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अब गोल्ड बांड स्कीम में खरीद सकते हैं ४ किलो सोना

नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने गोल्ड बांड स्कीम में सोना खरीदने की सीमा को ५०० ग्राम प्रति वर्ष से बढ़ाकर ४ किलोग्राम प्रति वर्ष कर दिया है। वहीं ट्रस्ट के लिये यह सीमा बढ़कर २० किलोग्राम प्रति वर्ष हो गयी है। आज यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुयी केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक के बाद जारी बयान में बताया गया है कि जिन उद्देश्यों को ध्यान में रखकर यह योजना शुरू की गयी थी, उन्हें हासिल करने के लिये इसमें कुछ विशिष्ट बदलाव किया गया है। नये फैसले के मुताबिक अब हिन्दू अविभाजित परिवार के लिये गोल्ड बांड योजना के तहत ५०० ग्राम प्रतिवर्ष की सीमा को बढ़ा कर ४ किलोग्राम कर दिया गया है। इसी तरह ट्रस्ट या सरकार द्वारा अधिसूचित इसी तरह की अन्य संस्थाओं के लिये यह सीमा बढ़ाकर २० किलोग्राम प्रतिवर्ष कर दी गयी है। मालूम हो कि सरकार ने ५ नवम्बर २०१५ को इस योजना की अधिसूचना जारी की थी। इसके पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य था कि स्वर्ण धातु की खरीद के बदले वित्तीय परिसंपत्ति का वैकल्पिक विकास किया जाय।
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सरकारी बैंकों के फंसे कर्ज से निबटने की नयी योजना
नई दिल्ली। दो साल पहले ही पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सरकारी बैंकों के फंसे हुए कर्ज से निबटने की योजना तैयार की थी। तब इसे बहुत कठिन और जटिल टास्क माना जा रहा था। लेकिन, धीरे-धीरे सरकार ने इस समस्या के समाधान की ओर कदम बढ़ाए हैं। केंद्र ने पिछले साल इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड, 2016 लाकर इस पर शिकंजा कसने की शुरुआत की थी और अब कई अन्य तरीकों से इसे मजबूती दी जा रही है। सरकार के ये प्रयास इंडिया इंक के लिए कड़े संदेश की तरह हैं कि भविष्य में डिफॉल्टर होना उन्हें खतरनाक स्थिति में ला देगा। सरकार ऐसे कई प्रयास कर रही है, जिससे धीरे-धीरे डिफॉल्टर कंपनियों पर शिकंजा कसा जा सके। इसके अलावा अन्य लोगों को डिफॉल्ट न करने का कड़ा संदेश दिया जा सके। सरकार की ओर से इस दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा कदम भारतीय रिजर्व बैंक को बैड लोन से निपटने की ताकत दिए जाने के लिए नया कानून लाना है। सोमवार को ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में बैंकिंग रेग्युलेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2017 पेश किया था। यह नया कानून बैंकों को डिफॉल्टर्स के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी ऐक्ट के तहत कार्रवाई करने का अधिकार देगा। केंद्र सरकार ने मई में एक अध्यादेश जारी किया था, जिसकी जगह यह कानून लेगा। यही नहीं फंसे हुए कर्ज के निपटारे के लिए आरबीआई के पास प्रस्ताव पारित करने और बैंकिंग कंपनियों को फंसे हुए कर्ज के निपटारे में मदद करने वाली अथॉरिटीज एवं कमिटियों में नियुक्ति एवं मंजूरी का अधिकार होगा। इस अध्यादेश के चलते ही आरबीआई को 12 बड़ी डिफॉल्टर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की ताकत मिली है। आरबीआई ने बैंकरप्सी कोड के तहत जिन 12 कंपनियों के खिलाफ ऐक्शन शुरू किया है, उनमें एस्सार स्टील और भूषण स्टील जैसी दिग्गज कंपनियां भी शामिल हैं। फिलहाल इन कंपनियों के मामले में नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल को रेफर कर दिए गए हैं। सरकार बैड लोन पर शिकंजा कसने के साथ ही कंपनियों को डिफॉल्ट करने से हतोत्साहित भी कर रही है। सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया चाहता है कि कंपनियां पेमेंट से चूकने के मामलों का खुलासा करें। यदि ऐसा नियम आता है तो लिस्टेड कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज को बैंक लोन के इंटरेस्ट या किस्त से चूकने की जानकारी देनी होगी। सेबी का कहना है कि इससे वित्तीय अनुशासन बना रहेगा और शेयरहोल्डर्स को पूरी जानकारी भी मिल सकेगी। पेमेंट से चूकने पर सूचना देने की अनिवार्यता के नियम से कंपनियों में खासी चिंता है। पेमेंट में देरी की जानकारी मिलने से कंपनी के स्टॉक वैल्यूएशन पर बड़ा असर होगा। आम लोगों को जानकारी होने की व्यवस्था के अभाव के चलते अब तक कंपनियां पेमेंट डिफॉल्ट के मामलों को गंभीरता से नहीं लेती थीं।