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आईपीएलमें भी दिखेगी कोहलीकी चमक

नयी दिल्ली (एजेन्सियां)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के निदेशक नियुक्त किए गए माइक हेसन ने कहा है की टीम के कप्तान विराट कोहली टी-२० लीग में भी उतने ही सफल हो सकते हैं जितने वल्र्ड क्रिकेट में हैं। कोहली ने बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए दूसरे टी-२० मैच में ७२ रनों की नाबाद पारी खेल भारत को जीत दिलाई। एक कप्तान के तौर पर भी कोहली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सफल रहे हैं, लेकिन बेंगलुरु के साथ उनकी कप्तानी इतनी चली नहीं है। हेसन ने कहा, वह वल्र्ड क्रिकेट में जितने सफल हैं उतने ही आईपीएल में हो सकते हैं। बीती रात हमने इस बात का एक और बेहतरीन उदाहरण देखा कि वह कितने शानदार खिलाड़ी हैं। वह बेहतरीन कप्तान भी हैं जो टीम का नेतृत्व अच्छे से करते हैं और टीम को जुनून और सही भावना के साथ आगे लेकर जाते हैं। वहीं बेंगलुरु के मुख्य कोच नियुक्त किए गए पूर्व ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज साइमन कैटिच ने भी कोहली की सराहाना की है। कैटिच ने कहा कि कोहली का रिकॉर्ड उनकी पूरी कहानी कहता है. कैटिच ने कहा, कोहली का रिकॉर्ड उनके बारे में बताता है। न सिर्फ एक खिलाड़ी बल्कि भारतीय टीम के कप्तान के तौर पर भी उन्होंने जो हासिल किया है उसके कारण मैं उनका सम्मान करता हूं। उन्होंने कहा, मुझे उनके बारे में जो बात पसंद है वो यह है कि कोहली बेहद प्रतिस्पर्धी हैं क्योंकि मुझे एक खिलाड़ी के अंदर यही खूबी भाती है। उन्होंने कहा, मैंने कोहली को पर्थ टेस्ट में बीते साल शतक बनाते हुए देखा था। वह वाका कि पुरानी विकेट की तरह थी. मैंने अभी तक टेस्ट में जितने भी शतक देखे हैं उनमें से वो सबसे अच्छा शतक था। कोहली, हेसन और कैटिच की कोशिश होगी कि वह इस बार बेंगलुरु का खिताबी सूखा खत्म करें और उसे पहला आईपीएल खिताब दिलाएं।
सिंधुका सफर दूसरे ही दौरमें खत्म

बीजिंग। हाल ही में विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की अग्रणी महिला बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु चाइना ओपन विश्व टूर सुपर १०००टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। पीवी सिंधु हाल ही में विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की अग्रणी महिला बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु चाइना ओपन विश्व टूर सुपर १००० टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। गुरुवार को उन्हें दूसरे दौर में थाईलैंड की पोर्नपावी चोचुवोंग (वल्र्ड नंबर-१५) ने कड़े मुकाबले में १२-२१, २१-१३, २१-१९ से मात दी। यह मैच ५८ मिनट तक चला। पहला गेम सिंधु ने आसानी से अपने नाम किया, लेकिन बाकी के दो गेमों में वल्र्ड नंबर-५ सिंधु थाईलैंड की खिलाड़ी के सामने प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाईं।  क्वार्टर फाइनलम में थाईलैंड की खिलाड़ी का सामना चीन की चेन यु फेई से होगा।
ओलम्पिकका टिकट लेकर हार गये बजरंग

नूर सुल्तान (कजाखस्तान) (एजेन्सियां)। बजरंग पूनिया तोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के बाद विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गुरुवार को यहां स्थानीय पहलवान दौलत नियाजबेकोव को सेमीफाइनल मुकाबला विवादास्पद परिस्थितियों में हार गए। बजरंग के अलावा रवि दहिया ने भी सेमीफाइनल में पहुंचकर तोक्यो का टिकट कटाया लेकिन वह भी यहां से आगे नहीं बढ़ पाए। बजरंग के मुकाबले के परिणाम से उनके कोच शाको बैनिटिडिस गुस्से में आ गए और उन्होंने ६५ किग्रा के मुकाबले में पक्षपातपूर्ण अंपायरिंग का विरोध किया। ६ मिनट तक चला तनावपूर्ण मुकाबला ९-९ से बराबरी पर छूटा लेकिन नियाजबेकोव ने मुकाबले के एक बार में सर्वाधिक ४ अंक बनाए थे इसलिए उन्हें विजेता घोषित किया गया। इस विवादास्पद मुकाबले में नियाजबेकोव काफी थक गए थे लेकिन रेफरी ने उन्हें उबरने का पूरा मौका दिया। इसके अलावा कम से कम तीन अवसरों पर उन्हें चेतावनी नहीं दी गई। इसके बजाय स्थानीय पहलवान को ४ अंक दे दिए गए जबकि सर्किल के किनारे पर अपने प्रतिद्वंद्वी पर हावी होने के लिए ये अंक बजरंग को मिलने चाहिए थे। बजरंग ने कई अवसरों पर अपनी निराशा भी दिखाई लेकिन इससे कोई फायदा नहीं मिला। पिछली बार के रजत पदक विजेता भारतीय को अब शुक्रवार को कांस्य पदक के लिए भिडऩा होगा। सेमीफाइनल तक की राह में कुछ चोटी के पहलवानों को हराने वाले रवि दहिया ५७ किग्रा के सेमीफाइनल में रूस के मौजूदा विश्व चैंपियन जौर उगएव से ४-६ से हार गए और उन्हें भी अब कांस्य पदक के लिये भिडऩा होगा। रवि ने भी सेमीफाइनल में जगह बना ली है। बजरंग ने पुरूषों के ६५ किग्रा में आसान ड्रा का पूरा फायदा उठाकर एक के बाद एक प्रतिद्वंद्वी को आसानी से शिकस्त दी। बजरंग को पहले दौर में पोलैंड के क्रीस्जतोफ बियांकोवस्की के खिलाफ खास मशक्कत नहीं करनी पड़ी। उन्होंने अपने इस प्रतिद्वंद्वी को आसानी से ९-२ से हराया। बजरंग का अगला प्रतिद्वंद्वी डेविड हबाट था जो भारतीय पहलवान को खास चुनौती नहीं दे पाया हालांकि इस बीच स्लोवाकिया के पहलवान ने दो बार उनका दाहिना पांव अपने कब्जे में लिया था। लेकिन दोनों अवसरों पर वह इसका फायदा नहीं उठा पाया। कोरिया के जोंग चोइ सोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में बजरंग ने शुरू में ही अंक गंवा दिया लेकिन उन्होंने यह मुकाबला आसानी से ८-१ से जीता। रवि दहिया ने शानदार पदार्पण किया और ५७ किग्रा में पहले दो मुकाबले तकनीकी दक्षता के आधार पर जीते। उन्होंने आर्मेनिया के ६१ किग्रा में यूरोपीय चैंपियन आर्सन हारुतुनयान के खिलाफ छह अंक से पिछडऩे के बावजूद जवाबी हमले करके लगातार १७ अंक बनाकर जीत दर्ज की। इस मुकाबले के आखिर में आर्मेनियाई पहलवान ने अंक को चुनौती दी लेकिन काफी देर तक रीप्ले देखने के बाद रवि को विजेता घोषित कर दिया गया। रवि ने इससे पहले शुरुआती दौर में कोरिया के सुंगवोन किम को हराया था। क्वार्टर फाइनल में उनका सामना २०१७ के विश्व चैंपियन और विश्व में नंबर तीन युकी तकाहाशी से था। उनको हराना आसान नहीं था लेकिन रवि ने बहुत अच्छा खेल दिखाया और यह मुकाबला ६-१ से जीता। भारतीय पहलवान ने जापानी खिलाड़ी को हावी होने का मौका नहीं दिया। महिला वर्ग में रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक का खराब प्रदर्शन जारी रहा और वह पहले दौर में ही नाईजीरिया की अमीनात आदेनियी से ७-१० से हार गयी।
रिकार्ड सुधारकर भी पदकसे चूकी चानू

पटाया। पूर्व चैंपियन मीराबाई चानू ने अपने राष्ट्रीय रिकार्ड में सुधार किया लेकिन वह विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में महिलाओं के ४९ किग्रा में पदक जीतने में नाकाम रही और उन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। पच्चीस वर्षीय मीराबाई ने तीनों वर्गों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने स्नैच में ८७ किग्रा, क्लीन एवं जर्क में ११४ किग्रा और इस तरह से कुल २०१ किग्रा भार उठाया। मीराबाई का इससे पहले का राष्ट्रीय रिकार्ड १९९ किग्रा (८८ और १११ किग्रा) था जो उन्होंने अप्रैल में चीन में एशियाई चैंपियनशिप के दौरान बनाया था। चीन की जियांग हुइहुआ ने २१२ किग्रा (९४ और ११८ किग्रा) भार उठाकर नया विश्व रिकार्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले का रिकार्ड चीन की ही होउ झिहुइ (२१० किग्रा) के नाम पर था। झिहुइ ने यहां २११ किग्रा के साथ रजत पदक जीता। उत्तर कोरिया की री सोंग गम ने २०४ किग्रा भार उठाकर कांस्य पदक हासिल किया। मीराबाई ने स्नैच में ८७ किग्रा भार उठाने के बाद क्लीन एवं जर्क में ११० किग्रा से शुरुआत की और फिर ११४ किग्रा भार उठाया। अपने तीसरे प्रयास में हालांकि वह ११८ किग्रा भार नहीं उठा पाई जिससे उन्हें नुकसान हुआ। अगर वह इसमें सफल रहती तो कांस्य पदक जीत सकती थी। इससे वह क्लीन एवं जर्क में रजत पदक भी हासिल कर लेती। विश्व चैंपियनशिप और महाद्वीपीय चैंपियनशिप में स्नैच, क्लीन एवं जर्क और कुल योग पर अलग अलग पदक दिए जाते हैं लेकिन ओलंपिक में केवल कुल योग पर ही पदक मिलता है। भारत की ही स्नेहा सोरेन ५५ किग्रा में ग्रुप डी में दूसरे स्थान पर रही। इस १८ वर्षीय भारोत्तोलक ने १७३ किग्रा (७२ और १०१ किग्रा) भार उठाया। ग्रुप ए की समाप्ति के बाद उनकी आखिरी पोजीशन तय होगी।मीराबाई चानू ने अपने राष्ट्रीय रिकार्ड में सुधार किया पर पदक से चूकी