पटना। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने कैंसर होने का खुलासा करके कई लोगों को चौंका दिया था। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा था कि वह 6 महीने से कैंसर से जूझ रहे हैं। वह अब लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए योगदान नहीं दे पाएंगे। सुशील मोदी के एलान से पूरा सियासी जगत स्तब्ध रह गया था।
लालू से लेकर नीतीश कुमार ने संवेदना व्यक्त की थी। लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप तो उनके आवास पर मिलने तक पहुंच गए और उनका हालचाल जाना। वहीं लालू यादव ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए पुरानी यादें ताजा की।
तो आइए आज ऐसे ही कुछ नेताओं का नाम जानेंगे जिन्होंने कैंसर से जिंदगी हार गए और वैसे नेताओं के नाम भी जानेंगे जिन्होंने कैंसर जैसी भयानक बीमारी से जंग जीत ली।
अनंत कुमार (Anant Kumar)
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का 12 नवंबर, 2018 को 59 साल की आयु में कैंसर से लड़ते हुए बेंगलुरु में निधन हो गया था। अनंत कुमार बेंगलुरु के एक अस्पताल में फेफड़े के कैंसर का इलाज करा रहे थे और इससे पहले वह अमेरिका और ब्रिटेन में इलाज कराने के बाद भारत लौटे थे। कुमार बेंगलुरु दक्षिण संसदीय क्षेत्र से 6 बार सांसद रहे थे और मई 2014 से वह केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली थी।
शरद पवार (Sharad Pawar)
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार (Sharad Pawar) कैंसर से जंग लड़ चुके हैं। शरद पवार को 1999 में मुंह के कैंसर के बारे में पता चला था और वो सबम्यूकोस फाइब्रोसिस से पीड़ित थे इलाज के लिए पवार न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर गए और वहां उनकी सर्जरी की गई। 2004 में उस सर्जरी से उनका कैंसर सही हो गया लेकिन अभी भी उन्हें बोलने में परेशानी होती है।
यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha)
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और TMC के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा भी कैंसर से लड़ाई लड़ चुके हैं। उन्हें 2006 में लिम्फोमा का पता चला था लेकिन उन्होंने अपनी बीमारी के बारे में किसी को पता चलने दिया। यशवंत सिन्हा दिल्ली के एम्स और मुंबई के रहेजा अस्पताल में 6 कीमोथेरेपी से गुजरे और इसके बाद इस बीमारी को हरा दिया। कैंसर की शुरुआती स्टेज होने की वजह से उन्होंने जल्द ही रिकवर कर लिया।
मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar)
पूर्व रक्षा मंत्री, गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता मनोहर पर्रिकर का 17 मार्च, 2019 को कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया था। बता दें कि पेनक्रिएटिक कैंसर एक जानलेवा कैंसर है जिससे बचने की संभावना बहुत कम होती है। फरवरी 2018 में उन्हें इस बीमारी का पता चला था और उन्होंने इसके इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर लगाए थे लेकिन दुर्भाग्य से उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
वीपी सिंह पूर्व प्रधानमंत्री (VP Singh)
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का 27 नवंबर, 2008 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल (Apollo Hospital) में 77 वर्ष की आयु में कैंसर से जंग लड़ते हुए निधन हो गया था। वीपी सिंह मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित थे, जो एक प्रकार का कैंसर का रूप है। वीपी सिंह को इस जानलेवा बीमारी के बारे में 1998 में पता चला था। वीपी सिंह 2 दिसंबर, 1989 से 10 नवंबर, 1990 तक लगभग 11 महीनों तक प्रधानमंत्री रहे।