Tel: 0542 - 2393981-87 | Mail: ajvaranasi@gmail.com


नवीनतम समाचार » परिणामोंकी प्रतीक्षा

परिणामोंकी प्रतीक्षा

लोकसभा चुनावके सातवें और अंतिम चरणमें रविवारको सात राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेशकी कुल ५९ सीटोंके लिए मतदानके साथ सभी ५४३ लोकसभा क्षेत्रोंकी मतदान प्रक्रिया पूरी हो गयी। १७ वीं लोकसभाके लिए यह अब तक की सबसे लम्बी चुनाव प्रक्रिया थी, जो ११ अपै्रलसे १९ मई तक चली। अंतिम चरणमें पश्चिम बंगाल, बिहार और कुछ अन्य राज्योंमें हिंसाकी घटनाएं हुई। पश्चिम बंगालमें हार्बर संसदीय क्षेत्रसे भाजपा प्रत्याशी नीलरंजन रायकी कारपर हमला हुआ। कई क्षेत्रोंमें भाजपा और तृणमूल कांगे्रस कार्यकर्ताओंके बीच झड़प भी हुर्इं। जालंधरमें कांग्रेस और अकाली दलके कार्यकर्ताओंमें जमकर मारपीट हुई। पंजाबके भटिंडामें चुनावी हिंसामें गोलियां भी चली। अनेक मतदान केन्द्रोंपर ईवीएममें गड़बड़ीकी भी शिकायतें मिली। उत्तर प्रदेशके चन्दौलीमें सपा और भाजपा कार्यकर्ताओंमें मतदानके दौरान मारपीट हुई। भीषण गर्मीके बावजूद लोगोंमें मतदानके प्रति उत्साह दिखा। कुछ संसदीय क्षेत्रोंमें मतदान प्रतिशत बढ़ानेकी होड़ लगी हुई थी। सुरक्षा व्यवस्थाके कड़े प्रबन्ध अवश्य किये गये थे, इसके बावजूद मारपीटकी घटनाओंका होना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण रहा। रविवारको पंजाब और उत्तर प्रदेशकी १३-१३ सीटों, पश्चिम बंगालकी नौ, बिहारकी आठ, मध्यप्रदेशकी आठ, हिमाचल प्रदेश और झारखण्डकी चार-चार और चण्डीगढ़की एक सीटके लिए हुए मतदानमें कुल ९१८ उम्मीदवार मैदानमें थे, जिनमें प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, हरदीप सिंह पुरी, मनोज सिनहा, अनुप्रिया पटेल भी शामिल हैं। अंतिम चरण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि २०१४ में ५९ सीटोंमें से ४० सीटोंपर भाजपा और उसके सहयोगी दलोंकी जीत हुई थी। राजगके लिए इन सीटोंको बचानेकी जहां बड़ी चुनौती है वहीं विपक्ष भी अधिकसे अधिक सीटोंपर जीत दर्ज करानेके लिए पूरी शक्तिके साथ जुटा हुआ है। अंतिम चरणका मतदान पूर्ण होनेके बाद अब पूरा देश परिणामोंकी प्रतीक्षामें है। २३ मई को चुनाव परिणामोंकी घोषणाकी जायगी। इसके पहले एक्जिट पोलका दौर शुरू हो गया है जिससे लोग हार-जीतके बारेमें अनुमान लगा रहे हैं। एक्जिट पोल कितना सही या गलत है, यह मतगणनाके बाद ही स्पष्टï हो सकेगा।
सबसे महंगा उत्सव
दुनियामें लोकतंत्रका सबसे महंगा उत्सव भारतमें लोकसभाका चुनाव है जिसने खर्चके मामलेमें अमेरिकाके राष्टï्रपतिके चुनावको भी पीछे छोड़ दिया है। नयी दिल्ली स्थित सेण्टर फार मीडिया स्टडीज (सीएमएस) ने जो आंकड़ा प्रस्तुत किया है उसके अनुसार रविवारको सम्पन्न हुए १७ वीं लोकसभाके चुनावोंपर कुल ५० हजार करोड़ रुपये अर्थात सात अरब डालर खर्च हुए जबकि ओपन सिक्रेट ओआरजीका कहना है कि २०१६ में सम्पन्न हुए अमेरिकी राष्टï्रपतिके चुनावपर साढ़े छह अरब डालर ही खर्च हुए थे। भारत और अमेरिकाकी तुलना करें तो दोनों ही विश्वके दो बड़े लोकतांत्रिक देश हैं जबकि अमेरिका विकसित राष्टï्र है और भारत विकासशील देश है लेकिन चुनावोंमें खर्चके मामलेमें अमेरिकासे आगे भारत है। सीएमएसका मानना है कि २०१४ के लोकसभा चुनावोंपर लगभग पांच अरब डालर खर्च हुए थे और २०१९ के चुनावोंमें इसमें ४० प्रतिशत की वृद्धि हुई। जिस गतिसे चुनावोंपर खर्च बढ़ रहा है उससे भविष्यके चुनावोंके और महंगे होनेका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। १७ वीं लोकसभा चुनावोंमें २६ अरब रुपये सिर्फ विज्ञापनपर खर्च हुए। चुनाव आयोगका कहना है कि पहले तीन लोकसभा चुनावोंका खर्च दस करोड़ रुपये या उससे कम था। १९८४-८५ में यह खर्च बढ़कर सौ करोड़ रुपये हो गया। १९९६ में यह राशि पहलीबार ५०० करोड़ रुपयेसे ऊपर पहुंच गयी। २००४ में चुनावोंका खर्च एक हजार करोड़ और २०१४ में यह राशि ३८७० करोड़के स्तरपर पहुंच गयी। २०१९ में लोकसभा चुनावोंपर ५० हजार करोड़ रुपये खर्च होना चिन्तनीय विषय है। विधानसभाओंके चुनावोंका खर्च अलग है। दोनोंको जोड़ दिया जाय तो चुनाव खर्चोंके मामलेमें भारत विश्व कीर्तिमान स्थापितकर देगा। इसलिए चुनावोंके खर्चोंपर अंकुश लगानेकी आवश्यकता है। जिस प्रकार पहले लोकसभा और विधानसभाओंके चुनाव एक साथ होते थे, उसी प्रकार चुनाव करानेकी जरूरत है। एक देश एक  चुनाव समयकी मांग है। इससे चुनावोंका खर्च काफी कम होगा और वह धनराशि विकास कार्योंपर खर्च होगी।