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कैलाश विजयवर्गीय- बंगाल में तलवार के बल पर तृणमूल कांग्रेस में शामिल किए जा रहे विपक्षी नेता


विस चुनाव के बाद से भाजपा नेताओं के तृणमूल में शामिल होने को लेकर ममता को घेरा ममता सरकार पर विपक्ष की हत्या के प्रयासों में जुटने का लगाया आरोप कैलाश विजयवर्गीय ने ममता बनर्जी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए करारा हमला बोला है।

 कोलकाता। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा चुनाव के बाद से अपने एक के बाद एक नेताओं के पार्टी छोड़कर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल होने को लेकर ममता बनर्जी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए करारा हमला बोला है। उन्होंने बंगाल सरकार पर विपक्ष की हत्या के प्रयासों में जुटने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इस सूबे में विपक्षी दलों के नेताओं पर संगीन जुर्मों के झूठे मामले लाद कर उन्हें तलवार के बल पर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने पर मजबूर किया जा रहा है।

विजयवर्गीय ने कहा, मुझे तो एक घटना याद आती है कि इस देश के अंदर इस्लाम भी तलवार के बल पर आया और बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में जो लोग जा रहे हैं, वे तलवार के बल पर जा रहे हैं। मुझे लगता है कि दोनों घटनाएं एक जैसी हैं। भाजपा महासचिव से बंगाल में उनकी पार्टी के नेताओं के सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में लगातार शामिल होने पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी।

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद पार्टी के कई नेताओं ने तृणमूल का दामन थाम लिया है। इस चुनाव में भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार रहे विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि बंगाल में कानून-व्यवस्था खत्म हो चुकी है और भाजपा के नेताओं पर हत्या, डकैती तथा भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों में बड़ी तादाद में झूठे मामले लादे जा रहे हैं। भाजपा महासचिव ने कहा, बंगाल में अकेले मुझ पर 20 मुकदमे चल रहे हैं। सरकार जब विपक्ष की हत्या करने में लग जाती है, तो वहां (बंगाल में) कोई आदमी कैसे जी पाएगा?

विजयवर्गीय ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा, अगर देश के इतिहास में किसी ऐसे तानाशाह नेता का नाम लिखा जाएगा जिसका प्रजातंत्र पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं रहा, तो इनमें बनर्जी भी शामिल होंगी। उन्होंने कहा, दुनिया भर में भारत के प्रजातंत्र की प्रशंसा हो रही है। लेकिन यह बात मैं भाजपा महासचिव की हैसियत से पूरी जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि बंगाल में प्रजातंत्र नहीं है।