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ग्रेच्यूटी से संबंधित उपदान संदाय विधेयक को संसद की मंजूरी

नयी दिल्ली। ग्रेच्युटी से संबंधित उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को संसद की मंजूरी मिल गई। विधेयक में निजी क्षेत्र और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्वायत्त संगठनों के ऐसे कर्मचारियों के उपदान (ग्रेच्यूटी) की अधिकतम सीमा में वृद्धि का प्रावधान है, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अनुसार सीसीएस (पेंशन) नियमावली के अधीन शामिल नहीं हैं।
 
लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है। कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन और आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने समेत अन्य मुद्दों पर विभिन्न दलों के भारी हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है। आज भी इन्हीं मुद्दों पर सदन में हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही बैठक शुरू होने के करीब 20 मिनट बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। लेकिन ग्रेच्युटी से संबंधित उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार के अनुरोध पर बिना चर्चा के, सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
 
गंगवार ने विधेयक पेश करते हुए कहा ‘‘यह अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक है और मैं अनुरोध करता हूं कि इसे चर्चा के बिना पारित कर दिया जाए।’’ विधेयक के लिए कांग्रेस के डॉ सुब्बीरामी रेड्डी ने दो संशोधन पेश किए थे लेकिन आज उन्होंने अपने दोनों ही संशोधन वापस ले लिये। इस विधेयक के तहत केंद्र सरकार में निरंतर सेवा में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर 'प्रसूति छुट्टी की अवधि' को अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है।
 
उल्लेखनीय है कि अभी दस अथवा अधिक लोगों को नियोजित करने वाले निकायों के लिए उपदान भुगतान अधिनियम 1972 लागू है जिसके तहत कारखानों, खानों, तेल क्षेत्रों, बागानों, पत्तनों, रेल कंपनियों, दुकानों या अन्य प्रतिष्ठानों में लगे कर्मचारी शामिल हैं जिन्होंने पांच वर्ष की नियमित सेवा प्रदान की है। इसी के तहत उपदान (ग्रेच्यूटी) संदाय की योजना अधिनियमित की गई थी। अधिनियम की धारा 4 के अधीन ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा वर्ष 2010 में 10 लाख रुपये रखी गई थी
 
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के बाद केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिये ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रूपये से बढ़ाकर 20 लाख रूपये कर दिया गया। इसलिए निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के मामले में भी महंगाई और वेतन वृद्धि पर विचार करते हुए सरकार का अब यह विचार है कि उपदान भुगतान अधिनियम,1972 के अधीन शामिल कर्मचारियों के लिए उपदान (ग्रेच्यूटी) की पात्रता में संशोधन किया जाना चाहिए। इस अधिनियम को लागू करने का मुख्य उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद कामगारों की सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, चाहे सेवानिवृत्ति की नियमावली के परिणामस्वरूप सेवानिवृत्ति हुई हो अथवा शरीर के महत्वपूर्ण अंग के नाकाम होने से शारीरिक विकलांगता के कारण सेवानिवृत्ति हुई हो।
 
विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में कहा गया है कि उपदान संदाय संशोधन विधेयक 2017 में अन्य बातों के साथ साथ अधिनियम की धारा 2क का संशोधन करने का प्रावधान किया गया है जिससे सरकार को निरंतर सेवा विधेयक में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर 'प्रसूति छुट्टी की अवधि' को अधिसूचित किया जाए। ऐसा इसलिये किया गया क्योंकि प्रसूति सुविधा संशोधन अधिनियम 2017 के माध्यम से प्रसूति छुट्टी की अवधि को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया था। ऐसे में केंद्र सरकार को वर्तमान 12 सप्ताह की अवधि को ऐसी अन्य अवधि के लिये अधिसूचित करने की बात कही गई है। इसके तहत दस लाख रूपये शब्द के स्थान पर ‘एक ऐसी रकम जो केंद्रीय सरकार द्वारा समय समय पर अधिसूचित की जाए’ शब्द रखने के लिये अधिनियम की धारा 4 का संशोधन करने का प्रस्ताव है।
14वें दिन भी विपक्ष का संसद में हंगामा, गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार तैयार
नयी दिल्ली। अलग अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के हंगामे के कारण संसद में आज 14 वें दिन भी गतिरोध कायम रहा और राज्यसभा की कार्यवाही बैठक शुरू होने के करीब 20 मिनट बाद ही, वहीं लोकसभा की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर करीब 12 बजे दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी। सरकार के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में हंगामे के कारण आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी।
 
सुबह, लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही आरंभ हुई, अन्नाद्रमुक और टीआरएस के सदस्य नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के आसन के निकट पहुंच गए। अन्नाद्रमुक के सदस्य कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग को लेकर और टीआरएस के सदस्य तेलंगाना में आरक्षण संबंधी अपनी मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। उन्होंने अपने हाथों में तख्तियां भी ले रखी थीं।
 
तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य अपने स्थानों पर ही तख्तियां लेकर खड़े थे। वे आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग कर रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया लेकिन हंगामा थमता नहीं देख उन्होंने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
 
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे बैठक फिर शुरू होने पर टीआरएस के सदस्य आसन के समक्ष आ गए। वे ‘‘एक राष्ट्र एक नीति’’ की अपनी मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। वहीं अन्नाद्रमुक के सदस्य आगे आकर कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग कर रहे थे। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, मैं सभी सदस्यों से निवेदन करता हूं कि वे अपने अपने स्थानों पर जाएं। सदन चलने दें। हम बैंकिंग समेत हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं। अविश्वास प्रस्ताव पर भी चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन सदन में व्यवस्था जरूरी है।
 
उधर तेदेपा के सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर शोर-शराबा कर रहे थे। हंगामे के बीच ही अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आवश्यक कागजात सदन के पटल पर रखवाए और सदन में व्यवस्था बनाने की अपील की। हंगामा थमता नहीं देख सुमित्रा महाजन ने कहा कि सदन में व्यवस्था नहीं होने के कारण वह अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में असमर्थ हैं । इसके बाद उन्होंने सदन की बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।
 
उधर राज्यसभा में भी विभिन्न मुद्दों पर हंगामा हुआ। इस वजह से उच्च सदन की बैठक शुरू होने के करीब बीस मिनट बाद ही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। हंगामे की वजह से सदन में शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं हो पाए। लेकिन सदन ने ग्रेच्यूटी भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को बिना चर्चा के ही सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने से पहले सभापति एम वेंकैया नायडू ने बताया कि अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के संदर्भ में चर्चा के लिए उन्हें विभिन्न दलों के सदस्यों के 55 नोटिस मिले हैं। उन्होंने कहा कि इन विचाराधीन नोटिसों पर अपने फैसले से वह शीघ्र ही सदन को अवगत कराएंगे।
 
इसके बाद सभापति ने बताया कि विभिन्न दलों के सदस्यों ने आज सुबह उनसे मुलाकात की और कहा कि वे चाहते हैं, सदन चले। नायडू ने कहा कि पिछले 13 दिनों से सदन में कोई कामकाज नहीं हो पाया है। वित्त विधेयक तथा विनियोग विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक रूके हुए हैं जिन पर चर्चा होनी है और उन्हें पारित किया जाना है। नायडू ने कहा, मैं सदस्यों से अपील करता हूं कि सदन को चलने दिया जाए और सभी महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया जाए।’’
 
कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने सहित विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण पिछले 14 दिनों से दोनों सदनों में गतिरोध कायम है। आज उच्च सदन में सभापति ने कहा कि वह सभी सदस्यों को अपनी बात कहने का मौका देंगे। आसन से अनुमति मिलने के बाद तेलुगू देशम पार्टी के सी एम रमेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश का जब विभाजन किया गया था तब कुछ वादे केंद्र सरकार की ओर से किए गए थे। राज्य कई परेशानियों का सामना कर रहा है। वहां की स्थिति और लोगों की भावनाओं को देखते हुए सरकार को अपना वादा तत्काल पूरा करना चाहिए।
 
आसन की अनुमति से ही अन्नाद्रमुक सदस्य वी मैत्रेयन ने कहा कि तमिलनाडु के लोग पानी के लिए परेशान हैं, किसानों की हालत दयनीय है। यह देखते हुए सरकार को तत्काल कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन करना चाहिए। इसी दौरान अन्नाद्रमुक और तेदेपा के सदस्य कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन तथा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने जैसी मांगों को लेकर आसन के समक्ष आ गए और नारेबाजी करने लगे। सभापति ने सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने और बैठक चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा, मैंने सदस्यों से सदन को चलने देने और हंगामा न करने की अपील की थी।
 
संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने भी हंगामा कर रहे सदस्यों से शांत होने की अपील की और कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। इसी दौरान कांग्रेस के सदस्य भी आसन के समक्ष आकर, अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले के संबंध में चर्चा की मांग करते हुए हंगामा करने लगे। तृणमूल कांग्रेस, बीजद और राकांपा सदस्य अपने स्थानों पर खड़े थे। सदन में व्यवस्था नहीं बनते देख नायडू ने 11 बज कर करीब 20 मिनट पर बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी।
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सत्तापक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से बचने के लिये सदन नहीं चलने दे रहा: माकपा
नयी दिल्ली। माकपा ने फेसबुक पर डाटाचोरी के आरोपों सहित पिछले कुछ दिनों में उजागर हुये सरकारी गड़बड़ियों के मामलों और अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में चर्चा से बचने का सत्तापक्ष पर आरोप लगाया और कहा कि दोनों सदनों में जारी गतिरोध के लिये विपक्ष को दोषी ठहराना गलत है। माकपा सांसद मोहम्मद सलीम ने आज संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार 14वें दिन स्थगित होने के बाद संवाददाताओं से कहा कि सत्तापक्ष स्वयं इस स्थिति के लिये जिम्मेदार है। सलीम ने कहा ‘‘हर बीतते दिन से साफ है कि सत्तापक्ष खुद सदन नहीं चलने देना चाहता है। फेसबुक डाटा चोरी सहित सरकारी गड़बड़ियों से जुड़े नये मामले हर दिन उजागर हो रहे हैं, जिन पर सदन में चर्चा होना चाहिये, लेकिन सत्तापक्ष इससे बचने के लिये सदन नहीं चलने दे रहा है।’’
 
सलीम ने कहा कि हर दिन मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण लोकसभा टीवी और राज्यसभा टीवी पर होता है इनकी फुटेज दिखा कर देश की जनता को बताया जाना चाहिये कि सदन में हंगामा करने वाले सदस्य सत्तापक्ष के हैं या विपक्षी दलों के। सलीम ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति से इस गतिरोध को दूर करने के लिये विभिन्न दलों के नेताओं से बातचीत की पहल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि एक तरफ कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद कहते हैं कि तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के नेताओं से उनके अच्छे संबंध हैं, तब फिर प्रसाद गतिरोध दूर करने के लिये टीआरएस नेताओं से बातचीत क्यों नहीं करते हैं।
 
सलीम ने फेसबुक पर डाटा चोरी करने के कथित आरोपों के मामले में कहा कि सोशल मीडिया के मार्फत चोरी किये गये डाटा का चुनाव में इस्तेमाल वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी हुआ था। डिजिटल डाटा की निजता और गोपनीयता के हवाले से उन्होंने इस मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की।