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सरकार खरीदेगी २५० करोड़का विमान

नयी दिल्ली। देश में मौसम का पूवार्नुमान लगाने के लिए सरकार अब और अधिक हाईटेक तरीकों का इस्तेमाल करेगी। 250 करोड़ रुपये की लागत से एक ऐसा विमान सिस्टम खरीदने की तैयारी है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के बारे में सटीक भविष्यवाणी करने में मदद करेगा। विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय यह विमान खरीदने पर विचार कर रहा है। इस विभाग के मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शुक्रवार को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में विमान खरीदने के बारे में जानकारी दी।

दरअसल, लोकसभा में शुक्रवार को एक सांसद ने सवाल किया था कि क्या सरकार मौसम पूवार्नुमान से संबंधित प्रयोग करने के लिए एक खास विमान खरीदने के प्रस्ताव पर विचार कर ही है? खरीदे जाने वाले विशेष विमान से क्या लाभ होंगे? इस सवाल का लिखित में जवाब देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया क मंत्रालय देश में वायुमंडलीय प्रक्रिया अध्ययनों के लिए एक उपकरण युक्त विशेष शोध विमान खरीद पर विचार कर रहा है। वैज्ञानिक उपकरणों से लैस इस विमान प्रणाली की कीमत ढाई सौ करोड़ रुपये हो सकती है। केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि इस विमान का उपयोग देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम, वातावरण में विभिन्न वायुमंडलीय अनुसंधान समस्याओं के समाधान के लिए किए जाने की संभावना है।

थाईलैंडका ड्रैगनके खिलाफ नया कदम-चीनके साथ बड़ा प्रोजेक्ट किया रद

बैंकाक(एजेंसी)। चीन की विस्तावादी नीतियों और दादागिरी से तंग एक और देश ड्रैगन के खिलाफ खड़ा हो गया है। कभी चीन का करीबी दोस्त रहा यह देश थाईलैंड भी अब उससे दूरियां बनाने लगा है जिस कारण ड्रैगन की मुसीबत बढ़  सकती है। चीन को सबक सिखाने के लिए अब थाईलैंड क्वाड देशों यानि  भार, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ हाथ मिला सकता है। दरअसल थाईलैंड अपने एक प्रोजैक्ट से चीन को अलग कर दिया है। थाइलैंड अपने इस  क्रा कैनाल प्रोजेक्ट (क्रा नहर परियोजना) को तैयार करने के लिए अब भारत के अलावा अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को कांट्रैक्ट दे सकता हैृ। पहले ये कॉन्ट्रैक्ट चीन को दिया जाने वाला था। लेकिन अब यह  प्रोजेक्ट किसके हिस्से आएगा, अभी यह तय नहीं है।  फिलहाल चीनी कंपनियां इस रणनीतिक प्रोजेक्ट से बाहर होती नजर आ रही हैं। 10 दिन पहले थाईलैंड सरकार ने चीन से 2 सबमरीन्स की डील रद्द कर दी थी। बंगाल की खाड़ी में चीन थाईलैंड के लिए एक नहर बनाने की कोशिश में था। अगर यह नहर चीन बना लेता तो बहुत आसानी से वह हिंद महासागर तक पहुंच सकता था। 

यानी भारत के लिहाज से यह प्रोजेक्ट समुद्री सीमा सुरक्षा के लिए एक परेशानी बन जाता। भारत के अलावा कम्बोडिया और म्यांमार तक चीन की सीधी पहुंच हो जाती। माना जा रहा है कि भारत और अमेरिका के दबाव के चलते थाईलैंड सरकार ने चीन के साथ बंगाल की खाड़ी में यह नहर प्रोजेक्ट रद्द कर दिया। थाईलैंड सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि छोटे पड़ोसी देशों के हितों के मद्देनजर ये फैसला लिया गया है। इसमें कहा गया है कि म्यांमार और कम्बोडिया की सीमाएं चीन से मिलती हैं, थाईलैंड सरकार को लगता है कि चीन नहर के जरिए इन दोनों के हितों को प्रभावित कर सकता है। थाईलैंड सरकार ने घोषणा की है कि अब वह खुद इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगी। यह नहर 120 किलोमीटर लंबी होगी। थाईलैंड के इस फैसले के बाद ये स्पष्ट नजऱ आ रहा है कि दक्षिण चीन सागर में चीन के उग्र रवैये के बाद सभी देश उससे किनारा कर रहे हैं। चीन का दोबारा दावेदारों की लिस्ट में होना बस एक औपचारिकता है। थाई मीडिया थाईलैंड संसद में थाई नेशनल पावर पार्टी के सांसद सोंगलोड ने थाई सदन को जानकारी दी कि भारत, आस्ट्रेलिया, अमेरिका और चीन इस प्रोजेक्ट में उसका साथ देने की बात कह रहे हैं। सांसद ने बताया कि ये देश नहर प्रोजेक्ट को लेकर थाई सरकार के साथ मेमोरेंडम साइन करना चाहते हैं। सांसद ने यह भी जानकारी दी कि 30 से ज्यादा विदेशी कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट को आर्थिक और टेक्नीकल सपोर्ट देने के लिए मंशा जाहिर की है। अगर यह प्रोजेक्ट भारत या भारत के किसी कंपनी के हाथ आता है तो चीन का दांव उल्टा पड़ जाएगा। चीन का दोबारा दावेदारों की लिस्ट में होना बस एक औपचारिकता है। थाई मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, थाईलैंड अब यह प्रोजेक्ट चीन को नहीं देगा। इससे कुछ दिन पहले भी थाईलैंड चीन को झटका दे चुका है। थाईलैंड ने चीन के साथ हुई सबमरीन डील को टाल दिया था। साल 2015 में थाईलैंड और चीन के बीच नेवल हार्डवेयर और इक्यूप्मेंट्स की खरीद पर बातचीत शुरू हुई थी। 2017 में थाईलैंड ने 3 सबमरीन खरीदने का सौदा किया था। चीन की तरफ से पहली सबमरीन की डिलीवरी 2023 में होनी थी। थाई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सबमरीन डील 72.4 करोड़ डॉलर की थी और इसके स्थगित होने से चीन को बड़ा झटका लगा है।

पाकिस्तानकी राजनीतिमें तूफानकी आहट : इमरानके दुश्मन हुए एकजुट

पेशावर(एजेंसी)। पाकिस्तान में इमरान खान सरकार के खिलाफ बगावत के सुर तेज और दुश्मन एकजुट हो रहे हैं । विपक्ष का एकजुट होना  पाक की राजनीति में किसी बड़े तूफान का संकेत दे रहा है। जानकारी के अनुसार  पाकिस्तान में विपक्षी नेता कल रविवार को ऑल पार्टी कॉन्फ्रेंस (एपीसी) करने जा रहे हैं। खास बात ये है कि इसमें पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होंगे। नवाज तीन महीने से लंदन में इलाज करा रहे हैं। पाकिस्तान की एक कोर्ट ने उन्हें देश वापस लाने के लिए अरेस्ट वॉरन्ट जारी किया है। आर्थिक और घरेलू मुद्दों पर घिरी इमरान खान सरकार की इस कॉन्फ्रेंस मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विपक्ष इस रैली में प्रधानमंत्री इमरान से इस्तीफे की मांग करेगा। बता दें कि इमरान सरकार विपक्ष के हर बड़े नेता के खिलाफ कोई न कोई मामला दर्ज कर चुकी है। ज्यादातर मामले भ्रष्टाचार से जुड़े हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी मई से ही सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कई बार नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज से मुलाकात की है। एक और विपक्षी नेता मौलाना फजल-उर-रहमान भी बिलावल और नवाज के साथ हैं। पाकिस्तानी मीडिया रिपोट्र्स की मानें तो नवाज शरीफ इस रैली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लंदन से संबोधित करेंगे। बिलावल ने शुक्रवार को नवाज से फोन पर बातचीत की। इसके बाद वे मरियम से भी मिलने पहुंचे।  रहमान से भी उनकी मुलाकात की खबर है। यह कॉन्फ्रेंस रविवार को होगी। बिलावल ने ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी। इसके बाद मरियम ने बिलावल को पिता की सेहत के लिए फिक्रमंद होने और इसकी जानकारी लेने के लिए शुक्रिया अदा किया। 

कल होने वाली कॉन्फ्रेंस का एजेंडा तय है। सरकार से इस्तीफे की मांग होगी। साथ ही नए चुनाव कराने की मांग भी की जाएगी। बिलावल का रुख इमरान को लेकर बेहद सख्त है। वे इमरान को हमेशा 'इलेक्टेड नहीं, सिलेक्टेड प्राइम मिनिस्टरÓ कहते हैं। यह सीधा आर्मी पर तंज है। दरअसल, पाकिस्तान और दुनिया का मीडिया कई बार यह साफ कर चुका है कि इमरान को चुनाव जिताने में फौज का अहम रोल है और इसके लिए बड़े पैमाने पर धांधली की गई। अक्टूबर में फाइनेंशियल टास्क फोर्स की मीटिंग होनी है। इसमें यह तय होगा कि पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर आएगा या फिर उसे ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। इमरान सरकार दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए इसी हफ्ते तीन बिल लाई। ये पास तो हो गए लेकिन विपक्ष ने साथ नहीं दिया। इनके जरिए टेरर फाइनेंसिंग पर रोक लगाने का वादा किया गया है। लेकिन, ये पहली बार नहीं है। पिछले साल भी पाकिस्तान ने ऐसे ही दो बिल पास किए थे। इनसे एफएटीएफ संतुष्ट नहीं था।

 मौसम संबंधी क्लाउड भौतिकी डेटा में यह मदद करेगा। मंत्री ने बताया कि इसके अलावा, यह वायु प्रदूषण मूल्यांकन और भारत में स्वास्थ्य, ²श्यता, जलवायु पर्यावरण और जल विज्ञान संबंधित अध्ययनों के समाधान में भी मददगार हो सकता है। केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि इस पूरी योजना के नोडल एजेंसी के रूप में भारतीय ऊष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे काम करेगा। यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक ऑटोनॉमस बॉडी है। इस नोडल एजेंसी के जरिए जनता को मौसम के बारे में जानकारी मिलेगी।