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ग्लेशियर आपदा : सेना ने खोली तपोवन में बंद सुरंग, 15 की मौत, 27 लोगों का रेस्क्यू


उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने के बाद सबसे अधिक प्रभावित हुए जोशीमठ के तपोवन में भारतीय सेना के जवानों ने इंजीनियर टास्क फोर्स के साथ मिलकर 2.5 किलोमीटर लंबी सुरंग को खोल दिया है। इस आपदा में अब तक 15 लोगों की मौत हुई है। वहीं 27 लोगों का रेस्क्यू कर बचा लिया गया है। अभी भी 150 से ज्यादा लोग लापता हैं।

एनडीआरएफ के डीजी एसएन प्रधान ने बताया कि 2.5 किलोमीटर लंबी सुरंग में बचाव अभियान चल रहा है। समस्या मलबे के साथ है जो धीरे-धीरे साफ हो रही है। लापता 153 लोगों में से 27 का रेस्क्यू कर बचा लिया गया हैं, वहीं सुरंग में अभी 40-50 लोगों के फंसे होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि हो सकता है बाकी लोग बाढ़ में बह गए हों।

उन्होंने कहा, अभी हमारा पूरा ध्यान 2.5 किलोमीटर लंबी सुरंग के अंदर फंसे हुए लोगों को बचाने पर है। सभी टीमें उसी काम में लगी हुई हैं। सुरंग में 1 किलोमीटर से ज्यादा तक की मिट्टी को हटा दिया गया है। जल्द ही हम उस स्थान तक पहुंच जाएंगे जहां पर लोग ज़िंदा हैं।

भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “जनरेटर और सर्च लाइट लगाकर पूरी रात बचाव कार्य जारी रहा।” फंसे हुए लोगों को निकालने के बाद साइट पर सेना द्वारा बनाए गए फील्ड अस्पताल में उपचार दिया जा रहा है। सूरज उगने से पहले ही भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर बचाव टीमों को लेकर यहां आ गए थे। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “ऊंचे इलाकों की जांच भी की जा रही है, ताकि पता चल सके कि कहीं फिर से हिमस्खलन का खतरा तो नहीं है।”

तपोवन के पास धौलीगंगा नदी में आई बाढ़ के कारण नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) लिमिटेड परियोजना के बहने से करीब 150 लोगों के मारे जाने की आशंका है। एनटीपीसी ने रविवार को एक बयान में कहा, “उत्तराखंड में तपोवन के पास ग्लेशियर टूटने से हमारे निमार्णाधीन जलविद्युत परियोजना के एक हिस्से को नुकसान हुआ है। बचाव कार्य जारी है। जिला प्रशासन और पुलिस की मदद से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।”

बता दें कि जोशीमठ के पास ऋषि गंगा नदी में रविवार सुबह 10.45 बजे के आसपास बाढ़ आ गई थी। ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा नदी में गिरने के कारण इसमें पानी की मात्रा तेजी से बढ़ गई थी। इसके कारण रेनी गांव के पास ऋषि गंगा पनबिजली परियोजना तबाह हो गई। जोशीमठ – मलारी राजमार्ग पर बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) का पुल भी बह गया है। स्थानीय प्रशासन ने कहा, “6 चरवाहे अपने पशुओं के साथ बाढ़ में बह गए थे, उन्हें बचा लिया गया था।”

ऋषि गंगा नदी रेनी गांव के पास धौली गंगा से मिलती है, जिसके कारण धौली गंगा में भी बाढ़ आ गई थी, जिसमें गांव के 6 घर बह गए। नदी के दूसरी तरफ के गांवों को जोड़ने वाले दो पुल भी इस आपदा में बह गए। बीआरओ ऋषिकेश-जोशीमठ-मान मार्ग को साफ करके खोलने में कामयाब रहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और राज्य के अधिकारी इस क्षेत्र में सेना के साथ बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। केंद्र सरकार स्थिति की निगरानी कर रही है और फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए सभी एजेंसियां काम कर रही हैं।