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जीवनकी तीन बातें

साधारण जीवन जिसे जीना है, उसकी तो कोई बात ही नहीं है। क्योंकि आपको कई व्यक्ति ऐसे मिल जायंगे जो दार्शनिक चार्वाकके पदचिह्नïोंपर चलते मिलेंगे। अर्थात्ï खाओ, पीओ, मौज करो। यह दृष्टिïकोण कई तरहसे गलत है। हमें यह जीवन कुछ करके बननेके लिए मिला है। ऐसेमें हमें समाज, परिवार और अन्तमें राष्टï्रके लिए भी कुछ करना धर्म बनता है। हम समाजमें हैं तो हमारी कुछ जिम्मेदारियां भी हैं। समाजसे पृथक हम कुछ नहीं कर सकते। समाजसे अलग-थलग तो मात्र संत ही रहता है, फिर भी वह भले एकांकी जीवन जीये, लेकिन तब भी वह कुछ न कुछ करता ही रहता है। उसके सभी कार्य अप्रत्यक्ष होते हैं। वह कोई उपदेश या सन्देश देता है तो वह भी समाजके लिए कल्याणकारी होता है। यह संतका अप्रत्याक्ष अवदान होता है। परिवारमें रहनेवाले हम लोग कभी-कभी अपने कार्यकी सफलता या संकटसे निबटनेके लिए किसी अच्छे मित्रकी तलाश करते हैं। आप मित्रकी तलाश मत करो। आपके सामने जो व्यक्ति है यदि वह आपका हाथ थाम ले तो उसे मित्र बनानेमें कोई कठिनाई नहीं है, क्योंकि ऐसा देखा गया है कि वही व्यक्ति आपका सच्चा शुभचिन्तक बनकर आपका साथ निभाता है। अब आप अच्छा समयपर आयें। अच्छा समय तो वर्तमान ही होता है। भूतकाल या भविष्यपर आपका कोई अधिकार नहीं है। जो बीत गया अब उसे लेकर चिन्तित होना व्यर्थ है, क्योंकि बीता समय कभी लौट कर नहीं आता। यही बात भविष्यके सम्बन्धमें है। हम भविष्यमें होनेवाली किसी घटनाका अनुमान भर कर सकते हैं। वह घटना घटेगी अवश्य ऐसा हम साधिकार नहीं कह सकते। अत: हमारा वर्तमान समय ही सबसे अधिक मूल्यवान है। वर्तमानको खोनेवाला व्यक्ति बादमें केवल हाथ ही मलता रह जाता है। अब सफलताके लिए कर्म करनेकी बात आती है तो हमारा सबसे अच्छा कर्म उपस्थित कम है। अर्थात्ï वर्तमानमें जो हम कर रहे हैं वही सबसे उत्त कर्म माना गया है। कर्मको टंटा या बोझ न मानें। इसे स्वाभाविक रूपसे लें। इसके बिना आप न किसी क्षेत्रमें सफल हो सकते हैं और न परिवार या समाजके प्रति अपनी जिम्मेदारियोंका निर्वहन कर सकते हैं। अतएव एक अच्छे मित्रके साथ वर्तमानमें उपस्थित कर्म करते रहें तो सदा सफल रहेंगे।
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लोक संवाद
अधिकारियोंकी कमीसे जूझती सेना

महोदय, सेना पिछले काफी समयसे अधिकारियोंकी कमीसे जूझ रही है। २०१० में सेनाकी जरूरत थी ४६४१५ अधिकारियों की, जबकि उस समय ११२३८ अधिकारियोंकी कमी देखी गयी थी। अगस्त २०१८ में लोकसभामें रक्षा राज्यमंत्नी सुभाष भामरे द्वारा सदनके पटलपर रखे गये आंकड़ोंके अनुसार हमारी १३ लाखकी सेनामें ४९९३३ अधिकारियोंकी जरूरत है, जबकि हम ७२९८ की कमीसे जूझ रहे हैं। फिलहाल भर्तीकी संख्या और अधिकारियोंकी स्वीकृत संख्याको देखें तो विशेषज्ञोंने यह अनुमान लगाया है कि पूर्णता प्राप्त करनेमें कमसे कम १७ साल लगेंगे। सेनाकी मानें तो कमसे कम हर वर्ष २००० से २५०० अधिकारियोंकी जरूरत सेनाको है। इस समय ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई और गयामें मौजूद हैं, जहांसे शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी सेनामें दाखिल होते हैं। २०१० में सेनामें अधिकारियोंकी कमी २६ प्रतिशत थी जिसे २०२१ तक घटाकर १२ प्रतिशततक लाया जायगा। २०१८ के आंकड़े बताते हैं कि सेनामें आनेवाले कैडेटोंकी संख्या २१०० रही जबकि सेनासे बाहर जानेवाले अधिकारियोंकी संख्या ११७२ थी। सेना एक बारमें ज्यादा कैडेटोंकी भर्ती नहीं कर सकती क्योंकि इसकी वजहसे पदोन्नतिमें गड़बड़ी होगी तथा सेवानिवृत्तिमें एक साथ बड़ी संख्या बाहर जायगी, इसलिए धीरे-धीरे भर्ती करना लाजमी है। लेकिन शॉर्ट सर्विस कमीशनके अधिकारियोंको लंबे समयतक सेनामें रखना एक विकल्प है। शॉर्ट सर्विस कमीशनके अधिकारियोंके लिए अब सेना मुख्यालयने नया रोड मैप बनाया है जिसके अनुसार सरकारसे सिफारिश की जा रही है। इस नये प्रस्तावके अंतर्गत १० और १४ सालतक सर्विस देनेवाले अधिकारियोंको सेनामें बनाये रखनेके लिए दस वर्ष बाद एकमुश्त १७ लाख रुपये दिये जायंगे, जबकि १४ वर्षतक सेनामें अपनी सेवाएं देनेवाले शॉर्ट सर्विस अधिकारियोंको एकमुश्त ३८ लाख रुपये देनेका प्रस्ताव है। इसीके साथ यह भी सोचा जा रहा है कि शॉर्ट सर्विस अधिकारियोंको डिफेंस सिक्योरिटी कोर और एनसीसीमें बीस वर्षकी नौकरीके लिए भेजा जाय, जिससे उन्हें पेंशन मिल सके। इसके अलावा सेनामें शॉर्ट सर्विस अधिकारियोंको पूरे वेतनके साथ शैक्षणिक अवकाश दिया जाय जिससे वह अपनी क्षमतामें विकास कर सकें और सेवानिवृत्तिके बाद अपने लिए नये और बेहतर विकल्प खोज सकें। -सारंग थत्ते, वाया ईमेल।
दफ्तरोंसे अनुपस्थितिपर लगाम
महोदय,- आप नौकरी कर रहे हैं। आपका ड्ïयूटी टाइम सेवायोजकने खरीद रखा है। आप तय समयमें ड्यूटी करनेको बाध्य हैं। सरकारी दफ्तरोंमें लोगोंका आये दिन छुट्टïी करना, बीचमें गोल होना आदत थी। इससे ड्यूटी टाइममें कर्मचारीके अनुपस्थित होनेपर बहुतसे लोग लौट जाते थे। अब दफ्तरोंमें बायोमेट्रिक मशीनसे हाजिरी होती है। बहुतसे विद्यालयोंकी हाजिरीका पुराना तरीका चल रहा है। इसमें गड़बड़ी ज्यादा है। मशीन द्वारा हाजिरी होनेसे कार्यप्रणालीमें सुधार होगा, गुणवत्ता आयेगी जिससे लापरवाह लोग सुधर जायंगे। -दिलीप गुप्त, बरेली।