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सीधे उपनिदेशक बनना चाहती हैं सुधा

लखनऊ (एजेन्सियां)। जकार्ता एशियाई खेलों की रजत पदक विजेता ऐथलीट सुधा सिंह ने बुधवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आश्वासन के बावजूद उत्तर प्रदेश का खेल विभाग उनकी नौकरी की राह में रोड़ा बना हुआ है। सुधा ने मंगलवार को राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं के लिए आयोजित सम्मान समारोह में पहले पुरस्कार राशि लेने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा खेल विभाग ने कसम खा रखी है कि वह मुझे अपने यहां नहीं आने देगा। मैंने लगातार तीन पदक जीते हैं। उसके बावजूद मेरे साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है। मैं खेल विभाग में उपनिदेशक का पद चाहती हूं लेकिन नियमों का हवाला देकर कहा जा रहा है कि मुझे यह पद नहीं मिल सकता। मैं अब पूरी तरह निराश हो चुकी हैं। स्टीपलचेज की ऐथलीट सुधा ने मंगलवार को पदक विजेताओं के सम्मान समारोह में यह कहते हुए इनामी राशि लेने से इनकार कर दिया था कि उन्हें रुपये नहीं बल्कि खेल उपनिदेशक का पद चाहिए। हालांकि राज्यपाल राम नाइक के आग्रह पर बाद में उन्होंने पुरस्कार राशि स्वीकार कर ली थी। वर्ष २०१० में ग्वांगझू एशियाई खेलों की स्टीपलचेज स्पद्र्धा में स्वर्ण पदक भी जीत चुकीं सुधा को अब अहसास हुआ कि उन्हें उप-निदेशक पद की मांग नहीं करनी चाहिए थी लेकिन इसके साथ उन्होंने जोड़ा कि पूर्व में ऐसे कई उदाहरण हैं जब ऐथलीटों को खेल उपनिदेशक के पद दिए गए। सुधा ने कहा, उपनिदेशक पद मांगने के लिए मैं माफी चाहती हूं। मुझे क्षेत्रीय क्रीड़ाकारी ही बना दिया जाए, लेकिन विभाग के कुछ लोग ही नहीं चाहते कि मैं उनके महकमे में आ सकूं। सुधा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों हुई मुलाकात में उनसे पुलिस उपाधीक्षक का पद देने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने खेल उपनिदेशक पद की मांग की जिसपर मुख्यमंत्री ने हामी भर दी थी। इसके बावजूद खेल विभाग नियमों का हवाला देकर इनकार कर रहा है। इस बीच, प्रदेश के खेल मंत्री चेतन चौहान ने कहा कि सुधा को खेल विभाग में नौकरी देने में कोई अड़चन नहीं है, मगर वह खेल उपनिदेशक का पद चाहती हैं। इस पर सरकार सीधे नियुक्ति नहीं कर सकती। चौहान ने कहा, उपनिदेशक की नियुक्ति चयन आयोग से होती है और सरकार के पास इस पद पर सीधे नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है। सुधा को पहले क्रीडाधिकारी की ही नौकरी मिलेगी, उसके बाद प्रोन्नत होकर वह उपनिदेशक भी बन सकती हैं। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले की रहने वाली सुधा के एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें राजपत्रित अधिकारी की नौकरी देने की घोषणा की थी। सुधा ने तब कहा था कि नौकरी के लिए उनकी फाइल वर्ष २०१४ से ही शासन में घूम रही है। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण और रजत पदक जीत चुकी हैं। दो बार ओलिम्पिक, दो बार विश्व चैम्पियनशिप और चार बार एशियाई चैम्पियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं। वह अर्जुन पुरस्कार विजेता हैं और इस समय खेल विभाग में उप निदेशक के पद की हकदार हैं।