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राफेल डील : लीक दस्तावेजोंपर फैसला आज

नयी दिल्ली(हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट राफेल मामले पर लीक दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश करने के मामले पर कल यानि 10 अप्रैल को फैसला सुनाएगा। कोर्ट ने पिछले 14 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने जो दस्तावेज लगाए हैं वे प्रिविलेज्ड हैं और उन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा-123 के तहत साक्ष्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता है। जबकि याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा था कि सरकार की चिंता राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं है बल्कि सरकारी अधिकारियों को बचाने की है जिन्होंने राफेल डील में हस्तक्षेप किया। अटार्नी जनरल ने कहा था कि जो दस्तावेज दिए गए हैं उन्हें आरटीआई की धारा-8(1)(ए) के तहत छूट दी गई है। अटार्नी जनरल ने कहा था कि राज्य के दस्तावेज बिना अनुमति के पब्लिश नहीं किए जा सकते हैं। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया था कि वो इन दस्तावेजों को कोर्ट के रिकॉर्ड से हटा दे। तब जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा थआ कि आरटीआई एक्ट का ऑफिशियल सिक्रेट एक्ट पर ओवरराइडिंग प्रभाव है। जस्टिस जोसेफ ने कहा था कि आरटीआई एक्ट की धारा-24 के तहत इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी प्रतिष्ठान भी भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के मामले पर सूचना देने को बाध्य हैं। जस्टिस जोसेफ ने अटार्नी जनरल को एक सर्कुलर दिखाया था, जिसमें सरकार के पारदर्शिता की बात कही गई है।
छापेमारीपर वित्त मंत्रालयने चुनाव आयोगकी दी सफाई
नयी दिल्ली (आससे)। वित्त मंत्रालय ने कांग्रेस की शिकायत के बाद चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में कुछ राजनेताओं के खिलाफ की गयी कार्रवाई पर पूछे गये सवालों अपना जवाब दे दिया है। कांग्रेस ने आयोग से शिकायत लगायी थी कि सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर आयकर विभाग और सीबीडीटी कांग्रेस नेताओं और उनके करीबियों के यहां छापेमारी कर रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने चुनाव आयोग से कहा है कि उसके राजस्व विभाग की कार्रवाई हमेशा तटस्थ, निष्पक्ष और भेदभाव रहित होती है। इस तरह की कार्रवाई राजनीतिक संबंधों पर विचार किये बगैर की जाती है। आयोग ने राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे और सीबीडीटी के अध्यक्ष पीसी मोदी को आज अपने मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर विस्तृत जानकारी देने के लिये बुलाया था। आयोग ने ७ अप्रैल को लिखे पत्र में राजस्व सचिव को सुझाव दिया था कि उसकी प्रवर्तन एजेंसियों की  चुनाव के दौरान कोई भी कार्रवाई निष्पक्ष तथा भेदभाव रहित होनी चाहिये। साथ ही आयोग ने यह भी कहा था कि ऐसी किसी भी कार्रवाई के बारे में उसे सूचित कियाजाय। आयोग का यह सुझाव आयकर विभाग के दिल्ली व मध्य प्रदेश में रविवार को तथा पिछले कुछ दिनों में कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में विपक्षी राजनेताओं तथा उनसे जुड़े लोगों के यहां छापेमारी के बाद आया है। आम चुनावों के कारण १० मार्च से देश में आचार संहिता लागू होने के बाद आयकर विभाग ने यह कार्रवाई की है। विपक्षी दलों ने इसे चुनाव के दौरान केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करार देते हुये चुनाव आयोग से शिकायत की थी। सूत्रों ने बताया कि पांडे ने आयोग के दिये गये अपने जवाब में कहा है कि हम तटस्थ, पक्षपातहीन और गैर-भेदभावपूर्ण शब्दों का अर्थ समझते हैं। इसका मतलब है कि हमें जब कभी किसी के खिलाफ सूचना मिले, हम उसपर कार्रवाई करें, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से संबंधित क्यों न हो। विभाग इसी विचार पर काम करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। विभाग ने अपने जवाब में चुनाव आयोग से यह आग्रह भी किया है कि वह अपने क्षेत्रीय अधिकारियों से कहे कि जब भी उन्हें चुनावी प्रक्रिया मंन अवैध धन के उपयोग के बारे में सूचना मिले, तो वे तत्काल कार्रवाई करें। पांडे ने पत्र में कहा है कि चुनाव आयोग के साथ राजस्व एजेंसियों की कालाधन के चुनाव में उपयोग को रोकने की जवाब देही है। ऐसे में आयोग से आग्रह है कि वह आचार संहिता लागू करने में जुटे अपने क्षेत्र के अधिकारियों को सलाह दे कि जब भी उन्हें अवैध धन के उपयोग के बारे में कोई सूचना मिले वे अपने स्तर से तत्काल कार्रवाई करें। उन्होंने यह भी यह भी लिखा है कि अगर जरूरी लगे तो अधिकारी इसकी सूचना गोपनीय रूप से आयकर विभाग को आगे की कार्रवाई के लिये दे सकते हैं। उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और राजस्व खुफिया निदेशालय वित्तीय अपराधों से निपटने के लिये राजस्व विभाग की कार्यकारी इकाइयां हैं। वित्त मंत्रालय के अधीन इन एजेंसियों ने हाल ही में ५५ जगहों पर छापेमारी की है।