Post Views: 936 आध्यात्मिकता और राजनीति दोनोंका ही मानवता एवं मानवके साथ गहरा संबंध है। राजनीतिका उद्देश्य सुशासन लाना और भौतिक एवं भावानात्मक सुविधाओंको जनतातक पहुंचाना है। वहीं आध्यात्मिकताका लक्ष्य नैतिकता एवं मानवीय मूल्योंको बढ़ाना है। किसी भी देशकी समृद्धि एवं विकासके लिए राजनीति एवं आध्यात्मिकताका एक साथ चलना अति आवश्यक है। सुशासन एवं अच्छे […]
Post Views: 880 अर्थव्यवस्थाको क्षति पहुंचायेगा ऋण यदि उद्यमी ऋण लेकर उद्योग स्थापित करता है, अधिक लाभ कमाता है और उस अतिरिक्त लाभसे ऋणका भुगतान करता है। ऐसेमें ऋणका सदुपयोग उत्पादक कार्योंके लिए होता है। लेकिन यदि ऋणका उपयोग घाटेकी भरपाईके लिए किया जाय तो उसका प्रभाव बिलकुल अलग होता है। खपतके लिए उपयोग किये […]
Post Views: 764 डा. शंकर सुवन सिंह शोध उस प्रक्रिया अथवा कार्यका नाम है जिसमें बोधपूर्वक प्रयत्नसे तथ्योंका संकलन कर सूक्ष्मग्राही एवं विवेचक बुद्धिसे उसका अवलोकन, विश्लेषण करके नये तथ्यों या सिद्धांतोंका उद्घाटन किया जाता है। रैडमैन और मोरीने अपनी किताब दि रोमांस आफ रिसर्चमें शोधका अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखा है कि नवीन ज्ञानकी […]