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दो सेंटीमीटर प्रति घण्टेकी रफ्तारसे बढ़ रहा गंगाका जलस्तर


सीतामढ़ी। गंगा की धारा अब किनारों से नाता जोडऩे के बाद बस्तियों में घुसने को आमादा नजर आ रही हैं। हफ्ते भर से गंगा नदी में चल रहा जलवृद्धि का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। सीतामढ़ी स्थित केंद्रीय जल बोर्ड के मीटर गेज कर्मचारी धनजंय ने बताया कि गुरुवार को पानी प्रति घण्टे 1 सेमी की गति से बढ़ रहा था किन्तु दोपहर 1 बजे से जलस्तर वृध्दि की रफ्तार प्रति घण्टे 2 सेमी मापी गई। वास्तव में त्रिपथगामिनी अब रौद्र रूप धारण करती दिख रही हैं। उफनती गंगा के पानी व पानी के तेज बहाव वाली धारा देख गंगा तटवासियों में हलचल मच गई है। सीतामढ़ी घाट पर स्थित उडिय़ा बाबा आश्रम दीर्घ ऊंचाई तक गंगा की जलधारा से बुरी तरह जहां घिर गया है वहीं कोनिया इलाके छेछुआ भुर्रा गजाधरपुर हरिरामपुर सहित अन्य तराई गांवों में कटान बेहद तेज हो गई है। बड़ी तेजी से मिट्टी के टुकड़े कटकर गंगा की गोद मे समाहित हो रहे हैं। वहीं बारीपुर व नारेपार गांव के मल्लाह बस्तियों में भी गंगा ने खतरे की घंटी बजा दी है तो अन्य उफनती गंगा के जलजले व तबाही आने की सोच अन्य तट वासियों की भी नींदे उड़ गई हैं। अपुष्ट खबर पर गौर फरमाएं तो अभी गंगा के जलस्तर में वृध्दि जारी रहेगी। सूचना है कि बारिश और मध्यप्रदेश की टोंस नदी व यमुुना नदी में अत्यधिक जलवृद्धि के कारण गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। गत दिनों नरोरा डैम सहित तीन डैमों से भी पानी छोड़ा गया था। सीतामढ़ी स्थित केंद्रीय जल बोर्ड के मीटर गेज की रीडिंग के अनुसार गुरुवार शाम 4 बजे जलस्तर 79.900 मीटर के आंकड़े को पार कर गया। जबकि सर्वाधिक जलस्तर वर्ष 2013 में 81.200 मीटर मापा गया था। हालात देख जिला प्रशासन भी कमर कस चुका है। फिलहाल कटान की जद में आ रहे इलाके का दौरा जनप्रतिनिधियों द्वारा नही किया है। बता दें कि गत वर्षो में सर्वाधिक जलस्तर वर्ष 2013 में 81.200 मीटर रिकॉर्ड किया गया था। लेकिन जिस स्तर से मंदाकिनी के पानी में वृद्धि हो रही है लगता है इस आंकड़े को गंगा का पानी पीछे छोड़ देगा। गंगा का पानी सोमवार को पर्यटन स्थली सीतामढ़ी के गंगा घाट की पक्की सीढिय़ों को छू लिया। वहीं सीतामढ़ी स्थित उडिय़ा बाबा आश्रम भी गंगा के पानी से घिरता नजर आ रहा है तो डीघ के कोनिया परिक्षेत्र के छेछुआ व भुर्रा गांव में कटान ने तेजी पकड़ लिया है। और कई एकड़ भूमि गंगा में समाहित हो चुकी है। उग्र होती जलधारा व कटान को देख गंगा किनारे बसे लोग भयभीत हो गए हैं।