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Delhi Metro का परिचालन निजी हाथों में सौंपना कहीं भारी न पड़ जाए, 12 सितंबर को दूसरे ट्रैक पर चली गई थी ट्रेन


नई दिल्ली । : कई हजार करोड़ रुपये के घाटे में चल रहा दिल्ली मेट्रो रेल निगम क्षतिपूर्ति में लगा हुआ है। इसके तहत डीएमआरसी ने खर्च कम करने के लिए यलो लाइन की मेट्रो का परिचालन निजी हाथों में सौंप दिया है। वहीं, 30 अगस्त को बादली डिपो से यात्री सेवा के लिए निकल रही मेट्रो ट्रेन तकनीकी लापरवाही के कारण डिपो में ही पटरी से उतर गई। इसके बाद डीएमआरसी ने निजी एजेंसी के आपरेटर को हटाया।

पिछले दिनों यलो लाइन पर ही क्रास ओवर पर गलत ट्रैक पर मेट्रो के जाने से साढे़ चार घंटे परिचालन भी प्रभावित रहा था। ऐसे सवाल यह उठ रहा है कि दिल्ली मेट्रो का परिचालन निजी हाथों में देना कहीं भविष्य में डीएमआरसी को भारी न पड़ जाए।

मेट्रो का परिचालन निजी हाथों में देना कहीं भारी न पड़ जाए

वहीं, यलो लाइन पर सोमवार (12 सितंबर) को साढ़े चार घंटे परिचालन बाधित होने के मामले में यह बात सामने आई है कि हुडा सिटी सेंटर की तरफ जा रही मेट्रो ट्रेन घिटोरनी स्टेशन के नजदीक क्रास ओवर (ट्रैक बदलने की जगह) पर रास्ता भटकर दूसरे ट्रैक पर चली गई थी। ऐसे में बड़ा हादसा हो सकता था।

दूसरे ट्रैक पर मेट्रो के जाने की घटना परेशानी की बात

गनीमत है कि मेट्रो में कोई यात्री नहीं थे और घटना सुबह-सुबह ऐसे समय में हुई जब यात्रियों के लिए मेट्रो का परिचालन शुरू नहीं हो पाया था। यदि यह घटना व्यस्त समय में होती तो अप और डाउन ट्रैक की दो मेट्रो आपस में टकरा भी सकती थी। ऐसे में यलो लाइन पर रास्ता भटकर दूसरे ट्रैक पर मेट्रो के जाने की घटना सिस्टम की बड़ी चूक है।

कार्रवाई करते हुए चालक को हटाया

मामले की गंभीरता के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने मामले की गहना से जांच शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया येलो लाइन पर मेट्रो परिचालन की जिम्मेदारी संभाल रही निजी एजेंसी के आपरेटर (चालक) की लापरवाही सामने आ रही है, इसलिए चालक को हटा दिया गया है।

घटना की जांच जारी

यलो लाइन दिल्ली मेट्रो का पहला कारिडोर है जिस पर परिचालन की जिम्मेदारी निजी एजेंसी के हाथ में है। डीएमआरसी का कहना है कि तकनीकी कारणों से मेट्रो का परिचालन प्रभावित होने की हर घटना की जांच कराई जाती है। इस मामले की भी जांच रही है। बता दें कि पिछले साल जून से यलो लाइन पर परिचालन की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी संभाल रही है, इसलिए निजी एजेंसी के माध्यम से 150 चालक तैनात किए गए हैं।

ट्रैक बदलने के लिए ओसीसी कमांड जरूरी

घटना के वक्त मेट्रो के आपरेशन कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) में मौजूद कर्मचारियों से भी पूछताछ होगी कि आखिर यह घटना कैसे हुई? क्योंकि परिचालन के दौरान मेट्रो को ओसीसी से ही कमांड दिया जाता है। मेट्रो आटोमेटिक ट्रेन कंट्रोल (एटीसी) सिग्नल सिस्टम से आपरेट होती है। ओवीसी से कमांड के बगैर मेट्रो ट्रैक नहीं बदल सकती।

डीएमआरसी के सूत्रों के अनुसार रविवार रात परिचालन बंद होने के बाद वह मेट्रो सुल्तानपुर स्टेशन पर खड़ी थी। सोमवार (12 सितंबर) को सुबह हुडा सिटी सेंटर से पहली मेट्रो के रूप में उसे यात्रियों को लेकर समयपुर बादली की ओर रवाना होना था, इसलिए मेट्रो सुबह खाली ही सुल्तानपुर से हुड़ा सेंटर की तरफ रवाना हुई।

नहीं दिया गया था ओसीसी से कमांड

सुल्तानपुर के बाद अभी अगले स्टेशन घिटोरनी ही पहुंची थी कि सिग्नल पार कर क्रास ओवर पर रास्ता बदलकर दूसरे ट्रैक पर पहुंच गई। तब चालक ने मेट्रो को रोका। बताया जा रहा है कि उस मेट्रो को हुडा सिटी सेंटर जाने के लिए ओसीसी से कमांड नहीं दिया गया था।

चालक की गलती से दूसरे ट्रैक पर गई दिल्ली मेट्रो

चालक ही मैनुअली मेट्रो को चलाकर हुडा सिटी सेंटर ले जा रहा था। सुबह में विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी मेट्रो को यात्री सेवा में उतारने के लिए सामान्य तौर पर यही प्रक्रिया अपनाई जाती है, इसलिए कहा जा रहा है कि चालक की गलती से मेट्रो दूसरे ट्रैक पर गई। इसके बाद सिग्नल नहीं मिलने और ओसीसी से संपर्क कटने के कारण मेट्रो अप या डाउन किसी भी ट्रैक पर आगे नहीं बढ़ पा रही थी।