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गंगा खतरेके निशानसे ऊपर, जलस्तर स्थिर

गंगा में रेकार्ड बढ़ोत्तरी हो गई है और इससे लोगों की मुसीबत भी बढ़ती जा रही है। घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने और खाने-पीने के सामान जुटाने के लिये और जिंदगी जीने की जद्दोजहद में ही उनका दिन बीत जा रहा है। यह दीगर है कि प्रशासन ने बाढ़ पीडि़तों की सुधि ली है और पीडि़तों की मदद के लिये आगे आये हैं। लेकिन यह अभी तक नाकाफी साबित हो रहा है। बढ़ता जलस्तर बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहा है और यही वजह है कि प्रशासन भी बड़ा कदम उठाने के लिये तैयारी में है। गंगा अभी भी खतरे के निशान के उपर बह रही हैं और जलस्तर में वृद्घि गुरुवार सायंकाल तक जारी रही। देर शाम तक गंगा का जलस्तर 71.52 मीटर दर्ज किया गया। फिलहाल गंगा स्थिर हैं। लेकिन बढ़ाव की आशंका बनी हुई है। इस बीच गंगा अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दाखिल हो गई हैं और इस वजह से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। उनकी फसल डूब गई है और वह सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुट गये हैं।
गंगा के जलस्तर में वृद्घि से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। तटवर्तीय और ढाब क्षेत्र में बहुत बुरे हालात हो गये हैं। हालांकि प्रशासन हरकत में आ गया है और बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिये कई टीमें बनाई गई हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों तक सभी आवश्यक सुविधाएं और सामान पहुंचाने के लिये निर्देश दिये गये हैं। बाढ़ से संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। पानी कम होने के बावजूद कई दिनों तक मुसीबतें बनी रहेंगी। गौर करने वाली बात यह है कि बारिश का सीजन अब चंद दिनों का ही है। इसके बावजूद प्रदेश की सहायक नदियों, बैराज सहित अन्य स्थानों से गंगा में पानी छोड़े जाने के कारण स्थिति अराजक हो गई है। तटवर्ती इलाकों के साथ नाविकों, व्यापारियों और पर्यटकों को काफी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। जल पुलिस, शीतला दरबार डूब गये हैं। दर्शन-पूजन के साथ सभी कामकाज प्रभावित हो गये हैं। शवदाह और गंगा आरती में समस्या जस की तस बनी हुई है। कोनिया के निचले इलाकों कोनिया सट्टïी, विजयीपुरा, कोनिया घाट, माता बारी, पलंग शहीद, सरैया, शैलपुत्री मढिय़ा सहित अन्य क्षेत्रों में लोगों के घरों में गंगा का पानी घुस गया है। यहां कई घरों के डूब जाने के कारण लोगों ने दूसरे स्थानों पर पलायन कर लिया है। दूसरी ओर, जिला प्रशासन के आदेश के बाद नौका संचालन पूरी तरह बंद है। नौका संचालन बंद होने से व्यापार प्रभावित है और घाट किनारे की ज्यादातर दूकानें एहतियातन बंद कर दी गई हैं। नौका की देखरेख में नाविकों की रात घाट किनारे ही बीत रही है और पानी बढऩे की स्थिति तेज होने के कारण नौका संचालकों की रातों की नींद गायब हो गई है। घाट और गंगा में नौका विहार नहीं कर पाने के कारण कई पर्यटक मायूस हैं और इसमें से कई अभी तक लौट भी चुके हैं। सभी पारंपरिक घाटों के डूब जाने और नावों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगने का खामियाजा पर्यटकों को भुगतना पड़ रहा है और वह मायूस होकर गलियों से घाट घूम रहे हैं। दरअसल, उनके पास कोई चारा भी नहीं है और यह दौर अभी जारी रहने की संभावना है। घाटों के किनारे जलकुंभी का डेरा है और इसके कम होने में समय लगने की संभावना है। कई स्थानों पर जहरीले जंतु आदि मिलने की भी सूचना आ रही है।
शवों का ढेर, घंटों का इंतजार
गंगा के जलस्तर में वृद्घि होने से महाश्मशान पर दिक्कतें बढ़ गई हैं। भारी दिक्कतों के कारण शवदाह और आरती बुरी तरह प्रभावित हो गया है। महाश्मशान पर शवों कतार लग गई है। इसके कारण शवदाह में शवयात्रियों को घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। हरिश्चंद्र घाट पर सड़क पर शवदाह हो रहा है ओर इसका खामियाजा शवयात्रियों के साथ स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। स्थिति यह हो गई है कि महाश्मशान पर उपर की ओर शवदाह कराया जा रहा है और यहां शवों की कतार लग गई है। हरिश्चंद्र घाट पर भी यही स्थिति है। पितृ पक्ष में तर्पण करने वाले लोगों को भी गंगा की गोद में तर्पण करना पड़ रहा है और दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दूसरी ओर, गंगा आरती सड़क से कुछ दूरी पर हो रही है और पर्यटक मायूस हैं।
बाढ़से नहीं साहब, चोरोंसे लगता है डर
दस हजार से ज्यादा मकान बाढ़ की चपेट में
वरुणा नदी और अस्सी नदी के तराई क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित कई दर्जन मकान जलमग्न हो गए है। जिला प्रशासन द्वारा लोगों को लाख मनाने के बावजूद बाढ़ पीडि़त अपना घर छोडऩे को तैयार नहीं है। कुछ लोग तो ज्यादातर अपने मकानों में आवश्यकतानुसार ईंधन-राशन का स्टॉक जमा कर रखा है लेकिन उन्हें पीने के पानी और दवाओं की ज्यादा डिमांड है। सूत्रों की माने तो वाराणसी जनपद में दस हजार से ज्यादा मकान बाढ़ की चपेट में है, वही बाढ़ पीडि़त परिवारों की मदद के लिए एनडीआरएफ , जल पुलिस और प्रशासन की टीम मुस्तैद है। एनडीआरएफ के डीआईजी आलोक कुमार सिंह ने बताया कि यदि बाढ़ का पानी बड़ता है तो उससे निपटने के लिए  एनडीआरएफ , जल पुलिस और जिला प्रशासन की टीम पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने बताया कि अबतक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में १५ आपरेशन कर ९२ लोगों को राहत कार्य कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है और १५० लोगों को बाढ़ राहत सामग्री प्रदान की गई है। बताया कि सामनेघाट से राजघाट पुल और वरुणा के तटीय क्षेत्रों में आठ से १० बाढ़ राहत चौकियां और एनडीआरएफ  और जल पुलिस की ५० नावें बाढ पीडि़तों को राहत कार्य के लिए लगाए गए है। बताते चले कि वाराणसी जनपद के तटवर्ती इलाकों में गंगा और वरुणा तबाही मचा रही हैं। मगर किनारे पर बसे लोग भी कम जीवट नहीं। वह किसी भी शर्त पर अपने मकान छोडऩे को तैयार नहीं हैं। उन्हें न बाढ़ के पानी से परेशानी है, न इसकी वजह से निकलने वाले जहरीले जंतुओं से उन्हें तो सिर्फ चोरों से डर लगता है। लोग कह रहे हैं कि ष्बाढ़ से डर नहीं लगता साहब, चोरों से लगता हैं।
बाढ़ क्षेत्रों में पीने का पानी और दवाओं की मांग ज्यादा
सामनेघाट, मारुति नगर, काशीराजपुरम आदि कालोनियों में लोगों ने बाढ़ के मद्देनजर पहले से तैयारी कर चुके हैं। घरों में राशन और ईंधन का स्टॉक कर लिया गया है। मगर उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत पीने के पानी और दवाओं की हो रही है। बाढ़ राहत के लिए पहुंच रही टीमों से सबसे पहले पीने के पानी की डिमांड हो रही है। एडीएम सिटी विनय कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ पीडि़त परिवारों की हरसंभव मदद की जा रही है। प्रशासनिक आंकलन के अनुसार जनपद में लगभग दस हजार मकान बाढ़ की चपेट में हैं। अकेले सामनेघाट, मारुति नगर, रमना और बनपुरवा क्षेत्र में एक हजार से ज्यादा मकानों में बाढ़ का पानी घुस गया है। लोगों के लिए जगह.जगह बाढ़ राहत शिविर लगाए गए हैं। यहां भोजन, चिकित्सा और आश्रय की व्यवस्था की गई है। बाढ़ ने प्रशासन के माथे पर बल ला दिए हैं और आगे भी पानी बढऩे की आशंका उसे परेशान किए हुए हैं। गुरुवार को गंगा के पानी में एक बार फिर तेज बढ़ाव शुरू हो गया। उफनाई चंबल का पानी भी गंगा में आ गया है जिसके कारण बढ़ाव की धीमी गति गुरुवार की सुबह से फिर तेज हो गई। एडीएम सिटी का कहना है कि अगले दो दिन महत्वपूर्ण होंगे। गुरुवार की दोपहर दो बजे तक गंगा का जलस्तर ७१.५२ मीटर दर्ज किया गया था। बाढ़ का पानी स्थिर है जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों के लिए राहत की खबर है।
वरुणा नदी और अस्सी नदी के तराई क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित कई दर्जन मकान जलमग्न हो गए है। जिला प्रशासन द्वारा लोगों को लाख मनाने के बावजूद बाढ़ पीडि़त अपना घर छोडऩे को तैयार नहीं है। कुछ लोग तो ज्यादातर अपने मकानों में आवश्यकतानुसार ईंधन-राशन का स्टॉक जमा कर रखा है लेकिन उन्हें पीने के पानी और दवाओं की ज्यादा डिमांड है। सूत्रों की माने तो वाराणसी जनपद में दस हजार से ज्यादा मकान बाढ़ की चपेट में है, वही बाढ़ पीडि़त परिवारों की मदद के लिए एनडीआरएफ , जल पुलिस और प्रशासन की टीम मुस्तैद है। एनडीआरएफ के डीआईजी आलोक कुमार सिंह ने बताया कि यदि बाढ़ का पानी बड़ता है तो उससे निपटने के लिए  एनडीआरएफ , जल पुलिस और जिला प्रशासन की टीम पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने बताया कि अबतक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में १५ आपरेशन कर ९२ लोगों को राहत कार्य कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है और १५० लोगों को बाढ़ राहत सामग्री प्रदान की गई है। बताया कि सामनेघाट से राजघाट पुल और वरुणा के तटीय क्षेत्रों में आठ से १० बाढ़ राहत चौकियां और एनडीआरएफ  और जल पुलिस की ५० नावें बाढ पीडि़तों को राहत कार्य के लिए लगाए गए है। बताते चले कि वाराणसी जनपद के तटवर्ती इलाकों में गंगा और वरुणा तबाही मचा रही हैं। मगर किनारे पर बसे लोग भी कम जीवट नहीं। वह किसी भी शर्त पर अपने मकान छोडऩे को तैयार नहीं हैं। उन्हें न बाढ़ के पानी से परेशानी है, न इसकी वजह से निकलने वाले जहरीले जंतुओं से उन्हें तो सिर्फ चोरों से डर लगता है। लोग कह रहे हैं कि ष्बाढ़ से डर नहीं लगता साहब, चोरों से लगता हैं।
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जिलाधिकारीने बाढ़ पीडि़तों में बांटी राहत सामग्री
जिलाधिकारी श्री सुरेन्द्र सिंह गुरुवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री बांटने भैसासुर घाट से रवाना हुए। एनडीआरएफ की टीम के साथ भैसासुर घाट से बाढ़ के पानी डूबे मकानों की छतों और ऊपरी मंजिल पर फंसे हुए  लोगों तक बाढ़ राहत सामग्री पहुंचाई। दो नौकाओं पर राहत सामग्री बांटते हुए गंगा नदी के घाटों से रामपुर, ढ़ाब, कोनिया होते हुए वरुणा नदी के शास्त्री घाट तक पहुंचे। जिलाधिकारी सिंह भ्रमण के दौरान चिरईगांव के प्राथमिक विद्यालय रामपुर में बनाये गये बाढ़ राहत शिविर में खाद्य पदार्थों सहित आवश्यक सामग्रियों के पैकेट वितरित किये। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित कैम्पो तक पहुंचाने कार्य लगातार जारी है। जहां से भी बाढ़ प्रभावित लोगों की सूचना प्राप्त हो रही है वहां त्वरित रेस्क्यू टीम पहुंच कर लोगों को निकाल कर कैम्प में पहुंचा रही है। राहत टीम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आनन्द कुलकर्णी, एडीएम प्रशासन, एडीएम सिटी, एसडीएम सदर सहित सभी सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री आज बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का करेंगे दौरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ २० सितम्बर को वाराणसी आ रहे है। श्री योगी गाजीपुर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद हेलिकाप्टर अपराह्नï लगीाग ३.४२ बजे बीएचयू हेलीपैड पर पहुंचेंगे। इसके बाद वे लगभग चार बजे अस्सी घाट से नाव द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे इसक बाद वे लगभग पांच बजे गोयनका संस्कृत विश्वविद्यालय में बने बाढ़ राहत शिविर में बाढ़ पीडि़तों को खाद्य सामाग्री वितरित करेंगे। यहां से श्री योगी बीएचयू स्थित हेलिपैड से बाबतपुर एयरपोट्र के लिए उड़ान भरेंगे वहां से वे सायं ७.३० बजे वायुयान द्वारा लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे।