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छूटका मिले पूरा लाभ

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की घटी दरें बुधवारसेे देशमें लागू कर दी गयीं। पिछले दिनों गुवाहाटीमें हुई जीएसटी परिषदकी बैठकमें २१३ वस्तुओंकी दरोंमें कमी करनेका महत्वपूर्ण निर्णय किया गया था। इससे दैनिक जीवनमें काम आनेवाली वस्तुएं सस्ती हो गयीं। खुदरा बाजारोंमें अब घटे मूल्यपर सामान मिल रहे हैं। इससे मध्यम और निम्र आय वर्गके लोगोंको राहत मिली है। रेस्टूरेण्टमें भी खान-पान सस्ता हो गया। अनेक बड़ी कम्पनियोंने मूल्योंमें की गयी कटौतीको प्रचारित करना शुरू कर दिया है। यह ग्राहकोंके हितमें अच्छा प्रयास है। इसके बावजूद आम उपभोक्ताओंको भी सतर्क रहनेकी आवश्यकता है जिससे कि उनका आर्थिक शोषण नहीं हो सके। उपभोक्ता मामलोंके मंत्री राम विलास पासवानने कहा है कि जिन वस्तुओंके मूल्य कम हुए हैं, कम्पनियां उनपर नये दामका स्टीकर लगायें तभी जीएसटीकी दरोंमें हुई कमीका पूरा लाभ उपभोक्ताओंको मिल सकेगा। यदि विक्रेता पुरानी दरोंपर सामान बेचता है तो इसकी शिकायत तुरन्त की जानी चाहिए जिससे कि अवैध मुनाफाखोरीकी प्रवृत्तिपर अंकुश लगाया जा सके। इसके लिए सरकार भी सक्रिय है और निकट भविष्यमें नयी व्यवस्थाके लिए दिशा-निर्देश भी जारी किये जा सकते हैं।  जीएसटी परिषद इसके लिए कड़े नियम बना रही है। यह उचित भी है। यदि जीएसटीकी दरोंमें कमीका लाभ उपभोक्ताओंको नहीं मिलता है तो सरकारके राहतकारी निर्णयोंका कोई अर्थ नहीं है। ग्राहकतक लाभ पहुंचानेमें राज्योंकी बड़ी भूमिका है। पासवानका यह भी कहना है कि राज्योंके प्रवर्तन अधिकारी सुनिश्चित करायें कि छूटका पूरा लाभ ग्राहकोंको मिले। इस बार करकी दरोंमें बदलावका दायरा काफी व्यापक रहा। रसोई घरसे लेकर आफिसतकके सामान सस्ते हुए हैं। इसके बाद भी कुछ ऐसे आवश्यक सामान हैं, जिन्हें २८ प्रतिशतकी कर श्रेणीमें रखा गया है। सीमेण्ट और भवन निर्माणसे सम्बन्धित इन वस्तुओंकी जीएसटी दरोंमें परिवर्तन किये जानेकी आवश्यकता है। भवन निर्माणको गति मिलनेसे दिहाड़ी श्रमिकोंको आजीविकाका साधन मिलता है और रोजगारके अवसर भी बढ़ते हैं।
 प्रदूषणपर कड़े तेवर
मानव जीवनके लिए शुद्ध वायु अत्यन्त आवश्यक है। मनुष्य कुछ समयतक भोजन और पानीके बिना रह सकता है, परन्तु शुद्ध वायुके बिना स्वस्थ जीवनकी कल्पना सम्भव नहीं है। बढ़ता वायु प्रदूषण गम्भीर समस्या है। इससे मानव जीवन ही नहीं, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे भी प्रभावित हो रहे हैं। यह बात देरसे ही सही सरकारके समझमें आयी। यह संतोषकी बात है। उत्तर प्रदेशकी राजधानी लखनऊके सबसे प्रदूषित शहरोंमें शामिल होनेके बाद हरकतमें आयी प्रदेश सरकारने उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर वन, पर्यावरण, परिवहन, कृषि नगर विकास, उद्योग और प्रदूषण नियन्त्रण बोर्डके शीर्ष अधिकारियोंको बढ़ते वायु प्रदूषणसे निबटनेके लिए तत्काल कदम उठानेका निर्देश दिया है। राजधानी लखनऊको दमघोटू हवासे मुक्ति दिलानेके लिए हेलीकाप्टरसे कृत्रिम वर्षा करानेका राहतकारी निर्णय भी किया गया। इसके लिए आईआईटी कानपुरके विशेषज्ञोंके साथ बैठकर कार्य योजना बनायी जाय तथा उसपर तत्काल अमल हो। इसके अलावा प्रत्येक शहरमें धूल कम करनेके लिए नगर निगम और फायर ब्रिगेडके टैंकरों और स्प्रिंकलरसे छिड़काव कर कूड़ा और पराली जलानेपर लगी रोकको सख्तीके साथ अमलमें लाया  जाय। नि:सन्देह इससे वायु प्रदूषणमें कुछ कमी आयगी। बैठकमें मुख्य मन्त्री योगी आदित्यनाथका तेवर काफी सख्त रहा। उन्होंने स्पष्टï शब्दोंमें चेतावनी दी है कि कूड़ा जलानेपर जहां जोनल अधिकारी, नगर पंचायतोंके अधिशासी अधिकारी और सेनेटरी इंस्पेक्टरको दण्डित किया जायगा, वहीं प्रदूषण नियन्त्रणके लिए प्रभावी कदम न उठानेवाले अधिकारियोंको किसी भी कीमतपर बख्शा नहीं जायगा। वायु प्रदूषण रोकनेके लिए सरकारका कदम उचित है पर सिर्फ सरकारके बूते प्रदूषणसे पूरी तरह मुक्ति सम्भव नहीं है। इसके लिए आम जनताको भी सक्रिय सहयोग करना होगा, तभी इस जानलेवा समस्यासे निजात मिल सकती है।