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नागपुरसे नहीं चलती है सरकार-भागवत

संघने कभी भी संविधानके खिलाफ कोई काम नहीं किया है,संघका प्रमुख काम है व्यक्तिका निर्माण
नयी दिल्ली(आससे)। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कभी भी संविधान के खिलाफ जाकर कोई काम नहीं किया है। सरकार के कामकाज में दखल के आरोपों और अटकलों पर सफाई देते हुये भागवत ने कहा है कि सरकार नागपुर से नहीं चलती है। आज यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित भविष्य का भारत कार्यक्रम के दूसरे दिन बोलते हुये मोहन भागवत ने कहा कि संघ संविधान को मानकर चलता है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी उदाहरण नहीं है, जब हमने संविधान के खिलाफ जाकर कोई काम किया हो।  संघ और राजनीति के बीच संबंधों पर मोहन भागवत ने आज खुलकर बात की। सरकार के कामकाज में दखल के आरोपों को खरिज करते हुये उन्होंने कहा कि लोग कयास लगाते हैं कि नागपुर से फोन जाता होगा, यह बिलकुल गलत बात है। उन्होंने दो टूक कहा कि नागपुर से सरकार नहीं चलती है।  संघ प्रमुख ने कहा कि केंद्र में काम कर रहे काफी लोग स्वयंसेवक हैं। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आदि स्वयंसेवक रह चुके हैं। ऐसे में कई तरह की बातें होती हैं। वास्तव में ये लोग मेरी उम्र के हैं, तो राजनीति में मुझसे वरिष्ठ हैं। संघ कार्य का जितना मेरा अनुभव है, उससे ज्यादा अनुभव उनका राजनीति का है। उनको अपनी राजनीति चलाने के लिये किसी सलाह की जरूरत नहीं है। हम सलाह दे भी नहीं सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर उन्हें सलाह चाहिये और हम दे सकते हैं तो देते हैं। भागवत ने कहा कि राजनीति और सरकार की नीतियों पर संघ का कोई प्रभाव नहीं है। वह हमारे स्वयंसेवक हैं और अपने क्षेत्र में अपना काम करने के लिये समर्थ हैं। देश की व्यवस्था में जो केंद्र संविधान से तय हुआ है, वहीं चलता है और चलना चाहिये, ऐसा हमारा मानना है। राजनीति से संघ का क्या संबंध है, एक ही दल में क्यों सबसे ज्यादा स्वयंसेवक हैं, बाकी दलों में जाने की उनकी इच्छा क्यों नहीं होती है।  इन सवालों का उल्लेख करते हुये भागवत ने कहा कि इस पर उनको विचार करना है। हम किसी भी स्वयंसेवक को किसी एक विशिष्ट राजनीतिक दल का काम करने के लिये नहीं कहते हैं।  भागवत ने कहा कि राष्ट्र के लिये एक विचार को लेकर, एक नीति का स्वप्न लेकर काम करने वालों के पीछे खड़े हो जाओ, ऐसा हम जरूर कहते हैं। वह नीति किसी भी दल की हो सकती है। राष्ट्रहित को सोचकर स्वयंसेवक नागरिक के नाते अपना कत्र्तव्य करते हैं। संघ के कार्य में दायित्वधारी कार्यकत्र्ता राजनीति में बिलकुल भी नहीं पड़ते। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक स्वतंत्र हैं, वे कर भी सकते हैं और नहीं भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संघ का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ता है। हम प्रभाव बढ़ाने के लिये काम नहीं करते हैं। व्यक्ति निर्माण संघ का मुख्य काम है।