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आपसी संवादसे निकलेेगा अयोध्या विवादका हल-योगी

लखनऊ (आससे)। अयोध्या आने के सवाल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिगम्बर अखाड़ा में अपने उद्बोधन के दौरान दो बार कहा कि मैं बार-बार अयोध्या आता हूं और आता रहूंगा। उन्होंने तर्क दिया कि मंै अगर संतों के समाधि पर श्रद्धांजलि देने आता हूं तो इसमें किसी को क्या आपत्ति होना चाहिए। अगर राम की महिमा को नजदीक से देखने का अवसर किसी को मिलता है तो इससे उसे वंचित नहीं करना चाहिए। अयोध्या आने पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रामजन्म भूमि के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये है। हमें उस पर विचार करना चाहिए। शीघ्र सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहल सुप्रीम कोर्ट करने जा रहा है। संवाद से समाधान होना अच्छा होगा। जिस दिन संवाद के माध्यम से समाधान करेंगे उस दिन जो ताकतें भारत को मजबूत नहीं होने देना चाहती उनके लिए सबसे बड़ा शोक का दिन होगा। अयोध्या में संवाद बढ़ाने के लिए बातचीत प्रारम्भ हो सरकार यही चाहेगी और इसमें सहयोग भी करेगी।     उन्होंने कहा कि समाज को जाति के नाम पर बांटने की साजिश रची जा रही है। इसे संतों को चुनौती के रुप में लेना होगा। एक बार पुन: अलख जगाने के लिए संतों को आगे आना होगा। चक्रवर्ती सम्राट की शुरुवात अयोध्या से होती है हमें इससे प्रेरणा लेनी होगी। उन्होंने कहा कि अयोध्या प्राचीन भारत की सप्तनगरियों में एक है। जिन्होंने दुनिया को सभ्यता का पाठ पढ़ाया है। पूरी दुनिया की पहचान राम और बुद्ध के नाम से होती है। हमें उस पर गौरवान्वित होना चाहिए। दुनिया में मुस्लिम देश है इण्डोनेशिया, लेकिन वहां का नेशनल फेस्टबल है रामलीला केन्द्र सरकार ने देश के सभी प्रतीकों जोड़कर पूरे देश को राजनैतिक एकता के सूत्र में बांधने का काम किया है। अपने सम्बोधन में उन्होंने परमहंस और अवैद्यनाथ के सम्बंधों की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि गोरक्षपीठ व परमहंस का सम्बंध 1949 के प्रारम्भ से चला आ रहा है। श्रीराम जन्मभूमि के आन्दोलन के प्रारम्भ से परमहंस व अवैद्यनाथ का आपसी सामजस्य था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामजन्म भूमि आन्दोलन के प्रणेता रहे महंत रामचन्द्र दास की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने अयोध्या आये थे। मुख्यमंत्री श्रद्धांजलि सभा में दिगंबर अखाड़ा परिषद के मंच पर मौजूद होने वाले वरिष्ठ संतों में सभा की अध्यक्षता राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। इसके अतिरिक्त दिगंबर अखाड़ा परंपरा के नासिक के महंत गंगा दास निर्वाणी अनी अखाड़ा के महंत धर्मदास, जगतगुरु वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर, जगतगुरु श्रीधराचार्य, जगतगुरु राघवाचार्य सहित अन्य कई वरिष्ठ संत कार्यक्रम में मौजूद रहे। राजनीतिक प्रतिनिधियों के रूप में सांसद लल्लू सिंह विधायकगण वेद प्रकाश गुप्ता, रामचंद्र यादव, गोरखनाथ बाबा, श्रीमती आशा सिंह, इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू व दिगम्बर अखाड़ा के महन्त सुरेश दास मंच पर मौजूद रहे।
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