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हलवा रस्मके साथ बजट छपाई शुरू

वित्तमंत्री जेटलीने अधिकारियों - कर्मचारियोंको खिलाया हलवा
नयी दिल्ली (आससे)। वित्तमंत्री अरूण जेटली ने आज नार्थ ब्लाक स्थिति अपने मंत्रालय में हलवा रस्म पूरी कर आम बजट २०१८-१९ की छपाई का आगाज कर दिया। इसके साथ ही छपाई में शामिल कर्मचारियों को तब तक के लिये बंद कर दिया गया है, जबतक की बजट पेश न हो जाय।  मालूम हो कि बजट छपाई की प्रक्रिया से पहले वित्त मंत्रालय में एक बड़ी कड़ाही में हलवा बनाया जाता है, जिसे मंत्रालय के सभी कर्मचारियों के बीच बांटा जाता है। हलवा रस्म के बाद बजट निर्माण एवं उसकी छपाई से सीधे जुड़े अधिकारियों और सहयोगी कर्मचारियों को तब तक मंत्रालय में स्थित एक बंद कमरे में रहना होता है, जब तक कि आम बजट पेश न हो जाय। इस दौरान उनके मोबाइल भी बाहर रहते हैं और वे अपने परिजनों से भी पूरी तरह कटे रहते हैं। उन्हें ई-मेल व अन्य संचार माध्यमों से भी किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क करने की अनुमति नहीं होती है। मालूम हो कि वित्तमंत्री अरूण जेटली १ फरवरी को वर्ष २०१८-१९ के लिये आम बजट पेश करेगे। बजट बनाने और उसकी छपाई प्रक्रिया में आमतौर पर लगभग १०० लोग शामिल होते हैं और ये सभी अधिकारी व कर्मचारी नार्थ ब्लाक के बजट पे्रस में लोकसभा में बजट पेश होने तक रहते हैं।
मोदीका जादू बरकरार, चुनाव हुए तो राजगकी हो सकती है वापसी
नयी दिल्ली(एजेंसी)। देश में अभी चुनाव हुए तो नरेंद्र मोदी की अगुआई में राजग बड़े बहुमत के साथ दोबारा सरकार बनाने में सफल हो  सकती है। कांग्रेस ने स्थिति में थोड़ा सुधार किया है, लेकिन बीजेपी को टक्कर देने की हालत में नहीं है। सर्वे में यह बात सामने आई है जिससे जनता का मिजाज पता लगाने की कोशिश की गई थी। सी वोटर की ओर से यह सर्वे पिछले साल तीन दिसंबर से लेकर इस साल तीन जनवरी तक सभी ५४३ लोकसभा सीटों के दस हजार से अधिक लोगों के बीच किया गया। सर्वे के अनुसार पूरे देश में मोदी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है और वह अकेले ही बीजेपी की गाड़ी खींच रहे हैं। आंकड़ों के स्तर पर बीजेपी के लिए राहत की खबर है,
लेकिन दूसरे तथ्य चिंताजनक हैं। कई लोग मानते हैं कि जमीन पर मोदी सरकार ने उन वादों को पूरा नहीं किया जो २०१४ में किये गये थे। क्योंकि पार्टी समर्थकों में भी इसको लेकर निराशा है कि काम वैसा नहीं हुआ, जितनी अपेक्षा थी। सी वोटर के संस्थापक यशवंत देशमुख ने कहा कि अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर ही है। युवाओं की नौकरी और किसानों की समस्या सबसे बड़ी चुनौती है। अब भी लोगों को उम्मीद है कि जिस अच्छे दिन का भरोसा मोदी ने दिया था वह २०१९तक जरूर पूरा होगा। यूपी की ८० सीटों पर बीजेपी सहयोगियों के साथ ६० सीट जीत सकती है, जबकि सपा के १६ और कांग्रेस-बीएसपी को दो-दो सीट मिलने का अनुमान जताया गया है। सर्वे में माना गया है कि एसपी-कांग्रेस साथ मिलकर लड़ेंगे। २०१४ के आम चुनाव में एनडीए को ७३, एसपी को पांच और कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं।