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दूसरे की बोयी फसल काटने पर आमादा मंत्री ओमप्रकाश राजभर
👉🏽घोसी में खंड-खंड हो गयी सुभासपा,फिर भी भाजपा कार्यकर्ताओं का हक छीना
👉🏽आदर्श चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाते हुए कभी भी देखे जा सकते हैं ओमप्रकाश राजभर

(ऋषिकेश पांडेय)
मऊ। दूसरे की बोयी फसल काटने पर आमादा सूबे के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर का वायरल वीडियो अब घोसी लोकसभा चुनाव पर भी एकदम फिट बैठ रहा है। दरअसल,घोसी लोकसभा कभी कम्युनिस्ट की गढ़ हुआ करती थी। कालान्तर में कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कल्पनाथ राय ने इसे अपना गढ़ बना लिया था। मगर,उनके तिरोधान के बाद सपा और बसपा का बारी-बारी से कब्जा रहा और 2014 में मोदी लहर में भाजपा उम्मीदवार के रूप में हरिनारायण राजभर ने घोसी में भाजपा का परचम फहराकर इतिहास रच दिया।इस लोकसभा में सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर का कोई प्रभाव नहीं था।अलबत्ता उनके सारथी महेंद्र राजभर ने ओमप्रकाश राजभर की फितरतों से तंग आकर सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी का गठन कर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से हाथ मिला लिया और घोसी विधानसभा के उपचुनाव में सत्तारूढ पार्टी भाजपा उम्मीदवार दारा सिंह चौहान को बुरी तरह हराते हुए सपा उम्मीदवार सुधाकर सिंह को विजय श्री दिलाकर विश्व रिकॉर्ड कायम करने का उदाहरण पेश किया है। इसके बावजूद भी सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा से सिर्फ एक सीट पर गठबंधन करते हुए घोसी लोकसभा सीट पर अपने पुत्र अरविंद राजभर को मैदान-ए-जंग में उतार दिया है और लगातार दावा कर रहे हैं कि केहू केतनों चिल्लाई,हमार अरविंद ही इहां से जीतकर जाई। उनके इस बड़बोले पन को लोग घोसी विधानसभा में हुए उपचुनाव से जोड़कर देखने लगे हैं। जहां भी ओमप्रकाश ने कुछ ऐसा ही दावा किया था और चुनाव परिणाम बिल्कुल उलट आया। ओमप्रकाश राजभर के बिना बोयी फसल काटने की राजनीति से खुद भाजपा कार्यकर्ता भी आहत दिख रहे हैं। लेकिन,अनुशासन की चादर में लिपटकर कुछ भी बोलने से परहेज़ कर रहे हैं।अब देखना यह है कि सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर घोसी में बिना बोयी फसल काटकर लेकर जाने में सफल हो जाते हैं कि उन्हें जनता के कोपभाजन का शिकार बनकर काटी गई फसल खेत में ही छोड़कर भागना पड़ता है। बहरहाल,मंत्री घोसी लोकसभा क्षेत्र में आये दिन आदर्श चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाते हुए कभी भी देखे जा सकते हैं।