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संघर्षविराम समाप्त

जम्मू-कश्मीरमें बिगड़ते हालातको देखते हुए केन्द्र सरकारने देशकी जनभावनाओंके अनुरूप संघर्षविराम समाप्त करने और आतंकियोंके खिलाफ फिर आपरेशन शुरू करनेकी घोषणा की है। इसका जम्मू-कश्मीर सरकार और विपक्षी दलोंने भी स्वागत किया है। स्वराष्टï्रमंत्री राजनाथ सिंहने रविवारको इसकी घोषणा करते हुए कहा कि रमजानके कारण एक माहतक आपरेशन निलम्बित था और संघर्ष विरामका भी अनुपालन किया गया, लेकिन पाकिस्तानने वादाखिलाफी करते हुए गोलीबारी की, जिसमें हमारे जवान भी शहीद हुए। पिछले दिनों स्वराष्टï्रमंत्रीने दो दिनोंतक कश्मीरका दौरा किया लेकिन पाकिस्तानी सेना और सीमापार समर्थित आतंकियोंने कायराना हरकतें की। स्वराष्टï्रमंत्रालयकी उच्च स्तरीय बैठकमें भी आपरेशन शुरू करनेपर सहमति बन गयी थी किन्तु राजनाथ सिंहने कहा था कि ईदका पर्व सम्पन्न होनेके बाद ही इसकी घोषणा की जायगी। केन्द्र सरकारका यह निर्णय पूरी तरहसे उचित है। इसके अतिरिक्त कोई विकल्प भी शेष नहीं था। पत्रकार शुजात बुखारी और सैनिक औरंगजेब की हत्याके बाद स्थितियां काफी गम्भीर हो गयीं। ईदके पर्वपर नमाज अदा करनेके बाद पथराव, पाकिस्तानी सेनाकी गोलीबारी और पाकिस्तानी ध्वज फहरानेकी घटनाओंके दौरान एक सैनिकके शहीद होनेसे पूरे राष्टï्रमें आक्रोश है। स्वराष्टï्रमंत्रीने आदेश दिया है कि घाटीमें आतंकियोंके खिलाफ तत्काल आपरेशन शुरू किया जाय। आतंकियोंके खिलाफ कड़े कदम उठानेकी सुरक्षाबलोंको पूरी छूट है। सरकार घाटीमें शांतिके लिए प्रयास जारी रखेगी। सेनाका मनोबल ऊंचा है। औरंगजेबकी हत्याके बाद कश्मीरमें सेनाके लिए समर्थन बढ़ गया है। इससे आतंकियों और आईएसआईकी नींद उड़ गयी है। सरकारकी घोषणाके बाद अब सुरक्षाबलोंकी जिम्मेदारी बढ़ गयी है। उसे अपने अभियानको दोगुनी, तीनगुनी शक्तिसे चलाना होगा। कश्मीरको आतंकवादियोंसे मुक्त करना जरूरी है। साथ ही अमरनाथ यात्राके दौरान भी सतर्क रहनेकी जरूरत है। शांतिप्रिय जनताको इस अभियानमें पूरा सहयोग देना चाहिए। सीमापर भी सेनाको पूरी तरहसे मुस्तैद रहना होगा। आवश्यकता पडऩेपर सर्जिकल स्ट्राइकका निर्णय किया जाना चाहिए जिससे कि पाकिस्तानको मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।
बेहतर रेल सेवाका संकल्प

ट्रेनोंकी बदतर होती व्यवस्थामें सुधारके लिए रेल मंत्रालयने अहम फैसला किया है। शनिवारको चार जोनोंके महाप्रबंधकोंकी बैठकमें रेलमंत्री पियूष गोयलने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि दो माहके भीतर देशभरमें ट्रेनोंका समयसे परिचालन सुनिश्चित करनेके लिए ९० फीसदी सुधार लानेका लक्ष्य तय किया गया है। रेल मंत्रालयने फैसला किया है कि निकट भविष्यमें कोई नयी ट्रेन नहीं चलायी जायगी। इसके साथ ही डिवीजनोंको ज्यादा अधिकार देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनानेका भी निर्णय किया गया है। मरम्मत कार्यके लिए ब्लाकके कारण ट्रेनके रास्तेमें देरतक रुकनेकी स्थितिमें यात्रियोंको मुफ्त भोजन, पानी भी दिया जायगा। रेल मंत्रालयका निर्णय स्वागतयोग्य है, लेकिन यह कितना कारगर होगा, यह तो आनेवाला समय ही बतायेगा। इसके पहले भी व्यवस्थामें सुधारके लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किये जा चुके हैं, लेकिन लाख कोशिशों और चेतावनियोंके बाद भी स्थितिमें अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। इसके मूलमें विभागमें व्याप्त भ्रष्टïाचार प्रमुख कारण है जिसपर रेल मन्त्रालयका कोई नियंत्रण नहीं है। जरूरत है पूरी व्यवस्थामें आमूलचूल परिवर्तनकी। रेलयात्रा पूरी तरह असुरक्षित है। यात्रियोंकी सुरक्षा सुविधा संतोषजनक नहीं है। खान-पानकी व्यवस्था भी राम भरोसे है। इसमें व्यापक सुधारकी आवश्यकता है। ट्रेनोंका परिचालन समयपर हो, यह अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए सिर्फ दिशा-निर्देश ही काफी नहीं है बल्कि रेलवेके रिक्त पदोंको भी भरा जाना चाहिए। पदोंमें ११ हजारकी कटौती किसी भी दृष्टिïकोणसे सही नहीं है। रेल मंत्रालयको इसपर पुनर्विचार करना चाहिए। मानवरहित रेलवे क्रासिंगकी समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। जर्जर पटरियोंकी मरम्मत नितांत आवश्यक है। दिशा निर्देशोंका अनुपालन किस सीमातक हो रहा है इसपर सतत निगरानी रखनेकी आवश्यकता है। जबतक निगरानी तंत्र मजबूत नहीं किया जायगा तबतक व्यवस्थामें सुधारकी कल्पना नहीं की जा सकती।