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बाबा हुए अद्र्धनारीश्वर, दर्शन कर भक्त निहाल

श्रावण मास के तीसरे सोमवार को काशी फिर केसरिया रंग में रंगी रही। बोल बम और हर-हर महादेव की गूंज होती रही तो श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिये रात्रि तक अटूट कतारें बिना रुके-थके कतारों में लगे हुए थे। व्रतियों ने दर्शन करने के बाद प्रसाद लेकर व्रत का पारण किया। इस बीच सायंकाल बाबा का अद्र्घनारीश्वर श्रृंगार किया गया और इसके झांकी के दर्शन करके भक्त निहाल हो गये। इस बीच सुरक्षा व्यवस्था में लगे जवानों को पूरे दिन भीड़ को नियंत्रित करने में भारी मशक्कत करनी पड़ी और रात तक दो लाख से ज्यादा भक्तों ने काशी पुराधिपति के दरबार में हाजिरी लगायी।
इससे पहले रविवार रात्रि से बाबा के दर्शन के लिये भक्तों का कतारबद्घ होने का सिलसिला शुरू हो गया था। गैर राज्यों और जनपदों से देर रात्रि तक पहुंचे कांवरियों तथा भक्तों ने शिविरों में शरण ली। इसके बाद डाक्टर राजेंद्र प्रसाद घाट, शीतला घाट और दशाश्वमेध सहित अन्य घाटों पर उन्होंने गंगा स्नान किया। पात्रों में गंगाजल लेकर वह कतारों में दर्शन के लिये लग गये। पूरी रात इसके कारण बाबा दरबार जाने वाली सड़कें और गलियां पूरी रात गुलजार रहीं। भक्त बाबा का भजन, मंत्र सिमरते रहे और हर-हर महादेव, बोल बम के उद्घोष कतारों में करते रहे। उल्लास और उमंग में कोई कमी नहीं थी। बिना कुछ खाये सिर्फ मन में महादेव के एक झलक की आस लेकर उनकी रात कतारों में कब बित गयी, उन्हें पता ही नहीं चला। इस बीच भोर में मंगला आरती के बाद पौने चार बजे मंदिर के पट भक्तों के दर्शन के लिये खोला गया। इसके बाद पूरा मंदिर परिसर बाबा के उद्घोष गूंज उठा। श्रद्घालु गंगाजल और विल्व पत्र के साथ दूध आदि चढ़ाकर सुख-समृद्घि की कामना करते रहे। उन्हें छत्ताद्वार से प्रवेश और सरस्वती फाटक गेट से निकाला गया। इसके कारण रेड जोन से सटी गलियों में पूरे दिन जाम की स्थिति बनी हुई थी। इस बीच बारिश होने के कारण अफरातफरी हो गयी और लगातार वर्षा के कारण गोदौलिया सहित अन्य स्थानों पर बैरिकेडिंग पानी में डूब गयी। इसके कारण कतारों में लगे भक्तों को काफी दुश्वारी झेलनी पड़ी। इस बीच भोग, सप्तर्षि और श्रृंगार आरती के दौरान दर्शन-पूजन थोड़ी देर के लिये प्रभावित रहा। इसके बावजूद आरती में झांकी दर्शन कराया जा रहा था, लेकिन बाबा का अभिषेक करने हजारों मील से आये भक्तों ने झांकी दर्शन के बावजूद रुककर बाबा का जलाभिषेक किया और अपने व्रत का पारण किया। भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिन में 12 बजे तक ही सवा लाख से ज्यादा भक्तों ने दर्शन कर लिये थे। यह गणना डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर के अनुसार सुरक्षा से जुड़े जवानों ने दी। इस बीच रात्रि शयन आरती तक दर्शन-पूजन निर्बाध चला और आरती के समय में देरी हुई।
मुस्लिम  बन्धुओं के सेवाभाव से निहाल हुए शिवभक्त
बाबा के भक्तों के लिए लगाया चिकित्सा शिविर
सावन के पवित्र महीने में बाबा भोलेनाथ का दर्शन करने के लिए प्रतिवर्ष लाखों शिवभक्त वाराणसी पहुंचते है। समाजसेवी संघटनो की ओर से कई स्थानों पर कांवरियों के लिए चिकित्सा सहायता शिविर आदि लगाए जाते है। इन्हीं में से एक है रेमण्ड शाप और पूर्वांचल विकास सेवा समिति जो पिछले कई वर्षों से सचिव डाक्टर गुफरान जावेद के नेतृत्व में गोदौलिया चौराहे के पास शिवभक्तों के सावन के हर सोमवार को मुफ्त चिकित्सा सहायता शिविर लगाती आ रही है। समिति के अधिकांश सदस्य मुस्लिम हैं, जो बड़े ही मनोभाव और अपनेपन से कांवरियों की सेवा में तत्पर रहते हैं। सावन के तीसरे सोमवार को प्रात: से आयोजित शिविर में डाक्टर शाहिद, नईम खान, हाफिज फरीद, आलम, हाफिज अलताक बरकाती, आफताब आलम, आजी दाउद, सन्तोष श्रीवास्तव, काशीनाथ शुक्ल आदि बाल कांवरियों की सेवा में मुस्तैद थे वहीं महिला दर्शनार्थियों की सेवा में अजीजा जमाल, आरजू बानो, शाहजहां बेगम, हुमाबानों, खुदैजा खातून आदि दिलोजान से जुटी थी। सेवा भाव से निहाल कांवरियों ने समिति और मुस्लिम भाइयों की जमकर सराहना की। शिविर के मुख्य अतिथि राष्टï्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठï प्रचारक महिरजध्वज सिंह चंदेल रहे जिनका स्वागत धवल प्रकाश ने किया। श्री महिरजध्वज  सिंह चंदेल ने समिति के इस नेक काम की प्रशंसा करते हुए कहा कि अगर धार्मिक कार्यों में बिना भेद भाव के सर्व धर्म के लोग समभाव से जुड़ेे तो हमारी संस्कृति, सभ्यता और अखंडता को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। कार्यक्रम के सहयोगी चिकित्सक पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डाक्टर आरएन श्रीवास्तव ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
मंगला में मंगल, भक्त के पीछे वीआईपी

वर्षों से श्री काशी विश्वनाथ के मंगला आरती में विशिष्टï लोगों के साथ अधिकारियों की मनमानी सामने आती रही है और यदा-कदा कारण से इस पर काररवाई से जिम्मेदार बचते भी रहे हैं। लेकिन सावन के पहले सोमवार को बाबा की मंगला आरती में अधिकारियों की मनमानी और आरती में अराजकता का मामला विधानसभा में उठने के बाद मंगला आरती में भक्तों का मंगल हो गया है। वह आगे-आगे चल रहे हैं और अधिकारी उनके पीछे हो जा रहे हैं। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। एक हजार का टिकट लेकर वह रानी भवानी-तारकेश्वर परिसर में एलईडी पर आरती देखते थे, लेकिन शासन के संज्ञान लेने और वीआईपी व्यवस्था पर लगाम लगाने के निर्देश के बाद मंगला में टिकट धारकों को ही प्रवेश दिय जा रहा है। तीसरे सोमवार को कुल 241 टिकट बिके थे और इतने ही भक्त आरती में पहुंचे। उन्होंने पूरे इत्मीनान से बाबा की मंगला आरती देखी।
विश्वनाथ गली के व्यापारियों ने किया जलाभिषेक

कई वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए सावन के तीसरे सोमवार को विश्वनाथ गली के सभी व्यापारियों ने हजारों की संख्या में बाबा का जलाभिषेक किया। उन्होंने गंगा घाट पर पहले स्नान किया और इसके बाद पात्र, गगरे में जल लेकर वह डेढ़सी पुल से विश्वनाथ गली, ढुंढिराज गणेश होते हुए गेट नंबर चार छत्ताद्वार से परिसर में दाखिल हुए। बाबा का जलाभिषेक करने के बाद वह सरस्वती फाटक से बाहर निकले। दर्शन-पूजन पूर्वाह्नï नौ बजे से 11 बजे तक चला।
४१ हजार दीपों से जगमगाया धर्मसंघ
दुर्गाकुण्ड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मण्डल का प्रांगण सोमवार को दीयों की रोशनी से नहा उठा। धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के ११० प्राकट्योत्सव के अवसर पर चल रहे दस दिवसीय महोत्सव के छठें दिन करपात्र जयन्ती की पूर्वसंध्या पर करपात्र दीपावली का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ४१ हजार दीयों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा। सायंकाल गोधूलि बेला में प्रांगण में स्थित राम मंदिर, करपात्र सभागार, अतिथि गृह, महाराज निवास, अन्नपूर्णा भण्डार, मुख्य द्वार सभी जगहो पर एक साथ दीप प्रज्जवलित किया गया। इस अवसर पर मुख्य द्वार से लगायत सम्पूण प्रांगण में विद्युत झालरों से भी आकर्षक सजावट की गई थी। सबसे पहले धर्मसंघ पीठाधीश्वर शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज एवं पंडित जगजीतन पाण्डेय ने करपात्र सभागार में प्रथम दीपक प्रज्जवलित किया उसके उपरान्त सैकड़ों की संख्या में बटुकों ने एक साथ पूरे धर्मसंघ प्रांगण के दीपक जलायें। एक साथ पूरे परिसर में दीप प्रज्जवलित होते ही अत्यन्त विहंगम दृश्य नजर आया। करपात्र दीपावली के अवसर पर धर्मसंघ परिसर में रंगोली प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार ग्लोरियस एकेडमी, द्वितीय पुरस्कार गोपीराधा बालिका इण्टर कालेज, तृतीय पुरस्कार सनातन धर्म इण्टर कालेज एवं एस0डी0एस इण्टर कालेज के छात्र छात्राओं को मिला। कार्यक्रम में पंडित रत्नाकर मिश्र, दुर्गेश पाठक, सत्य कुमार तिवारी, रमेश शुक्ल, प्रभांशु आदि ने सहयोग किया।
उपन्यास सम्राट का गांव बना हेरिटेज
विकास प्राधिकरण विश्व में साहित्य का नाम रौशन करने वाले साहित्यकारों को इतिहास के पन्ने से लुप्त नही होने देगा। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद का जन्मस्थल हेरिटेज गांव के रूप में विकसित किया जायेगा। गांव के स्वरूप को इस प्रकार विकसित किया जायेगा की देश विदेश पर्यटक यहां आये। इसके अलावा लोग मुंशी प्रेमचंद के विषय में जान सके। लमही गांव को हेरिटेज का स्वरूप देने के लिए दो चरणों में कार्य होगा। विप्रा उपाध्यक्ष श्री पुलकित खरे ने बताया कि प्रथम चरन  ३१ जुलाई तक लमही में प्रथम चरन के कार्य में आडियो, वीडियो के माध्यम से मुंशी जी के उपन्यास एवं साहित्य का प्रशारण शुरु कराया जायेगा। जन्म दिवस समारोह में उनके द्वारा रचित कहानियों से संबंधित पुस्तिकाओं की प्रदर्शनी के अलावा मेले में टी शर्ट, पेन एवं अन्य वस्तुओं के स्टाल लगाये जायेंगे। दूसरे चरन में लमही गांव में स्थित पोखरा का सुन्दरीकरण कराया जायेगा। पोखरे में छोटी नांव चलायी जायेगी। इसके अलावा आस पास के क्षेत्रों में बनारसी खान पान जैसी बाटी, चोखा की दूकान खोली जायेगी। क्षेत्र को इस प्रकार विकसित किया जायेगा कि यहां मेले का माहौल हमेशा बना रहे।
काशी की साहित्य विभूतियों का स्थल होगा हेरिटेज
अब साहित्य जगत से जुड़े महान विभूतियों का स्थल हेरिटेज के तौर पर विकसित होगा। शुरु में हजारी प्रसाद द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, नजीर बनारसी समेत दस विभूतियों के बारे में छात्रों, पर्यटको को जानकारी दी जायेगी। व्रिपा उपाध्यक्ष ने बताया कि साहित्य विभूतियों के आवास के एक कमरे में उनके साहित्य, जीवन शैली, फोटोग्राफी लगाया जायेगी। साहित्यकारों की पुस्तों की छोटी लाइब्रेरी होगी। साहित्यकारोंके आवास जाने वाले मार्ग को आकर्षक बनाया जायेगा। बाबतपुर, रेलवे स्टेशनों पर साहित्यकारों के स्थल और उनके स्मृति विवरण का उल्लेख होगा। जिससे उक्त स्थल के प्र्रति पर्यटकों के आकर्षण को बढ़ाया जा सके । छात्र-छात्राओं को उक्त स्थल से जोडऩे के लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को जोड़ा जायेगा। इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी और स्वयं सेवी संस्थाओं के अलावा बिल्डर असोसियेशन से वार्ता हुई है।
शासन को भेजी जायेगी कार्य योजना
विप्रा उपाध्यक्ष ने बताया कि साहित्य विभूतियों के स्थल को हेरिटेज के तौर पर विकसित करने के लिए कार्य योजना शीघ्र तैयार कर शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जायेगा।