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मऊ समाचार

119983 मतोंसे चुनाव जीतकर सबको चौंकाया
मउफ। घोसी लोक सभा चुनाव में गठबन्ध्न उम्मीदवार बसपा के अतुल राय ने 119983मतों से चुनाव जीत कर भाजपा उम्मीदवार और वर्तमान सांसद हरिनारायन राजभर को बुरी तरह पराजित कर दिया है। अतुल राय को जहां 568490वोट मिले। वहीं हरिनरायन राजभर को 448507 मत प्राप्त हुए। इसी क्रम में भाकपा के अतुल कुमार अंजान को 14553 ,कांग्रेस के बालकृष्ण चौहान को 23655,अखंड समाज पार्टी के अबूसाद को 4890,राष्ट्रीय क्रान्तिकारी समाजवादी पार्टी के किशनलाल को 3512,अम्बेडकर समाज पार्टी की गीता को 1361,राष्ट्रीय जनतांत्रिक भारत विकास पार्टी के पारस को 1585,सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के महेन्द्र को 39693,पीस पार्टी के सपफकततकी को 3948,निर्दलीय प्रवीण कुमार सिंह को 1220,राजेश,सूर्य कुमार,सुरजीत कुमार और संतोष को क्रमशः 3635,2145,2867 और 6683मत प्राप्त हुए। जबकि नोटा पर 5283लोगों ने बटन दबाये। गुरूवार को सब्जीमंडी के मैदान में बने मतगणना स्थल पर प्रातः आठ बजे से कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना शुरू हुई। गठबन्ध्न उम्मीदवार अतुल कुमार राय ने शुरू से ही बढ़त बनाई और अन्त तक बढ़त बनाये रखा। कुल 1132027मतों की गिनती पूरी होने में लगभग सवा छह बज गये और देर सायं परिणाम घोषित कर दिया गया। जिला निर्वाचन अध्किरी ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी और पुलिस अध्ीक्षक सुरेन्द्र बहादुर शुरू से अन्त तक डटे रहे। कहीं से कोई आरोप-प्रत्यारोप देखने सुनने को नहीं मिला। हालांकि 48घंटे पहले सपा-बसपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इ्रवीएम बदलने की अपफवाह पर मतगणना स्थल पर हंगामा काटा था। जिससे निबटने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज भी किया था। अतुल राय के जीत का प्रमाण पत्रा उनके अभिकर्ता र्ध्मप्रकाश यादव ने लिया। आरोपों से घिरे होने के चलते अतुल राय प्रमाण पत्रा लेने भी नहीं आये। उल्लेखनीय है कि चुनाव के दौरान ही विपक्षियों ने एक महिला को साजिश में लेकर अतुल राय पर गंभीर धराओं में मुकदमा दर्ज करा कर उनके चरित्रा हनन की कोशिश की थी। जिसके चलते अतुल राय को प्रचार छोड़कर अदालतों का चक्कर लगाना पड़ा। 119983मतों की भारी जीत से विपक्ष के हौसले पस्त हो गये हैं। इसी के साथ चुनाव में लगे अध्किरियों,कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। चुनाव में हारे उम्मीदवार अपनी समीक्षा करने में जुटे हैं। यह दूसरा मौका है जब प्रधनमंत्रा नरेन्द्र मोदी की अपील को मउफ की जनता ने पूरी तरह से ठुकरा दिया है। विधन सभा चुनाव में भी यहां की जनता ने भाजपा गठबन्ध्न उम्मीदवार को नकार दिया था और इस चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवार को आसमान दिखा दिया। जबकि दोनों बार प्रधनमंत्रा मउफ आये और अपने उम्मीदवारों को जिताने को मउफ की जनता से पुरजोर अपील की।

भाजपाको भुगतना पड़ा उम्मीदवार न बदलनेका खामियाजा
बिना प्रचार 1.19 लाखसे अध्कि मतोंसे जीतकर बसपाके अतुल रायने बनाया कीर्तिमान
मउफ। 17वीं लोक सभा चुनाव के लिए घोसी लोक सभा क्षेत्रा में चुनाव परिणाम आने के बाद पिछले चार दिनों से चल रही चर्चाओं पर जहां विराम लग गया है। वहीं यह भी सापफ हो गया है कि कौन कितने पानी में है? निवर्तमान भाजपा सांसद हरिनारायन राजभर की पराजय सर्वाध्कि चर्चा में है। जिन्होंने पिछले कार्य काल में जनता से कोई सरोकार नहीं रखा। यहां तक कि वे कुछ भी कहने पर यह कह देते थे कि घोसी की जनता ने उन्हें नहीं बल्कि मोदी को वोट दिया है। इस चुनाव में भी जब टिकट के लिए मारा-मारी मची थी। दावेदारों की एक लम्बी पफेहरिस्त थी। भाजपा हाई कमान घोसी उम्मीदवार के बारे में कोई पफैसला नहीं ले पा रहा था। अन्तिम समय में जब पिफर हरिनारायन राजभर को उम्मीदवार घोषित किया गया तो विरोध् के स्वर जरूर उठे। मगर,नक्कारखाने में तूती की आवाज की तरह दब कर रह गये। समय बचा ही नहीं था। लोगों ने जबरन थोपे गये भाजपा उम्मीदवार को स्वीकार तो कर लिया। मगर,चुनाव में पूरी तरह से नकार दिया। कुछ नाराजगी तो सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी गठबन्ध्न टूटने से थी। मगर, सुभासपा उम्मीदवार महेन्द्र राजभर भाजपा उम्मीदवार का कुछ खास नुकसान नहीं कर पाये। इस लिए इस बात का भी कोई पछतावा नहीं है कि गठबन्ध्न नहीं टूटता तो भाजपा उम्मीदवार की जीत हो जाती। भाजपा ने अपना यहां उम्मीदवार न बदल कर भारी भूल की। जिसका खामियाजा भाजपा उम्मीदवार के पराजय के रूप में देखने को मिला।  एक तरपफ जहां भाजपा को पूरे देश में प्रचंड बहुमत मिला। वहीं घोसी लोक सभा क्षेत्रा में भाजपा उम्मीदवार की बुरी तरह पराजय ने पार्टी कार्यकर्ताओं को बेहद निराश करने का काम किया है। कांग्रेस उम्मीदवार पर नजर डाली जाय तो बसपा के पूर्व सांसद को कांग्रेस ने चुनाव के मौके पर पार्टी की सदस्यता ग्रहण करा कर सीध्े टिकट देकर मैदान में उतार दिया। कांग्रेस हाई कमान ने भी यहां कल्पनाथ राय के परिवार को दरकिनार कर भारी भूल की। यहां कांग्रेस उम्मीदवार को जितने वोट मिले उससे कहीं ज्यादा पूर्व केन्द्रीय मंत्रा कल्पनाथ राय की पत्नी डा.सुध राय प्रायः हर चुनाव में पाती रहीं हैं। यह अलग बात है कि वो कभी चुनाव जीत नहीं पायीं। घोसी लोक सभा सीट से लड़ रहे 15 उम्मीदवारों में भाकपा के अतुल कुमार अंजान भी चुनाव मैदान में डटे थे। जो राष्ट्रीय स्तर के वक्ता भी माने जाते हैं। मगर,चुनाव में जितने वोट उन्होंने प्राप्त किये उससे यह स्पष्ट हो गया कि जनता उन्हें भी पसंद नहीं करती है। समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार चुनाव लड़ा ही नहीं। यह सीट गठबन्ध्न में गयी और बसपा उम्मीदवार अतुल कुमार राय ने भारी मतों से निर्वाचित होकर यह साबित कर दिया कि चुनाव के दौरान उनके चरित्रा पर उठायी गयी अंगुली को घोसी की महान जनता ने तोड़-मरोड़ कर रख दिया। यह अलग बात है कि अतुल राय ठीक से अपना चुनाव प्रचार भी नहीं कर पाये। सपा-बसपा का हर कार्यकर्ता अतुल राय बन कर ईमानदारी से चुनाव लड़ा। जिसका नतीजा जीत के रूप में सामने आया। अतुल राय की जीत ने यह साबित कर दिया कि यहां का सपा-बसपा कार्यकर्ता समर्पित होकर लगा रहा। उम्मीदवार की बिना मौजूदगी के ही भारी मतों से चुनाव जितवाना एक बहुत बड़ा संदेश देने का काम कर रहा है। वरना,जिस तरह से अतुल राय के पीछे पुलिस पड़ी और उन्हें उसके साथ लुका-छिपी का खेल खेलना पड़ा। घोसी की जनता ने अतुल राय को अपना रहनुमा चुनकर यह साबित कर दिया है कि वह अपने मर्जी की मालिक है। यहां प्रधनमंत्रा नरेन्द्र मोदी की अपील को भी कोई तवज्जो नहीं मिली और ना ही पिछले विधन सभा चुनाव में भी जनता ने उनकी अपील को स्वीकार किया था। उस दौरान जहां परम्परागत रूप से मोख्तार अंसारी को मउफ नगरवासियों ने अपना विधयक चुना। वहीं इस बार मोख्तार अंसारी के ही बेहद करीबी और गाजीपुर जनपद के ही वीरपुर निवासी अतुल राय को जिता कर सबसे अलग संदेश देने का काम किया है। 15उम्मीदवारों में अखण्ड समाज पार्टी के अबूसाद,राष्ट्रीय क्रान्तिकारी समाजवादी पार्टी के किशन लाल,अम्बेडकर समाज पार्टी की गीता,राष्ट्रीय जनतांत्रिक भारत विकास के पारस,पीस पार्टी के सेपफकततकी,निर्दल प्रवीण कुमार सिंह,राजेश,सूर्य कुमार,सुरजीत कुमार,संतोष ने भी अपने दांव आजमाये थे। नोटा पर भी लोगों ने जमकर बटन बताये। नोटा का मत कतिपय उम्मीदवारों के वोटों से भी ज्यादा रहा।
टीवीसे चिपके रहे लोग
मुहम्मदाबाद गोहना;मउफद्ध। मतगणना की सीध्े लाइव प्रसारण को देख रहे लोगों को आज भूख प्यास की भी चिंता नहीं। बड़ी बात तो यह क्षेत्रा में वे जिनमें बुजुर्ग भी हैं जो सुबह 9 से 10 के बीच भोजन न मिलने पर सिर पर घर उठा लेते थे । आज उन्हें भी मानो भूख ही नहीं लग रहा है। शोर शराबा करने वाले बच्चों को भी लोग शांत करा कर पास बैठाये रहे। घर के अंदर से खाना खाने के लिए बुलाए जाने पर भी ध्यान नहीं है। जो महिलाएं  सीरियल देखने के लिए सब कुछ छोड़कर टीवी के सामने बैठ जाती थी । आज उनके खुशी और मनोरंजन पर मतगणना का ग्रहण लग गया। घरों में जागरूक लोग मतगणना के नतीजे देखने के लिए बेताब थे।