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यूपी सहित तीन राज्योंमें जारी रहेगा पेटकोक

 फर्नेस ऑयल पर प्रतिबंध
नयी दिल्ली (आससे.)। उच्चतम न्यायालय ने फर्नेस ऑयल और पेटकोक जलाने पर लगाये गये प्रतिबंध को बरकरार रखा है। न्यायालय के इस आदेश से दोनों ईंधनों का इस्तेमाल करने वाले उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कारखाना मालिकों को झटका लगा है। न्यायालय ने अपने पूर्व के फैसले में उत्तर प्रदेश सहित उक्त सभी राज्यों के कारखानों में पेटकोक और फर्नेस ऑयल के इस्तेमाल पर १ नवम्बर से प्रतिबंध लगा दिया था। तीनों राज्यों के कारखाना मालिकों ने इस आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की थी। न्यायालय ने आज इसी याचिका पर सुनवाई करते हुये अपने पूर्व के आदेश को बरकरार रखा। मालूम हो कि पेटकोक और फर्नेस ऑयल का इस्तेमाल   वस्त्र, रबड़, चीनी मिल, इस्पात, कागज और पैकेजिंग उद्योग में होता है। उत्तर प्रदेश में इस तरह के छोटे-मोटे लाखों कारखाने हैं, जिनमें लोग बड़ी संख्या में काम करते हैं। न्यायालय के आज के फैसले से लाखों लोगों की नौकरियों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इन ईंधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की एक याचिका जानेमाने पर्यावरणविद एमसी मेहता ने वर्ष १९८५ में दाखिल की थी। याचिका से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का मुद्दा उठाया गया था। शीर्ष अदालत ने इसी याचिका पर सुनवाई करते हुये फर्नेस ऑयल और पेटकोक के इस्तेमाल पर रोक लगायी है।
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पद्मावती विवाद
नयी दिल्ली। पद्मावती की मुश्किलें दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही हैं। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी सुनवाई के लिए राजी हो गया है। दरअसल, एक एक जनहित याचिका में ये मांग की गई थी कि फिल्म से आपत्तिजनक सीन हटा दिए जाएं। ये याचिका एक वकील ने की थी। इस याचिका को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और अब इस पर सुनवाई होगी। विरोध करने वालों का कहना है कि फिल्म में महारानी पद्मावती का चित्रण सही ढ़ंग से नहीं किया गया है और इतिहास के साथ भी छेड़छाड़ की गई है। पद्मावती मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई है, जहां अगली सुनवाई की तारीख 20 दिसंबर रखी गई है। याचिका में  मांग की गई है कि फिल्मी की रिलीज पर रोक लगाई जाए, क्योंकि फिल्म से रानी पद्मावती की छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही याचिका में सेंसर बोर्ड को कमेटी बनाकर आपत्तिजनक सीन हटाने का आग्रह किया है। याचिका में ये भी कहा गया है कि जब दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिजली की गलत नजर रानी पद्मिनी पर पड़ी थी तो उन्होंने 16000 अन्य महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था। उनका चरित्र महान था और वह आज भी हमारी आन-बान-शान हैं। फिल्म में इतिहास की मनगढ़ंत कहानी बनाई गई है।
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गुजरातके लिए भाजपाने जारी की ७० नामोंकी सूची
नयी दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए 70 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी जिसमें मुख्यमंत्री विजय रूपाणी राजकोट पश्चिम से उम्मीदवार बनाये गये हैं जबकि महेसाणा से उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल को टिकट दिया गया हैं। भाजपा की इस सूची में ज्यादातर पुराने नेताओं के नाम हैं।  पटेल समुदाय के 17 उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया हैं। मुख्यमंत्री विजयभाई रूपाणी राजकोट पश्चिम विधानसभा सीट से उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल मेहसाणा सीट से और जीतूभाई वाघाणी भावनगर पश्चिम सीट से उम्मीदवार बनाए गए हैं।  सूची में कांग्रेस छोड़कर आए पांच उम्मीदवार भी शामिल हैं। भाजपा ने अंजान विधानसभा सीट से वासणभाई   अहीर को, वाव से शंकरभाई चौधरी को, धराद से परबतभाई पटेल को और दीयोदर सीट से केशाजी चौहाण को उम्मीदवार बनाया है. बुधवार को नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में उम्मीदवारों के नाम को अंतिम रूप दिया गया था। बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत अनेक वरिष्ठ नेता तथा गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी आदि शामिल हुए थेे उस दिन हालांकि सूची जारी नहीं की गयी थी।
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 नीतीश जद यू के असली वारिश
पटना। जदयू के चुनाव चिह्न तीर को लेकर शरद यादव गुट और नीतीश कुमार गुट के बीच चल रही तकरार शुक्रवार को खत्म हो गयी। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को नीतीश कुमार गुट के पक्ष में फैसला देते हुए शरद यादव गुट को झटका दिया हैं।  मालूम हो  कि जदयू के चुनाव चिह्न तीर को लेकर शरद यादव गुट ने भी चुनाव आयोग के समक्ष दावेदारी पेश की थी। इससे पहले चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। चुनाव आयोग द्वारा नीतीश कुमार गुट को तीर दिये जाने की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं में खुशी की लहर है. मालूम हो   कि तीर पर दावे को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष दोनों धड़ों ने गुजरात चुनाव लडऩे की इच्छा से अवगत करा दिया था। नीतीश कुमार गुट की ओर से वरिष्ठ वकील सतीश द्विवेदी और गोपाल सिंह ने अपनी बातें रखीं. उसके बाद शरद यादव गुट ने भी अपना पक्ष चुनाव आयोग के समक्ष रखा। हालांकि, शरद गुट के अरुण कुमार श्रीवास्तव ने उम्मीद जतायी थी कि चुनाव आयोग हमारी बातों से संतुष्ट हैं और उनके हक में ही फैसला आयेगा। नीतीश कुमार गुट की ओर से भी राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह, राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी, पार्टी महासचिव संजय झा,बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री ललन सिंह, वकील सतीश द्विवेदी, गोपाल सिंह आदि चुनाव आयोग के समक्ष पेश होकर अपनी बातें रखी थीं वहीं, शरद गुट की ओर से महासचिव अरुण श्रीवास्तव,गोविंद यादव और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल चुनाव आयोग के समक्ष उपस्थित होकर तीर पर दावेदारी पेश की थी। मालूम हो कि नीतीश कुमार गुट की ओर से दलील दी गयी कि पार्टी के अधिकतर विधायक और सांसद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले के साथ हैं।