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विकासका आतंकका किला ध्वस्त

योगी सरकार एक्शनमें,लग्जरी कारों समेत सब कुछ तहतनहस
  • गिरफ्तारीके लिए कई जिलोंमें दबिश
  • पिता,नौकरानी सहित  कई हिरासतमें
बिकरू (कानपुर) (आससे)। डीएसपी समेत पुलिस के आठ जांबाज जवानों को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाले माफिया डॉन विकास दुबे को पूरे प्रदेश की ४० से ज्यादा तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों की टीमें गिरफ्तार करने के लिए लगाई गईं हैं। एसटीएफ और एटीएस की भी मदद ली जा रही है। कानपुर शहर के अलावा मुख्यमंत्री के आदेश पर प्रदेश की सीमाएं सील कर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया, पर इस जघन्य वारदात के ४८ घंटे बीत जाने के बाद भी कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। वहीं विकास दुबे के बिकरू गांव में आज दिनभर बुलडोजर से उसकी लग्जरी कारें, ट्रैक्टर और आधा दर्जन से ज्यादा वाहनों को तहस-नहस कर डाला। पुलिस ने उसका किलानुमा मकान भी बुलडोजर चलवाकर पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। इसी मकान की छत से विकास पुलिस के जवानों पर गोलियां चलाकर उन्हें छलनी कर दिया था। इससे पहले रात में ही पुलिस ने सर्च आपरेशन चलाकर विकास के घर से कई अहं दस्तावेज जब्त कर लिए थे, जिससे उसके तमाम बड़े नेताओं, व्यापारियों और अन्य काले धंधे में लिप्त लोगों के संपर्कों का पता चला है। इन्हीं संपर्कों के आधार पर पुलिस टीमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में दबिशें भी दे रही हैं। एसटीएफ के डॉटा फिल्ट्रेशन में माफिया डॉन विकास दुबे के संपर्कियों में २२०० ऐसे मोबाइल नंबर सामने आए हैं, जिनको क्रास लिंक करके माफिया की टोह लेने की कोशिश की जा रही है। वैसे तो २००० से ज्यादा मोबाइल कॉलर्स को विकास दुबे की धरपकड़ अभियान में लगी टीमें लिसनिंग मोड में लिए हुए हैं।  विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए जिन ४० टीमों को लगाया गया है, उनमें १५०० से ज्यादा दरोगा-सिपाही शामिल हैं। जो न केवल सर्विलांस बल्कि अपराध के आधुनिक तौरतरीकों से निपटने में महारथ हासिल किए हैं। चूंकि विकास दुबे कुख्यात अपराधी है, इसलिए हर दबिश की मॉनीटरिंग एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश और डीआईजी अनंतदेव तिवारी खुद कर रहे हैं। एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार भी हर स्थिति पर नजर रखे हैं और हर चार घंटे में प्रोग्रेस रिपोर्ट डीजीपी और   मुख्य सचिव को सौंपी जा रही है। इधर आज दोपहर बिकरू गांव में चार कंपनी पीएसी और दो दर्जन थानों के पुलिस बल ने पहले गांव में फ्लैग मार्च किया और फिर माफिया विकास दुबे के घर को छावनी में तब्दील कर दिया। यहां मौजूद विकास के वृद्ध पिता, नौकरानी व उसके बच्चों को हिरासत में लेकर मकान खाली करा लिया। फिर ऊंची बाउंड्रीवाल के अंदर मौजूद दो ट्रैक्टर, मोटरसाइकिलें, दो लग्जरी कारें नेस्तनाबूद कर दीं। इसके बाद मुख्यद्वार तोड़ डाला। बाउंड्री ध्वस्त कर दी। फिर दोपहर बाद मकान के अंदर मौजूद घर-गृहस्थी का आलीशान कीमती सामान तहस-नहस कर डाला। पुलिस का अभियान यहीं नहीं रुका। देर रात तक बुलडोजर से पूरा किलानुमा मकान भी जमींदोज कर दिया गया।  आज पुलिस की कार्रवाई पूरी योजनाबद्ध तरीके से थी। पहले तो पुलिस ने तोडफ़ोड़ की इस कार्रवाई की मीडिया कवरेज पर रोक लगाने की कोशिश की, पर बाद में मकसद में कामयाबी न मिलते देख योजना के तहत पुलिस के चर्चित चेहरे मौके से पीछे हट गए।
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सामने आयी खाकी की दगाबाजी
कानपुर (आससे)। माफिया सरगना विकास दुबे द्वारा पुलिस के आठ जांबाजों को मार गिराने में खाकी की दगाबाजी सामने आई। थानाध्यक्ष चौबेपुर की भूमिका न केवल पुलिस के मुख्य भेदिया के रूप में सामने आई है, बल्कि हैरान करने वाली बात तो यह कि जिस वक्त विकास व उसके गुर्गे अपने किलानुमा हवेली से डीएसपी, दरोगाओं व सिपाहियों पर ताबड़तोड़ गोलियां दाग रहे थे तब उनकी सरकारी पिस्टल खामोश थी। यहां गौरतलब यह भी है कि चौबेपुर एसओ विनय तिवारी दबिश टीम के अगुआकार थे और शहीद डीएसपी देवेंद्र मिश्रा पूरी आपरेशन की कमान संभाले थे। जिस वक्त  विकास ने दो दरोगाओं को ढेर कर दिया था और उसके गुर्गे उनके शवों के साथ बेहूदगी और वर्दी को अपमानित कर अट्टहास कर रहे थे तब एसओ चौबेपुर मोर्चा लेने के बजाय मौके से भाग खड़े हुए। मुठभेड़ की तैयारी आधी-अधूरी थी। न ड्रगन लाइट थी, न सेमीजेनसेट था। फायर पावर और रबर बुलेट व वाटर कैनन जैसी जरूरी उपकरण भी साथ नहीं थे। बहुत अहं सवाल यह है कि जब रात एक बजे मुठभेड़ की प्लानिंग की गई थी तो यह स्वाभाविक है कि अंधेरा होगा। ऐसे में कोई योजना अंधेरे से लडऩे की योजना नहीं थी। सरकारी दस्तावेज भी दगाबाजी की कहानी चीख कर कह रहे हैं।