Tel: 0542 - 2393981-87 | Mail: ajvaranasi@gmail.com


नवीनतम समाचार » भारत ने चीन को दी सलाह

भारत ने चीन को दी सलाह

नयी दिल्ली(एजेंसी)। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुंह की खानी पड़ी है। दरअसल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद(यूएनएससी) में कश्मीर मुद्दा उठाने को लेकर समर्थन पाने की पाकिस्तान की कोशिश बुधवार को फिर नाकाम हो गई है। पाकिस्तान को सिर्फ अपने दोस्त चीन का ही साथ मिला। विदेश मंत्रा ने गुरुवार को प्रेस वार्ता कर स्पष्ट किया है कि इस साल भारत में होने जा रहे शंघाई सहयोग संगठन(एससीओ) की बैठक के लिए पाकिस्तान को भी निमंत्रण भेजा जाएगा। पिछली बार मात खाने के बावजूद पाकिस्तान ने चीन के जरिए बुधवार को फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिष (यूएनएससी) में कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश की थी। चीन अन्य विषयों के अंतर्गत सुरक्षा परिषद के बंद कमरे में कश्मीर पर चर्चा चाहता था। लेकिन फ्रांस ने कश्मीर को भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा बताते हुए इस पर चर्चा का विरोध किया था।  चीन को छोड़ बाकी देशों ने भी एक सुर में कहा कि कश्मीर भारत-पाक का द्विपक्षीय मुद्दा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जम्मू कश्मीर पर चीन द्वारा लाये गये प्रस्ताव को समर्थन नहीं मिलने के बाद भारत ने चीन को सलाह दी है कि उसे इस मुद्दे पर वैश्विक सहमति को गंभीरता से लेना चाहिए और भविष्य में ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यहां नियमित ब्रीफिंग में इस बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में कहा कि पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक सदस्य द्वारा एक द्विपक्षीय मुद्दे पर चर्चा कराके सुरक्षा परिषद मंच का दुरुपयोग करने का प्रयास किया गया। सुरक्षा परिषद में अधिकांश सदस्यों ने माना कि सुरक्षा परिषद ऐसे मुद्दों पर चर्चा करने का उचित मंच नहीं है और ऐसे मुद्दों पर भारत एवं पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय ढंग से चर्चा करना चाहिए। कुमार ने कहा कि इस अनौपचारिक एवं गुप्त बैठक का कोई नतीजा नहीं निकला। इससे यह तथ्य पुन: रेखांकित हुआ कि पाकिस्तान हड़बड़ी में बेबुनियाद आरोपों को उठाने की कोशिश कर रहा है जिससे एक अविश्वास का माहौल बन रहा है। उन्होंने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि इससे पाकिस्तान को बहुत साफ संदेश चला गया है कि भारत एवं पाकिस्तान के बीच अगर किसी मुद्दे पर चर्चा होनी है तो उस पर द्विपक्षीय चर्चा करनी चाहिए। पाकिस्तान को रचनात्मक कार्य में अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए और दुनिया भर में अपनी जगहंसाई नहीं करानी चाहिए। चीन के कदम के बारे में उन्होंने कहा कि उनका सुझाव है कि चीन के कदम के औचित्य के बारे में चीन से पूछा जाना चाहिए। चीन को इस बारे में वैश्विक सहमति को संजीदगी से ग्रहण करना चाहिए, इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए।