सम्पादकीय

उम्मीद और चुनौती

कोरोनासे प्रभावित देशकी अर्थव्यवस्थाके सन्दर्भमें वित्त मंत्रालयने भी स्वीकार किया है कि दूसरी लहरसे चालू वित्त वर्षकी पहली तिमाही (अप्रैलसे जून २०२१) में आर्थिक विकास दरमें गिरावटकी आशंका है। मंत्रालयकी मासिक रिपोर्टमें कहा गया है कि दूसरी लहरका आर्थिक विकास दर असर दिख सकता है। साथ ही यह भी कहा गया है कि पहली लहरके […]

सम्पादकीय

रिजर्व बैंकका सीमित दायरा

डा. भरत झुनझुनवाला रिजर्व बैंकने छोटे उद्योगों द्वारा लिये गये ऋणको अदा करनेकी मियादको बढ़ानेकी छूट बैंकोंको दे दी है जिससे कि छोटे उद्योग कोरोनाके संकटको पार कर सकें। साथ ही रिजर्व बैंकने प्राथमिक क्षेत्र, जिसमें कृषि और छोटे उद्योग आते हैं, उनमें कोरोना संकटसे लडऩेमें उपयोगी टीका उत्पादक, मेडिकल डिवाइस उत्पादक, अस्पताल, लेबोरेटरी, आक्सीजन […]

सम्पादकीय

आशा ही सकारात्मक भावशक्ति

हृदयनारायण दीक्षित    कोरोनाके कारण वैश्विक बेचेनी है। वैज्ञानिक कम समयमें टीका खोजनेमें सफल हुए हैं। भारत सरकारें उपलब्ध साधनोंका सदुपयोग कर रही हैं, लेकिन सवा अरबकी जनसंख्याके लिए तत्काल व्यवस्था करना संभव नहीं है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदीने कई देशोंको भारतकी मददके लिए सहमत किया है। गैर-सरकारी संघटन भी सहायार्थ जुटे हैं। चिकित्सा विज्ञानी एवं […]

सम्पादकीय

संक्रमणकी रफ्तार रोकनेके लिए तालाबंदी ही विकल्प

 रवि शंकर देशमें कोरोना वायरसकी दूसरी लहरसे हाहाकार मचा हुआ है। रोजाना संक्रमणके लाखों नये मामले सामने आ रहे हैं। ऐसेमें देशमें फिरसे संपूर्ण लाकडाउनकी मांगपर बहस छिड़ गयी है। यह ठीक है अप्रैल माहमें कोरोना संक्रमणके बेलगाम होनेके बाद कई राज्योंने अपने यहां लाकडाउन लगाया है। लेकिन केंद्र सरकार इस बार देशव्यापी लॉकडाउन लगानेसे […]

सम्पादकीय

ध्यानकी चेतना 

श्रीश्री रविशंकर व्याकुलतासे रहित मन ध्यान है। वर्तमान क्षणमें स्थित मन ध्यान है। दुविधा और प्रत्याशा रहित मन ध्यान है। वापस स्रोततक पहुंच चुका मन ध्यान है। विश्राम तभी संभव है, जब आप अन्य सभी काम छोड़ दें। जब आप इधर-उधर घूमना, काम करना, सोचना, बात करना, देखना, सुनना, सूंघना, चखना, यह सब काम बंद […]

सम्पादकीय

टीकाकरणकी नजीर

कोरोनासे गम्भीर रूपसे आक्रांत ब्राजीलका एक छोटा शहर सेरेना है, जिसकी आबादी मात्र ४५ हजार है। सेरेनामें ९५.७ प्रतिशत लोगोंका टीकाकरण हुआ है और यह शहर पूरी तरहसे संक्रमण मुक्त है। सेरेना विश्वके लिए न केवल एक प्रेरक नजीर है, बल्कि इस शहरने यह भी सन्देश दिया है कि टीकाकरण हर व्यक्तिका होना अत्यन्त जरूरी […]

सम्पादकीय

कार्बन उत्सर्जनपर रोकथाम जरूरी

अरविंद जयतिलक जहां एक ओर दुनियाके अधिकांश देश कार्बन उत्सर्जनमें कमी लानेमें कोताही बरत रहे हैं वहीं भारत पहले ही कार्बन उत्सर्जनमें ३५ फीसदी कमी लानेका संकल्प जता चुका है। इस सम्मेलनकी अच्छी बात यह रही कि अमेरिकाने भी २०३० तक ग्रीनहाउस उत्सर्जनमें ५० फीसदीकी कटौतीका ऐलान किया है। भारत और अमेरिकाने पेरिस समझौतेके लक्ष्योंको […]

सम्पादकीय

चिकित्सा व्यवस्थामें मजबूती

आर. सर्राफ  कोरोना संक्रमितोंका सिलसिला इसी रफ्तारसे बढ़ता रहा तो आनेवाले कुछ दिनोंमें ही स्थिति विकट हो जायेगी। संक्रमितोंकी संख्यामें वृद्धिके साथ ही देशमें आक्सीजनकी भारी कमी महसूस की जा रही है। आक्सीजनकी कमीके चलते कई स्थानोंपर कोरोना संक्रमित लोगोंकी मौत भी हो चुकी है। हालांकि आक्सीजन संकट व्याप्त होते ही केंद्र सरकारने शीघ्रतासे आपदा […]

सम्पादकीय

संकटमें विनिर्माण उद्योग

आर.डी. सत्येन्द्र कुमार विनिर्माण उद्योग संकटमें रहा है। मार्चमें यह संकट गहनतर हो गया है। इतना ही नहीं, उसमें सुधारके भी फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इसके लिए एक हदतक कोविड केसमें उभारको मुख्य रूपसे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हालांकि विनिर्माण उद्योगकी विसंगतियोंकी भी भूमिका स्वीकार की जा रही है। फरवरीमें […]

सम्पादकीय

आहार 

ओशो मनुष्य एक अकेली प्रजाति है, जिसका आहार अनिश्चित है। अन्य सभी जानवरोंका आहार निश्चित है। उनकी बुनियादी शारीरिक जरूरतें और उनका स्वभाव फैसला करता है कि वह क्या खाते हैं और क्या नहीं। किंतु मनुष्यका व्यवहार बिलकुल अप्रत्याशित है, वह बिलकुल अनिश्चिततामें जीता है। न ही तो उसकी प्रकृति उसे बताती है कि उसे […]