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हमारे आंतरिक मामलेमें दूसरी संस्थाको हस्तक्षेपका अधिकार नहीं-रवीश कुमार

नयी दिल्ली(आससे)। भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय में संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त की हस्तक्षेप याचिका पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम भारत का आंतरिक मामला है और देश की सार्वभौमिकता से जुड़े मुद्दे पर किसी दूसरी संस्था को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक बयान में कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम भारत का आंतरिक मामला है, जो कानून बनाने के भारतीय संसद के सार्वभौमिक अधिकार से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की सार्वभौमिकता से जुड़े मुद्दे पर किसी दूसरी संस्था को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।  प्रवक्ता ने कहा कि सरकार का यह स्पष्ट मानना है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम संवैधानिक रूप से वैध है और भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि यह भारत के विभाजन की त्रासदी से उत्पन्न मानवाधिकारों के मुद्दे के संबंध में भारत की लंबे समय से चली आ रही राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  रवीश कुमार ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां कानून का शासन है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका में लोगों का पूरा विश्वास है और वे इसका सम्मान करते हैं। उन्होंने उम्मीद जाहिर कि की उच्चतम न्यायालय इस अधिनियम की कानूनी रूप से संधारणीय स्थिति की पुष्टि करेगा।