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१० नक्सल प्रभावित राज्यों में मजबूत होगा संचार नेटवर्क

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में योजना के दूसरे चरण को दी गयी मंजूरी
नयी दिल्ली(आससे)। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड सहित वाम चरमपंथ प्रभावित क्षेत्रों में संचार सेवाओं को मजबूत किये जाने के दूसरे चरण के प्रस्ताव को आज अपनी मंजूरी दे दी है। कुल ७३३० करोड़ रुपये की लागत से इस चरण के तहत १० राज्यों के ९६ वाम चरमपंथ प्रभावित इलाकों में मोबाइल टावर लगाये जायेंगे।  आज यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुयी केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में उक्त निर्णय लिया गया। बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में विधिमंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि गृहमंत्रालय द्वारा चिन्हित ४०७२ टावर लोकेशनों पर मोबाइल सेवा प्रदान करने के लिये सार्वभौमिक दायित्व कोष समर्थित योजना को मंजूरी दी गयी है। प्रसाद ने बताया कि दूसरे चरण की यह परियोजना १० राज्यों के ९६ चरमपंथ प्रभावित क्षेत्रों के लिये है।  प्रसाद ने बताया कि कुल ७३३० करोड़ रुपये की इस परियोजना से तैयार होने वाले नेटवर्क के इस्तेमाल वाम चरमपंथ प्रभावित इलाकों में तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा किया जायेगा। यह परियोजना मोबाइल सेवाएं भी प्रदान करेंगी, जिससे कि संपर्क रहित आबादी वाले निवासियों की मदद की जा सके।  प्रसाद ने बताया कि इसके तहत बिहार के ८ जिलों में ४१२, झारखंड के २१ जिलों में १०५४ और उत्तर प्रदेश के ३ जिलों में १७९ टावर लगाये जायेंगे। उन्होंने बताया कि इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में सुधार होगा। यह परियोजना डिजिटल मोबाइल संपर्क की उपलब्धता के साथ पिछड़े और वाम चरमपंथ प्रभावित क्षेत्र में ई-गवर्नेंस गतिविधियों को गति प्रदान करेगी।
बता दें कि पहले चरण की परियोजना के तहत चरमपंथ प्रभावित क्षेत्रों में टूजी टेकनॉलोजी का इस्तेमाल करते हुये मोबाइल सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
इसके लिये ४०८१ करोड़ रुपये मंजूर किये जा चुके हैं और परियोजना पूरा होने के कगार पर है।
गौरतलब है कि गृहमंत्रालय ने १० राज्यों के ९६ जिलों में तैनात सुरक्षाकर्मियों की संचार आवश्यकताओं के लिये संबंधित राज्यों के साथ विचार विमर्श करके ४०७२ टावर लोकेशनों को चिन्हित किया है। इसके बाद मंत्रालय ने एक प्रस्ताव तैयार करके २७ अक्टूबर २०१७ को दूरसंचार विभाग को भेज दिया था। हितधारकों की जरूरत के अनुसार दूसरे चरण की परियोजना में प्रस्तावित टेकनॉलोजी उन्नत बनायी गयी है। मोबाइल संपर्क प्रदान करने के लिये अब इस परियोजना में २जी तथा ४जी टेकनॉलोजी दी जा रही है।