Tel: 0542 - 2393981-87 | Mail: ajvaranasi@gmail.com


सरकार के आदेश की होगी न्यायिक समीक्षा

नयी दिल्ली(आससे)। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि वह केंद्र सरकार के उस फैसले की समीक्षा करेगा, जिसमें १० केंद्रीय एजेंसियों को किसी भी कम्प्यूटर प्रणाली को इंटरसेप्ट करने या उसकी निगरानी के लिये अधिकृत किया जा सकता है। इसके साथ ही न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके ६ सप्ताह में जवाब तलब किया है।
केंद्र सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह केंद्र के फैसले की न्यायिक समीक्षा करेगा। इसके साथ  ही पीठ ने अधिसूचना पर रोक लगाने से मना करते हुये केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा। इसके लिये न्यायालय ने सरकार को ६ हफ्ते का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई ६ सप्ताह बाद होगी। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने बीते २० दिसम्बर को कम्प्यूटर की निगरानी के लिये एक अधिसूचना जारी की थी। अधिसूचना के मुताबिक किसी भी कम्प्यूटर प्रणाली से जानकारी व निगरानी करने के लिये केंद्र ने १० एजेंसियों को अधिकृत किया था। सरकार के इस फैसले की मीडिया में भी काफी आलोचना हुयी थी, जिसके बाद सरकार ने सफाई भी पेश की थी। सरकार ने अपनी सफाई में कहा था कि किसी भी कम्प्यूटर से जानकारीनिकालने के लिये किसी भी एजेंसी को पूर्ण शक्ति नहीं दी गयी है। कम्प्यूटर की जांच के लिये हर बार पूर्व मंजूरी की जरूरत होगी। सरकार ने सफाई में यह भी कहा था कि एजेंसियों को इस तरह की कार्रवाई के दौरान वर्तमान नियम कानून का कड़ाई से पालन करना होगा। सरकार ने कहा था कि सब चीजें पुरानी ही हैं। अलग से कोई नियम नहीं बनाया गया है। बता दें कि सरकार ने जिन एजेंसियों को लोगों के कम्प्यूटरों को इंटरसेप्ट करने और उनकी निगरानी के लिये अधिकृत किया है, उनमें आईबी, एनसीबी, ईडी, सीबीडीटी, डीआरआई, सीबीआई, एनआईए, रॉ आदि शामिल हैं। याचिकाकत्र्ता का कहना है कि लोगों के कम्प्यूटर का बड़े  पैमाने पर अवैध तरीके से सर्विलांस हो रहा है। यहां तक कि न्यायपालिका व अन्य नामचीन हस्तियों के कम्प्यूटरों की निगरानी हो रही है।
------------------------
सज्जन कुमारकी याचिकापर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
नयी दिल्ली (आससे)। १९८४ के सिख विरोधी दंगों में दोषी करार देने के बाद सजा काट रहे पूर्व कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिये उच्चतम न्यायालय आज तैयार हो गया। साथ ही न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुये आज सीबीआई को नोटिस जारी किया है।  प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सज्जन कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुये आज सीबीआई को नोटिस जारी किया। दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा १९८४ के सिख दंगों के दौरान पांच लोगों की हत्या करने और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में हाल ही में सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा सुनायी गयी थी। इसके बाद सज्जन कुमार ने बीते ३१ दिसम्बर को निचली अदालत में समर्पण किया था। सीबीआई को जारी किये गये नोटिस में शीर्ष अदालत ने कहा है कि सज्जन कुमार की जमानत याचिका पर ६ हफ्ते में जवाब दाखिल करे।
-----------------------
यूपी मुठभेड़ मामला गम्भीर,  विस्तृत जांच की जरूरत-सुप्रीम कोर्ट
नयी दिल्ली(आससे)। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ मामले को एक गंभीर विषय बताते हुये कहा है कि इसकी विस्तृत  जांच की जरूरत है। न्यायालय ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई १२ फरवरी से की जायेगी। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिससंजय किशन कौल की पीठ ने आज उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उत्तर प्रदेश में बीते साल हुयी कई मुठभेड़ों की जांच अदालत की निगरानी में सीबीआई या विशेष जांच दल से कराने से मांग की गयी है। पीठ ने रिकार्ड में उपलब्ध सामग्री के अवलोकन के बाद कहा कि याचिका में उठाये गये मुद्दों पर गंभीरता से विचार की आश्यकता है। इसके साथ ही पीठ ने अगली सुनवाई के लिये १२ फरवरी की तारीख मुकर्रर कर दी।  इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुये वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दावा किया कि मुठभेड़ों के दौरान राज्य प्रशासन ने सभी मापदंडों और प्रक्रिया का पालन किया है। बता दें कि शीर्ष अदालत ने याचिका पर राज्य सरकार से हलफनामा मांगा था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि २०१७ में करीब ११०० मुठभेड़ें हुई हैं, जिनमें ४९ व्यक्ति मारे गये और ३७० अन्य जख्मी हुये थे।
---------------
नागेश्वर रावकी नियुक्तिके खिलाफ सुप्रीमकोर्ट याचिका
नयी दिल्ली (हि.स.)। नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम डायरेक्टर नियुक्त करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका एनजीओ कॉमन कॉज और अंजलि भारद्वाज ने दायर की है। एनजीओ कॉमन कॉज़ ने वकील प्रशांत भूषण के ज़रिए दाखिल याचिका में बिना चयन समिति की मंजूरी के नियुक्ति को गलत बताया गया है। उन्होंने नागेश्वर राव के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप होने की दलील भी दी है। याचिका में सीबीआई डायरेक्टर के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया को वेबसाइट पर डाला जाए। वेबसाइट पर दी गई सूचना में सेलेक्शन कमेटी की मिनट्स को भी अपलोड किया जाए। याचिका में मांग की गई है कि इस पद के लिए चुने हुए लोगों के नाम वेबसाइट पर डालने का निर्देश दिया जाए ताकि आम लोगों को अगर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई सूचना हो तो वो दे सके।