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जांच अपरिहार्य

उत्तर कोरियाके तानाशाह किम जोंगके पागलपनसे पूरा विश्व चिन्तित है। अमेरिका और उत्तर कोरियाके बीच बढ़ते टकरावसे विश्व युद्धका खतरा भी मडराने लगा है। उत्तर कोरियाकी पारमाणविक शक्तिके सन्दर्भमें परराष्टï्रमंत्री सुषमा स्वराजने मंगलवारको न्यूयार्कमें एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है, जो विश्व समुदायके लिए चिन्तनका विषय है। संयुक्त राष्टï्र महासभाके सत्रसे अलग हटकर सुषमा स्वराजने अमेरिका और जापानके विदेश मंत्रियोंके साथ त्रिपक्षीय बैठक की। इस दौरान पाकिस्तानका नाम लिये बिना उन्होंने कहा कि उत्तर कोरियाके परमाणु प्रसार सम्बन्धी गतिविधियोंकी जांच होनी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगोंको जवाबदेह भी ठहराया जाना चाहिए। परराष्टï्र मंत्रालयके प्रवक्ता रवीश कुमारने बताया कि सुषमा स्वराजने उत्तर कोरियाके पिछले कुछ दिनोंके दौरान किये गये परमाणु परीक्षणोंकी निन्दा की है। सुषमा स्वराजका सीधा निशाना पाकिस्तानपर है। उत्तर कोरियाकी परमाणु शक्ति बढ़ानेमें पाकिस्तानकी विशेष भूमिका रही है। पाकिस्तानके परमाणु बमके जनक अब्दुल कादिर खांने २००४ में ईरान, उत्तर कोरिया, लीबियाको परमाणु तकनीक बेचनेकी बात स्वीकार की है। यह तकनीक चोरीसे बेची गयी थी। इसके लिए उसने क्षमा याचना भी की थी। इसकी शुरुआत १९७६ में उस समय हो गयी थी जब तत्कालीन प्रधान मन्त्री जुल्फीकार अली भुट्टïोने उत्तर कोरियाकी यात्रा की थी। उत्तर कोरियाने पहला परमाणु परीक्षण २००६ मंश किया था। अबतक नौ परमाणु परीक्षण किये गये। इस तरह उत्तर कोरिया अपनी परमाणु ताकत बढ़ाता रहा। इसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है। ऐसी स्थितिमें पाकिस्तान और उत्तर कोरियाके बीच परमाणु सम्बन्धोंकी गहराईसे जांच जरूरी है। सम्भव है इससे कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये। विश्व शान्ति और मानवताकी रक्षाके सन्दर्भमें यह आवश्यक है। सुषमा स्वराजने यह मुद्दा उठाकर विश्व समुदायको सोचनेके लिए विवश कर दिया है। इसकी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। यह जांच अपरिहार्य है। इसके अतिरिक्त उन देशोंको भी कटघरेमें खड़ा किया जाय जो पाकिस्तान और उत्तर कोरियाका संरक्षण करते हैं।
पर्वोंपर विशेष रेल सेवा

पूर्वांचल एवं बिहारके लोगोंके लिए त्योहारोंके सीजनमें होनेवाली भीड़-भाड़से बचानेके लिए भारतीय रेल चार हजार विशेष रेलगाडिय़ां चलायेगा। रेल राज्यमंत्री मनोज सिनहाने मंगलवारको विभागके वरिष्ठï अधिकारियोंसे बैठकके दौरान यह निर्देश दिये। गत वर्ष इन्हीं दिनोंमें ३८०० विशेष गाडिय़ां चलायी गयी थीं। रेल राज्यमंत्रीने इसके अतिरिक्त ५५ रैकको तैयार रखनेका भी निर्देश दिया ताकि आवश्यकता पडऩेपर गाडिय़ोंकी संख्या बढ़ायी जा सके। यात्रियोंकी सुविधाके लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहारकी ओर जानेवाली नियमित रेलगाडिय़ोंमें ९५०० अतिरिक्त कोच भी जोड़ जायंगे। दशहरासे लेकर सूर्यषष्ठïी (डाला छठ) तक विभिन्न प्रदेशोंमें रोजी-रोजगारके लिए गये पूर्वांचल एवं बिहारके लोग अपने-अपने घरोंको लौटते हैं। विभिन्न राज्योंसे पूर्वांचल सहित बिहारकी ओर जानेवाली रेलगाडिय़ोंमें विशेष प्रबन्ध किये जायंगे। दिल्ली, महाराष्टï्र, गुजराज, बंगालके बड़े स्टेशनों एवं उपनगरीय स्टेशनोंसे रेलगाडिय़ां चलायी जायंगी। रेल विभाग ठहराववाले बड़े स्टेशनोंपर यात्रियोंकी सुविधाके लिए पण्डाल लगायेगा। पण्डालमें भोजन, शौचालय सहित यात्रियोंकी सुविधाके प्रबन्ध होंगे। यात्रियोंको रेलगाड़ीके आगमन और प्रस्थानकी सूचना पण्डालमें ही ध्वनि विस्तारक यंत्रके माध्यमसे दी जायगी। हर स्टेशनपर भारी संख्यामें सुरक्षा बलकी तैनाती रहेगी जिससे आम यात्री अपनेको सुरक्षित महसूस कर सकें। आरक्षित कोचोंमें आम यात्रियोंका प्रवेश नहीं होने दिया जायगा। इसके साथ ही दलालों और अवैध वेण्डरोंपर सख्ती की जायगी। रेल विभागकी यह योजना सराहनीय है। रेल यात्रियोंको इसका लाभ भी मिलेगा। वर्तमानमें भारतीय रेलकी दशा सुरक्षा और संरक्षाको लेकर ठीक नहीं है। आये दिन दुर्घटनाओंमें लोगोंकी जान जाती है। रेल डब्बोंका पटरीसे उतरना अब आम खबर बन गयी है। ऐसी स्थितिमें अन्य रेलगाडिय़ां घण्टों विलम्बसे चलती हैं। कईको तो निरस्त भी करना पड़ता है। रेल विभाग विशेष रेलगाडिय़ोंके संचालनसे पूर्व ऐसी व्यवस्था करे जिससे यात्री अपनेआपको सुरक्षित महसूस करते हुए समयसे अपने गंतव्यतक पहुंच सकें।