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आधी रात गिरे ओले, झमाझम बारिश

किसानोंके लिये बेमौसम वर्षा बनी आफत
धानके गठ्ठïर कई स्थानों पर डूबे, नुकसान


ठंड मिजाज में आ गई है और लोगों को कंपकंपाने के लिये अपने तेवर में इसने इजाफा भी कर लिया है। शुक्रवार आधी रात के बाद अचानक मौसम ने करवट ली और इसके बाद ओले बरसने लगे। घरों में सो चुके या सोने की तैयारी में लगे लोग उठकर बैठ गये। करीब 15 मिनट तक ओलों के गिरने के कारण कई स्थानों पर ओले जमा हो गये और इसके बाद झमाझम बारिश का सिलसिला शुरू हुआ तो यह काफी देर तक चला। ओले साफ करने के लिये रात में ही लोग उठे और इसे हटाया। सड़कों पर राहगीरों और वाहन चालकों को रात में इस दिक्कत से काफी जूझना पड़ा। इसके बाद बर्फीली हवा और गलन ने रही-सही कसर पूरी कर दी। ओले गिरने से किसानों को भी काफी नुकसान का सामना करना पड़ा और पूरी रात वह जागते रहे। उनकी फसलों, फूलों आदि पर इसका बुरा असर पड़ा है। इस बीच तापमान में थोड़ी रियायत तो आई लेकिन गलन जस की तस रही। दिन का अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्शियस और न्यूनतम तापमान 15.3 डिग्री सेल्शियस दर्ज किया गया। मौसम विज्ञानियों की मानें तो एक-दो दिन में बादलों का डेरा साफ हो जायगा, लेकिन गलन बनी रहेगी।
सर्द हवा और बादलों का डेरा सुबह से ही बना हुआ था। इस बीच पूरी रात बारिश होने के कारण शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक जगह-जगह पानी लगा हुआ था। इसके कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया तो कई लोगों ने घर के बाहर निकलने से परहेज किया। बाजारों पर इसका असर देखने को मिला और सन्नाटे की चादर में प्रमुख बाजार लिपटे हुए थे। सड़कों से लेकर कई घरों की दहलीज तक कई स्थानों पर गंदगी लगी हुई थी और लोगों को इससे काफी दिक्कत भी हुई। खराब मौसम और गलन के कारण लोग घरों में ही कैद रहे। दिन में ही अलाव, हीटर का सहारा लिया गया और इससे राहत ली। भगवान भास्कर के दर्शन नहीं हुए और इसकी उम्मीद लगाये लोगों को निराशा हाथ लगी। दूसरे प्रहर सूर्यदेव ने दर्शन दिये लेकिन धूप बेअसर रही। बादलों और कुहासे के कारण वाहन चालकों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। यही वजह थी कि बाजारों में शहर के बाहर से आने वाले वाहन देर में पहुंचे और बाजार भी लगने में समय लगा। गर्म कपड़ों से लोगबाग लदे रहे और सर्द मौसम में कंपकंपाने को मजबूर रहे। भोर में अधिकांश नेमियों ने घाटों पर उतरना बंद कर दिया है। इसका कारण गलन और कुहासा है। पौ फटने के बाद भी आलम यह था कि घाटों पर लोग नदारद थे। सर्द हवा सुबह से रात तक लोगों को झकझोरती रही। शाम होते ही मौसम में परिवर्तन हुआ और सर्द हवा के साथ गलन का कोप शुरू हुआ। हवा पूरी तरह बर्फीले मिजाज में चली और लोग इससे कठुआ गये। बाजारों से आनन-फानन घरों की ओर निकल गये। ठंड में इजाफा हो गया और रही-सही कसर कई स्थानों पर हुई हल्की बूंदाबांदी ने पूरी कर दी। पूरी रात सर्द हो गयी और सड़कों से रौनक पूरी तरह गायब हो गयी।  मौसम के मिजाज से लोगबाग घरों में कैद हो गये। शहरी इलाकों को छोड़ दें तो ग्रामीण और शहर के कुछ क्षेत्रों में रात्रि आठ बजे के बाद मौसम में परिवर्तन का असर दिखना शुरू हो गया था। रात्रि में बारिश के कारण ग्रामीण घरों के बाहर अलाव से राहत ले रहे थे और फसल, सब्जियों को बूंदाबांदी से बचाने के लिये जतन भी करते दिखे। ओले गिरने से किसानों का काफी नुकसान हुआ है और उन्होंने फसलों को सुरक्षित करने के लिये इसे अन्यत्र स्थानों पर पहुंचाया। इसके बावजूद धान की बड़ी फसल डूबी है। ग्रामीण इलाकों में भी पूरे दिन कोहरे की चादर फैली हुई थी। वाहन चालकों की असल दिक्कत शुरू हो गई है।
नमी से बारिश की आशंका-विज्ञानी
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डाक्टर एसएन पांडेय ने बताया कि कोल्ड फ्रंट और पश्चिमी विक्षोभ के कारण ठंड में काफी इजाफा होगा। इसके कारण न्यूनतम और अधिकतम तापमान में गिरावट होगी। इससे ठंड का बढऩा तय है। इसके अलावा कश्मीर पहुंचे पश्चिमी विक्षोभ और यहां चल रही पूर्वा हवा के कारण वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल में बारिश की संभावना बन रही है और इससे गलन में भी इजाफा होनेे की पूरी आशंका है। हालांकि एक-दो दिन के अंदर मौसम साफ होने की उम्मीद है।
आकाशीय बिजली गिरनेसे दर्जनों गांवमें विद्युत आपूर्ति ठप
जंसा थाना क्षेत्र के शुक्रवार की रात्रि में वर्षा के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से दर्जनों गांव में विद्युत आपूर्ति ठप हो गयी। वहीं इसके चलते जलापूर्ति भी ठप हो गयी। शुक्रवार की रात्रि में वर्षा के दौरान आकाशीय बिजली जंसा क्षेत्र के खरगूपुर गांव स्थित विद्युत तार पर गिरा जिससे तार टूटकर जमीन पर गिर गयी। इससे खरगूपुर पचवार, सोनवरसा और वेशहूपुर सहित दर्जनों गांव मे विद्युत आपूर्ति ठप हो गयी। वहीं क्षेत्र में पानी के लिए लोग परेशान रहे। अभियंता राजकुमार ने बताया कि आकाशीय बिजली के चलते विद्युत तार टूट कर गिर गया है। जिसको ठीक करने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। शीघ्र ही विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जायेगी।
संकष्ट श्रीगणेश चतुर्थी आज

चन्द्रोदय होगा रात्रि ०८ बजकर १८ मिनटपर
सनातन धर्म में पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीगणेशजी की अपार महिमा है। कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ करने से पहले श्रीगणेशजी स्मरण करके उनकी पूजा-आराधना सर्वप्रथम करने का विधान है। सुख-समृद्धि के लिए संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत अत्यन्त चमत्कारिक है। इस बार यह पर्व १६ दिसम्बर को पड़ रहा है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि पौष कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि १५ दिसम्बर को प्रात: ७ बजकर १८ मिनट पर लगेगी जो कि उसी दिन १५ दिसम्बर को अद्र्धरात्रि के पश्ïचातï् ५ बजकर ३५ मिनट तक रहेगी। संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत १५ दिसम्बर को रखा जाएगा, चन्द्रोदय रात्रि ८ बजकर १८ मिनट पर होगा। चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि के दिन संकष्टïी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। श्रीगणेशजी की आराधना रात्रि में चन्द्र उदय होने के पश्चात् चन्द्रमा को अघ्र्य देकर की जाती है। संकष्टïी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत महिला-पुरुष तथा विद्याॢथयों के लिए समानरूप से फलदायी है। जिन व्यक्तियों की जन्मकुण्डली के अनुसार ग्रहों की महादशा, अन्तर्दशा और प्रत्यन्तरदशा में अनुकूल फल की प्राप्ति न हो रही हो तो संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी के दिन व्रत उपवास रखकर प्रथम पूज्यदेव भगवान श्रीगणेशजी की पूजा-अर्चना करके लाभ उठाना चाहिए। जिन्हें अपने जीवन में संकटों का सामना करना पड़ रहा हो, उन्हें भी आज के दिन श्रीगणेश जी का दर्शन-पूजन करके व्रत रखना चाहिए। श्रीगणेश पुराण के अनुसार भक्तिभाव व पूर्ण आस्था के साथ किए गए संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी के व्रत से समस्त संकट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का संयोग बनता है।