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अपराधियोंका दुस्साहस

देश जहां कोरोना और चीन संकटसे जूझ रहा है, वहीं राजनीतिक संरक्षणके मदमें अपराधियोंका बढ़ता दुस्साहस कानून-व्यवस्थापर सवाल खड़ाकर गम्भीर चिन्तनके लिए मजबूर कर रहा है। राजनीतिक संरक्षणकी हनक ऐसी है कि पुलिसकी हर काररवाईकी जानकारी उन्हें पहलेसे मिल जाती है और वे पुलिसके लिए ही घातक बन जाते हैं। कानपुरके बीकरू गांवमें बीती रात बदमाशको पकडऩे गये पुलिस दलपर घात लगाकर हमला इसका जीताजागता प्रमाण है। इस घटनामें डीएसपी स्तरके एक अधिकारी सहित आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गये, जबकि कुछ अन्य जीवन-मृत्युके बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस सम्बन्धमें बताया जाता है कि किसी मामलेमें कुख्यात अपराधी विकास दुबेको पकडऩेके लिए भारी संख्यामें पुलिस बल उसके गांव पहुंचा। इस बातकी भनक विकासको पहले ही लग गयी और वह सतर्क हो गया और घर आनेवाले मार्गपर जेसीबी मशीन लगाकर रास्ता बंद कर दिया और अपने सहयोगियोंके साथ घरमें अन्धेरा कर छतपर घात लगाकर बैठ गया, जैसे ही पुलिस दल उसके दरवाजेपर पहुंचा तो छतपर घात लगाये बदमाशोंने पुलिस दलपर गोली और बम वर्षा शुरू कर दी। चूंकि बदमाशोंके घरमें अन्धेरा था और पुलिस जीपकी लाइट जल रही थी जिसका फायदा उठाकर बदमाश पुलिस बलको आसानीसे निशाना बना रहे थे। सवाल उठता है कि जब बदमाशोंने इतनी बड़ी तैयारी कर रखी थी तो इस बातकी भनक खुफिया विभाग (एलआईयू) को क्यों नहीं हो सकी। इसीका परिणाम रहा कि पुलिसपर हमलेके बाद विकास दुबे और उसके सहयोगी भागनेमें सफल हो गये। हालांकि मुख्य मंत्रीने इस मामलेको गम्भीरतासे लेते हुए डीजीपीको सख्त काररवाईका निर्देश दिया है। उसकी गिरफ्तारीके लिए सम्भावित ठिकानोंपर छापेमारी की जा रही है। उत्तर प्रदेशमें २००४ में नक्सलियोंने पुलिस दलपर हमला किया था, जिसमें १४ पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। उसके बाद यह सबसे बड़ी घटना है, जिसमें पुलिसकर्मी अपराधियोंके शिकार हुए हैं। ऐसे अपराधियोंका जिन्दा या मुर्दा पकड़ा जाना जरूरी है। इनको ऐसा सबक दिया जाना चाहिए जो अन्य अपराधियोंके लिए सबक बने। साथ ही इनकी चल-अचल सम्पत्ति भी जब्त की जानी चाहिए।
कोरोना जंग जीतकी ओर
कोरोना वायरसके खिलाफ देशमें मजबूत जंग अब जीतकी ओर अग्रसर है। एक ओर जहां संक्रमितोंमें सुधारकी दर बढ़कर ६०.७२ प्रतिशत हो गयी है, वहीं दूसरी ओर इसका टीका भी तैयार हो गया है जिसे आगामी स्वतन्त्रता दिवस १५ अगस्तको लांच किया जा सकता है। इसके लिए आवश्यक तैयारी की जा रही है। कोरोनाका टीका देशवासियोंके लिए स्वतन्त्रता दिवसका बड़ा उपहार होगा और इससे लोगोंको काफी राहत मिलेगी। यह टीका हैदराबादकी कम्पनी भारत बायोटेकने तैयार किया है। भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डाक्टर बलराम भार्गवने कम्पनीको अधिकारिक पत्र प्रेषित कर सात जुलाईसे मानवीय परीक्षण शुरू करनेका निर्देश देते हुए कहा है कि इसमें विलम्ब नहीं होना चाहिए जिससे कि १५ अगस्तको आम जनताके लिए इसे लांच किया जा सके। भारत बायोटेककी ओरसे कहा गया है कि इस स्वदेशी टीकाको आईसीएमआर और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) के साथ मिलकर विकसित किया गया है। आईसीएमआरने मानवीय परीक्षणके लिए अनुमति भी दे दी है। नि:सन्देह यह टीका देशके लिए बड़ी उपलब्धि है। इसे तैयार करनेमें लगे वैज्ञानिक और संस्थाएं बधाईकी पात्र हैं, जिन्होंने दिन-रात परिश्रम कर टीकेको विकसित किया है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदीने गत दिनों एक उच्चस्तरीय बैठक कर टीकेको देशव्यापी स्तरपर उपलब्ध करानेका प्रारूप तैयार किया है। भारत इसे पीडि़त राष्ट्रोंको भी उपलब्ध कराकर मानवताकी सेवामें अपना हाथ बटा सकता है। भारतने पहले भी कुछ आवश्यक दवाएं अमेरिका सहित अन्य देशोंको उपलब्ध करायी थी। देशमें कोरोनाकी भयावहता कम नहीं हुई है। शुक्रवारको संक्रमितोंकी संख्यामें बीस हजारकी वृद्धि हुई है और कुल संख्या छह लाख २५ हजार ५४४ हो गयी। मृतकोंका आंकड़ा भी १८,२१३ पर पहुंच गया। अबतक ३,७९,८९२ लोग ठीक भी हुए हैं। यह राहतकी बात है लेकिन जनताको अधिक सतर्क रहनेकी जरूरत है। छोटी लापरवाही भी किसीके लिए भारी पड़ सकती है।