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कांग्रेस नेता राजीव त्यागी का निधन

नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता और पार्टी के तेजतर्रार प्रवक्ता राजीव त्यागी का दिल का दौरा से निधन हो गया है। शाम तक टीवी डिबेट में शामिल रहे राजीव त्यागी के अचानक निधन से सभी हैरत में हैं। पार्टी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। राजीव त्यागी विनम्र स्वभाव के एक कुशल वक्ता थे और टीवी की बहसों में पार्टी का पक्ष जोरदार ढंग से रखते थे। राजीव त्यागी की तबीयत शाम तक पूरी तरह ठीक थी। वे शाम पांच बजे एक टीवी न्यूज चैनल पर डिबेट में शामिल भी हुए थे। बताया जा रहा है कि बाद में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत कौशाम्बी के यशोदा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कांग्रेस पार्टी की ओर से ट्विटर पर जारी शोक संदेश में कहा गया है, हम राजीव त्यागी के अचानक निधन से बेहद दुखी हैं। वे निष्ठावान कांग्रेसी और सच्चे देशभक्त थे। इस दुख की घड़ी में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थना उनके परिवार और दोस्तों के साथ हैं।
आज शाम भी टीवी डिबेट में उनके साथ रहे बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने शोक जताते हुए कहा, विश्वास नहीं हो रहा है कंग्रेस के प्रवक्ता मेरे मित्र राजीव त्यागी हमारे साथ नहीं हैं। आज 5 बजे हम दोनों ने साथ में टीवी चैनल पर डिबेट भी किया था। जीवन बहुत ही अनिश्चित है ...अभी भी शब्द नहीं मिल रहे। हे गोविंद राजीव जी को अपने श्री चरणों में स्थान देना।
कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने त्यागी के निधन पर शोक वयक्त करते हुए अपूर्णीय क्षति बताया। उन्होंने लिखा,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव त्यागी जी की असामयिक मृत्यु मेरे लिए एक व्यक्तिगत दु:ख है। हम सबके लिए अपूर्णीय क्षति है। राजीव जी विचारधारा समर्पित योद्धा थे। समस्त यूपी कांग्रेस की ओर से परिजनों को हृदय से संवेदना। ईश्वर उनके परिवार को दुख सहने की शक्ति दें।
गाजियाबाद के रहने वाले राजीव त्यागी उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक पार्टी के लिए काम कर चुके हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई भी गाजियाबाद में हुई थी और उन्होंने एमबीए की डिग्री हासिल की थी।
 अब फिर पवेलियन में लौट आए हैं अशोक गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह लड़ाई डेमोक्रेसी के हित में है. इसमें हमारे विधायकों ने इतना साथ दिया. 100 से ज्यादा विधायकों का एक साथ इतने लंबे समय के लिए रुकना, ऐसा हिंदुस्तान के इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा. यह डेमोक्रेसी को बचाने की लड़ाई है. आगे भी जारी रहेगी हमारी लड़ाई. उन्होंने कहा, सब मिलकर चलें. प्रदेश के लोगों ने विश्वास करके सरकार बनाई थी, हमारी जिम्मेदारी है कि उसे बनाए रखें और प्रदेश की सेवा करें, सुशासन बनाए रखें और कोरोना से मुकाबला करें गहलोत ने कहा कि यह जीत प्रदेश के लोगों की जीत है. उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेशवासियों ने हमारे विधायकों को फोन कर-करके हौसलाअफजाई की है. उन्होंने कहा कि सरकार स्थिर होनी चाहिए. ऐसे में हमें दोबारा दोगुनी शक्ति से उनकी सेवा करनी है गहलोत ने अपने पूरे सियासी उठापटक में अपने साथ रुके हुए विधायकों की नाराजगी की खबर पर कहा कि विधायकों की नाराजगी स्वाभाविक है. गहलोत ने कहा  उनकी नाराजगी स्वाभाविक है, जिस रूप में यह एपिसोड हुआ उन्हें इतने दिन होटलों में रहना पड़ा, उनकी नाराज होना स्वाभाविक था लेकिन मैने इन विधायकों को समझाया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अब सब मिलकर राज्य के विकास के लिए काम करेंगे.
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रेलवे ने तबादलों पर लगायी मार्च तक रोक
नयी दिल्ली (आससे)। कोरोना वायरस महामारी के चलते रेलवे के परिचालन में कमी आ गई है। फिलहाल देश में 230 स्पेशल ट्रेनों और मालगाडिय़ों को छोड़कर के सभी तरह की ट्रेनें खड़ी हुई हैं। ऐसे में इसका असर रेलवे की आय पर भी पड़ा है। इसको देखते हुए रेलवे ने मार्च 2021 तक सभी तरह के तबादलों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इससे टीटीई, बुकिंग क्लर्क, आपरेटिंग, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल,सिग्नल एवं टेलीकॉम के हजारों रेलकर्मियों को राहत मिली है, जिनका तबादला कर दिया गया था। रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक, स्थापना डी. जोशफ ने सात अगस्त 2020 को सभी जोन के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर मार्च 2021 तक तबादले को स्थगित करने का निर्देश दिया है।  रेलवे में संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को चार साल तक काम करने के बाद दो वर्ष का गैप होना चाहिए। इसके बाद ही संवेदनशील पद पर नियुक्त हो सकते हैं। दो वर्ष तक उन्हें मूल कैडर पर काम करना होगा। देश भर में 67 मंडल हैं, जबकि 17 जोन हैं। सभी जगहों पर यह नियम लागू होता है। डीआरएम कार्यालय में बाबू की सीट को बदल दिया जाता है, जबकि फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों को दूसरे स्टेशन या अन्य मंडल में भेज दिया जाता है।
सालाना 50 से 75 हजार कर्मचारियों व अधिकारियों के तबादले किए जाते हैं। एक कर्मी अथवा अधिकारी को बेसिक-पे का 80 फीसद ट्रांसफर अलाउंस मिलता है, जो 25 से 75 हजार रुपये पड़ता है। ऐसे में सरकारी खजाने से 200 से 300 करोड़ रुपये खाली होता है। रेलवे में कमर्शियल कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी सीधे यात्रियों से जुड़ी होती है, इसलिए इस विभाग के तबादलों की सूची लंबी होती है। इसी प्रकार इंजीनियरिंग, सिग्नल, इलेक्ट्रिकल, ऑपरेटिंग, मेकैनिकल आदि विभाग में भी संवेदनशील पदों पर विराजमान कर्मचारियों और अधिकारियों का तबादला चार साल में कर दिया जाता है।
यह आदेश जारी होने से खासकर ग्रुप सी के कर्मचारी राहत महसूस कर रहे हैं। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज संघ (एनसीआरईएस) के सहायक मंडल मंत्री आलोक सहगल ने बताया कि कोरोना संकट क समय नए स्थान पर काम करना मुश्किल है। आलोक के अनुसार आपसी सहमति से ट्रांसफर हो सकते हैं।