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शक्तिबीज

 जब शिवाक्षर शक्ति अक्षरोंसे युक्त होते हैं, तभी शब्दार्थकी अभिव्यक्ति और शब्दमय संसारकी रचना होती है। शिव शब्दमें इकार शक्तिबीज है। शवमें जबतक इकारका संयोग नहीं होता, तबतक वह शव ही रहता है। मृतक शरीरमें हिलनेतककी शक्ति नहीं होती। मातृकाओंमें 'अ’ से 'अ:’ तक सोलह स्वर शक्तिके अक्षर हैं तथा 'कÓ से 'क्षÓ तक पैंतीस शिवाक्षर हैं, जो शिवश्यकत्यात्मक हैं। जिस प्रकार व्यक्त-अव्यक्त संसारको शिवशक्तिका परिणाम बताया गया है, उसी प्रकार शब्दमय जगतकी रचना भी तब संभव है, जब शिवशत्यात्मक अक्षरोंका परस्पर संयोग हो। जब शिवाक्षर शक्ति अक्षरोंसे युक्त होते हैं, तभी शब्दार्थकी अभिव्यक्ति और शब्दमय संसारकी रचना होती है। शिव शब्दमें इकार शक्तिबीज है। शवमें जबतक इकारका संयोग नहीं होता, तबतक वह शव ही रहता है। मृतक शरीरमें हिलनेतककी शक्ति नहीं होती। समस्त भावोंके मनन और संपूर्ण संसारके त्राणके कारण वह मंत्ररूपिणी, मननत्राणरूपिणी है। पंचदशी श्रीविद्याके संबंधमें चतु:शती ग्रंथके अनुसार- यस्य यस्य पदार्थस्य या या शक्ति समीरिता,
सा तु सर्वेश्वरी देवी स सर्वोअपि महेश्वर:॥
व्याप्ता पंचदशार्णैर्या विद्या भूत गुणात्मिका।
पंचभिश्च तथा षड्भिश्चतुर्भिरपि चाक्षरै:॥
 स्वर व्यंजन भेदेन सप्तविंशति भेदिनी।
सप्तविंशप्रभेदेन षट्त्रिंशत्तत्वरूपिणी॥

तत्वातीत स्वभावा च विद्यैषा भाष्यते सदा। अर्थात जिस पदार्थकी जो शक्ति है, वह सब सर्वेश्वरी श्रीविद्या है और जो पदार्थ शक्तिवाले हैं, वह सब महेश्वर स्वरूप हैं। वह सर्वेश्वरी पंचभूत गुण स्वरूपिणी हैं अर्थात पृथ्वीके शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध पांच गुण, जलके शब्द, स्पर्श, रूप और रस चार गुण, तेजके शब्द, स्पर्श और रूप तीन गुण, वायुके शब्द और स्पर्श दे गुण और आकाशका शब्द एक गुण। इस तरह सब गुणोंको जोड़कर पंद्रह गुणोंवाली पंचदशी विद्या हुई। पंचदशी श्रीचक्र स्वरूपा है। लकार पृथिवी बीजसे भूपुर और उसमें स्थित देवता बने हैं। सकार षोडश कलात्मक चंद्रमा है, इससे षोडशदल कमल और तदंतर्गत देवताओंकी उत्पत्ति हुई। हकार अष्टमूर्ति शिवकी संज्ञा है, इससे अष्टदल कमल और तदंतर्गत देवियोंका उद्भव है। ईकार भुवनेश्वरी बीज है। चौदह भुवनोंकी ईश्वरी। उससे चतुर्दशार और उसके देवताओंका जन्म हुआ। एकारसे दशावतार विष्णु स्वरूप बहिर्दशार और तदंतर्गत देवियोंके मंडलका आविर्भाव हुआ। रकार वह्नि बीज है, इससे दशकलात्मक अग्निरूप अंतर्दशार तथा तत्तवेताओंका जन्म हुआ। ककार अष्टमूत्र्यात्मक शिवका वाचक है, इससे अष्टकोण और उसकी अधिष्ठात्री शक्तियोंकी उत्पत्ति हुई। अर्धचंद्रसे त्रिकोण और उसके कोणस्थ कामेश्वरी, वज्रेश्वरी और भगमालिनी देवियोंकी उत्पत्ति हुई। इसी प्रकार बिंदुसे बिंदुचक्र, उसकी अधिष्ठात्री महात्रिपुरसुंदरी प्रकट हुईं। श्री महात्रिपुरसुंदरीका मंत्रात्मक रूप पंचदशी है। इसके तीन कूट हैं। प्रथम कूट श्रीमद्वाग्भव कूट है जो भगवतीका मुख है। कंठसे लेकर कमरतक भगवतीका मध्य कूट कामराज कूट है तथा भगवतीके कमरसे नीचेका भाग शक्ति कूट है।
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लोक संवाद
यूआईडीएआईका जवाब
महोदय,- आधार हर भारतीयके लिए आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट भी आधारकी संवैधानिकतापर मुहर लगा चुका है। हालांकि बैंक अकाउंटसे आधारको लिंक करानेको लेकर सुप्रीम कोर्टने फैसला दिया है कि यह अनिवार्य नहीं, लेकिन सभीके मनमें एक सवाल उठता है कि क्या आधार नंबरसे बैंक अकाउंट हैक हो सकता है। आधारकी अधिकृत संस्था यूआईडीएआईने अपनी वेबसाइटपर ऐसे ही कुछ सवालोंके जवाब दिये हैं। इस सवालपर यूआईडीएआईका कहना है कि यह बिलकुल गलत है। जिस तरह एटीएम कार्ड नंबरकी जानकारी रखनेसे कोई भी एटीएम मशीनसे पैसे नहीं निकाल सकता, उसी तरह केवल आपके आधार नंबरकी जानकारी रखनेसे कोई भी न तो आपके बैंक खातेको हैक कर सकता है और न ही पैसे निकाल सकता है। यदि आपने बैंक द्वारा दिये गये अपने पिन-ओटीपीको कहीं शेयर नहीं किया है तो आपका बैंक खाता सुरक्षित है। -सुधीर शर्मा, वाया ईमेल।