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कुमार स्वामीने दूसरी बार संभाली कर्नाटककी सत्ता

परमेश्वर उपमुख्य मंत्री,कांग्रेसके २२-जेडीएसके १२ बने मंत्री
राहुल-सोनिया समेत विपक्षके बड़े नेताओंका जमावड़ा
नयी दिल्ली। एच डी कुमारस्वामी ने आज कर्नाटक के नये मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल वजूभाई वाला ने विधान सौध प्रांगण में आयोजित समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी। मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद राज्यपाल ने कुमारस्वामी को बधाई दी। इस समरोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुलगांधी,संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई दलों के नेताओं ने शिरकत की। कुमारस्वामी का खेल कर्नाटक में शपथ ग्रहण का समारोह पिछले दो घंटे से हो रही भारी बारिश से बिगड़ हुआ था। शपथग्रहण समारोह के लिए विधान सौध के सामने बनाया गया विशाल मंच पानी में पूरी तरह डूब गया था। जिसके बाद शपथ ग्रहण समारोह को बैंकट हॉल में रखवाने के कयास लगाए जा रहे थे। कांग्रेस के रमेश कुमार अगले विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) बने, जबकि विधानसभा उपाध्यक्ष पद जद (एस) के खाते में गई। कांग्रेस के 22 और जद (एस) से 12 मंत्री होंगे। शुक्रवार को विधानसभा में होने वाले शक्ति परीक्षण के बाद कुमारस्वामी ने शपथ ग्रहण किया। वह एक हफ्ते के अंदर कर्नाटक में शपथ लेने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बने । दरअसल, भाजपा के प्रदेश प्रमुख बीएस येदियुरप्पा ने 19 मई को शक्ति  परीक्षण का सामना किए बगैर इस्तीफा दे दिया था। वहीं इससे पहले कुमारस्वामी ने कहा कि विभागों के आवंटन पर शुक्रवार को चर्चा होगी। गठबंधन के सुचारू रूप से कामकाज करने के लिए एक समन्वय समिति गठित की जाएगी। जद (एस) प्रमुख एवं पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के तीसरे पुत्र कुमारस्वामी को राज्यपाल वजुभाई वाला विधानसभा के सामने शाम साढ़े चार बजे पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। इस समारोह के लिए बड़ा मंच बनाया गया था जिसमें कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेता शरीक हुए। माना जा रहा है कि इस मंच के जरिए 2019 के आमचुनाव से पहले भाजपा को विपक्षी एकजुटता का एक संदेश दिया गया है। बता दें कि कुमारस्वामी का यह दूसरा कार्यकाल है। इससे पहले उन्होंने फरवरी 2006 से अक्तूबर 2007 के बीच 20 महीनों तक जद (एस)-भाजपा गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया था। उन्होंने स्वीकार किया कि अगले पांच साल कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन की सरकार चलाना उनके लिए  बड़ी चुनौती रहेगी। गौरतलब है कि 224 सदस्यीय विधानसभा की प्रभावी क्षमता फिलहाल 221 सदस्यों की है। विधानसभा चुनाव में भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी।