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डीजल-पेट्रोल पर राहत नहीं

सरकार बना रही दीर्घकालिक रणनीति

नयी दिल्ली (आससे)। डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी से चिन्तित सरकार अब इस समस्या के स्थायी समाधान के लिये दीर्घकालिक रणनीति पर विचार कर रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुयी। बैठक के बाद सरकार की तरफ से कहा गया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत देने के लिये कोई फैसला जल्दबाजी में नहीं किया जायेगा। आज यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुयी केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मीडिया के सवालों के जवाब में विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पेट्रोल औरडीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी पर सरकार चिंतित है और इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान पर काम किया जा रहा है।  पेट्रोल की कीमतों में नरमी के लिये आबकारी शुल्क में कटौती की मांग के सवाल पर प्रसाद ने कहा कि सरकार इस शुल्क से मिली रकम को राजमार्गों, डिजिटल बुनियादी ढांचों, गांवों को बिजली, अस्पताल और शिक्षा सहित देश के विकास में इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि बार-बार ईंधन की कीमतों में बढ़ोत्तरी का मामला बहस और चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कीमतों के संबंध में चिंता और अनिश्चितता सहित इस पूरी प्रक्रिया में सरकार शामिल है। प्रसाद ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों से अनिश्चितता जैसा माहौल है और एक नयी आपात जैसी स्थिति पैदा हुयी है। उन्होंने कहा कि सरकार औपचारिक कदम उठाने के बजाय, इसपर दीर्घकालिक नजरिये से काम कर रही है, जिससे न सिर्फ अनिश्चितता का हल निकले, बल्कि बार-बार बढ़ोत्तरी और कमी से पैदा होने वाली अनावश्यक दिक्कत का समाधान हो। हालांकि उन्होंने इससे अधिक कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। इससे पहले केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ला ने पेट्रोल तथा डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर आज एक बयान में कहा कि कच्चा तेल अयातित होता है। विदेशी कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय कह चुका है कि पेट्रोल तथ डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि लेकिन मुद्दा यह है कि इस प्रस्ताव को जीएसटी परिषद के समक्ष तबतक नहीं लाया जा सकता है, जबतक सभी राज्यों के वित्त मंत्रालय इसे मंजूरी न दें। गौरतलब है कि पहले हर १५ दिन में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बदलाव होता था, लेकिन पिछले वर्ष राजग सरकार ने इसका आधार दैनिक कर दिया। कर्नाटक चुनाव से पहले १९ दिन तक तेल कंपनियों ने कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन चुनाव की ठीक बाद पेट्रोल की कीमत में २.५४ रुपये और डीजल की कीमत में २.४१ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी कर दी गयी। जिसके बाद दोनों उत्पादों की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गयी। इस वृद्धि की वजह से मोदी सरकार पर विपक्षी दल चौतरफा हमला कर रहे हैं।