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राजिम धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक समागम का केंद्र: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल


 

रायपुर 6 फ़रवरी/ माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक आयोजित होने वाले सुप्रसिद्ध राजिम माघी पुन्नी मेला का भव्य शुभारंभ आतिशबाजी के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मुख्य अतिथ्य में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्मस्व, पर्यटन एवं गृहमंत्री ने की। समारोह में वन मंत्री , राजिम विधायक, अभनपुर विधायक सिहावा विधायक की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने भगवान श्री राजीव लोचन की प्रतिमा के समक्ष दीप-प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना की।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजिम को कमल क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। माघी पुन्नी मेला के स्वरूप को बिगाड़ कर पूर्ववर्ती सरकार ने कुंभ बना दिया, जिनका खूब विरोध हुआ। हमने छत्तीसगढ़ में सत्ता की बागडोर सम्हालने के बाद इसके प्राचीन एवं गरिमामय स्वरूप को यथावत रखने के लिए संशोधन बिल लाया। हमारी सरकार राज्य की संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार काम कर रही है।

 

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा किसानों के हित के लिए लगातार नए-नए निर्णय लिए जा रहे हैं। इस बार राज्य में रिकार्ड धान खरीदी हुई है। राज्य में 23 लाख 41 से अधिक किसानों से सरकार ने 107.53 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा है। हमरी किसान हितैषी नीतियों के चलते राज्य में खेती का रकबा और किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। बीते 4 सालों में धान बेचने वालों किसानों की संख्या और उर्पाजित धान की मात्रा लगभग दो गुनी हो गई है। किसानों के साथ-साथ सभी वर्गों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए हमने कई नई योजनाएं शुरू की है। गौठान और गोधन न्याय योजना से ग्रमाीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने तथा ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने का नया अवसर सुलभ हुआ है। गरियाबंद जिले के तीन गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने का काम हो रहा है। अब बिजली उत्पादन का भी काम होगा।

 

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि राज्य में 10 हजार गौठान बने है। जिससे पशुपालक किसान और गौपालक खुश है। गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी होने से पशुपालकों को अतिरिक्त आय होने लगी है। राज्य में डेयरी की संख्या बढ़ी है। लघु वनोपज से हर गरीब के घर में पैसा आया है। शिक्षा के लिए स्कूल भवन एवं अन्य अधोसंरचना के विकास के लिए 1000 करोड़ की व्यवस्था की गई है।

 

धर्मस्व मंत्री ने पुन्नी मेला की बधाई देते हुए कहा कि नवीन मेला ग्राऊंड का विकास किया जा रहा है। अगले साल यह मेला नए मैदान में लगेगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्री रामचंद्र जी ने अपने वनवास काल के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य में 2200 किलोमीटर की पदयात्रा की थी। वानवास काल के पूरे दस साल छत्तीसगढ़ में गुजारे थे। प्रभु श्रीराम के वनवास काल की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए राम वन गमन पर्यटन परिपथ का विकास किया जा रहा है। भगवान श्रीराम वनवास काल के दौरान राजिम से गुजरे थे। यहां राम वन गमन पर्यटन परिपथ के तहत 19 करोड़ रूपए की लागत के काम कराये जा रहे है। उन्होंने कहा कि साढ़े तीन किलोमीटर तक सड़क के लिए 41 करोड़ रूपए का काम नवीन मेला मैदान पर होगा। यह सड़क फोरलेन होगी। बोटिंग से लेकर अन्य कार्य आने वाले समय में होगा। मंच, बोर, लेबलिंग का काम शुरू हुआ है। राजिम, चौबेबांधा नवागांव मार्ग के लिए राशि स्वीकृत हुई है। घाट निर्माण भी शुरू हो गया है। मेला में आवश्यकतानुसार जनता को कोई दिक्कत न हो इस बात का ध्यान रखा जा रहा है। साहू ने कहा कि माता राजिम की भक्ति एवं भगवान विष्णु के कृपा इस क्षेत्र पर बनी हुई है। पंचकोशी यात्रा जिनमें पटेश्वरनाथ महादेव, चम्पेश्वरनाथ महोदव, ब्रम्केश्वरनाथ महोदव, फणिकेश्वरनाथ महोदव, कोपेश्वरनाथ महादेव तक पैदल यात्रा करने की अनोखी परंपरा इस क्षेत्र में है।

 

वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि इस क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व है। 118 साल पुराना राजपत्र में राजिम मेला का जिक्र है। राजिम एक शहर नहीं बल्कि संस्कृति एवं आस्था का केन्द्र है। कार्यक्रम को राजिम विधायक श्री अमितेश शुक्ल, अभनपुर विधायक श्री धनेन्द्र साहू और सिहावा विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने भी सम्बोधित किया। कलेक्टर प्रभात मलिक ने मेला आयोजन संबंधी जानकारी दी। इस अवसर पर जिले के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी श्रद्धालु उपस्थित थे।