नई दिल्ली (एजेंसी)। जंग के बीच ईरान में ईरानी करेंसी की वैल्यू रद्दी के बराबर हो गई है। ईरान ने अब 10 मिलियन ईरानी रियाल यानी कि 1 करोड़ ईरानी रियाल का नोट जारी किया है। कुछ ही दिन पहले ईरान ने आधा करोड़ यानी कि 5 मिलियन के करेंसी नोट जारी किए थे। लेकिन ईरानी करेंसी की हालात इतनी बदतर है कि इससे बाजार और लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हुई।
इसके बाद ईरान ने 1 करोड़ के नोट जारी किए हैं। लेकिन इस भारी-भरकम नोट से भी ईरानी जनता की हालत अच्छी नहीं होने वाली है। क्योंकि ईरान में महंगाई दर उच्चतम स्तर पर है। आप जरूर सोच रहे होंगे कि इस एक करोड़ के नोट से ईरान में अगर शॉपिंग करने निकलें तो ट्रक भर जाएगा। लेकिन अगर आप ऐसा सोचते हैं आप बिल्कुल गलत हैं।
ईरान में एक करोड़ रियाल खर्च कर आप अपना थैला भी नहीं भर पाएंगे। क्योंकि अगर भारतीय रुपया से तुलना की जाए तो एक करोड़ ईरानी मुद्रा की कीमत 600 से 725 रुपये के बीच है। जी हां, आपने ठीक सुना। ईरान का एक करोड़ भारतीय रुपया में लगभग 715 रुपये है और अगर एक करोड़ ईरानी रियाल को अमेरिकी डॉलर में बदलें तो आपको मात्र 7 डॉलर ही मिलेंगे। एक अमेरिकी डॉलर की कीमत ईरान में लगभग 13 लाख 15 ईरानी रियाल है। यही वजह है कि ईरान को अपनी इकोनॉमी चलाने के लिए बहुत बड़े बड़े नोट जारी करने पड़ रहे हैं।
ईरान में 1 करोड़ रियाल में क्या-क्या खरीद सकते हैं?
अगर आपके पास ईरान में 1 करोड़ रियाल है तो भारत के हिसाब से आपके पास 700 से 725 रुपये हैं। ईरान में अभी आटा की कीमत 5.2 लाख रियाल प्रति किलो तक पहुंच गया है। चावल कई जगह 2 लाख रियाल प्रति किलो तक बिक रहा है। दूध, अंडे, चिकन जैसी चीजें भी तेज महंगाई से प्रभावित हैं। ईरान में दूध 6 लाख रियाल प्रति लीटर बिक रहा है।
एक करोड़ ईरानी रियाल में कितनी खरीदारी
अगर ईरान का एक शख्स चार लोगों के परिवार के लिए 1 करोड़ रियाल लेकर रोटी और आटे की दुकान पर जाता है। वहां रोटी खरीदने में ही लाखों रियाल खत्म हो जाते हैं। कई परिवार बताते हैं कि सिर्फ ब्रेड खरीदने में ही करीब 10 लाख रियाल खर्च हो जाते हैं। इसके बाद वह चावल, दाल या अंडे लेने की सोचता है, लेकिन उसे जल्दी समझ आता है कि सब्ज़ी, तेल और दूध जैसी साधारण चीजें भी पिछले महीनों में 60% से लेकर 100% तक महंगी हो चुकी हैं।
अब वह हिसाब लगाने लगता है। चार लोगों के परिवार के लिए यदि सिर्फ साधारण खाना, रोटी, थोड़ा चावल, कुछ अंडे और सस्ती सब्ज़ियां ही लिया जाए तो एक दिन का न्यूनतम खर्च कई लाख रियाल तक पहुंच जाता है। कई ईरानी परिवारों ने बताया है कि पांच लोगों का रोज का बेसिक खर्च लगभग 3 करोड़ रियाल तक जा रहा है, वह भी बिना मांस और फल के।
इसलिए उस आदमी को जल्दी समझ आ जाता है कि उसके पास जो एक करोड़ रियाल हैं, उससे वह अपने परिवार के लिए मुश्किल से एक दिन का साधारण राशन, या बहुत सख्ती से खर्च करे तो डेढ़ दिन तक का खाना ही खरीद पाएगा। मांस, फल, डेयरी जैसी चीजें लेने की कोशिश करे तो यह रकम आधे दिन में भी खत्म हो सकती है। यानी कि ईरान में एक करोड़ रियाल में एक थैला सामान भी नहीं खरीद पाएगा।
ईरान में आसमान क्यों छू रही है महंगाई
ईरान की अर्थव्यवस्था पिछले कई सालों से दबाव में थी। लेकिन 2025-2026 में ये संकट चरम पर पहुंच गया। दिसंबर 2025 में महंगाई दर 42.5% तक पहुंच गई, और कुछ रिपोर्ट्स में खाने-पीने की चीजों की महंगाई 70% से भी ज्यादा बताई जा रही है। अभी ईरान में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद महंगाई का स्तर सबसे ज्यादा है। दिसंबर 2025 में एक डॉलर की कीमत 14 लाख ईरानी रियाल थी।
फरवरी के आखिर में जंग शुरू होते ही ये संतुलन और भी बिगड़ गया। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इसका सबसे बड़ा असर ये हुआ कि आयातित सामान जैसे दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, और यहां तक कि कुछ बेसिक खाद्य सामग्री बहुत महंगे हो गए।
अमेरिकी प्रतिबंधों ने तोड़ी ईरानी इकोनॉमी की कमर
ईरान पहले से ही अमेरिका, यूरोप और UN के कड़े प्रतिबंधों से जूझ रहा था। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम के कारण अमेरिका और यूरोप ने काफी सख्त प्रतिबंध अमेरिका पर लगाए हैं। कोई भी देश तो अमेरिका से बिजनेस करना चाहता है उसे ईरान के साथ कुछ भी खरीद बिक्री नहीं करनी पड़ेगी। ऐसा अमेरिका का प्रतिबंध कहता है। यही वजह रही कि भारत ईरान से कच्चा तेल नहीं खरीदता था।
ईरान दुनिया का बड़ा तेल उत्पादक है, लेकिन सैंक्शंस की वजह से ईरान अपने तेल किसी को नहीं बेच पाया। इस वजह से ईरान के पास विदेशी मुद्रा यानी कि डॉलर की भारी कमी हो गई। तेल बेचकर कमाई कम होने से सरकार का खजाना खाली हो गया।





