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शाश्वत सत्य

वर्तमानमें धर्मका कुछ ज्यादा ही प्रचार एवं प्रसार देखनेको मिल रहा है प्रचार एवं प्रसार होना अच्छी बात है लेकिन इससे ज्यादा जरूरी है इसके सत्यको अपनाना किन्तु अपनानेके नामपर सिर्फ दिखावा है । वर्तमानमें धर्म ग्रंथोंके शाश्वत वचन केवल भाषणतक ही सीमित हैं। इसपर भाषण देनेवाले अधिकांश लोग ज्ञान एवं अनुभवसे अनभिज्ञ हैं जिससे इसका कोई सकारात्मक असर नहीं हो रहा है। यह व्यक्तिकी पीड़ाको कम करनेके स्थानपर बढ़ा रहे है जिससे जीवन पीड़ामें डूबता ही जा रहा है। सत्य है कि हर धर्ममें कहे गये शाश्वत वचन ईश्वरीय वचन ही हैं जो उसकी प्रेरणास्वरूप लिखे गये हैं लेकिन इनकी गहराईका अहसास तभी हो सकता है जब इनको पढऩे एवं सुनानेवालेमें इन्हें अनुभव करनेकी शक्ति विकसित हो। बिना अनुभवके यह सकारात्मक प्रभाव नहीं डाल पाते हैं। इनसे लाभ तभी प्राप्त होगा जब स्वयंमें अनुभव करनेकी शक्ति विकसित हो चुकी हो बिना इसके इनका प्रचार-प्रसार प्रवचन सब निरर्थक है। वर्तमानमें धर्मके ठेकेदारोंकी संख्या बहुत बढ़ गयी है जिन्हें इसका वास्तविक अर्थतक नहीं मालूम यह बातें तो देवत्व समान करते हैं लेकिन जा रहे हैं पशुताकी ओर। धर्मका आचरण यदि सही ढंगसे नहीं किया जाता तो यह केवल आडंबर बनकर ही रह जाता है। इसका सही आचरण निश्चित ही व्यक्तिको देवत्व प्रदान करता है लेकिन गलत आचरण नर्ककी ओर ले जाता है। प्राय: ऐसा भी देखा जा रहा है कि धर्मका एक ऐसा अन्यायी भूत लोगोंके जेहनमें घुस गया है जिसे वह बाहर निकालना नहीं चाहते और न ही इसकी बारीकियोंपर विचार करते हैं जिससे वह कुछ अनुभव कर सकें। ऐसे अनुभव ही जो अपने प्रयासोंसे दूसरोंतक पहुंचाये जाय। यही वास्तवमें धर्मका वास्तविक पालन है। वास्तविकता यह है कि एक तो धर्मके वास्तविक अर्थको समझनेवाले बहुत ही कम हैं और जो हैं वह सही तरहसे अनुसरण नहीं कर रहे हैं यह लोगोंकी नासमझीका लाभ उठाकर अपनी अपनी दुकानें चला रहे हैं तथा धर्मके नामपर मनुष्यको ऐसे तोताके समान बना देना चाहते हैं जो केवल वहीं भाषा बोले जो उन्हें रटाई जाय प्रत्येक मनुष्यके मस्तिष्कमें अकूत ज्ञानका भंडार है जो दुनियाके हर धर्मके बारेमें समझ सकता है इसे तो बस थोड़ा-सा प्रयास करके जागृत करना है। जो ऐसा करनेमें सफल हो जाते हैं उन्हें सभी धर्म एक जैसे ही दिखाई देते हैं, न कोई छोटा, न कोई बड़ा क्योंकि शाश्वत सत्य तो हर धर्म ग्रंथमें एक ही हैं। धर्म ग्रंथोंके शाश्वत सत्यको जो एक बार जान लेते हैं उन्हें सभी धर्म एक जैसे ही लगते हैं।
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 लोक संवाद
आतंकियोंकी धमकियां

महोदय,- महाराष्टï्रकी पुणे पुलिस द्वारा पूर्वके प्रधान मन्त्री राजीव गांधीकी हत्याकी तरह देशके प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदीकी हत्या करनेकी योजना बनायी गयी। साजिशके तहत माओवादी नक्सली नेता एवं भीमा कोरे गांव हिंसा मामलेमें दोषी आरोपी रोना जैकब विल्सन सहित पांच अपराधियोंको धर दबोचा गया। कम्युनिस्ट पार्टी आफ इण्डिया प्रतिबन्धित संघटन एवं रोना जैकब विल्सन प्रधान मन्त्री मोदीकी हत्या करनेकी कुचेष्टïामें था। मोदीके खिलाफ जहर उगलने, आपत्तिजनक पर्चे छपवा कर माओवादियों एवं उनके हिमायतियोंमें बांटे जा रहे थे। इस मामलेमें पुलिसने छापा मारकर दोषी रोना जैकब विल्सन सहित पांच नक्सलियोंको धर दबोचा। पुलिस इसकी बधाईकी पात्र है अन्यथा देशमें भयानक हिंसा और तबाही होती। इसी तरह महाराष्टï्रके मुख्य मन्त्री देवेन्द्र फडणवीस और उसके परिवारको खत्म करनेकी आतंकियोंने धमकी भी दी है। जिसका मुख्य मन्त्रीने इस धमकीका खुलासा भी किया है। इसी तरह पाकिस्तानमें पल रहे आतंकी मुखिया जमात-उद-दावा हाफिल सईदने भी सुन्नी मुसलमानोंसे अपील की है कि वह जेहाद छेड़ और भारतके प्रधान मन्त्रीकी हत्या करें। इस्लामका झण्डा भारत और अमेरिकामें लहरायेगा। इस तरह आतंकियों, नक्सलियों एवं बाबर, औरंगजेब एवं जयचन्दकी नस्ल देश एवं दुनियाकी मुसीबतें बढ़ा रहे हैं। इस्लाम बेकसूरोंकी हत्या करनेकी इजाजत नहीं देता है लेकिन देशमें तबाही करने एवं हिंसा भड़कानेके पीछे आतंकियों एवं नक्सलियोंकी जो धमकियां दी जा रही हैं भारत सरकारको चाहिए कि इन धमकियोंकी जांच करायी जाय और दोषियोंको सजा दी जाय। देश सर्वोपरि है। इन गद्दारोंको सजा देना ही देशकी आवाज है। -हरीशचन्द्र धानुक, लखनऊ।
मोदी सरकारके चार वर्ष
महोदय,- पिछले २६ मईको मोदी सरकारके चार वर्ष पूरे हो गये। इन चार वर्षोंमें प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदीने पूरे विश्वके देशोंकी यात्राएं की और अपनी विदेश नीतिको पुख्ता बनाया। इंग्लैण्ड, अमेरिका, रूस, जापान, चीन इंडोनेशिया, ईरान, इसराइल, साउथ अफ्रीका, मारीशस, नेपाल, श्रीलंका, बंगलादेशने मोदीकी नीतियोंकी सराहना की और उनका लोहा माना। सभी देशोंने आतंकवादसे एकजुट होकर समाप्त करनेकी कसमें खाईं। सारे देश आतंकवाद मुद्देपर एकमत हैं। मोदीकी विदेश नीति उच्च स्तरकी रही भाजपा सरकारने देशमें गांव एवं कस्बोंमें शौचालय बनवाये जिससे लोग बाहर शौच करने न जाय तथा गांव स्वच्छ एवं साफ-सुथरा रहे। गरीब महिलाओंको मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किया, दिव्यांगोंको ट्राई साइकिल प्रदान किया, गंगाको स्वच्छ रखनेके लिए कई योजनाएं बनायीं। कई राष्टï्रीय मार्गोंमें चार-लेन एवं छह-लेनकी सड़कें बनवायीं, फ्लाईओवर बनवाया जिससे शहरमें भीड़ कम हो और जाम न लग सके तथा जनता आसानीसे आ-जा सके। किसानोंको उचित मूल्यपर खाद एवं बीज प्रदान किया और गेहूंका न्यूनतम मूल्य बढ़ा दिया। किसानोंके लिए फसल बीमा योजना बनायी जिससे बाढ़, सूखा, ओलावृष्टिïमें भरपाई हो सके। गरीबोंके इलाजके लिए गांवों एवं कस्बोंमें स्वास्थ्य केन्द्र खुल गये। गांवमें बच्चोंके पढऩेके लिए विद्यालय खुलवाये। इसके अलावा और भी बहुतसे अच्छे एवं सराहनीय कार्य किये। लेकिन बेरोजगारीको दूर करनेमें असफल रही। यही एक मुद्दा रह गया। -अवधेश, इलाहाबाद।