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गाजा तूफानपर केंद्रने जारी की चेतावनी

तमिलनाडु, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश में मचा सकता है तबाही
नयी दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर मंडराने वाले प्रचंड तूफान गाजा को देखते हुए केंद्र सरकार ने आज तमिलनाडु, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश के लिए एहतियाती चेतावनी जारी की है।  पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने एक बयान में बताया है कि गाजा तूफान पश्चिम-दक्षिण पश्चिम दिशा में आगे बढ़ गया है। पिछले छह घंटों के दौरान उसकी रफ्तार २२ किलोमीटर प्रति घंटा रही है। तूफान को चेन्नई और कराइकल में डोपलर वेदर रडार द्वारा ट्रेक किया जा रहा है। मंत्रालय ने १५-१६ नवंबर के लिए तमिलनाडु और पुडुचेरी में भारी वर्षा की चेतावनी दी है। आशंका है कि तमिलनाडु के नागपट्टिनम, तंजावुर, पुदुक्कोटई और रामनाथपुरम जिलों तथा पुडुचेरी के कराइकल जिले में एक मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं और यहां के निचले इलाकों में ज्वार आने की संभावना है।    मंत्रालय ने अपनी चेतावनी में कहा है कि अगले २४ घंटों के दौरान तमिलनाडु एवं पुडुचेरी तथा पड़ोसी दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों पर मछली पकडऩे की गतिविधियां रोक दी जाएं। मछुआरों को सलाह दी जाती है कि अगले २४ घंटों के दौरान वे दक्षिण-पश्चिम एवं पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में समुद्र में न जाएं। इसी तरह तट के निकट झोपडिय़ों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जाती है। प्रभावित क्षेत्रों के अन्य लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है।
८४ सिख विरोधी दंगा : दोषियों के खिलाफ  फैसला सुरक्षित
नयी दिल्ली (हि.स.)। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगों के मामलों में दोषी करार दिए गए दो लोगों की सजा की अवधि पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। एडिशनल सेशंस जज अजय पांडेय सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 20 नवम्बर को सजा की अवधि पर फैसला सुनाने का आदेश दिया। आज सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष की ओर से वकील एचएस फुल्का ने दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की। सुनवाई पूरी होने के बाद जब दोनों दोषियों को कोर्ट से बाहर निकाला जा रहा था, उसी समय दिल्ली के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक आरोपित को पुलिस की मौजूदगी में थप्पड़ जड़ दिया। उसके बाद कोर्ट परिसर में अफरातफरी मच गई। इस घटना की पीड़ितों के वकील एचएस फुल्का ने निंदा की। पिछले 14 नवम्बर को पटियाला हाउस कोर्ट ने दक्षिणी दिल्ली के महिपालपुर में 1984 में दो लोगों की हत्या के मामले में नरेश सहरावत और यशपाल सिंह को दोषी करार दिया था।
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 हेराल्ड मामले में यथास्थिति
नयी दिल्ली(एजेंसी)। एसोसि एटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को राहत देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरूवार को केन्द्र से कहा कि वह 22 नवंबर तक इस मामले में यथास्थिति बनाए रखे। नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक ने शहरी विकास मंत्रालय के 30 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देते हुए मंगलवार को अदालत का रुख किया था। इस आदेश में उसके 56 साल पुरानी लीज को खत्म करते हुए यहां आईटीओ पर प्रेस एरिया में भवन को खाली करने को कहा गया था। मामला जब सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति सुनील गौड़ के पास आया तो केन्द्र ने अदालत को मौखिक आश्वासन दिया कि एजेएल की लीज के मामले में 22 नवंबर तक यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी। न्यायमूर्ति गौड़ ने जब कहा कि वह मामले की सुनवाई किसी और दिन करेंगे और केन्द्र को यथास्थिति बरकरार रखनी चाहिए तो भूमि एवं विकास विभाग की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने उन्हें ऐसा करने का मौखिक आश्वासन दिया।   मेहता ने अदालत को बताया कि वह भोजनावकाश के बाद दलीलें नहीं दे पाएंगे क्योंकि उन्हें किसी मुकदमे में उच्चतम न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई किसी और दिन की जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 22 नवंबर तय की है। एजेएल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यथास्थिति का अर्थ है कि कब्जा वापस नहीं लिया जाना चाहिए और उस वक्त तक सार्वजनिक परिसर (अवैध कब्जाधारियों से मुक्ति), अधिनियम, 1971 के तहत कोई कार्रवाई भी नहीं होनी चाहिए। इस पर अदालत ने कहा कि 'हां, ऐसा हीÓ और साथ ही कहा कि ऐसे में जबकि मामला अदालत में है, उन्हें अदालत को इतना सम्मान तो देना ही चाहिए। मामले पर 13 नवंबर को सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि याचिका में आपात स्थिति जैसी कोई बात नहीं है और वह 15 नवंबर को सुनवाई करेगी क्योंकि उसे अभी तक मुकदमे से जुड़ी फाइल नहीं मिली है। केंद्र सरकार के वकील राजेश गोगना ने कहा कि वे प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं और अगर एजेएल ने परिसर का कब्जा उन्हें नहीं सौंपा तो वे उसमे दोबारा प्रवेश कर लेंगे।