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मारपीटके बाद रातभर चली थानेमें पंचायत

अपहरण, लूट और हत्याके प्रयास जैसी संगीन आरोपको लिया गया वापस
लंका थाना क्षेत्र के सुन्दरपुर में शुक्रवार की रात्रि में मास्क न लगाने को लेकर हुए विवाद में पुलिस कर्मियों और सत्ता पक्ष के नेताओं के बीच मारपीट हुई थी। इसी को लेकर सत्ता पक्ष की हनक सड़क पर देखा गया। मारपीट को लेकर रातभार लंका थाने में सत्ता पक्ष और पलिस कर्मियों के बीच लम्बी पंचायत चली। पुलिस बैकफूट पर आ गयी और अपहरण, लूट और हत्या का प्रयास की संगीन धारो वापस ले लिया। शनिवार को आरोपियों को न्यायालय से जमानत मिल गयी। मारपीट करने वाले आरोपी भाजपा नेता को छुड़ाने के लिए विधायक, केन्द्रीय मंत्री से सांसद, पूर्व मंत्री सहित कई राज्यमंत्री पूरी कोशिश की लेकिन पुलिस ने शनिवार को आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दी। लेकिन आरोपियों को जमानत मिल गयी। आरोपी सुरेन्द्र पेल को थानेदार ने एक निजी वाहन से न्यायालय के लिए रवाना हुए, जबकि उनके छोटे भाई को सरकारी जीप से लेकर पहुंचे। इस संबंध में लंका थाना प्रभारी ने ऐसे किसी मामले से इंकार कर दिया। बीजेपी नेता की गिरफ्तारी की जानकारी होते ही लंका थाने पर जो  देर रात के सत्ता पक्ष के लोगों की जुटान हुई। वह शनिवार को सुरेंद्र के कोर्ट न जाने तक बनी रहीं। थाने में सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं होते देख पुलिस कर्मियों और नेताओं से नोकझोंक होती रहीं। सुरेन्द्र को छुड़ाने के लिए सपा का एक कद्दावर नेता भी जोर शोर से लगा था।वहीं दूसरी तरफ  इस मामले में बीजेपी नेताओं का आरोप हैं कि घटना रात १० बजे की हैं। जबकि पुलिस ने एफ आईआर में शाम सात बजे दुकान बंद कराने को लेकर विवाद का कारण बताते हुए रपट दर्ज कराई। इस पूरे प्रकरण के मामले में एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने जांच क्षेत्राधिकारी भेलूपुर प्रिति त्रिपाठी को सौंपी है।
 दो घण्टे में  दो सौ से ज्यादा पैरोकारों का  आया फोन
बीजेपी नेता सुरेंद्र पटेल का सत्ता के गलियारे में ऊंची पकड़ हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दरोगा से मारपीट  करने के आरोप में  गिरफ्तार होने के बाद उसके पैरवी में  इंस्पेक्टर और पीडि़त दारोगा के पास दो घण्टे में दो सौ  से ज्यादा फ ोन सत्ता पक्ष के नेताओं का आया। बावजूद इसके पुलिस ने सीधे मनाकर दिया। सुरेंद्र पटेल और उसके बेटे ने इसके पूर्व में पुलिस से  उलझ चुके थे।
इंस्पेक्टर लंका का मास्क न लगाना चर्चा का विषय बना
सुंदरपुर  चौराहे शुक्रवार की रात दारोगा के साथ मारपीट की  सूचना पर आलाधिकारियों के साथ पहुंचे इंस्पेक्टर लंका अश्वनी कुमार चतुर्वेदी अपने मुंह पर मास्क नहीं लगाए थे। जबकि वहां मौजूद अन्य अधिकारी मास्क लगाए हुए थे। शनिवार को सोशल मीडिया के प्लेट फ ार्म पर इंस्पेक्टर लंका के मास्क नहीं लगाने का  फ ोटो और वीडियो  वायरल होने के बाद चर्चा का विषय बन गया।
सीओ भेलूपुर को मिली बीजेपी नेता की जांच
बीजेपी नेता सुरेंद्र पटेल के खिलाफ इंस्पेक्टर लंका को गंभीर धाराओं में मुकदमा लिखना पड़ा भारी। बीजेपी नेताओं की शिकायत पर पूरे मामले की जांच जिलाधिकारी ने सीओ भेलूपुर प्रीति   त्रिपाठी को सौंप दी। इस बाबत सीओ भेलूपुर ने बताया कि जांच के दौरान वीडियो फुटेज में गलत मिलने पर अपहरण, हत्या का प्रयास और लूट की धारा तत्काल हटाई ली गई। अभी आगे विवेचना जारी है। हटने वाले धाराओं में ३६४, ३९२, ३०७ है। जबकि बाकी धाराओं की जांच में आगे कुछ कहा जा सकता हैं।
एपेक्स हास्पिटल के मामले में पुलिस बैकफुट पर क्यूं?
मास्क न लगाने को लेकर हुए विवाद में नेता के पुत्र और पुलिस कर्मियोंं के बीच हुई मारपीट के मामले में सत्ता पक्ष की हनक पर पुलिस बैकफुट पर आयी और संगीन धाराओं को वापस लेने पर आरोपियों की जमानत मिल गयी, लेकिन भिखारीपुर स्थित एपेक्स हास्पिटल में मिले कोरोना प्रकरण की जांच करने पहुंचे लंका थाने की दरोगाा से हास्पिटल के कर्मचारियों द्वारा दुव्र्यवहार किया गया दरोगा द्वारा हास्पिटल के कर्मचारियों के विरुद्ध तहरीर देने में हिम्मत नहीं जुटायी। इसी को लेकर लंका पुलिस पर सवालिया निशान बना हुआ है।