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केंद्र की राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) की आलोचना करने वाले पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मंगलवार को सरकार से कहा कि वह पहले आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) को इस मुद्दे पर राजी करे।उन्होंने एक बयान में कहा, अगर पीएम, वित्त मंत्री अन्य मंत्री नेशनल मॉनिटाइजेशन पाइपलाइन (राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन) के फायदे को लेकर इतने ही आश्वस्त हैं तो पहले भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) को भरोसे में क्यों नहीं लिया गया? बीएमएस एक आरएसएस से जुड़ा ट्रेड यूनियन है। क्या नेशनल मॉनिटाइजेशन पाइपलाइन के ऐलान से पहले भारतीय मजदूर संघ से सलाह ली गई थी?
चिदंबरम ने आरोप लगाया कि सच्चाई यह है कि किसी से सलाह नहीं ली गई। चिदंबरम ने आगे केंद्र पर हमला करते हुए कहा, सच्चाई ये है कि किसी से इसे लेकर संपर्क नहीं किया गया। छोटे पदाधिकारियों से गुमराह करने वाले बयान दिलाने की जगह उन्हें 3 सितंबर को मुंबई में पूछे गए मेरे 20 सवालों के जवाब देने चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 3 सितंबर को केंद्र की प्रस्तावित एनएमपी पर 20 सवाल पूछे थे, जिसका मकसद कुछ संपत्तियों का मुद्रीकरण करना इस पर अगले चार साल तक 6 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करना है।