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पद्मावतीपर बढ़ा विरोध

मुंबई(एजेंसी)। फिल्म मेकर संजय लीला भंसाली की बहुर्चिचत फिल्म पद्मावती को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन कोई न कोई इस फिल्म का विरोध कर रहा है। पद्मावती फिल्म का राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में विरोध किया जा रहा है। तमाम संगठन इस फिल्म को प्रतिबंधित किए जाने की मांग कर रहे है। विरोध करने वालों का साफ तौर पर कहना है कि रानी पद्मिनी पर आधारित फिल्म 'पद्मावतीÓ में इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है जो स्वीकार नहीं है।  इस पर कई राज्य के नेताओं और अध्यक्ष ने भी अपनी नाराजगी जताई है। हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दावा है कि संजय लीला भंसाली जैसे लोग इतिहास के साथ में छेड़छाड़ करने का काम करते है। इनकी गलती के लिए तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। रानी पद्मावती वीर नारी थी, फिल्म के जरिए लोगों तक गलत संदेश दिए जाने की कोशिश की जा रही है। गौरतलब है कि फिल्म 'पद्मावतिÓ में दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर मुख्य भूमिका में है। राजपूत समाज भी फिल्म के प्रदर्शन के खिलाफ सड़कों पर उतर आई। हाल ही में असंध की नई अनाज मंडी में राजपूत समाज के सैंकड़ों लोगों ने रोष प्रकट किया। समाज के लोगों ने रोष प्रकट करने के लिए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति असंध के बैनर तले एक बैठक का आयोजन किया जिसकी अध्यक्षता समिति के प्रधान सुरेंद्र राणा ने की। इस दौरान बैठक में फिल्म को प्रदर्शित होने से रोकने की मांग की। समाज के लोगों ने कहा कि वह इसे लेकर आज भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर इस फिल्म को प्रदर्शित होने से रोकने की मांग करेंगे। समाज के लोगों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर फिल्म को प्रदर्शित होने से नहीं रोका गया तो समस्त राजपूत समाज सड़कों पर उतरने में देर नहीं करेगा। पद्मावती को लेकर विवाद यहीं नहीं थमा कुछ दिन पहले वाराणसी की महिलाएं हाथों में बेलन लेकर सड़क पर उतर आईं और संजय लीला भंसाली का पुतला दहन कर अपना विरोध जताया। विरोध करने वाली महिलाओं ने यह धमकी भी दी है कि यदि वाराणसी के किसी भी थियेटर में यह फिल्म लगी तो इनका विरोध और उग्र होगा। महिलाओं ने अखिल भारतीय क्षत्रीय महासभा के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर किसी भी कीमत पर फिल्म को न चलने देने की बात कही है। फरीदाबाद में भी अखिल भारतीय क्षत्रिय सभा के प्रदेशाध्यक्ष उमेश भाटी के नेतृत्व में सैंकड़ों राजपूत समाज के युवाओं ने शहर के सिनेमाघरों पर जमकर संजय लीला भंसाली के खिलाफ प्रदर्शन किया। राजपूत समाज ने ही नहीं बल्कि अन्य समाज के सैंकडों लोगों ने मिलकर शहर के सिनामघरों पर संजय लीला भंसाली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विरोधस्वरूप बोलते हुए उमेश भाटी ने संजय लीला भंसाली को भांड बताया और कहा कि रानी पद्मावती पूरे देश के हिंदुओं की रानी थी वो सिर्फ राजपूत की रानी नहीं थी जिसने एक मुगलशासक के सामने सिर झुकाने की जगह जौहर दिखाना पसंद किया।  स्वास्थ्य व खेलमंत्री मंत्री अनिल विज ने भी इस फिल्म का विरोध किया है। इसे लेकर उनका कहना है कि कभी भी मनोरंजन के लिए इतिहास से तोड़-मरोड़ नहीं करनी चाहिए। पद्मावती फिल्म लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ी है।
आने वाली पीढ़ी को ये गलत संदेश नहीं जाना चाहिए। यह एक प्रकार की साजिश है हिन्दुस्तान की जनता को बहकाने की। ऐसी साजिश को कभी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। जब तक इस फिल्म को ठीक नहीं किया जाएगा। तब तक इसे हरियाणा में प्रदर्शित नहीं होने दिया जाएगा।  बता दें कि जहां इस फिल्म का जमकर विरोध किया जा रहा है वहीं फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारें फिल्म का समर्थन कर रहे है।
'पद्मावतीÓ फिल्म को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजस्थान में इस विरोध ने हिंसक रूप ले लिया है। राजस्थान के कोटा में इस फिल्म का ट्रेलर दिखाया गया जिसके विरोध में नाराज करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने एक मॉल में जमकर तोडफ़ोड़ और पथराव किया। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार मॉल के सिनेमा हॉल में चल रही एक फिल्म के बीच पद्मावती फिल्म का ट्रेलर दिखाने को लेकर करणी सेना कोटा संभाग के बैनर तले दर्जनों लोग मॉल पर प्रदर्शन करने पहुंचे गए।
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मॉल की दुकानों में लगे कांच के गेट भी तोड़ दिये। वहीं सिनेमा की टिकट विंडो को भी तोड़ दिया। कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर भी पथराव किया जिस दौरान मॉल में भगदड़ मच गई। वहीं इसे लेकर राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन प्रदर्शन का तरीका लोकतांत्रिक होना चाहिए। अगर कोई कानून को हाथ में लेगा तो फिर उसके खिलाफ कार्रवाई तय है। उन्होंने बताया कि इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गौरतलब है कि करणी सेना पद्मावती फिल्म के निर्माण के समय से ही इसका विरोध कर रही है। उनका आरोप है कि इस फिल्म में इतिहास के तथ्यों के सात छेड़छाड़ की गई है। करणी सेना के सदस्यों ने फिल्म के सेट पर भी तोडफ़ोड़ की थी और निर्देशक संजय लीला भंसाली से भी बदतमीजी की थी।