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एनआरसीकी प्रासंगिकता

घुसपैठियोंको देशके बाहरका रास्ता दिखानेके लिए असमके राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टरसे शुरू हुई बात अब राष्ट्रव्यापी हो गयी है। हालांकि पश्चिम बंगाल सहित कई राज्य इसका विरोध कर रहे हैं, यहांतक कि कुछ भाजपा नेता भी इस विरोधमें शामिल हैं लेकिन केन्द्र सरकारने घुसपैठियोंको बाहर निकालनेका मन बना लिया है। स्वराष्ट्रमंत्री अमित शाहने कहा है कि देशमें एक भी घुसपैठियेको रहने नहीं दिया जायगा। इसके लिए एनआरसी (नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस) पूरे देशमें लागू किया जायगा। उन्होंने कहा है कि दुनियामें एक भी ऐसा देश नहीं है, जहां कोई भी अवैध रूपसे बस जाय तो फिर भारतमें कोई अवैध रूपसे कैसे रह सकता है। देशमें रहनेवालोंका एक रजिस्टर जरूरी है जिससे घुसपैठियोंकी पहचान हो और उन्हें देशसे बाहर किया जा सके। घुसपैठियोंसे आबादीके साथ समस्याएं बढ़ी हैं, इसमें तो सन्देह नही। इसलिए इनकी पहचान जरूरी है जिससे इनपर नियन्त्रण किया जा सके। यह राष्ट्रहितका विषय है। इसपर केवल राजनीतिके लिए विरोध उचित नहीं है। घुसपैठियोंको बाहर निकालनेका बड़ा अभियान जरूरी है, लेकिन पूरी पारदर्शिताके साथ। असममें जिन चालीस लाख लोगोंके नाम रजिस्टरमें नहीं हैं, उनमेंसे कई पीढिय़ोंसे भारतमें रहते आये हैं यानी रजिस्टर बनानेमें विसंगति हुई है, सरकारको इसपर विशेष ध्यान देनेकी जरूरत है। विरोधको देखते हुए प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदीको लोगोंको भरोसा देना पड़ा कि किसी भी भारतीय नागरिकको देश नहीं छोडऩा होगा। प्रक्रियाका पालन करते हुए चिन्ताओंको दूर करनेके पर्याप्त अवसर दिये जायंगे। एनआरसी हमारा संकल्प था जिसे हम सर्वोच्च न्यायालयके निर्देशके तहत पूरा कर रहे हैं। यह राजनीति नहीं, बल्कि लोगोंके बारेमें है। केन्द्र सरकारने एनआरसी पूरे देशमें लागू करनेका निर्णय कर उचित कदम उठाया है परन्तु इसपर विशेष ध्यान देना होगा कि इसके क्रियान्वयनमें पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी बरती जाय। इसमें पूर्वाग्रहका कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यह राष्ट्रहितका विषय है इसपर राजनीति उचित नहीं है।
अमेरिकासे सुखद संकेत
अमेरिकासे दो सुखद संकेत मिले हैं। एक भारतके सन्दर्भमें है तो दूसरा चीनके बारेमें। अमेरिकाके ४४ सांसदोंके एक समूहने ट्रम्प सरकारसे भारतके लिए सामान्य तरजीही व्यवस्था (जीएसपी) फिरसे बहाल करनेकी मांग की है वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्पने कहा है कि अमेरिका और चीनके बीच व्यापार समझौता चुनावोंसे पहले या तत्काल बाद होनेकी सम्भावना है। आर्थिक मोरचेपर दोनों ही संकेतोंके दूरगामी परिणाम होंगे। सांसदोंके जिस समूहने भारतके लिए जीएसपीका दर्जा बहाल करनेकी मांग की है उनमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियोंके सांसद हैं। इस बातकी प्रबल सम्भावना है कि भारतको यह दर्जा शीघ्र ही प्राप्त हो जायगा जिससे भारत आर्थिक और व्यापारिक रूपसे लाभान्वित होगा। भारत १९७६ से ही जीएसपीका सदस्य है। इससे १२९ देशोंको लाभ मिलता है। अमेरिका निर्यातमें एकसे छह प्रतिशततक छूट देता है। भारत इस छूटका बड़ा लाभार्थी था लेकिन २०१७ में भारतने जीएसपीके तहत अमेरिकाको ५.७ अरब डालरका निर्यात किया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्पका नजरिया कुछ बदल गया और उन्होंने कहा कि भारत और चीन अब विकासशील देश नहीं हैं। पिछले पांच जूनको अमेरिकाने कड़ा रुख अपनाते हुए भारतका जीएसपी दर्जा समाप्त कर दिया था जिससे भारतकी दिक्कतें बढ़ गयीं। राष्ट्रपति ट्रम्प और भारतके प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी आगामी 'हाउडी मोदी’ कार्यक्रममें मंच साझा करनेवाले हैं, जिसमें ट्रम्प बड़ी घोषणाएं कर भारतके साथ अपने मैत्री सम्बन्धोंको मजबूती देनेका पूरा प्रयास कर सकते हैं। विगत कुछ महीनोंसे भारत और अमेरिकाके बीच आपसी रिश्तोंमें काफी सुधार भी हुआ है। इसलिए जीएसपी दर्जा वापस मिलनेकी सम्भावनाएं भी बढ़ गयी हैं। साथ ही यदि अमेरिका और चीनके बीच व्यापार समझौता हो जाता है तो उसका लाभ विश्वके अनेक देशोंको मिलेगा।