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अमर्यादित भाषाका दौर

देश अत्यन्त ही नाजुक दौरसे गुजर रहा है जिसमें सबसे प्रमुख मसला राष्टï्रवादका है। जबसे श्रीलंकामें आतंकवादी घटना हुई, विश्व भारत सरकारको चेतावनी दे रहा है कि ऐसी घटना भारतमें भी हो सकती है।
आजादीके बाद लोकसभाके जितने आम चुनाव हुए उनमें इतनी कटुता कभी नहीं देखी गयी जितनी इस बार देखी गयी है। इस बार तो सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरेको जमकर गालियां दे रहे हैं। सभ्य परिवारोंमें लोगोंने इन टीवी डिबेटोंको देखना बन्द कर दिया, जिससे बच्चोंपर खराब असर नहीं पड़े। शायद ही ऐसी कोई गाली होगी जो विपक्षी नेताओंने नरेन्द्र मोदीके खिलाफ इस्तेमाल नहीं की होगी। सबसे विभत्स गाली मणिशंकर अय्यरने दी, जिसमें उन्होंने नरेन्द्र मोदीको दुबारासे 'नीचÓ कहा है।  इसके पहले उन्होंने प्रधान मंत्रीको 'नीच किस्मका व्यक्तिÓ कहा था। यहांतक कि जब वह पाकिस्तान गये थे तब उन्होंने कहा था कि नरेन्द्र मोदी कभी भारतका प्रधान मंत्री नहीं हो सकता है। भारत लौटकर उन्होंने २०१४ में आम चुनावसे पहले कहा कि यह 'चाय बेचनेवालाÓ कभी किसी हालतमें प्रधान मंत्री नहीं बन सकता है। अपनी शेखी बघारनेके लिए उन्होंने कहा कि यदि नरेन्द्र मोदी चाहें तो वह कांग्रेस पार्टीके मुख्यालयके सामने चाय दुकान खोल सकते हैं। उनकी इस टिप्पणीपर उनके खिलाफ पूरे देशमें रोष फैल गया। उस चुनावमें नरेन्द्र मोदी भारी बहुमतसे जीत गये। कांग्रेस पार्टीने अपनी झेंप मिटानेके लिए मणिशंकर अय्यरको कुछ समयके लिए निलंबित कर दिया और कुछ समय बाद उन्हें वापस पार्टीमें ले लिया। लेकिन उन्हें यह चेतावनी दी गयी कि वह इस तरहकी बेसिर-पैरकी बातें नहीं करें। उस समय तो उन्होंने माफी मांग ली और वादा किया कि दुबारा वह ऐसी टिप्पणी नहीं करेंगे। परन्तु वह शीघ्र अपनी बात भूल गये। इस बार फिर नरेन्द्र मोदीको 'अति नीच किस्मÓ का व्यक्ति बताया। यह कहकर उन्होंने कांग्रेस पार्टीको कितनी क्षति पहुंचायी है इसका उन्हें अन्दाजा नहीं होगा।
जबसे लोकसभाके वर्तमान आम चुनावका ऐलान हुआ तबसे एक तरहसे सब कुछ ठीक-ठाक ही चल रहा था और प्राप्त संकेतोंसे ऐसा लग रहा था कि नरेन्द्र मोदीकी सरकार कुछ सहयेागी पार्टियोंके साथ मिलकर सरकार बना लेगी। विपक्षी भी निराश होकर चुप बैठ गये थे। अचानक इसी बीच 'पुलवामाÓ में पाकिस्तानी आतंकवादियोंने सुरक्षा बलोंपर आत्मघाती कारसे प्रहार कर दिया जिसमें ४२ से ज्यादा निर्दोश जवान मारे गये। इस घटनासे विपक्षी दलोंको एक बहुत बड़ा हथियार मिल गया। सभीने एक स्वरसे पूछा कि जब गुप्तचरोंने बताया था कि सीआरपीएफ को सड़क मार्गसे न भेजकर हवाई जहाजसे भेजना चाहिए तो सरकारने ऐसा क्यों नहीं किया। यही नहीं, इतनी बड़ी मात्रामें बारूद वहां कैसे पहुंच गया, जबकि सेनाके गुप्तचर पूरी निगाह रखे हुए थे। सचमुचमें यह एक अत्यन्त ही चिन्ताजनक बात थी। परन्तु विपक्षके नेताओंका मुंह बन्द करनेके लिए प्रधान मंत्रीने सेना और वायु सेनाको खुली छूट दे दी कि जैसे भी चाहें, जहां भी चाहे आतंकवादियोंके ठिकानोंको वह नष्ट कर दें। अत्यन्त ही सोची-समझी रणनीतिके तहत, अत्यन्त ही गुप्त तरीकेसे आतंकियोंके 'बालाकोटÓ गढ़पर 'ऐयर स्ट्राइकÓ किया। विदेशी पत्रकारोंने अपने समाचारपत्रोंमें यह खुलासा किया है कि उस ऐयर स्ट्राइकमें जैशके १७० आतंकवादी मारे गये। परन्तु विपक्ष यह माननेको तैयार नहीं हैं। भारत सरकारका कहना है कि जब विदेशी पत्रकार दावेके साथ १७० आतंकवादियोंके मारे जानेका समाचार दे रहे हैं तो अब विपक्षको और क्या सबूत चाहिए। पहले तो विपक्षके नेताओंको ऐसा लगता था कि वह मोदीकी पार्टी और एनडीएके सहयोगी दलोंको शिकस्त नहीं दे पायंगे। परन्तु इसी बीच विपक्षकी कई पार्टियोंने आपसमें एक गठबंधन बना लिया। मायावती और अखिलेश यादव वर्षोंसे एक-दूसरेके कट्टर दुश्मन थे। परन्तु नरेन्द्र मोदीको नीचा दिखानेके लिए दोनोंने हाथ मिला लिया। मायावतीने तो अपनी अनेक सभाओंमें बेहिचक नरेन्द्र मोदीको चुन-चुनकर अपशब्द कहे। उन्होंने यहांतक कह दिया कि जो व्यक्ति अपनी पत्नीको नहीं संभाल सकता है, वह दूसरी महिलाओंकी इज्जत कहांसे करेगा। उन्होंने यह भी व्यंग्य किया कि अब बीजेपीके सांसदों और नेताओंकी पत्नियां इस बातसे चिन्तित हैं कि नरेन्द्र मोदीके प्रभावमें आकर उनके पति कहीं उन्हें भी नहीं छोड़ दें। बात यही नहीं रूकी, विपक्षके नेताओंने नरेन्द्र मोदी और भाजपाके अन्य नेताओंको गालियां दी हैं। अपशब्दोंका ऐसा माहौल पहले कभी नहीं बना। नरेन्द्र मोदीकी तरफसे बार-बार यही कहा गया कि पिछले पांच वर्षोंमें उन्होंने आम जनताके लिए क्या कार्य किये। परन्तु विपक्षके नेता इन सब बातोंको सुननेके लिए तैयार नहीं है। उनका एक सूत्रीय कार्यक्रम है कि मोदीको हटाओ। परन्तु उनके चाहनेसे नरेन्द्र मोदीको नहीं हटाया जा सकता है। यह ताकत तो जनताके पास है। इस बातको पूरे देशकी जनता अच्छी तरह समझती है कि देश एक अत्यन्त ही नाजुक दौरसे गुजर रहा है जिसमें सबसे प्रमुख मसला राष्टï्रवादका है। जबसे श्रीलंकामें आतंकवादी घटना हुई, पूरे संसारके लोग भारत सरकारको चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसी घटना कहीं भारतमें भी हो सकती है। परन्तु आम जनताको नरेन्द मोदीकी काबलियतपर भरेासा है और उन्हें यह अच्छी तरह पता है कि नरेन्द्र मोदीने देशको एक मजबूत सरकार दी है।
अब २३ तारीखको सारी स्थिति साफ हो जायगी। यदि किसी कारणवश एनडीएको बहुमत नहीं भी मिल सका तो इतना तो निश्चित है कि भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियां इतनी सीट जरूर प्राप्त कर लेंगी जिससे लोकसभामें उसे बहुमत प्राप्त हो सके। इसमें कोई संदेह नहीं कि नरेन्द्र मोदीने देशके कोने-कोनेमें घूमकर लोगोंका आत्मविश्वास बढ़ाया है। देशकी जनता २३ मईको आनेवाले चुनाव परिणामोंका इन्तजार कर रही है।
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अंशुघातसे समुचित बचावकी आवश्यकता
 वैद्य गोपालजी द्विवेदी     
 
       
इस समय देशके विभिन्न भागोंमें लूका प्रकोप है। लोग गर्मी एवं पसीनेसे युक्त हो अंशुघात यानी लू से पीडि़त हो जाते हैं। उष्णकालीन सूर्यकी किरणोंसे वायु संतप्त होकर पित्तकी वृद्धि करता है और शरीरका प्रधान अंग सिर संतप्त हो जाता है। फलत: विनाशकारी लू मानव शरीरको आक्रान्त करती है। इसे आयुर्वेदे शास्त्रमें अंशुघात ज्वर तथा आधुनिक चिकित्सक इसे 'सन स्ट्रोकÓ कहते हैं। लू एक घातक जानलेना व्याधि है। लू प्राय: उन व्यक्तियोंको आक्रान्त करती है, जो उष्ण प्रदेशोंमें रहते हैं। जो दुर्बल व्यक्ति धूपमें अधिक चलते हैं, उनपर लूका प्रकोप अत्यधिक होता है। साथ ही जो व्यक्ति एसीसे निकलकर एकाएक तेज धूपमें जाते हैं, वह भी लू के शिकार हो जाते हैं। लू लगनेका अर्थ है शरीरकी तरलता एवं स्निग्धताका एकाएक सूख जाना। सूर्यकी किरणोंके आघातसे शरीरका जलीय अंश शोषित हो जाना ही लू लगना कहा जाता है। लू के लक्षणोंको तीन भागोंमें विभक्त किया जा सकता है।
प्रथम अवस्थाको शीतावस्था भी कहते हैं। इसमें त्वचा क्लिन्न एवं मूच्र्छा, थकान (श्रम), दौर्बल्यता, नाड़ी गति तीव्र होना आदि लक्षण दृष्टिïगोचर होते हैं। इस अवस्थामें उपचार होनेसे रोगीको बचाया जा सकता है। द्वितीय अवस्थामें रोगीके सिरमें अत्यधिक पीड़ा, त्वचामें शुष्कता, शरीरमें तीव्र, संताप, नाड़ीकी गति अति तेज, साथ ही हृदय और श्वांसकी गति दुर्बल एवं क्षीण मिलती है। तृतीय अवस्थाको तीव्रावस्था कहा जाता है। इसमें अत्यधिक श्वांस कष्टï, प्रलाप, मुखाकृति लाल-अचेतना, नाड़ी स्पन्दन क्षण-क्षण लुप्त होना, हाथ-पैरका भी नीला होना, आक्षेप आदि लक्षण मिलने लगे तो समझना चाहिए कि रोगी प्राय: नहीं बचेगा। अत्यन्त प्यासका लगना, कण्ठका सूखना, चक्कर आना, शरीर रूक्ष होना, आंखें लाल होना, शारीरिक तापक्रममें वृद्धि, मूच्र्छा, वमनकी इच्छा पेशाबमें जलन तथा कष्टïका अनुभव होना, पीला या लाल होना आदि लक्षण अनिष्टï सूचक हैं। आधुनिक मतानुसार मूत्रमें अल्वयूमिन, इण्डिकेन आदि अधिक आने लगते हैं। साथ ही गुदा प्रदेशमें १०८ से ११२ डिग्री फारनेहाइट तापक्रम मिलता है। कभी-कभी उग्र वमन, अतिसार, जो कालराका भ्रम कराता है, आदि लक्षण उपस्थित होते हैं।
प्राथमिक उपचारमें लू से पीडि़त रोगीको सर्वप्रथम वस्त्रादिसे ठण्डी जगह ढककर सुखद मुलायम गुदगुदे शैयापर शीघ्र लिटा देना चाहिए। तदोपरान्त जल सिंचित कर खसके पंखे या ताड़के पंखोंसे हवा करते हुए शीतल जल अथवा नारियलके पानीसे परिषेक (देहको पोछना) करना चाहिए। पिपासा शान्तिके लिए सहसा शीतल जल नहीं देना चाहिए, अपितु चन्दन, उशीर (खस) आदिसे युक्त शीतल जलका प्रयोग किया जाय। यदि रोगीको कोष्ठïबद्धता (कब्ज) हो तो उसे तत्क्षण दूर करें। प्याजका रस एक छोटा चम्मच, मटरके समान नमककी मात्राके साथ देनेसे लाभ मिलता है। कच्चे आमको आगमें भूनकर ठण्डा होनेपर हाथसे शीतल जलमें मसलकर मीठा या नमकीन शर्बत बनाकर पिलायें। पके हुए मीठे अनारको अग्निमें पकायें, जब शीतल हो जाय तो उसका स्वरस निकाल लें, उस स्वरसमें दस गुना शहद मिलाकर सेवन करायें, लाभ मिलेगा। मीठे अनारके रसमें समभाग जल और डेढ़ गुना चीनी मिलाकर शर्बत बनायें। इस शर्बतसे प्यास एवं दाह अवश्य शान्त होती है। लहसुनके एक जवेको कुचलकर एक गिलास दूधमें उबालकर गर्म-गर्म पी लें। काली मिर्च, जीरा, धनियां, पुदीनेकी पत्तियां, काला एवं सेंधा नमक पांच-पांच ग्राम लेकर चूर्ण बना लेें। इस चूर्णको आधा लीटर दूध, कागजी नीबू एवं लौंग दो-दो और जरा-सा हींग, सबको अच्छी तरह फेटकर पिलायें। लूसे तत्क्षण लाभ मिलेगा। ६० ग्राम नीबूका रस, ३०-३० ग्राम शहद और पानीको मिलाकर पिलानेसे लूका विकास नष्टï होता है। अर्क गुलवनप्सा एवं चन्दन अर्क प्यास लगनेपर दोनोंको मिलाकर देना चाहिए। पित्ता पापड़ा अर्क एवं केवड़ा शर्बत, समान भाग तीन गुने जलमें मिलाकर देते रहना चाहिए। नीबूका शर्बत और संतरेका शर्बत समान भाग जलमें मिलाकर दिया जा सकता है। एलादि चूर्ण चार माशे, मिश्री दो माशा, शहदमें मिलाकर चटायें। इससे मिचली एवं उल्टी बन्द हो जाती है। खसका शर्बत तथा गिलोयका शर्बत एवं कपूरसिव तीनोंको समान मात्रामें मिलाकर ऊपरसे दो गुना जल डालकर पिलायें, दाह एवं प्यास तुरन्त शान्त होगी।
अनन्तमूल, चोपचीनी, मंजीठ, गिलोय, घमासा, रक्तचन्दन, गुलबनप्सा, गोरखमुण्डी, शहतरा, कमलके फूल, गुलाबके फूल, गुमा, पद्माख और शंखाहुली प्रत्येक समान भागमें लेकर इसका जौ कूट चूर्ण बना लिया जाय। इसमेंसे एक तोला चूर्ण लेकर रातमें एक पाव जलमें पकाकर आधा जल रहनेपर छानकर क्वाथ बना लिया जाय। इस क्वाथको शीतल कर मिट्टïीके बर्तनमें डालकर एक सुरक्षित स्थानमें बालूपर रखकर ऊपरसे मिट्टïीके ढक्कनमें ढंक दिया जाय। तत्पश्चात्ï प्रात:-सायं लू के रोगीको पांच तोलाकी मात्रामें पिलायें। इससे गलेकी तकलीफ, ज्वर, चक्कर एवं घबराहट सब दूर हो जाते हैं। मुखमण्डल, गले एवं सीनेपर श्रीखण्डका लेन करते रहें। साथ ही डाभ (नारियलका पानी) का सिंचन भी करते रहना चाहिए। सेवनीय पथ्य- पतली खिचड़ी, उष्णोदक, चापलका माड़, भुली हुई मूंग या मसूर या चलाकी दालका सूप पिलाना पथ्य है। कोदो, साठी, शाली, चावल, जौ, श्वेत कुष्माण्ड पुदीना, म_ïा, इमलीका शर्बत, केला, लौकी, परवल, खजूर, अनार, झरबेर, इमली, मुनक्का, अंगूर, किसमिस, आमला, महुआका फूल, कागजह नीबू, कच्चे नारियलका पानी, मधुर एवं तिक्त रसवाले पदार्थ, छोटी इलायची, बादामयुक्त सौंफकी ठंडई, बर्फका चूसना तथा शीतल जल, सत्तूका पतला शर्बत जिसमें इच्छानुसार नमक, जीरा एवं नीबूके रससे युक्त, सुगठीका पीसा उबटन भी दाहनाशक है। ताजा मीठा, गौका म_ïा मिश्रीयुक्त लेनेसे प्यास मिटती है तथा विस्मरणशीलता दूर होती है। ब्रह्मïमूहूर्तमें उठकर नित्य कर्मोंसे निवृत्त हो तत्पश्चात्ï इसबगोलकी भूसी जलमें भिगोकर मिश्रीके साथ अवश्य लें। शीतल जलमें जौका सत्तू चीनी मिलाकर यथेष्ठï शीतल जलमें घोलकर लें। यह सभी प्यास एवं दाह तथा अशक्तिको दूर करनेवाले उपयोगी उपचार हैं।