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हज सब्सिडीपर ऐतिहासिक फैसला- तारकेश्वर मिश्र

अदालतके आदेशके मुताबिक केंद्र सरकारने हज यात्रापर मिलनेवाली रियायतको खत्म करके ऐतिहासिक कदम उठाया है। वैसे खुद मुस्लिम धार्मिक संस्थाएं भी इस पवित्र यात्राको अपनी ईमानकी कमाईसे ही करनेमें यकीन रखती हैं। लिहाजा मुस्लिम धर्मावलंबियोंने इस फैसलेपर खुशी ही जाहिर की है।

मोदी सरकारने हजके लिए प्रस्तावित सब्सिडी समाप्त करनेका फैसला किया है। अल्पसंख्यक मामलोंके मंत्री मुख्तार अब्बास नकवीका स्पष्टीकरण कि हज सब्सिडीसे कुछ बिचौलिया एजेंसियोंकी तिजोरियां भरी जा रही थीं, लिहाजा यह फैसला लेना पड़ा। अलबत्ता सरकार गरीब हाजियोंकी आर्थिक मदद करनेपर विचार करेगी। इस तरह हज सब्सिडी खत्म होनेसे भारत सरकारकी सात सौ करोड़ रुपयेसे ज्यादाकी बचत हो सकती है। साथ ही हाजी मुसलमान 'खैरातÓ की लानतसे बच सकेंगे, क्योंकि कुरानमें लिखा है कि जो समर्थ हैं, वही हजपर जायं। बेशक सब्सिडी भी 'खैरातÓ ही है।

इस साल हज यात्रापर जानेवाले लगभग दो लाख यात्रियोंको रियायत अब नहीं मिलेगी। केन्द्र सरकारने इस सब्सिडीको बंद करते हुए कहा है कि वह मुस्लिम समुदायके लोगोंको बिना तुष्टीकरणके सशक्त बनाना चाहती है। प्रधान मंत्री मोदीने सत्तामें आनेके बाद हज सब्सिडी खत्म करनेका जो सिलसिला शुरू किया था, अब उसपर पूरी तरह रोक लगा दिया गया है। मोदी सरकारने हजके लिए प्रस्तावित सब्सिडी बिलकुल ही खत्म करनेका फैसला लिया है। अल्पसंख्यक मामलोंके मंत्री मुख्तार अब्बास नकवीका स्पष्टीकरण है कि हज सब्सिडीसे मुसलमानोंको फायदा होनेके बजाय कुछ बिचौलिया एजेंसियोंकी तिजौरियां भरी जा रही थीं, लिहाजा यह फैसला लेना पड़ा। अलबत्ता सरकार गरीब हाजियोंकी आर्थिक मदद करनेपर जरूर कुछ विचार करेगी। इस तरह हज सब्सिडी खत्म होनेसे भारत सरकारकी सात सौ करोड़ रुपयेसे ज्यादाकी बचत हो सकती है। साथ ही हाजी मुसलमान 'खैरातÓ की लानतसे बच सकेंगे, क्योंकि कुरानमें लिखा है कि जो समर्थ हैं, वही हजपर जाएं। हज करनेके लिए किसी भी तरहकी 'खैरातÓ हराम है। बेशक सबसिडी भी 'खैरातÓ ही है।

मोदी सरकारने अपनी प्राथमिकता तय की है कि सब्सिडीकी राशिको मुस्लिमोंके विकास, कल्याण और खासकर मुस्लिम बच्चियोंकी पढ़ाईपर खर्च किया जायगा। सच्चर आयोगकी रिपोर्टके मुताबिक, करीब ९० फीसदी मुस्लिम बच्चियां अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पाती हैं और स्कूल छोडऩेको विवश होती हैं। करीब ६० फीसदी मुस्लिम महिलाएं शिक्षासे ही वंचित हैं। मात्र दस फीसदी औरतें ही उच्च शिक्षा ग्रहण कर पाती हैं। औसतन ४३ फीसदी मुसलमान निरक्षर हैं। यह भी आकलन सामने आया है कि अभीतक हज सब्सिडीके नामपर जो तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं, उनसे १५१ स्कूल बनाये जा सकते थे। इस मुद्देको हिंदू-मुसलमानके चश्मेसे देखा जाय। मई, २०१२ को सर्वोच्च न्यायालयने आदेश दिया था कि दस सालोंकी अवधिके दौरान हज सब्सिडीको धीरे-धीरे खत्म किया जाय। हालांकि तत्कालीन यूपीए सरकारने उस फैसलेके खिलाफ याचिका दायर की थी कि फिलहाल सब्सिडी खत्म की जाय, लेकिन सुप्रीम कोर्ट अपने फैसलेपर सख्तीसे कायम रहा। शायद उसीका नतीजा है कि २०१४ में केन्द्रमें मोदी सरकार आनेके बाद सब्सिडी घटाकर ५७७ करोड़ रुपये कर दी।

उसके बाद २०१५ में ५२९ करोड़ और २०१६ में ४०५ करोड़ रुपये हज सब्सिडी रह गयी थी, जिसे अब पूरी तरह खत्म किया जा रहा है। इसपर मुसलमानोंने तल्ख प्रतिक्रियाएं दी हैं और ओवैसी सरीखे मुस्लिमनेताओंनेभीयहसब्सिडीतुरन्तखत्मकरनेकीबातकहीथी।मुस्लिमनेताओंकाएकतबकाऐसाहै,जिसकामाननाहैकिमोदीसरकारमुसलमानोंकोपरेशानकररहीहै,लिहाजालगातारमुस्लिम-विरोधी फैसले लिये जा रहे हैं। उनकी दलीलें हैं कि ऐसा कर मोदी सरकार हिंदुओंकोसंकेतदेनाचाहतीहैकिदेखिये,वहमुसलमानोंसेकिसतरहनिबटरहीहै!दरअसलयहहिंदू-मुसलमानकामामलानहींहै,देशकीआर्थिकस्थितिकोबचानेकीकोशिशहै।सवालहैकिदेशकीआजादीकेबादहजसब्सिडीलगातारक्योंदीजातीरहीहै?यदिमुसलमानोंकोसरकारीसुविधादीजातीरहीहैतोजैन,बौद्ध,सिख,पारसीआदिअन्यअल्पसंख्यकोंकोक्योंनहींदीगयी?उनकेभीधर्मस्थलहैं,वहभीतीर्थयात्रापरजानाचाहतेहैं।सवालतोयहभीहैकिपूरीहिंदूजमातको'धार्मिकसब्सिडीÓक्योंनहींदीजाती?

जब कैलाश मानसरोवरकी यात्राके लिए विभिन्न राज्य सरकारें बीस हजार रुपयेसे एक लाख रुपयेतकके अनुदान देती हैं तो उनपर आपत्ति की जाती है। इस यात्रामें हिंदू और मुसलमान सभीको अनुदान दिये जाते हैं। कुंभ मेलेमें भी केंद्र और राज्य सरकारें विस्तृत बंदोबस्त करती रही हैं। स्वच्छ पेयजलसे लेकर सुरक्षा, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओंके लिए डाक्टर और विशेष प्रकारके इंजेक्शन आदि भी मुहैया कराये जाते हैं। वह सरकारोंके सामाजिक दायित्व हैं, कि सब्सिडीके माध्यम हैं, जिनके जरिये सरकारें तुष्टीकरणकी राजनीति खेलती रही हैं। क्या हज सब्सिडी भी तुष्टीकरणका एक जरिया रही है?

सरकारी रिकार्डके मुताबिक, करीब ४० लाख मुसलमानोंने हजके लिए आवेदन किया है। लॉटरीके जरिये इजाजत मिलेगी, लेकिन बिना हज सब्सिडीके .७५ लाख मुस्लिम ही मक्का-मदीना जा सकेंगे। सब्सिडी किसी भी देशकी अर्थव्यवस्थापर बोझ है। मोदी सरकारकेआनेसेपहलेकरीबदोलाखकरोड़रुपयेकीसब्सिडीदीजातीथी।प्रधानमंत्रीमोदीकेआह्वानपरलोगोंनेगैससिलेंडरपरसबसिडीछोड़ी।अबभीएकमोटीसब्सिडीमुहैयाकरायीजारहीहै।यहखत्महोनीचाहिए।यदिकोईगरीब,असहायहै,तोउसकीमददकरनासरकारकासामाजिकदायित्वहै,लेकिन'खैरातÓउनतबकोंकोभीक्योंदीजाय,जोसक्षमऔरसमर्थहैं?

यह भी सच है कि सब्सिडीका असल फायदा गरीबोंके बजाय बिचौलिये ही उठा रहे थे। दरअसल सबसिडीकी यह सात सौ करोड़ रुपयेकी रकम अल्पसंख्यक समुदायकी आधी आबादीके शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरणके लिए खर्च होगी। सरकारने हज यात्राके लिए दी जानेवाली सब्सिडी बंद करने और पैसेको मुस्लिम वर्गके कल्याणके लिए लगानेका फैसला लिया है। सरकारने हज यात्राके लिए दी जानेवाली सब्सिडीमें गड़बड़ीका अंदाजा लगाया होगा, तभी सरकारने सबसिडी बंद करनेका मन बनाया है। सुप्रीम कोर्टने भी धीरे-धीरे हज सब्सिडी खत्म करनेका आदेश दिया था। सरकारके इस फैसलेपर कुछ राजनीतिक पार्टियां या मुस्लिम वर्गके लोग इसपर आपत्ति जताते हुए बेतुकी बयानबाजी कर रहे हैं, जो कतई उचित नहीं।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई सरकार मुसलमानोंको मुख्य धारामें लाना चाहती है, वह भी बिना किसी भेदभावके? यदि हां, तो सरकार क्यों नहीं २००२ में आये सच्चर कमेटीकी सिफारिशोंको लागू करती है? इस रिपोर्टके मुताबिक भारतमें मुस्लिम समुदाय दलितोंसे भी ज्यादा पीछे हैं, चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो या फिर सरकारी नौकरीकी बात हो। हज सब्सिडी अब नहीं मिलेगा, जबकि चार महाकुंभ मेलेमें सरकार लगभग चार हजार आठ सौ करोड़ रुपये खर्च करती है। कैलाश मनसारोवर यात्रामें सरकार डेढ़ लाख रुपये प्रति व्यक्तिका खर्च करती। यदि मोदी सरकार नेक दिलसे मुस्लिम समुदायका सशक्तीकरण करना चाहती है तो प्रधान मंत्रीको बहुत-बहुत धन्यवाद। उम्मीद है कि बचतके पैसोंसे मुस्लिम वर्गका भला ही होगा। यकीनन सरकारके इस फैसलेसे मुस्लिम वर्गकी गरीब तबकेकी मातृशक्तिको संबल मिलेगा। पक्ष-विपक्ष भी इस फैसलेको सियासतका अखाड़ा बनाकर वोट बटोरनेका जरिया बनाये। उम्मीद है कि इस बचे धनका इस्तेमाल अल्पसंख्यक तबकेकी बालिकाओंकी जिंदगीमें क्रांतिकारी बदलाव लायगा।