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कश्मीर में स्थिति सामान्य हो रही है

श्रीनगर(एजेंसी)। कश्मीर का दौरा करने वाले यूरोपीय (ईयू) संघ के 25-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा है कि घाटी में जन-जीवन फिर से सामान्य हो रहा है, लोग अपना व्यवसाय कर रहे हैं और सड़कों पर यातायात भी सामान्य रूप से जारी है। हालांकि हाई स्पीड इंटरनेट ओर ब्रॉडबैंड सेवा के निलंबन के कारण लोगों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले वर्ष पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के निर्णय के बाद से घाटी में हाई स्पीड इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवा निलंबित है। यूरोपीय संघ के 25-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को कश्मीर का दौरा किया है। इस बीच डेमोक्रेटिक पार्टी नेशनलिस्ट (डीपीएन) के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री गुलाम हसन मीर ने कहा है कि चूंकि केंद्र सरकार तीन विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को कश्मीर का दौरा करने की अनुमति दे चुकी है। इसलिए अब संसद के सदस्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के अन्य नेताओं को पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के बाद घाटी की स्थिति का मूल्यांकन करने की अनुमति देने का समय है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने गुरुवार को कहा बुधवार को कश्मीर घाटी की एक दिन की यात्रा के दौरान हमने श्रीनगर में लोगों को अपने-अपने सामान्य कार्यों को करते देखा। इस दौरान हमने विश्व प्रसिद्ध डल झील में शिकारा सैर भी की। उन्होंने कहा कि घाटी के युवाओं में जज्बा है और वे आगे बढऩा चाहते हैं। प्रतिनिधिमंडल में शामिल अफगानिस्तान के ताहिर कादरी ने दौरे को लेकर और कश्मीर के हालात पर खुशी जताई। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि देश में 80 फीसदी सेब यहीं से ही जाता है और यहां व्यापार की काफी संभावनाएं हैं। दल के लैटिन अमेरिकी सदस्य ने कहा कि वह केवल एक पर्यटक के तौर पर यहां आए हैं। हालांकि वे खराब मौसम के चलते तय कार्यक्रम के अनुसार बारामूला नहीं जा सके। प्रतिनिधिमंडल ने श्रीनगर स्थित अपने होटल में कई लोगों से मुलाकात की। इस दौरान वह कई राजनेताओं से भी मिले, जिन्होंने नजरबंद किए गए मुख्यमंत्रियों को रिहा करने की मांग की और हालात को जल्द सुधारने की बात कही। इल्तिजा ने ट्वीट किया उम्मीद है कि पांच अगस्त से इंटरनेट पर प्रतिबंध एवं आर्थिक घाटे के बारे में आप सब (विदेशी राजनयिक) भारत सरकार से सवाल करेंगे। भारत सरकार ने कश्मीर में स्थानीय मीडिया पर पाबंदी लगा दी है, लोसुका के तहत तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की रिहाई पर रोक है, लोगों के बीच भय पैदा करने के लिए सैनिकों की तैनाती की गयी है। सामान्य स्थिति केवल एक भ्रम है। जम्मू-कश्मीर में विदेशी राजनयिकों को अपने दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन का भी सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने  राजनयिक के डल झील में शिकारा पर सैर करने को धन की बर्बादी बताया। यहां के कुछ युवाओं ने कहा कि हमारी जरूरत रोजगार है। उन्होंने सवाल किया कि कहीं ये दौरे केवल पब्लिसिटी स्टंट बनकर तो नहीं रह जाएंगे या इनसे कुछ फायदा भी होगा। कश्मीर युवा ने कहा कि सरकार को इन आयोजनों पर खर्च बंद करना चाहिए। ये पैसा कश्मीर के विकास पर खर्च होना चाहिए। इस दल में यूरोपीय संघ, दक्षिण अफ्रीका और खाड़ी देशों के राजनयिक शामिल हैं। प्रदर्शन कर रहे तीन युवको को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया।