शाबाश सूर्यवंशी, बढ़ा दी तिरंगे की शान
भारत के सिर छठी बार सजा ताज, फाइनल में इंगलैण्ड को १०० रन से हराया
हरारे (आससे)। क्रिकेट के नये ‘वंडरकिड वैभव सूर्यवंशी (१७५ रन, ८० गेंद, १५ छक्के, १५ चौके) ने अंडर-१९ विश्वकप के इतिहास की शायद सबसे प्रभावशाली पारी खेली जिससे भारत ने शुक्रवार को यहां फाइनल में इंगलैंड को १०० रन से हराकर छठा खिताब अपने नाम कर लिया। दिलचस्प बात है कि भारत ने पिछली बार २०२२ में वेस्टइण्डीज में इंगलैंड को हराकर ही खिताब जीता था। भारत ने इससे पहले २०००, २००८, २०१२, २०१८ और २०२२ में आईसीसी ट्राफी जीती थी जो टूर्नामेंट के इतिहास में देश के दबदबे को दिखाता है। दसवीं बार फाइनल में पहुंची भारतीय टीम ने पहले सूर्यवंशी के शतक और उनकी कप्तान आयुष म्हात्रे (५३) के साथ दूसरे विकेट के लिए की गयी १४२ रन की विस्फोटक शतकीय साझेदारी के दम पर नौ विकेट पर ४११ रन का रेकार्ड स्कोर खड़ा किया फिर इंगलैण्ड को ४०.२ ओवर में ३११ रन पर समेट दिया। ४१२ रन के पहाड़ सरीखे लक्ष्य के सामने इंगलैण्ड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने जोसेफ मूर्स (१७ रन) का विकेट १९ रन पर गंवा दिया। इसके बाद बेन डाकिन्स और बेन मेस ने दूसरे विकेट के लिए ७४ रन जोड़े। खिलान पटेल ने मेस को आउट करके इस साझेदारी को तोड़ा। मेस ने २७ गेंदों पर ४५ रन बनाए जिसमें सात चौके और दो छक्के शामिल रहे। भारत को तीसरी सफलता इंग्लिश कप्तान थामस रेव के रूप में मिली जो ३१ रन बनाकर आउट हुए। सलामी बल्लेबाज बेन डॉकिन्स ने अर्द्धशतक जड़ा लेकिन वो उसके बाद ज्यादा देर टिक नहीं पाये। आयुष म्हात्रे ने डाकिन्स का विकेट लिया जिन्होंने सात चौके और दो छक्के की मदद से ५६ गेंदों पर ६६ रन की पारी खेली। राल्फी अल्बर्ट (शून्य) और फरहान अहमद (एक रन) और सेबेस्टियन मार्गन (शून्य) ने विकेट पर रुकने की जहमत नहीं उठाई। मार्गन के आउट होने के समय इंगलैण्ड का स्कोर सात विकेट पर १७७ रन था। यहां से कालेब फाल्कनर और जेम्स मिंटो ने आठवें विकेट के लिए ९२ रन जोड़े। आरएस अम्बरीश ने मिंटो (२८ रन) को आउट करके इस साझेदारी को तोड़ा। फिर अम्बरीश ने मैनी लम्सडेन (तीन रन) को भी चलता किया। कालेब फाल्कनर ने अकेले संघर्ष किया और वो ११५ रन बनाकर आउट हुए। फाल्कनर ने ६७ गेंदों की पारी में नौ चौके और सात छक्के जड़े। उनकी इस पारी का नतीजा रहा कि इंगलैण्ड ने सिमटने से पहले ४०.२ ओवर में ३११ रन बना लिए। भारत की ओर से आरएस अम्बरीश ने तीन विकेट झटके। दीपेश देवेंद्रन और कनिष्क चौहान को भी दो-दो सफलताएं हासिल हुईं। इससे पहले सिक्के की उछाल अपने पक्ष में होते ही भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे ने बल्लेबाजों के अनुकूल पिच पर लक्ष्य देने का फैसला करते हुए पहले बल्लेबाजी चुनी। हालांकि जब पिछले मैच के शतकवीर आरोन जार्ज केवल नौ रन बनाकर एलेक्स ग्रीन की गेंद बेन मेस के हाथों में खेल पवेलियन लौट गये तो लगा कि फैसला कहीं गलत तो नहीं हो गया है लेकिन छोटी से उम्र में विश्व फलक पर अपनी दमदार बल्लेबाजी का लोहा मनवाने वाले नैसर्गिक प्रतिभा के धनी वैभव सूर्यवंशी २२ गज की पट्टïी पर आज कुछ अलग गाथा लिखने के इरादे से आये थे। पहले दो ओवर की सुस्त चाल के बाद वैभव की अगुवाई में टीम इंडिया ने चाल बदली और तूफानी रफ्तार पकड़ ली। इस रफ्तार के सूत्रधार वैभव ने इंगलैण्ड के हर गेंदबाजों को चाहे वह तेज हो या स्पिन पनाह मांगने पर मजबूर कर दिया। इधर पिछले मैच से फार्म में लौटे आयुष म्हात्रे मंत्रमुग्ध हो अपने इस साथी खिलाड़ी की अंग्रेज गेंदबाजों की हो रही धुनाई को देखते रहे। उन्होंने भी प्रेरणा ली और अपने हाथ खोले,जिससे स्कोर बोर्ड पर भारत के खाते में तेजी से रन अंकित होने लगे। वैभव जिस अंदाज में चौके और छक्के लगा रहे थे लग रहा था कि उनकी बुक में एक और दो रन अंकित है ही नहीं। इधर इंगलैण्ड के गेंदबाज के हाथ से गेंद छूटती और वैभव के बल्ले से टकराती तो उस पर चौके या छक्के की छाप पहले से ही पड़ी दिखती। वैभव ने तूफानी अंदाज में ३२ गेंदों पर अर्द्धशतक पूरा कर लिया और इसी अंदाज में खेलते हुए अगला अर्द्धशतक उन्होंने २३ गेंदों में जड़ दिया। इस तरह ५५ गेंदों में शतक लगाकर वह इस टूर्नामेंट में दूसरा सबसे तेज शतक लगानेवाले खिलाड़ी बन गये। इधर म्हात्रे ने भी संयम से खेलते हुए अर्द्धशतक पूरा किया लेकिन जब वह ५१ गेंदों पर सात चौके और दो छक्के की मदद से ५३ रन पर थे तो एलेक्स ग्रीन की गेंद बेन मेस के हाथों में खेल बैठे। म्हात्रे पवेलियन तो लौट गये लेकिन इस दौरान उन्होंने वैभव के संग ९० गेंद में १४२ रन की साझेदारी कर भारत के मजबूत स्कोर की आधारशिला रख दी। शतक के बाद सूर्यवंशी और ज्यादा विस्फोटक हो गये। सूर्यवंशी के दबदबे का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि उनके १०० से १५० रन तक पहुंचने के दौरान दूसरे छोर पर खड़े वेदांत त्रिवेदी ने केवल चार गेंदों का ही सामना किया। इस टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे कम उम्र के शतकवीर बननेवाले वैभव ने इंगलैण्ड के बांये हाथ के स्पिनर राल्फी अल्बर्ट और आफ स्पिनर फरहाद अहमद पर क्रमश: २७ एवं २२ रन बटोरे। सूर्यवंशी की बल्लेबाजी इतनी जबरदस्त थी कि आधे मैच तक भारत का रनरेट लगभग १० था और अनुमानित स्कोर ५०० रन। दो घंटे से भी कम समय में क्रिकेट की दुनिया को हैरान करने के बाद २६वें ओवर में वैभव मैनी लम्सडेन की शार्ट गेंद को स्कूप करने के प्रयास में आउट हो गये। उनका कैच विकेटकीपर थामस रीव ने लपका। वैभव ने ८० गेंदों पर १५ चौके और १५ छक्के की मदद से १७५ रन की अद्भुत पारी खेली। उनके १५० रन केवल चौके और छक्के से आये। वैभव ने वेदांत त्रिवेदी के साथ तीसरे विकेट के लिए ३९ गेंदों में ८९ रन की साझेदारी की। हालांकि इसके बाद उस तीव्र गति से रन नहीं बना बावजूद इसके धमाकेदार शुरुआत का असर रहा कि उनके बाद के बल्लेबाजों ने भी उनकी तरह तो नहीं लेकिन आक्रामक अंदाज अपनाये रखा। वेदांत ने ३६ गेंद में ३२ रन, विहान मल्होत्रा ने ३६ गेंद में ३० रन, अभिज्ञान कुंडू ने ३१ गेंद में ४० रन, कनिष्क चौहान ने २० गेंद में अजेय ३७ रन और आरएस अंबरीश ने १८ रन की पारी खेली जिससे भारत का स्कोर ५० ओवर में नौ विकेट पर ४११ रन हो गया जो टूर्नामेंट के फाइनल के इतिहास में टीम का सबसे बड़ा स्कोर है। पिछला रेकार्ड २५३ रन का था जो कि आस्ट्रेलिया ने भारत के खिलाफ २०२४ में बनाया था।





