एक न्यूज चैनल के हवाले से बताया गया है कि जब कोरोना के आईसीयू वार्ड में आग लगी थी, उस समय मेडिकल स्टाफ चाय और स्नैक्स लेने में व्यस्त था। इतना ही नहीं आग लगने के दौरान वार्ड के इंचार्ज भी ड्यूटी पर नहीं आए और न ही उन्होंने अपने न आने की जानकारी किसी को दी।
अस्पताल के बाहर मौज एक मरीज के परिजन ने बताया कि चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल था। धुंआ ही धुंआ ही था। कोई खिड़की से निकलने की कोशिश कर रहा था, उन्होंने बताया कि जैसे ही वो वार्ड में गए, उन्होंने अपनी मां के चिल्लाने की आवाज सुनी, क्योंकि उस समय धुंआ बहुत था, इसलिए आंखों में जलन भी हो रही थी। विवेक ने पहले तो अपने मां को वहां से बाहर निकाला और उसके बाद पिता को कंधे पर बैठाकर बाहर 200 मीटर दूर पुरानी बिल्डिंग में बने दूसरे वार्ड लेकर गए, जहां उनके पिता ने आखिरी सांस ली।