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मेघोंकी मेहरबानी, सब पानी-पानी

भोर के बाद दूसरे प्रहर से रात तक झमाझम वर्षा, एक दिन में दो सौ मिलीमीटर बारिश दर्ज, कई क्षेत्र अंधेरे में डूबे, वाहन चालकों की मुसीबत
कहावत है कि सावन से भादो दुब्बर नहीं होता। ऐसे में कहावतों, पर्वों और तिथियों की बात की जाय तो जन्माष्टïमी भी ऐसा दिन माना गया है जिस दिन बारिश होना तय होती है। लेकिन बुधवार को ऐसी बारिश हुई कि समय से पहले बाजार से लोग घरों की ओर भाग गये, दूकानदार गायब और ग्राहक भी नदारद हो गये। सड़क से लेकर गलियां खाली और चारों ओर सिर्फ पानी-पानी हो गया। कई सड़कों का हाल तालाब सरीखा हो गया था और गलियों में सीवर चोक के कारण स्थिति बदतर हो गई थी। एक दिन में करीब दो सौ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है और इस माह में अब तक की यह सबसे ज्यादा और अच्छी बारिश है। वर्षा का ऐसा दौर शुरू हुआ कि कई इलाके जलमग्न हो गये। मौसम सुहावना हो गया और झमाझम बारिश के होने, रुकने और फिर बरसने का अनवरत दौर रात तक जारी रहा। मौसम खुशनुमा हुआ तो मुसीबतें भी साथ लाया। विद्युत आपूर्ति प्रभावित, कई स्थानों पर जाम, राहगीरों से लगायत वाहन चालकों की फजीहत, ग्रामीण इलाकों में खेत भर गये। तापमान में कमी आई और रात तक मौसम में तरावट बनी हुई थी। अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्शियस और न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्शियस दर्ज किया गया। मौसम के जानकारों की मानें तो लोकल हीटिंग और मानसून के कारण शहर से लेकर गांव तक बारिश का दौर जारी रहा और यह एक-दो दिन बना रहेगा।
भगवान भास्कर ने सुबह थोड़ी देर के लिये दर्शन दिये और इसके पहले भोर में तेज बारिश हुई थी और सुबह तक यह जारी थी। इसके बाद बादल गहराये रहे और दूसरे प्रहर के साथ वर्षा का दौर शुरू हुआ तो यह रात तक धीमे और तेज होता गया। इसके कारण कई स्थानों पर जलजमाव हो गया और दिक्कतों का दौर शुरू हो गया। यह सिलसिला काफी देर तक चला और इस दौरान हवा में भी तरावट आ गई। रात्रि तक लगातार बारिश होने से सड़कों पर समय से पहले सन्नाटा हो गया और सब कुछ सियापे की जद में आ गया। वर्षा से बचने के लिये जहां-तहां खड़े लोगों ने अपने गंतव्य जाने की तैयारी की और कुछ देर बाद फिर झमाझम बरसात शुरू हो गई। इसके कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। बारिश होने के कारण सड़कें और गलियां सब स्थान दिक्कत से भर गये। कचरे का अंबार, फिसलन और सीवर चोक की समस्या हो गई। कई कालोनी और क्षेत्रों में भी लोगों के घरों के अंदर पानी पहुंच गया। पानी निकालने में लोग रात तक लगे हुए थे और दिक्कत खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी। दरअसल, बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी और यही वजह थी कि लोग पानी की निकासी के लिये लगे हुए थे। दूकानों भी जद में आई और दूकानदारों ने अपने सामान की सुरक्षा के लिये उचित रास्ते बनाये। इस बीच कई इलाकों से बिजली गुल हो गई और इसके मरम्मत में काफी समय लग गया। इसके कारण जलापूर्ति भी प्रभावित हो गई। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में भी जमकर बारिश हुई और इसके कारण किसानों के चेहरे खिले हुए थे। हालांकि ग्रामीण इलाकों में भी विद्युत आपूर्ति काफी देर तक प्रभावित थी।
लगातार बारिश होने के कारण शहर के कई क्षेत्र, गलियां, कालोनी सहित अन्य स्थानों के अलावा सड़कों पर काफी देर पानी लगा हुआ था और इसके कारण सभी को दिक्कत हुई। गोदौलिया, गिरजाघर, रेवड़ी तालाब, रविन्द्रपुरी कालोनी, भदैनी, लंका, दुर्गाकुंड, कमच्छा, बड़ी गैबी, निरालानगर, सिद्घगिरिबाग, नई सड़क, कोदई चौकी, मैदागिन, पिपलानी कटरा, लहुराबीर, तेलियाबाग, अंधरापुल, अर्दली बाजार के अलावा शहर की कई गलियों की भी हालत खस्ता रही। सीवर चोक होने और इसके कारण सीवर का पानी घरों तक जाने की शिकायतें पूरे दिन चलीं।
कुछ दिनों तक  जारी रहेगी वर्षा
मानसून की रफ्तार तेज होने और उम्मीद से अच्छी बारिश होने के कारण अभी तक इसका प्रतिशत बीते वर्षों से अच्छा रहा है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डाक्टर एसएन पांडेय ने बताया कि अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश होने की आशंका बनी हुई है और मानसून अभी अपने पिक पर रहेगा। बताया कि दो-तीन दिन तक बारिश का सिलसिला इसी तरह बना रहेगा।
एयरपोर्ट परिसर हुआ जलमग्न
बाबतपुर वाराणसी बीती रात हुई बारिश और आज शाम को हुई भारी बारिश के चलते लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पुराने टर्मिनल भवन के सामने पूरी तरह जलमग्न हो गया है एयरपोर्ट के सारे कार्यालय इसी भवन में है इस नाते लोगों को आने जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बरसात से धराशाही हुआ पेड़

मंडुआडीह मोढ़ेला मार्ग पर बारिश के वजह से वर्षो पुराना एलेस्टॉनिया का वृक्ष बीच सड़क पर गिर गया। इसके चलते इस मार्ग पर आवागमन प्रभावित हो गया है। मंडुआडीह थाना क्षेत्र के सरकारीपुरा मोढ़ेला मार्ग पर हुए सड़क चौड़ीकरण के दौरान लोकनिर्माण विभाग द्वारा नियुक्त कार्यदायी संस्था द्वारा इस्तेमाल किये गए जेसीबी ने दर्जनों पेड़ो को आधारविहीन कर दिया है।जिसके चलते कभी भी हादसा हो सकती है। चूंकि वन विभाग द्वारा आदेश न मिलने की दशा में सभी पेड़ो को ऐसे ही छोड़ दिया गया है। जिनमे से अनेक पेड़ इस कदर खतरनाक बन चुके है कि किसी भी समय यह पेड़ गिर सकते है।यदि ऐसा दिन के वक्त हुआ तो किसी बड़े हादसे से इनकार नही किया जा सकता।
कैण्टके रेलवे कालोनियोंमें जलजमाव की समस्या बदस्तूर
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र का हाल बुधवार को सायं हुई लगातार बारिस से बेहाल हो गया। शहर के ज्यादातर क्षेत्रों में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी। सबसे ज्यादा बदत्तर स्थित रेलवे कालोनी में रहने वाले कर्मचारियों की है। कैण्ट रेलवे स्टेशन के एईएन कालोनी, आरएमएस कालोनी और लहरतारा कालोनी के लिए यह कोई नयी समस्या नही है। पिछले कई वर्षो से इन कालोनियों में बारिश होते ही जलजमाव हो जाता है। मजे की बाज यह है कि हर साल रेल प्रशासन जलजमाव को लेकर बड़ी बड़ी बाते तो करता है लेकिन बारिश होते ही सारी बाते हवा हवाई हो जाती है। इन कालोनियों में जल निकासी के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिये गये, लेकिन कालोनी की सड़कों पर पानी जमा है अपितु बहुत से क्वाटरों के अंदर भी पानी घुस गया है रेल कर्मचारी इस समस्या की शिकायत करते करते थक चुके है। लेकिन रेलवे प्रबंधन के ऊपर इसका कोई असर नहीं पड़ता। जबभी बारिश होती है और कालोनियों में जलजमाव होता है तो स्थानीय प्रशासन दिखावे के लिए सक्रिय हो जाता है और जहां तहां पम्प लगाकर पानी निकालना शुरू कर देता है। ये सारा कार्य सिर्फ कर्मचारियों के आक्रोश को शांत करने के लिए किया जाता है।
नये नाले का निर्माण भी आधा अधूरा
एईएन कालोनी में कई सालों से हो रहे जल जमाव को दूर करने के लिए एक नये नाले का निर्माण शुरू किया गया था। यह नाला स्टेशन के सामने जीटी रोड से होते हुए आरएमएस कालोनी की बाउंड्री तोड़कर रोडवेज तक जाना था। इस नाले के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च किये गये लेकिन निर्माण अधूरा ही छोड़ दिया गया था। इस अधूरे कार्य को अभी कुछ महीनों पहले पूरा किया गया। लेकिन इस निर्माण में भी खेल कर दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि जिस नाले का निर्माण हो रहा था उस नाले को रोडवेज के पास यूनियन बैंक के विपरीत दिशा में जीटी रोड के किनारे पुराने सीवर लाइन में मिलाकर कार्य बंद कर दिया। इस वर्ष स्थानीय प्रशासन ने बहुत बड़ी-बड़ी डींगे हाक रहा था कि जल-जमाव नहीं होगा। लेकिन बारिश होते ही पोल खुल गयी।
डीआएम बिल्डिंग में भी घुसा पानी
पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मण्डल प्रबंधक कार्यालय में भी बारिश ने अपनी अकड़ दिखाते हुए इंतजामों की पोल खोल दी। वर्षा का पानी कार्यालय भवन के अन्दर तक पैठ बना लिया। पानी से घिरा भवन टापू सदृश्य हो गया।
भारी बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले
चोलापुर विकास खंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों चोलापुर धरसौना  गोसाईपुर मोहाव रौना खुर्द बेला  ताड़ी  हाजीपुर  मुरली जगदीशपुर अलीपुर इमिलिया  चंदापुर  चमरहा आदि  गांव में भारी बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले वही उमस भरी गर्मी से लोगों ने राहत  महसूस किया वही किसानों ने बताया कि हर साल के भांति कृष्ण जन्माष्टमी पर अक्सर बरसात होने की संभावना रहती है जिसको लेकर किसान जन्माष्टमी के त्यौहार पर बेहद खुश नजर आए वहीं धान की फसल सहित गन्ना  बाजरा  उर्दी  मूंगकी फसल अच्छी होने की संभावनाएं बनी हुई है जबकि नदी के तराई इलाकों में बाढ़ आने को लेकर कुछ किसान चिंतित हैं ।