Tel: 0542 - 2393981-87 | Mail: ajvaranasi@gmail.com


हिंद-प्रशांत क्षेत्र भारत के लिये काफी महत्वपूर्ण: एम जे अकबर

नयी दिल्ली। विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर ने हिंद- प्रशांत क्षेत्र को भारत के लिये बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि साझा खुशहाली क्षेत्र में टिकाऊ खुशहाली का एकमात्र तरीका है। मंत्री ने कहा कि भारत ने क्षेत्र में व्यापार के फलने- फूलने के लिये सबके लिये मुक्त रास्ते का समर्थन किया। उन्होंने हिंद- प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता विषय पर आयोजित एक कार्यशाला में अपने मुख्य भाषण में यह बात कही। इस कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (आईडीएसए) और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटजिक स्टडीज (आईआईएसएस), लंदन ने किया था।
उन्होंने कहा कि हिंद- प्रशांत दुनिया के सर्वाधिक महत्वपूर्ण और गतिशील व्यापार क्षेत्रों में से एक है और बढ़ती अर्थव्यवस्था और बढ़ते वाणिज्य ने क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के लिये महती गुंजाइश पैदा की है। अकबर का बयान क्षेत्र में चीन की बढ़ती मुखरता की पृष्ठभूमि में आया है। हिंद- प्रशांत क्षेत्र में दक्षिण चीन सागर विवाद समेत कई क्षेत्रीय विवाद हैं। दक्षिण चीन सागर का विवाद चीन और कई आसियान देशों के बीच है। आईडीएसए ने एक वक्तव्य में कहा, ‘‘हिंद- प्रशांत क्षेत्र को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए अकबर ने इस बात पर जोर दिया कि साझा खुशहाली क्षेत्र में टिकाऊ खुशहाली का एकमात्र तरीका है।’’
 
मंत्री ने कहा कि संपर्क अब सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समुद्र, आकाश और अंतरिक्ष तक फैला है। उन्होंने नीली अर्थव्यवस्था की अवधारणा को साकार करने और सबके लिये सुरक्षा और विकास हासिल करने के लिये संपर्क के महत्व पर जोर दिया। नीली अर्थव्यवस्था से आशय समुद्र आधारित सतत आर्थिक विकास से है जो पर्यावरण जोखिम और पारस्थितिकीय अभावों को कम करते हुए मानव जीवन में सुधार और सामाजिक समता की ओर ले जाती है।
99999999999999999

-----------------
भारत में शोध, नवोन्मेष में हिस्सेदारी बेहद कम: प्रणब मुखर्जी

नयी दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि देश में हर साल अलग अलग क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ‘प्रतिभाएं’ सामने आती है और दुनिया को आकर्षित करती है लेकिन इनमें से गिनेचुने लोग ही ऐसे शोध तथा नवोन्मेष में लगे हैं जो मानवता के काम आ सके। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, मेडिकल के क्षेत्र में तैयार होने वाली प्रतिभाएं बड़ी बड़ी कंपनियों, उद्योगों, कारपोरेट क्षेत्रों में चली जाती हैं। इससे एक तरह की संतुष्टि मिल सकती है। ‘‘लेकिन हमें यह तथ्य ध्यान में रखना होगा कि सी वी रमण के बाद किसी भारतीय को भारत के संस्थान में काम करते हुए नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है।’’
 
क्यूएस..इरा उच्च शिक्षा रेटिंग प्रणाली का शुभारंभ करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कल कहा कि डा. हरगोविंद खुराना, अमर्त्य सेन आदि को नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ लेकिन उन्हें यह सम्मान तब मिला जब वे देश से बाहर काम कर रहे थे। ‘‘ इसका अर्थ है कि कहीं न कहीं इस संदर्भ में हम विफल रहे हैं ।’’ प्रणब मुखर्जी ने कहा ‘‘हमें इस पर विचार करना होगा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद हमारी प्रतिभाएं वैज्ञानिक बनें, नवोन्मेष करें और ऐसी व्यवस्था तैयार करने में सहभागी बने जो मानवता के काम आ सके।’’
 
उन्होंने कहा, ‘‘देश में हर साल अलग अलग क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ‘प्रतिभाएं’ सामने आती है और दुनिया को आकर्षित करती है लेकिन इनमें से गिनती के लोग... लगभग नगण्य ही... शोध, नवोन्मेष में लगे हैं जो मानवता के काम आ सके।’’ उन्होंने कहा कि जब वे राष्ट्रपति थे तब वह शिक्षा से जुड़े हर मंच पर शिक्षा की गुणवत्ता के विषय पर बोलते रहे । शिक्षा की गुणवत्ता का बेहतर होना सर्वाधिक जरूरी है। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने सकल नामांकन दर को 24 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है जो एक स्वागत योग्य कदम है। लेकिन इसे और आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
 
प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत में दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता है और यह सबसे युवा देश है। आज 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष आयु वर्ग की है और साल 2030 तक कामकाजी युवा आबादी की औसत आयु 29 वर्ष हो जायेगी। उन्होंने कहा कि इतनी विशाल संख्या में भारत की युवा आबादी दुनिया के रोजगार बाजार की मांगों की आपूर्ति कर सकती है और यह भारत के लिए फायदे की स्थिति बन सकती है। लेकिन अगर हम 15 से 25 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं को ठीक से शिक्षित नहीं कर पायेंगे तब हम दुनिया के रोजगार बाजार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पायेंगे और ऐसी स्थिति में यह बोझ बन सकता है।
 
पूर्व राष्ट्रपति ने कारपोरेट क्षेत्रों समेत शिक्षा के सभी पक्षकारों से कहा कि समय तेजी से बीत रहा है और हमें यह ध्यान देना होगा कि युवा कार्यबल का समुचित उपयोग किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक हिस्सों में हम खबरों के माध्यम से इस विषय पर दुष्परिणाम को देख रहे हैं। इस अवसर पर क्यूएस इरा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ अश्चिन फर्नाडिस ने कहा कहा कि भारत में शैक्षणिक संस्थाओं की रेटिंग करने के लिये पहली बार समग्र आयामों पर विचार करते हुए एक रेटिंग प्रणाली पेश की गई है। इसमें अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को समाहित करते हुए घरेलू स्थिति को ध्यान में रखा गया है।
----------------
प्रधानमंत्री ने बिहार दिवस पर दी बिहारवासियों को शुभकामनाएं

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार दिवस के अवसर पर बिहार वासियों को बधाई दी और कहा कि देश की प्रगति में बिहार का योगदान अनुकरणीय है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, "बिहार दिवस के अवसर पर बिहार की बहनों और भाइयों को हार्दिक शुभकामनाएं। ऐतिहासिक समय से ही देश की प्रगति में बिहार का योगदान अनुकरणीय और बहुमूल्य रहा है।"
 
उल्लेखनीय है कि 22 मार्च यानी आज ही के दिन, साल 1912 में बिहार को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग कर राज्य बनाया गया था। इसलिए हर साल राज्य सरकार 22 मार्च को बिहार दिवस मनाती है।
---------
युवा ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब प्रोवाइडर’ बनने पर करें ध्यान केंद्रित: मलिक

पटना। बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि युवाओं को ‘जॅाब सीकर’ नहीं बल्कि ‘जॅाब प्रोवाइडर’ बनने पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। यहां 5वें बिहार उद्यमिता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मलिक ने कहा कि दुनिया के समुन्दर में खुद ही तैरना होता है जो इंसान जितना अधिक हूनरमंद होता है, मेहनती होता है, उसे सफलता उतनी ही जल्दी मिलती है।

राज्यपाल ने कहा कि बिहार राज्य एक कृषि प्रधान राज्य है। झारखंड बँटवारे के बाद जब खनिज-सम्पदा से बिहार राज्य वंचित हो गया, तब इसके विकास का मुख्य आधार कृषि क्षेत्र ही रह गया। यह राज्य कभी-कभी बाढ़ एवं सुखे से एक साथ भी जूझता है। नेपाल की नदियों में आनेवाली बाढ़ से बिहार भी सीधे तौर पर प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि बिहार में कृषि के विकास के लिए मौजूदा सरकार ने अपने दो कृषि रोड-मैप के जरिये काफी सार्थक प्रयास किए हैं।
तीसरे कृषि रोड़ मैप के द्वारा भी समेकित कृषि को बढ़ावा देने के साथ-साथ कृषि-उत्पादकता बढ़ाने, कृषि-उत्पादों की समुचित विपणन-व्यवस्था करने, उत्कृष्ट श्रेणी के खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा कृषि के आधुनिक तौर-तरीकों की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराने जैसे कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गये हैं। राज्यपाल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में हो रहे ठोस प्रयासों को देखकर कहा जा सकता है कि दूसरी हरित क्रांति सबसे बेहतर रूप में बिहार में ही प्रतिफलित होगी।
 
उन्होंने बिहार को इस वर्ष भी कृषि कर्मण पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। मलिक ने कहा कि विश्व बैंक के सहयोग से पूरे भारत में 15 पूर्ण-विकसित टूल रूम एवं ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की जानी है। इनमें से एक केन्द्र बिहार के पटना जिला के बिहटा में भी खुल रहा है। बिहार सरकार ने इसके लिए 15 एकड़ भूमि उपलब्ध करा दी है।
 
राज्यपाल ने विभिन्न केन्द्रीय योजनाओं का उल्लेख करत हुए कहा कि देश को मैनुफैक्चरिंग हम बनाने तथा सकल घरेलू उत्पाद में दो अंकों में विकास-दर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग क्षेत्र को आगे बढ़ाना बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि बिहार में उद्यमिता जगत का विकास भी कृषि एवं इसके अनुषंगी क्षेत्रों के औद्योगिक विकास पर ही निर्भर करेगा।