीओ की टैरिफ दर 509 से घटाकर 463 डॉलर तथा सोयाबीन ऑयल की 717 से घटाकर 707 डॉलर प्रति टन कर दी गई। टैरिफ दरों में कटौती किए जाने तथा मांग घटने से 50/100 रुपए घटकर सरसों तेल 8400 रुपए, सोया रिफाइंड 7850 रुपए व बिनौला तेल के भाव 6850 रुपए प्रति क्विंटल रह गये। कांदला में सीपीओ भी उठाव न होनेे से 20 रुपए घटकर 3180 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। आखाद्य तेलों में भी मांग घटने से राइस फैट्टïी के भाव 50 रुपए घटकर 4950/5000 रुपए प्रति क्विंटल रह गये। गुड़-चीनी- सरकार द्वारा दिसम्बर माह के लिए 19.50 लाख टन चीनी का कोटा छोड़े जाने तथा मिलों द्वारा भाव बढ़ाकर सेल दिए जाने से इस में स्थिरता रही। जबकि उत्तर प्रदेश की मंडियों से आवक बढऩे तथा मांग कमजोर होने से गुड़-पेड़ी 50 रुपए मुलायम होकर 2650/2750 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। चाकू व ढैया के भाव 2600/2900 रुपए पर सुस्त रहे। मांग के अभाव में खांडसारी 200 रुपए गिरकर 3700/3800 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गई।  किराना-मेवा- बिकवाली का दबाव और उठाव कमजोर होने से यहां जीरा एवरेज 200 रुपए और गिरकर 19800/19900 रुपए रह गया। कोच्चि में नई सौंठ की आवक बढऩे से यहां लिवाल गायब होने से इसके भाव  भी 1000 रुपए और लुढ़ककर 20500/21000 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गए। शिमला का अनारदाना भी नए माल की आवक बढऩे से 10/15 रुपए घटाकर 490/500 रुपए किलो बोला जा रहा था। मेवों में ग्राहकी कमजोर होने से बादाम कैलिफोर्निया एवं इसकी गिरी तथा पिस्ते के भाव पूर्वस्तर पर ढीले रहे। मांग के अभाव में गोला 500 रुपए और टूटकर 18500/22000 रुपए क्विंटल पर आ गया।   विदेशों के मंदे समाचार आने तथा मांग कमजोर होने से सर्राफा बाजार में चांदी के भाव 515 रुपए प्रति किलो लुढ़क गये। उठाव न होने से सोने में भी नरमी का रुख रहा। अंतर्राष्टï्रीय बाजार में चांदी के भाव 15 सेंट घटकर 1415 सेंट प्रति औंस रह जाने तथा औद्योगिक मांग कमजोर होने से चांदी हाजिर 515 रुपए लुढ़ककर 36560 रुपए प्रति किलो पर आ गई। लिवाली कमजोर होने से चांदी वायदा 35605 से घटकर 35145 रुपए प्रति किलो रह गया। विदेशों में सोने के भाव तीन डॉलर घटकर 1221 डॉलर प्रति औंस रह जाने तथा आभूषण निर्माताओं की मांग घटने से सोना 15 रुपए मुलायम होकर किलोबार 31310 रुपए तथा स्टैंडर्ड के भाव 31460 रुपए प्रति 10 ग्राम रह गये। उठाव न होने से गिन्नी 24700 रुपए पर सुस्त रही। 
इंडोशियाई फसल में पोल: लौंग में और तेजी
नयी दिल्ली। इस बार इंडोनेशिया एवं मैडागास्कर की फसल में पोल के साथ-साथ जंजीबार का माल भी कम आने से नीचे वाले भाव से बाजार धीरे-धीरे बढऩे लगे हैं। बढिय़ा मैडगास्कर में इसी लाइन पर अगले दो माह के अंतराल 100 रुपए की और तेजी लग रही है। लौंग की फसल श्रीलंका में इस बार कम आई थी तथा हल्के माल नहीं आने से सस्ती लौंग का व्यापार कम हो गया। इसका मुख्य कारण यह है कि मैडागास्कर एवं जंजीबार के ही भाव नीचे आ जाने से श्रीलंका की लौंग इंडिया में बिकनी बंद हो गयी। पहले कुछ माल आया था, वह मिक्सिंग में पूरी तरह खप गया। अब बाजार में ऊंचे आयात की हुई लांैग आयातकों के पास पड़ी है तथा आई हुई ।
लौंग की सभी फसलें, पोल आने से इंडोनेशिया, मैडागास्कर व जंजीबार में ही ऊंची बिक रही हैं। बीते एक वर्ष के दौरान श्रीलंकाई माल पड़ते के अभाव में कम आया है। दूसरी ओर कोमरोन व जंजीबार का माल धीरे-धीरे कट चुका है। कोमरोन में नई लांैग की फसल  अक्टूबर में आती है, जो इस बार 40 प्रतिशत कम होने की खबर आ रही है तथा वहीं पर भाव ऊंचे होने से कोई व्यापार अभी नहीं हो रहा है। आयातक अभी अगाऊ सौदे नहीं किये हैं क्योंकि पुराना माल गले में फंसा हुआ है तथा डॉलर में दिन-प्रतिदिन तेजी के चलते आयातक सौदे नहीं कर रहे हैं। यहां मैडागास्कर 620/625 रुपए प्रति किलो बिक रही है। यह नीचे में पिछले महीने 575/580 रुपए देख आई है। श्रीलंका का माल गिने-चुने घरों में है क्योंकि अधिकतर माल इस बार कोलकाता व चेन्नई पोर्ट से पान मसाला एवं सिगरेट कम्पनियां खरीद चुकी हैं तथा पूरे वर्ष लौंग को जो मंदा किया था, वह लौंग की डंडी 80 प्रतिशत खपत चुकी है। यह माल कानपुर, बनारस, पटना लाइन में प्रचूर मात्रा में गया है। यही सब हल्के माल पूरे वर्ष लौंग को उठने नहीं दिये हैं, अब जो माल बचा है वह मैडागास्कर व जंजीबार का है। मैडागास्कर की फसल मार्च में आएगी। जंजीबार की फसल में भी कोई दम नहीं है। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान भाव की लौंग में लाभ मिलने की प्रबल संभावना दिखाई दे रही है तथा अगले दो माह में 100 रुपए की तेजी लग रही है।
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