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पूर्वांचलमें बाढ़से बिगड़े हालात

सैकड़ों गांव पानीसे घिरे, फसलोंको भारी क्षति
वाराणसी (ह.स.)। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में बाढ़ से स्थिति काफी बिगड़ गयी है। गंगा के साथ घाघरा में भी उफान के चलते अधिकांश जगहों पर जल स्तर खतरा के निशान बिन्दू के पास पहुंच गया हैं। गंगा में प्रतिघंटा एक सेमी.जलस्तर वृद्घि होने से चंदौली, भदोही, वाराणसी, गाजीपुर,बलिया, आजमगढ़ में खतरा के निशान बिन्दू से ऊपर बह रहा है। बाढ़ के पानी से सैकड़ों गांव घिर गये हैं और तटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीण बाढ़ राहत शिविरों में शरण लिये हुए है। यमुना १६लाख क्यूसिक पानी छोड़े जाने से गंगा सहित प्रमुख सहायक नदियां उफान पर है, बाढ़ का सबसे ज्यादा असर बलिया और मिर्जापुर में है। इन जिलों में बाढ़ कें चलते कई स्थानों पर पुलों और सड़कों के ऊपर पानी बहने से सम्पर्क टूट गया है। जिला प्रशासन सभी बाढ़ चौकियों को एलर्ट कर दिया है तथा एनडीआरएफ के जवान पानी में फंसे लोगों को नावों द्वारा सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे है। वाराणसी में गंगा के साथ वरुणा भी कहर बरपा रही है। गंगा का पानी रिहायशी इलाकों में प्रवेश करनेसे लोग छतों पर शरण लिये है। बाढ़ से धान, मक्का, बाजरा, उरद, मूंग सहित खरीफ की  फसलों को काफी क्षति पहुंची है। गाजीपुर। गंगा नदी के साथ ही सहायक नदियों में उफान से जनपद में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है वहीं चंबल नदी में बाढ़ को देखते हुए जमुना नदी में तीन दिन के भीतर १६००००० क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा नदी में दो दिन भीषण बाढ़ आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन सतर्क दृष्टिï बनाये हुए है। जिलाधिकारी के बालाजी ने अधिनस्थो को बाढ़ की स्थिति पर सतर्क दृष्टिï रखने तथा राहत व बचाव कार्य युद्घ स्तर पर चलाने हेतु निर्देशित किया है। बाढ़ की वीभिषिका को देखते हुए जिलाधिकारी ने गहमर कामाख्या मंदिर में बनाये गये शरणार्थी शिविर का स्थलीय निरीक्षण कर राहत कार्य व बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को बाढ़ प्रभावित गांवों में कैम्प के माध्यम से दवाओं का वितरण का निर्देश दिया है। आजमगढ़। घाघरा नदी उफान पर है। साथ ही यह खतरा बिन्दु के पास पहुंच  चुकी है। यही वजह है कि देवरांचल के लोग काफी सहमे हुए हैं। सहमेपन के कारण ही यहां के लोग अपने ही हाथ से अपना आशियाना तोडना शुरू कर दिये हैं। इसकी वजह यह है कि हर साल इस इलाके में बरसात काल बनकर आती है और इस काल के गाल में कई गांव समा जाते हैं। बाढ़ का पानी हटने के बाद कई गांवों का नक्शा बदला हुआ होता है। बंधे के कटान के बाद नदी का रूख मुड़ जाता है। ऐसे में बरसात के बाद लोग नये सिरे से अपनी गृहस्थी बसाते हैं। प्रकृति के कहर के कारण ही इस इलाके में पक्के मकान काफी कम हैं। लोग घास-फूस की रिहायशी झोपडियां बनाकर रहते हैं। बरसात में यह झोपडियां बह जाती हैं। जिन कुछ लोगों के साधारण पक्के मकान हैं वह लोग बरसात शुरू होते ही खुद अपना पक्का मकान तोड़कर ईंटें एकत्रित करके रख लेते हैं ताकि वह बरसात में बह न जाय। मकान तोडने के बाद ईंटें सुरक्षित बच जाती हैं।  रेवती (बलिया)। गंगा की प्रलयंकारी लहरों की तबाही अभी निरंतर जारी है। उधर घाघरा ने भी अपनी आंखें तरेरनी शुरू कर दी है। प्रति घंटा १ सेंटीमीटर से ऊपर की रफ्तार से घाघरा का बढ़ाव निरंतर जारी है। चांदपुर गेज पर नदी का जलस्तर खतरा बिन्दू ५८ मीटर के सापेक्ष    गुरुवार की सुबह ५७.२३ सेंटीमीटर पर पहुंच गया। खतरा बिन्दू से अठखेलियां कर रही घाघरा की लहरों को देख तटबंधीय इलाकाई लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें घर लकीरें गहराने लगी हैं। करीब चार दर्शकों से घाघरा की प्रचंड लहरों से टक्कर लेते-लेते टीएस बन्ध कमजोर हो चुका है। भदोही। गंगा की धारा अब किनारों से नाता जोडऩे के बाद बस्तियों में घुसने को आमादा नजर आ रही हैं। हफ्ते भर से गंगा नदी में चल रहा जलवृद्धि का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। सीतामढ़ी स्थित केंद्रीय जल बोर्ड के मीटर गेज कर्मचारी धनजंय ने बताया कि गुरुवार को पानी प्रति घण्टे 1 सेमी की गति से बढ़ रहा था किन्तु दोपहर 1 बजे से जलस्तर वृध्दि की रफ्तार प्रति घण्टे 2 सेमी मापी गई। वास्तव में त्रिपथगामिनी अब रौद्र रूप धारण करती दिख रही हैं। उफनती गंगा के पानी व पानी के तेज बहाव वाली धारा देख गंगा तटवासियों में हलचल मच गई है। सीतामढ़ी घाट पर स्थित उडिय़ा बाबा आश्रम दीर्घ ऊंचाई तक गंगा की जलधारा से बुरी तरह जहां घिर गया है वहीं कोनिया इलाके छेछुआ भुर्रा गजाधरपुर हरिरामपुर सहित अन्य तराई गांवों में कटान बेहद तेज हो गई है।