Tel: 0542 - 2393981-87 | Mail: ajvaranasi@gmail.com


प्रश्नाकुल भारतीय जनमानस-हृदयनारायण दीक्षित

उपनिषद् अनूठे हैं। आनन्दका ऐसा आख्यान भारत छोड़ अन्यत्र नहीं मिलता। प्राचीन यूनानी दर्शनमें बेशक उपनिषदों जैसी अभिव्यक्तियां हैं। लेकिन वह ज्ञानकी सूचना ही देती हैं और सूचना ज्ञानका पर्याय नहीं होती। भारतकी प्रज्ञा प्रश्नाकुलतामें ही रमती रही है।

भारतीय इतिहासके उत्तर वैदिक कालमें सृष्टि और सृष्टिके रचनाकारपर तमाम जिज्ञासाएं थीं। तर्क, प्रतितर्क, प्रश्न ही प्रश्न थे। जीवन जगत्के रहस्य जान लेनेकी बेचैनी थी। यजुर्वेदके ऋषि तबतक 'प्रश्नोंÓ की महत्ता बता चुके थे। वैदिक साहित्यमें अनेक देवताओंकी स्तुतियां हैं। ऋग्वेदके ऋषियोंने श्रद्धा एवं नमस्कारको भी देवता बताया था। यजुर्वेदके ऋषिने 'प्रश्नोंÓ को देवता बताया। ऐसा उचित भी है प्रश्न ही ज्ञान यात्राके प्रेरक हैं। भारतकी प्रश्न परम्परा अद्वितीय है। गीता दर्शन भी अर्जुनके प्रश्नोंका परिणाम है। उसके सैकड़ों वर्ष पहले कठोपनिषद् रची जा चुकी थी। इस उपनिषद्में नचिकेताके प्रश्न हैं। कालके देवता यम द्वारा उनके प्रश्नोंके उत्तर दिये गये हैं। यमने उन्हें सुयोग्य प्रश्नकर्ता बताया था। भारतकी प्रज्ञा प्रश्नाकुलतामें ही रमती रही है। विज्ञानऔरदर्शनआधुनिककालकीआंखेहैं।प्रश्नहैकिविज्ञानऔरदर्शनकाजन्मकबहुआ?इनकेविकासकेमूलतत्वक्याहैं?विज्ञानऔरदर्शनकाजन्मप्रश्नोंकेगर्भसेहीहुआ।हमारीजिज्ञासाहैकिविश्वकापहलाप्रश्नक्याथा?आदिममनुष्यवस्त्रहीन,गृहविहीनऔरसाधनहीनभीथे।जलप्राथमिकआवश्यकताहैजीवनकी।किसीनेअपनेसहयोगीसेहीपहलाप्रश्नपूछाहोगापानीकहांहै?चाल्र्सडारविननेसृष्टिकेविकासकीखोजमेंआश्चर्यजनकपरिश्रमकियाथा।उनकेमनमेंअनेकप्रश्नथे।भाषाबोलीकेविकासकोलेकरभीएकप्रश्नथा।दुनियाकेप्राचीनतमशब्दसाक्ष्यऋग्वेदकेऋषियोंकेमनमेंआयेसैकड़ोंप्रश्नहैं।एकमनोरमप्रश्नहैकिसृष्टिमेंउगेप्रकाशपुंजकोसबसेपहलेकिसनेदेखा-कोददर्शप्रथमंजायमान?ऋग्वेदमेंज्ञानकीपूर्णताकादम्भनहींहै।यहांसृष्टिरहस्यजाननेकीविनम्रजिज्ञासाहै।

ऋग्वेदका नासदीय सूक्त अन्तरराष्ट्रीय स्तरपर चर्चित है। सृष्टि सृजनकी जिज्ञासावाले इस सूक्तकी पूरी कथा प्रश्नाकुल है 'जब सत् था, असत् था। लोक थे। रात्रि थी, दिन। तब सबको आच्छादित करनेवाला था क्या? कौन जानता है कि यह सृष्टि कहांसे किस कारण आयी? क्या सृष्टिका अध्यक्ष भी यह बात जानता है कि नहीं जानतायहां हजारों वर्ष प्राचीन भारतीय प्रश्नाकुलताकी झांकी है। हम सब दैनिक जीवनमेंअनेकप्रश्नोंसेजूझतेहैं- जैसेक्रिकेटकेखेलमेंकिसनेकितनेरनबनायेहैं?इत्यादि।ऋग्वेदकेएककविनेदेवताओंसेदिलचस्पस्तुतिकीहै'हेदेव!मुझेऐसेमित्रोंसेदूररखोंजोप्रश्नऔरजिज्ञासामेंरमणनहींकरते।ऋषिप्रश्नोंमेंआनंदितनरहनेवालेमित्रोंसेदूरहीरहनाचाहताहै।

प्रश्न हमारी मनोभूमिको किसानकी तरह खोदते हैं। बार-बार हल चलाते हैं। मनोभूमिको उर्वर बनाते हैं। प्रश्न बीज पौध बनाते हैं, फिर कली फिर पुष्प और फिर बीज। बीज, पौध, कली, फूल और फिर बीजका चक्र प्रकृतिके उद्भववाले दिनसे ही चल रहा है? प्रश्न स्वाभाविक ही है कि इस चक्रीय गतिशीलताकी मूल ऊर्जा क्या है? सूरज लाखों बरससे ताप दे रहे हैं। तापके लिए ईंधनकी जरूरत होती है। प्रश्न उठता है कि इस ईंधनकी मात्रा क्या है? क्या सूर्यके पास ईंधनका अनंत भण्डार है? अनन्त हुआ तो क्या सूर्यका ईंधन किसी किसी दिन समाप्त होनेवाला है? प्रति प्रश्न पैदा होता है कि तब विश्वका क्या होगा? विज्ञानके इतिहासमें ऐसी घटनाके उल्लेख नहीं हैं लेकिन प्रश्नोंका क्या? वह उगते, उठते हमारी मनोभूमिको बेचैन बनाया ही करते हैं। क्या प्रश्नाकुलताका विकास आधुनिक कालमें ही हुआ है? मैं स्वयं उत्तर देता हूं कि नहीं। संसद और विधानमण्डलोंमें भी प्रश्नाकुल बेचैनी घटी है। संप्रतिप्रश्नकीतुलनामेंअपनीनिजीबातजोरदारढंगसेयाप्राय:चिल्लाकरकहनेकाचलनबढ़ाहै।

भारतकी प्रश्नाकुलता सहस्त्रों बरस पुरानी है। उत्तरवैदिक काल प्रश्नाकुल अग्निधर्मा है। उपनिषदोंमें गुरूकुल आश्रमोंकी चर्चा है। कह सकते हैं कि इन आश्रमोंमें प्रश्नोंकी खेती होती थी। वृहदारण्यक उपनिषद्के अनुसार गार्गीके प्रश्नसे याज्ञवल्क्य भी तमतमा गये थे कि गार्गी ब्रह्मïका कारण नहीं पूछते। यह अति प्रश्न है। भारतमें प्रश्न, प्रति प्रश्न, अनुपूरक प्रश्न और अतिप्रश्न भी। कश्मीर आश्रमके पिप्पलाद महान तत्ववेत्ता थे। भारतमें उनके तत्वज्ञानकी धूम थी। ऋषि भरद्वाजके पुत्र सुकेशा, शिविकुमार सत्यकाम, गर्गगोत्री सौर्यायणी, कौशल निवासी आश्वलायन, विदर्भके भार्गव और ऋषि कत्यके प्रपौत्र कबन्धी विद्वान तत्वखोजी थे लेकिन बह्मï आस्तिक थे। इन छह महानुभावोंने पिप्पलादके ज्ञानकी प्रशंसा सुनी थी। तब चर्चा थी कि पिप्पलाद ब्रह्मï तत्वके जानकार हैं। ब्रह्मï जिज्ञासाकी शांतिके लिए छहो महानुभाव विनम्रतापूर्वक पिप्पलादके आश्रम पहुंचे।पिप्पलादनेउन्हेंएकवर्षतकआश्रममेंरहनेऔरएकवर्षबादप्रश्नोंकेउत्तरदेनेकाआश्वासनदिया।सूर्यउगे,सूर्यगये।एकवर्षबीतगया।छहोमहानुभावोंनेजीवनजगतसेजुड़ेछहप्रश्नपूछे।पिप्पलादनेउनकेउत्तरदिये।इसीप्रश्नोत्तरसेबनीप्रश्नोपनिषद्।प्रश्नोपनिषद्यानीप्रश्नोंकीउपनिषद्।आपसबकेमनमेंस्वाभाविकहीप्रश्नहोंगेकिवहप्रश्नक्याथे?उनकेउत्तरक्याथे?इसप्रश्नोत्तरकोसमेटनायहांसंभवनहीं।संप्रतिइतनाकाफीहैकिभारतमेंप्रश्नोंकीभीएकउपनिषद्है।

----------------

युवाओंको जालमें फंसाते आतंकी संघटन-. कुमार 

   

किसीको आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि एक प्रतिभावान कश्मीरी छात्र मन्नान बशीर वानी आतंकवादी संघटन हिजबुल मुजाहीद्दीनमें शामिल हो गया है। उसका पूरा छात्र जीवन उज्जवल भविष्यकी ओर ले जानेवाला है। उसके बारेमें जानकारी यह भी है कि २०१६ में भोपालके आइसेक्ट विश्वविद्यालयमें जल, पर्यावरण,ऊर्जाएवंसमाजअंतरराष्ट्रीयसम्मेलनमेंउसेसर्वश्रेष्ठशोधपत्रकासम्मानमिलचुकाहै।ऐसायुवकयदिअपनीपढ़ाईकेअंतिमपायदानमेंआतंकवादीबनजायऔरखुशी-खुशी एके-४७ लिये अपनी तस्वीर वायरल कराये तो निश्चय ही समस्त भारतीयोंकोदुखपहुंचेगा।उसकेपिताजम्मू-कश्मीर राज्य स्कूल शिक्षा विभागमेंलेक्चररहैं।उसकाएकभाईकनिष्ठअभियंताहै।यानीशिक्षितसंभ्रांतपरिवारसेनिकलाहुआनवजवानआजहाथोंमेंहथियारथामेअपनेहीलोगोंकाकत्लकरनेऔरहिंसाफैलानेकेलिएमैदानमेंकूदगयाहै।

अब वह मन्नान बशीर वानी होकर हमजा भाई है। जबतक आतंकवादीके रूपमें वह जीवित रहेगा हमजा भाईके नामसे ही जाना जायगा। हालांकि कोई पढ़ा-लिखा व्यक्ति आतंकवादी बनता है तो इसमें आश्चर्य करनेका कोई कारण नहीं होना चाहिए। दुनियामें जितने बड़े आतंकवादी हुए हैं सब एकसे एक अच्छी डिग्रीवाले। ओसामा बिना लादेनसे अयमान अल जवाहिरीतककी डिग्री देख लीजिए। ११ सितंबर २००१ को अमेरिकापर हमला करनेकी साजिशमें जितने शामिल थे सब अलग-अलग क्षेत्रोंके बेहतर डिग्रीधारी। भारतमें आईएसआईएसके कई प्रच्छन्न एजेंट पकड़े गये सब उतने ही पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल। अपने साथ यह कम पढ़े-लिखोंकी भी भर्ती आतंकवादी काररवाईके लिए करते हैं, लेकिन ज्यादातर नेतृत्व या कमान उच्च डिग्रीधारियोंके हाथों ही रहा है। मुंबई हमलेमेंजिंदापकड़ागयाअजमलकसाबकोप्रेरितकरनेवाले,प्रशिक्षणदेनेवालोंकीसूचीमेंज्यादातरपढ़े-लिखे थे। यहांतककीफौजमेंमेजरसेसेवानिवृत्तव्यक्तिभीथे।इसलिएइसविषयपरज्यादाबहसकीआवश्यकतानहींकिइतनापढ़ा-लिखा होनेके बावजूद मन्नान आतंकवादीक्योंबना?मूलप्रश्नयहहोसकताहैकिआखिरजम्मू-कश्मीरमेंऐसेनवजवानआतंकवादीक्योंबनरहेहैं।

मन्नान या उसके जैसे युवाओंको आतंकवादी बननेके बाद अपने जीवनका हश्र पता है। एक समय था जब आतंकवादियोंकी उम्र कुछ वर्षकी होती थी। अब तो आतंकवादी बननेके बाद कुछ महीनेसे ज्यादा उनकी उम्र नहीं होती। कई तो कुछ सप्ताहके अन्दर ही मार डाले गये। जबसे कश्मीरमें आतंकवादके खिलाफ ऑल आउटके नामसे बहुपक्षीय सैन्य अभियान चला है आतंकवादियोंकी उम्र घट गयी है। इस समय सुरक्षाबलजहांआतंकवादियोंकेसफायेकेलिएअभियानचलारहेहैंवहींवहउनकेमाता-पिता और रिश्तेदारोंसेअपीलकरवाकरउनकोमुख्यधारामेंवापसीकेलिएभीकामकररहेहैं।इसकाअसरभीहुआहै।पिछलेकुछमहीनोंमेंइसकाअसरहुआहैऔरकरीबएकदर्जनआतंकवादीआतंकवादकारास्ताछोड़करसमाजमेंवापसआयेहैं।जम्मू-कश्मीर पुलिस एवं प्रशासनकीघोषणाहैकिजोवापसआयंगेउनकोमुख्यधारामेंबनेरहनेमेेंहरसंभवमददकीजायगी।इसकेसाथनयेयुवकआतंकवादीनबनेंइसकेलिएभीकईप्रकारकेअभियानचलरहेहैं।इनसेकाफीयुवकजोआतंकवादियोंकेसंपर्कमेंआगयेथेएवंआतंकवादीबननेकेएकदमकगारथे,उनकोरोकाजासकाहै।ऐसीसफलताओंऔरऐसेवातावरणकेबीचकिसीकाआतंकवादीबननानिश्चयहीयहसोचनेकेलिएजरूरमजबूरकरताहैकिआखिरऐसाहोक्योंरहाहै।

यह तो साफ है कि आतंकवादी समूह कई तरीकोंसे युवाओंको आकर्षित करनेकी कोशिश कर रहे हैं। कौन कहां किस वेषमें आतंकवादी बना रहा है यह पता करना मुश्किल है। मन्नान बशीरके बारेमेें अब जानकारी मिली है, लेकिन उसकी छानबीनमें सामने आया है कि उसके ही कमरेमें रहनेवाले यानी रूम पार्टनर मुजम्मिल पिछले वर्ष जुलाईसे ही अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालयके कैम्पस नहीं आया है। ध्यान रखिये वह भी पीएचडीका ही छात्र है और दोनों एक ही प्रोफेसरके अधीन शोध कर रहे थे। संयोग देखिये दोनों कुपवाड़ा जिलेके ही रहनेवाले हैं। तो कहां गया वह। यदि वह पुलिसको नहीं मिलता तो यह मान लेना चाहिए कि आतंकवादी समूहमेें उसका प्रत्यक्ष प्रवेश पहले हो गया था और मन्नान बशीर उसके बाद गया है। छानबीनसे ही पता चलेगा कि यह दोनों किसके संपर्कमें थे। यह भी समाने आया था कि आतंकवादी बुरहान वानीके मारे जानेके बाद मन्नान बशीरने अभियान चलाया था। बुरहान वानीको शहीद बताते हुए पोस्टर आदि लगाये थे। उस समय भी पुलिस उसके नजदीक पहुंच रही थी, लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालयने उसे क्लीन चीट दे दी। कहा गया कि वह एक मेधावी छात्र है तथा आतंकवादीयाअलगाववादीगतिविधियोंसेउसकाकोईरिश्तानहीं।यहकहनामुश्किलहैकिउससमयआतंकवादीसमूहोंसेकिसीप्रकारकाउसकारिश्ताबनाथायानहीं।किन्तुयहकहाजासकताहैकियदिउसपरकड़ीनजररखीजातीतोवहपकड़मेंआजाता।

इसे जम्मू-कश्मीरका दुर्भाग्य कहिये कि जब भी वहां शांति और स्थिरताकी स्थिति बननेकी संभावना पैदा होती है उसके समानांतर ऐसी घटनाएं घटने लगतीं हैं कि पूरा माहौल उलट हो जाता है। पाकिस्तानने पिछले चार सालोंमें पूरी कोशिश की है कि जम्मू-कश्मीरमें १९९० के दशककी स्थिति कायम की जाय। इसके लिए अपने यहांसे आतंकवादियोंको तो भेजो ही, घाटीके अंदरसे आतंकवादीपैदाकरो।इसमेंउसेसफलताभीमिलरहीहै।२०१७मेंसुरक्षाबलोंकामाननाहैकि१२०केआसपासआतंकवादीघाटीसेबनेहैं।उसकेपूर्व२०१६मेंभीकरीब९०आतंकवादीवहांसेबनेथे।इसकेपूर्वकश्मीरसेआतंकवादीबननेकीघटनाएंकमहोरहींथीं।किन्तुवहांयोजनाबद्धतरीकेसेकश्मीरकेअलगाववादकाअतिइस्लामीकरणकियाजाचुकाहै।अबआतंकवादीवहांकेवलकश्मीरकोभारतसेअलगकरनेकेलिएसंघर्षनहींकरते।उनकीघोषणाहैकिइसेइस्लामिकराजमेंबदलनाहै।यानीवहांकेसंघर्षकोइस्लामकासंघर्षबनादियागयाहै।आखिरजाकिरमूसाकेजितनेवक्तव्यहमारेसामनेआयेहैंउनमेंयहीकहागयाहैकिकश्मीरकोइस्लामीराजकेलिएहमसंघर्षकररहेहैं।उसनेतोयहांतककहाहैकिकश्मीरकीआजादीकीमांगकरनेवालेअलगाववादीयदिइसकाविरोधकरतेहैंतोउनकाभीकामतमामकियाजायगा।इस्लामकेजुड़जानेसेआतंकवादकोनयीधारमिलीहै।अलगाववादकासामान्यनारेकाअसरकमजोरपडऩेलगाथा।आतंकवादीसमूहोंनेइसमेंबदलावकरकेइस्लामकीलड़ाईकानारादियाऔरइसमेंइतनाआकर्षणहैकियुवाखींचरहेहैं।पिछलेदिनोंमुठभेड़मेंमारेगयेतीनआतंकवादियोंमेंसेएकजम्मू-कश्मीर पुलिस अधिकारीका१७वर्षीयबेटाथाजोतीनमहीनेपहलेहीआतंकवादीबनाथा।जाहिरहैमन्नानबशीरजैसेकेआतंकवादीबननेकेपीछेमजहबमुख्यकारकहोगा।अबविचारकरनेकीआवश्यकतायहहैकिआखिरइसमजहबीआकर्षणकोवहांकैसेखत्मकियाजाय।