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सपा बसपा गठबंधन के लिए अग्निपरीक्षा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिये कल होने वाला चुनाव आगामी लोकसभा निर्वाचन के लिये सूबे की दो बड़ी सियासी ताकतों सपा और बसपा के गठबंधन की सम्भावनाओं के लिहाज से निर्णायक होगा। राजनीतिक लिहाज से देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में सपा को छोड़कर कोई भी विपक्षी दल अपने बलबूते एक भी राज्यसभा सीट जीतने की स्थिति में नहीं है। बसपा ने हाल में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सहयोग देकर सपा की जीत में अहम भूमिका निभायी है। अब कर्ज चुकाने की बारी सपा की है।
 
राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक करीब 25 साल के बाद ऐसा पहला मौका है जब बसपा प्रमुख मायावती ने सपा के प्रति नरम रुख अपनाया है। यह आगे भी जारी रहेगा, इसका सारा दारोमदार राज्यसभा चुनाव के परिणाम पर है। यह चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा के गठबंधन की सम्भावनाओं पर निर्णायक असर डालेगा।
 
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा में एक उम्मीदवार को जिताने के लिये 37 विधायकों का समर्थन जरूरत है। प्रदेश की 403 सदस्यीय सपा के पास 47 सदस्य हैं। उसके पास अपनी उम्मीदवार जया बच्चन को चुनाव जिताने के बाद भी तकनीकी रूप से 10 वोट बच जाएंगे। बसपा के पास 19 वोट हैं जबकि कांग्रेस के पास सात और राष्ट्रीय लोकदल के पास एक वोट है। ऐसे में इन दलों का गठबंधन ही दसवें सदस्य को राज्यसभा भेज सकता है, मगर जरा सी भी गड़बड़ी सारा गणित बिगाड़ सकती है।
 
बहरहाल, 324 विधायकों के संख्याबल के आधार पर आठ सीटें आराम से जीत सकने वाली भाजपा ने 10 सीटों के लिये नौ प्रत्याशी उतारे हैं, जो विपक्ष के लिये चिंता का सबब है, क्योंकि अगर ‘क्रास वोटिंग‘ हुई तो विपक्ष के लिये मुसीबत होगी। अपने-अपने मतों को एकजुट रखने के लिये सपा और बसपा ने ‘डिनर डिप्लोमेसी‘ का सहारा लिया है। सपा ने कल रात अपने विधायकों को रात्रि भोज पर बुलाया था और बसपा मुखिया मायावती ने भी आज अपने विधायकों को रात के खाने पर आमंत्रित किया है।
 
पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल के भाजपा में जाने के बाद उनके सपा विधायक पुत्र नितिन अग्रवाल के भी भाजपा के पक्ष में वोट करने की प्रबल सम्भावना है लेकिन सपा के लिये राहत की बात रही कि कल हुए विधायकों के रात्रि भोज में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा और कभी उनके प्रतिद्वंद्वी रहे शिवपाल यादव तथा निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने शिरकत की। दोनों ने सपा का साथ देने की बात भी कही है। कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी को समर्थन देने का एलान किया है।
 
मालूम हो कि सपा के राज्यसभा सदस्यों नरेश अग्रवाल, दर्शन सिंह यादव, नरेश चन्द्र अग्रवाल, जया बच्चन, चैधरी मुनव्वर सलीम और आलोक तिवारी, भाजपा के विनय कटियार और कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसके अलावा मनोहर पर्रिकर और मायावती की सीट रिक्त है।
 
भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिये वित्त मंत्री अरुण जेटली, डॉक्टर अशोक बाजपेयी, विजयपाल सिंह तोमर, सकलदीप राजभर, कांता कर्दम, डॉ. अनिल जैन, जीवीएल नरसिम्हा राव, अनिल कुमार अग्रवाल और हरनाथ सिंह यादव को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। सपा ने जया बच्चन, जबकि बसपा ने भीमराव अम्बेडकर को प्रत्याशी बनाया है। राज्यसभा चुनाव के लिये मतदान 23 मार्च को होगा और परिणाम भी उस दिन ही घोषित होंगे।
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RS चुनावः अखिलेश के रात्रिभोज में चाचा शिवपाल और राजा भैय्या शामिल हुए
लखनऊ। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्टी के विधायकों के साथ बैठक कर रणनीति पर चर्चा की, हालांकि, इस बैठक में अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव शामिल नहीं हुए। लेकिन बाद में अखिलेश की तरफ से आयोजित रात्रिभोज में शिवपाल और निर्दलीय विधायक राजा भैय्या शमिल हुए। सपा विधायकों और नेताओं की बैठक को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा, 'भाजपा मनमानी पर उतारू है। यदि भाजपा में जरा भी नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की परवाह होती तो वह राज्यसभा के लिए नौवां प्रत्याशी नहीं उतारती। लगता है कि भाजपा को कदाचार से कोई परहेज नहीं है।' भाजपा ने एक अतिरिक्त उम्मीदवार के रूप में बड़े व्यावसायी अनिल कुमार अग्रवाल को मैदान में उतारा है। प्रदेश में राज्यसभा चुनाव 23 मार्च को होना है।बाद में देर शाम अखिलेश की तरफ से आयोजित रात्रिभोज में शामिल वरिष्ठ नेता एवं उनके चाचा शिवपाल यादव ने कहा, 'मैं राज्य सभा में मतदान करूंगा। सपा और सपा समर्थित बसपा उम्मीदवार इसमें जीतेंगे। मेरा आशीर्वाद हमेशा अखिलेश के साथ है।' गौरतलब है कि इससे पहले यह कयास लगाये जा रहे थे कि शिवपाल रात्रिभोज में शामिल नहीं होंगे। इससे पहले बुधवार के दिन में हुई सपा विधायकों की बैठक में शिवपाल शामिल नहीं हुए।
शिवपाल के नजदीकी सूत्रों ने बताया कि बैठक के समय वह इटावा में थे। निर्दलीय विधायक राजा भैय्या ने भी रात्रिभोज में शामिल होकर सपा बसपा उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कही। रात्रिभोज में पार्टी की प्रत्याशी जया बच्चन और सांसद डिंपल यादव भी मौजूद थी। सांसद नरेश अग्रवाल के साथ हाल में भाजपा में शामिल हुए उनके पुत्र और सपा विधायक नितिन अग्रवाल इस रात्रि भोज में शामिल नहीं हुए, वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आयोजित भाजपा विधायकों की बैठक में शामिल हुए। इससे पहले दिन में हुई बैठक के बाद वरिष्ठ सपा विधायक पारसनाथ यादव ने कहा, 'हम जानते है कि कैसे चुनाव लड़ा जाता है। हमारा प्रत्याशी चुनाव जीत रहा है और हम अपने दूसरे बसपा प्रत्याशी की जीत के प्रति भी सुनिश्चित है।' उनसे जब पूछा गया कि बैठक में कितने पार्टी विधायक गैर हाजिर थे तो उन्होंने जवाब दिया कि केवल दो विधायक गैर हाजिर थे। समाजवादी पार्टी के 47 विधायक हैं। उधर, दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं का दावा है कि नरेश अग्रवाल के करीबी सपा के कुछ विधायक क्रास वोटिंग कर सकते है, जबकि सपा का खेमा अपनी प्रत्याशी जया बच्चन और बसपा प्रत्याशी भीमराव आंबेडकर की जीत के प्रति आश्वस्त है। राज्यसभा चुनाव में एक सीट के लिये 37 वोटों की जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक बुधवार के दिन में हुई सपा विधायकों की बैठक में विधायक आजम खान, उनके पुत्र विधायक अब्दुल्ला आजम और जेल में बंद विधायक हरिओम भी मौजूद नहीं थे, लेकिन इन सबको पार्टी अपने खेमे में मान रही है।
सपा-बसपा गठबंधन आगे चलेगा या नहीं, फैसला होगा राज्यसभा चुनाव में
लखनऊ। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिये कल होने वाला चुनाव आगामी लोकसभा निर्वाचन के लिये सूबे की दो बड़ी सियासी ताकतों सपा और बसपा के गठबंधन की सम्भावनाओं के लिहाज से निर्णायक होगा। राजनीतिक लिहाज से देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में सपा को छोड़कर कोई भी विपक्षी दल अपने बलबूते एक भी राज्यसभा सीट जीतने की स्थिति में नहीं है। बसपा ने हाल में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सहयोग देकर सपा की जीत में अहम भूमिका निभायी है। अब कर्ज चुकाने की बारी सपा की है।
राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक करीब 25 साल के बाद ऐसा पहला मौका है जब बसपा प्रमुख मायावती ने सपा के प्रति नरम रुख अपनाया है। यह आगे भी जारी रहेगा, इसका सारा दारोमदार राज्यसभा चुनाव के परिणाम पर है। यह चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा के गठबंधन की सम्भावनाओं पर निर्णायक असर डालेगा। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा में एक उम्मीदवार को जिताने के लिये 37 विधायकों का समर्थन जरूरत है। प्रदेश की 403 सदस्यीय सपा के पास 47 सदस्य हैं। उसके पास अपनी उम्मीदवार जया बच्चन को चुनाव जिताने के बाद भी तकनीकी रूप से 10 वोट बच जाएंगे। बसपा के पास 19 वोट हैं जबकि कांग्रेस के पास सात और राष्ट्रीय लोकदल के पास एक वोट है। ऐसे में इन दलों का गठबंधन ही दसवें सदस्य को राज्यसभा भेज सकता है, मगर जरा सी भी गड़बड़ी सारा गणित बिगाड़ सकती है।
 
बहरहाल, 324 विधायकों के संख्या बल के आधार पर आठ सीटें आराम से जीत सकने वाली भाजपा ने 10 सीटों के लिये नौ प्रत्याशी उतारे हैं, जो विपक्ष के लिये चिंता का सबब है, क्योंकि अगर ‘क्रास वोटिंग‘ हुई तो विपक्ष के लिये मुसीबत होगी। अपने-अपने मतों को एकजुट रखने के लिये सपा और बसपा ने ‘डिनर डिप्लोमेसी‘ का सहारा लिया है। सपा ने बुधवार रात अपने विधायकों को रात्रि भोज पर बुलाया था और बसपा मुखिया मायावती ने भी आज अपने विधायकों को रात के खाने पर आमंत्रित किया है।
 
पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल के भाजपा में जाने के बाद उनके सपा विधायक पुत्र नितिन अग्रवाल के भी भाजपा के पक्ष में वोट करने की प्रबल सम्भावना है लेकिन सपा के लिये राहत की बात रही कि कल हुए विधायकों के रात्रि भोज में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा और कभी उनके प्रतिद्वंद्वी रहे शिवपाल यादव तथा निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने शिरकत की। दोनों ने सपा का साथ देने की बात भी कही है।
 
कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी को समर्थन देने का एलान किया है। मालूम हो कि सपा के राज्यसभा सदस्यों- नरेश अग्रवाल, दर्शन सिंह यादव, नरेश चन्द्र अग्रवाल, जया बच्चन, चैधरी मुनव्वर सलीम और आलोक तिवारी, भाजपा के विनय कटियार और कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसके अलावा मायावती की सीट रिक्त है। भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिये वित्त मंत्री अरुण जेटली, डॉक्टर अशोक बाजपेयी, विजयपाल सिंह तोमर, सकलदीप राजभर, कांता कर्दम, डॉ. अनिल जैन, जीवीएल नरसिम्हा राव, अनिल कुमार अग्रवाल और हरनाथ सिंह यादव को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। सपा ने जया बच्चन, जबकि बसपा ने भीमराव अम्बेडकर को प्रत्याशी बनाया है। राज्यसभा चुनाव के लिये मतदान कल 23 मार्च को होगा और परिणाम भी कल ही घोषित होंगे।
मायावती ने अखिलेश से मांगे 10 प्रतिबद्ध MLAs के वोट, जया बच्चन मुश्किल में
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन में नया पेंच आ गया है। दरअसल कल 23 मार्च को राज्यसभा चुनाव होने हैं और बसपा अपने उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर को जिताने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। समाजवादी पार्टी ने जया बच्चन को अपना उम्मीदवार बनाया है और अपने 10 अतिरिक्त वोट बसपा को देने का वादा किया है। लेकिन नरेश अग्रवाल के समाजवादी पार्टी छोड़ देने और भाजपा में चले जाने से उनके बेटे नितिन अग्रवाल अब भाजपा उम्मीदवार को वोट देंगे। इसके अलावा भी एक और सपा विधायक के भाजपा खेमे में जाने के आसार हैं जिससे बसपा की चिंता बढ़ गयी है।
इसी के चलते बसपा प्रमुख मायावती ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को फोन कर सपा के 10 प्रतिबद्ध विधायकों के वोट बसपा उम्मीदवार को आवंटित करने का आग्रह किया है। 'बुआजी' के इस आग्रह के चलते अब अखिलेश पशोपेश में हैं क्योंकि 10 प्रतिबद्ध विधायकों के वोट अगर बसपा को दे दिये और राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग हो गयी तो सपा की अधिकृत उम्मीदवार जया बच्चन को सीट निकालने में मुश्किल हो जायेगी। सपा के सूत्रों के मुताबिक पार्टी के अधिकांश नेता बसपा मुखिया के इस आग्रह को मानने के पक्ष में नहीं हैं लेकिन अंतिम निर्णय अखिलेश पर छोड़ दिया गया है।
 
बसपा के 19 विधायक हैं और सीट जीतने के लिए 37 विधायक चाहिए। बसपा की रणनीति है कि सपा के 10 वोट अगर उसे मिल जाएं तो उसकी राह आसान हो सकती है क्योंकि कांग्रेस के 7 और रालोद का एक वोट उसे मिलना पहले से ही तय है।
 
इससे पहले बुधवार देर रात सपा और भाजपा की ओर से अपने अपने विधायकों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया गया और राज्यसभा चुनावों के लिए पार्टी विधायकों को निर्देश दिये गये। अखिलेश यादव के रात्रिभोज में उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव और निर्दलीय विधायक राजा भैय्या शमिल हुए। सपा विधायकों और नेताओं की बैठक को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा, 'भाजपा मनमानी पर उतारू है। यदि भाजपा में जरा भी नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की परवाह होती तो वह राज्यसभा के लिए नौवां प्रत्याशी नहीं उतारती। लगता है कि भाजपा को कदाचार से कोई परहेज नहीं है।'
 
गौरतलब है कि भाजपा ने एक अतिरिक्त उम्मीदवार के रूप में बड़े व्यावसायी अनिल कुमार अग्रवाल को मैदान में उतारा है। प्रदेश में राज्यसभा चुनाव 23 मार्च को होना है।
 
शिवपाल यादव ने कहा, 'मैं राज्य सभा में मतदान करूंगा। सपा और सपा समर्थित बसपा उम्मीदवार इसमें जीतेंगे। मेरा आशीर्वाद हमेशा अखिलेश के साथ है।' रात्रिभोज में पार्टी की प्रत्याशी जया बच्चन और सांसद डिंपल यादव भी मौजूद थी।
 
सांसद नरेश अग्रवाल के साथ हाल में भाजपा में शामिल हुए उनके पुत्र और सपा विधायक नितिन अग्रवाल इस रात्रि भोज में शामिल नहीं हुए, वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आयोजित भाजपा विधायकों की बैठक में शामिल हुए। इस बैठक में सुभासपा प्रमुख और राज्य सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी उपस्थित थे।