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पिछले पांच वर्षोंमें हमारे देशमें कोई बड़ा आतंकवादी हमला नहीं हुआ-नकवी

कोलकाता(एजेंसी)। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के संघर्षों से परिचित नहीं हैं उन्होंने मनगढ़ंत कहानियां बुनने की कोशिश की कि कैडर आधारित पार्टी व्यक्ति-केंद्रित बन गई है। भाजपा में डर पैदा होने के दावों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि ये कहानियां कि मोदी और शाह के अलावा पार्टी में किसी अन्य नेता को अपने दिमाग से बात करने की अनुमति नहीं है, झूठी है। वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री ने एक साक्षात्कार में पीटीआई-भाषा से कहा कि मोदी राजनीतिक असहिष्णुता के सबसे बड़ी पीडि़त रहे हैं और छिटपुट तत्वों की कुछ घटनाओं'' को अल्पसंख्यकों के खिलाफ असहिष्णुता के रूप में प्रचारित नहीं किया जा सकता। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा जैसी कैडर आधारित पार्टी मोदी और शाह की पार्टी बन गई है, इस पर नकवी ने कहा, जो अमित शाह और मोदी जी (तथा उनके संघर्षों) को नहीं जानते वे ऐसी टिप्पणियां करते हैं। वे ऐसी झूठी और मनगढ़ंत कहानियां बुनते हैं। नकवी ने विश्वास जताया कि भाजपा साल 2014 से ज्यादा सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सुशासन के कारण मोदी विकास, सुशासन और स्थिरता के बहुत विश्वसनीय ब्रांड बन गए हैं। उन्होंने कहा, पिछला आम चुनाव नरेंद्र मोदी के नाम पर हुआ, इस बार चुनाव नरेंद्र मोदी के काम के आधार पर हो रहा है। देश की बेहतरी के लिए हमें नरेंद्र मोदी सरकार की जरुरत है। केंद्रीय मंत्री ने अल्पसंख्यकों के डर, खतरे और धमकी के साये में रहने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि च्च्गलत अवधारणा जानबूझकर बनाई गई। उन्होंने दावा किया, पिछले पांच वर्षों में हमारे देश में कोई बड़ा आतंकवादी हमला नहीं हुआ, खाली कश्मीर में कुछ घटनाओं को छोड़कर जहां सुरक्षाबलों ने कड़ी कार्रवाई की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासन के दौरान हर 15 दिनों में भारत में आतंकवादी हमला होता था और इन हमलों में निर्दोषों के मारे जाने के अलावा बड़ी संख्या में मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया जाता था और उन्हें आतंकवादी बताया जाता था। भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या किए जाने की घटनाओं पर नकवी ने कहा कि भेदभाव के बिना विकास हुआ है लेकिन कुछ छिटपुट और आपराधिक तत्वों ने विकास के एजेंडे को बाधित करने की कोशिश की है।  पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने में निर्वाचन आयोग का सहयोग नहीं कर रहा है।