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मोदी काशीको देंगे नयी सौगात

कई योजनाओंका करेंगे लोकार्पण-शिलान्यास
वाराणसी/नयी दिल्ली। तमाम व्यस्तताओं से समय निकालकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर जा रहे हैं।   वाराणसी में अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री कई बुनियादी सुविधाओं रेलवे, वस्त्र, वित्तीय समावेशन, पर्यावरण और स्वच्छता, पशुपालन, संस्कृति तथा अध्यात्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने नरेन्द्र मोदी के वाराणसी दौरे के बारे में जानकारी देते हुये बताया है कि बाड़ा लालपुर में वह दीनदयाल हस्तकला संकुल में हस्तशिल्प के लिये एक व्यापार सुविधा केंद्र राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसके अलावावह वीडियो लिंक के माध्यम से वाराणसी से गुजरात में सूरत और वड़ोदरा के लिये महामना एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसी स्थान पर प्रधानमंत्री वाराणसी में विभिन्न विकास कार्यों की आधारशिलाओं की पट्टिकाओं को रखेंगे और इन कार्यों को वाराणसी के लिये समर्पित करेंगे। उन्होंने नवरात्रि के अवसर पर ट्वीट कर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी। इसके अलावा मोदी उत्कर्ष बैंक की बैंकिंग सेवाओं का उद्घाटन करेंगे और बैंक के मुख्यालय की इमारत की आधारशिला के लिये एक पट्टिका का अनावरण भी करेंगे। उत्कर्ष बैंक को माइक्रो फाइनेंस के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है। प्रधानमंत्री एक वीडियो लिंक के माध्यम से वाराणसी के लोगों को एक जल एम्बुलेंस सेवा और एक जल शव वाहन सेवा भी समर्पित करेंगे। २२ सितम्बर की शाम को प्रधानमंत्री यहां के ऐतिहासिक तुलसी मानस मंदिर का दर्शन करेंगे और रामायण पर एक डाक टिकट जारी करेंगे। इसके बाद वह शहर के दुर्गा माता मंदिर का दर्शन करेंगे। २३ सितम्बर को प्रधानमंत्री शहंशाहपुर गांव में एक स्वच्छता कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और इसके बाद वह एक पशुधन आरोग्य मेला जायेंगे। मोदी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित करेंगे और सभा को संबोधित भी करेंगे।  वहीं जल संसाधन मंत्रालय ने बताया कि २२ सितम्बर को प्रधानमंत्री वाराणसी के रमना में ५० एमएलडी क्षमता वाले सीवेज परिशोधन संयंत्र (एसटीपी) की आधारशिला रखेंगे। इस संयंत्र का निर्माण १५३ करोड़ रुपये की लागत से हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर किया जाने वाला है।
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कृषि क्षेत्रमें सहकारिताको मिले बढ़ावा-मोदी
नयी दिल्ली (आससे)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सहकारी आंदोलन केवल पद्धति बदलने के लिये नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी भावना है जो कुछ अच्छा करने के लिये लोगों को साथ लेकर चलती है। आज यहां सहकारिता आंदोलन के प्रणेताओं में से एक लक्ष्मण राव ईनामदार के जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित सहकार सम्मेलन को संबोधित करते हुये मोदी ने कहा कि भारत में सहकारी क्षेत्र का बढऩा स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जहां सहाकरिता के जरिये सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। सहकारिता आंदोलन को देश के स्वभाव के अनुरूप बताते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उधर लिया हुआ विचार या व्यवस्था नहीं है, बल्कि हमारे मूलभूत चिंतन स्वभाव और संस्कार के अनुकूल व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि देश में सहकारिता आंदोलन स्वाभाविक रूप से पनपा, इसके लिये कोई विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हम अपने यहां बाहर की उधार ली हुयी व्यवस्थाओं को लागू करने की कोशिश करते हैं तो उसका स्वाभाविक प्रतिरोध होता है। सहकारिता आंदोलन को देश की सहज प्राकृतिक व्यवस्था का हिस्सा बताते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि हम मिलकर काम कर सकते हैं।  २०२२ तक किसानों की आमदनी दोगुना बढ़ाये जाने पर जोर देते हुये मोदी ने कहा कि मधुमक्खी पालन और समुद्री शैवाल की खेती जैसे नये क्षेत्रों में सहकारिता का प्रयोग किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि शहरी भारत के विकास के साथ ही ग्रामीण भारत का विकास भी बहुत महत्वपूर्ण है। कृषि जगत को आधुनिक भारत के संदर्भ में तैयार करके इसे ग्रामीण जीवन से जोडऩे का सुझाव देते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि शहर आगे बढ़ जायें और गांव को हम पीछे छोड़ दें, ऐसा संभव नहीं है।