Post Views: 848 श्रीराम शर्मा प्रकृतिकी मर्यादाओंमें चलकर ही सुखी और संपन्न रहा जा सकता है। इसीको नैतिकता भी कहा जा सकता है। जिस प्रकार प्रकृतिकी व्यवस्थामें प्राणियोंसे लेकर ग्रह-नक्षत्रोंका अस्तित्व, जीवन और गति-प्रगति सुरक्षित है, उसी प्रकार मनुष्य नैतिक नियमोंका पालन कर सुखी एवं संपन्न रह सकता है। नैतिकता इसीलिए आवश्यक है कि अपने […]
Post Views: 558 रमेश सर्राफ धमोरा कांग्रेस पार्टी इन दिनों अपने ही असंतुष्ठ नेताओंकी बगावतसे जूझ रही है। देशमें लगातार कांग्रेसका प्रभाव कम होता जा रहा है। कुछ दिन पूर्व पुडुचेरीमें कांग्रेसकी सरकार गिर गयी थी। ऐसेमें गिरते जनाधारको रोकनेमें नाकाम रही कांग्रेसमें व्याप्त आंतरिक संकट पार्टीको और अधिक कमजोर करेगा। कांग्रेसके २३ वरिष्ठ नेताओंने […]
Post Views: 898 कश्मीरमें सुरक्षा व्यवस्थाके मोरचेपर नयी चुनौती सामने आयी है, जिससे सुरक्षाबलोंकी दिक्कतें बढ़ गयी हैं। नयी चुनौती हाईब्रिड आतंकियों या पार्टटाइम आतंकियोंसे उत्पन्न हुई है। नयी परिपाटीके इन आतंकियोंकी संख्या बढ़ रही है, जिन्हें पहचानना भी जटिल कार्य है। ऐसे आतंकियोंको पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआईका संरक्षण प्राप्त है। इनके निर्देशपर […]