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साधनाका स्वरूप

 साध्य, साधना और साधक इन तीनोंकी संगति है। तीनोंके समन्वयसे पूरी बात बनती है। साध्य ईश्वर है। ईश्वर अर्थात सत्प्रवृत्तियोंका समुच्चय। मोक्षकी भी इसीमें गिनती होती है। दुष्प्रवृत्तियां ही बंधन हैं। भव बंधनोंकी चर्चा जहां होती है वहां उसका तात्पर्य कषाय-कल्मषोंसे है। कषाय अर्थात पूर्व जन्मोंके अभ्यस्त संस्कार, कल्मष अर्थात प्रस्तुत ललक लिप्साओंको आकर्षणसे किये हुए दुरित। इनसे छुटकारा पानेका नाम मोक्ष है। यह मान्यता सही नहीं है कि जन्म-मरणसे छूट जानेका नाम मोक्ष है। जन्म, अभिवर्धन और मरण यह प्रकृतिका नियम है। ईश्वरकी सत्ता इस प्रकृति क्रमको इसी निमित्त बनाती है। जीव-जंतु, वृक्ष-वनस्पतिसे लेकर मानव शरीर धारियोंतक, प्रत्येकको इस चक्रमें अनिवार्यत: भ्रमण करना पड़ता है। अवतारी महामानव भी बार-बार जन्म लेते हैं। सूक्ष्म शरीरधारियोंको भी एक अवधिके लिए नियत उत्तरदायित्व संभालनेके लिए भेजा जाता है उसे पूरा करनेके उपरांत वह भी वापस लौट जाते हैं और आवश्यकतानुसार उसी क्रमकी पुनरावृत्ति करते रहते हैं। जब अवतारों और देवताओंको आवागमनकी प्रक्रिया पूर्ण करनी पड़ती है तो भक्तजनोंके लिए अपवाद कैसे हो सकता है। मोक्षका तात्पर्य कषाय-कल्मषोंसे छुटकारा पाना है। इसीको ईश्वरकी प्राप्ति कहते हैं। यह इस जीवनकी सर्वोपरि परिस्थिति है, जिसमें निरंतर सत, चित्त और आनन्दका अनुभव होता रहता है। ईश्वरका स्वरूप भक्तके लिए सच्चिदानंद स्वरूप ही है। इसीमें उसे कषाय-कल्मषोंसे छुटकारा मिलता है। कर्म बंधनसे बलात बंधकर जन्म-मरणके चक्रमें फंसना बंदीकी तरह कष्टकारक भी हो सकता है। ईश्वर एक व्यवस्था है। भावनाशीलोंके लिए उसकी भावनाके अनुरूप भी। इसलिए मरनेके बाद मोक्ष मिलनेकी कल्पना निरर्थक है उसे भावनाशील जीवित स्थितिमें भी प्राप्त कर सकते हैं। ईश्वरप्राप्तिके लिए मरनेतकका इन्तजार करना व्यर्थ है। सगुण भक्तोंने भी जीवित स्थितिमें भगवानको पाया है। निराकार वादियोंके लिए तो वह और भी सरल है। उसे सबसे निकट देखना हो, सबसे सरलतापूर्वक देखना हो तो अपने शुद्ध अंत:करणमें ही उसकी झांकी करनी चाहिए। साधनामें साध्य एक ही है, ईश्वरप्राप्ति। इसीको मोक्ष कहना हो तो भी कुछ हर्ज नहीं। इसे प्राप्त करते ही साधक अज्ञान, अभाव और अशक्ति जन्म समस्त दु:ख दरिद्रोंसे छूट जाता है। सच्चिदानंदके साथ एकीभूत हो जाता है। अपनी और ईश्वरकी स्थितिमें भिन्नता नहीं रहती। साध्यको समझ लेनेके बाद साधनाका स्वरूप समझनेकी आवश्यकता है। साधना ही ईश्वरतक आपको ले जा सकती है।
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लोक संवाद
कोरोनासे कारोबारको हानि
महोदय,-सूरतके डायमंड कारोबारको कमसे कम ८००० करोड़ रुपयेका नुकसान हो सकता है। दरअसल सूरतसे हर साल ५४००० करोड़ रुपयेका एक्सपोर्ट हांगकांगको होता है। कोरोना वायरसकी वजहसे हांगकांगमें कारोबार सुस्त हो गया है। इसका सीधा नुकसान देसी कारोबारियोंको होनेवाला है। लेकिन इससे भी भयावह है उन कारोबारियोंका नुकसान जो चीनसे आये कच्चे मालका इस्तेमाल करते हैं। देशमें तीन इंडस्ट्री-फार्मा, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो ऐसे हैं जिनके कच्चे मालका बड़ा हिस्सा चीनसे ही आता है। एक रिपोर्टके मुताबिक या तो कच्चे माल मिल नहीं रहे हैं या फिर बहुत महंगे हो गये है। इसके लिए दूसरे देशोंका तत्काल रुख करना आसान नहीं है। रिपोर्टमें कहा गया है कि फार्मा इंडस्ट्रीके लिए जरूरी एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट) काफी महंगे हो गये है। सर्दी-खांसी और बैक्टेरिया इन्फेक्शनके लिए जरूरी एपीआई भी काफी महंगे हो गये हैं। इंडस्ट्रीके दिग्गजोंका मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरते हैं तो इंडस्ट्रीके लिए मुसीबतें काफी बढ़ सकती है। फिलहाल पुराने स्टॉक्स से काम चलाना पड़ रहा हैण् चीन टेलीवीजन पैनल्स, एसईडी चीप्स और फ्रीज और एसीमें लगनेवाले कंप्रेशरका भी बड़ा सप्लायर है। मोबाइल हैंडसेटके जरूरी पाट्र्स भी चीनसे आते हैं। उनसे जुड़े इंडस्ट्रीका मानना है कि अगले हफ्तेतक चीनसे सप्लाई शुरू नहीं हुई तो करोबारपर बहुत बुरा असर पडऩे वाला है। दरअसल चीन हमारा बहुत बड़ा ट्रेड पार्टनर है। हर साल हम चीनसे करीब ७० अरब डालरका आयात करते हैं और करीब १७ अरब डॉलरका निर्यात। चीनके बहुत सारे इलाकेमें कोरोना वायरसकी वजहसे कारोबार ठप पड़ा है। चीनकी विकास दरमें एक परसेंटेज प्वाइंटतककी कमी आ सकती है। जानकारोंका मानना है कि कोरोना वायरसका असर सार्ससे भी ज्यादा होनेवाला है। २००३ में सार्स वायरसकी वजहसे पूरी दुनियामे ८०० मौंते हुई थी और चीनकी विकास दरमें एक परसेंटेज प्वाइंटकी कमी आयी थी। लेकिन चीन उस समय दुनियाकी छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी इसीलिए दुनियाके ग्रोथपर इसका खास असर नहीं हुआ था। लेकिन अब चीन अमेरिकाके बाद दुनियाकी दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अनुमान है कि २०१९ में पूरी दुनियाके ग्रोथमें अकेले चीनका योगदान ३९ परसेंट रहा। ऐसेमें चीनकी लडख़ड़ाती अर्थव्यवस्थाका असर पूरी दुनियामें २००३ के मुकाबले कहीं ज्यादा होनेवाला है। चीन पिछले ११ सालोंसे दुनियाका सबसे बड़ा आयातक और निर्यातक दोनों है। भारतके अलावा जापान और वियतमानकी कई इंडस्ट्रीज चीनसे होनेवाली सप्लाईपर निर्भर है। ऐसेमें चीनसे सप्लाई आनेमें देरी या महंगी होंगी तो इन अर्थव्यवस्थाओंपर बहुत ही बुरा असर पड़ेगा। इसी वजहसे पूरी दुनियाके शेयर बाजारमें पिछले चार दिनोंसे जोरदार रैली दिख रही है। लेकिन यह सारी उम्मीदें है और हकीमतका सामना अगले हफ्ते ही होगा। लेकिन चीनमें अगले हफ्तेसे २४ प्रांतोमें कारोबार आंशिक रूपसे भी शुरू नहीं होते हैं तो भारतमें दवाकी कीमतें बढऩा तय है। हो सकता है कि कुछ जरूरी दवाईयोंके सप्लाईपर भी इसका असर पड़े। नये बीएस नॉर्म गाडिय़ोंके सप्लाईपर इसका असर पड़ सकता है। हमारी अर्थव्यवस्थाको चीनमें वायरस अटैकसे कितना धक्का लगेगा, इसके आधिकारिक अनुमानके लिए तो थोड़ा इन्तजार करना पड़ेगा। फिलहाल तो यही उम्मीद करनी चाहिए कि भारतकी फार्मा इंडस्ट्रीको जरूरी सामान समयपर मिलता रहे। -मयंक मिश्र, वाया ईमेल।