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क्या होती है कैंसिलेशन रिपोर्ट जिसके आधार पर POCSO केस में बृजभूषण को मिल सकती है राहत


नई दिल्ली, । भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के निवर्तमान प्रमुख व यूपी के गोंडा से भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ नाबालिग महिला पहलवान द्वारा लगाए गए पॉक्सो केस में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने आज गुरुवार को पटियाला हाउस कोर्ट में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की है।

4 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

पॉक्सो केस में दिल्ली पुलिस की ओर से बृजभूषण शरण सिंह को क्लीनचिट मिलने के बाद अब इस कैंसिलेशन रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट से बड़ी राहत मिल सकती है।

उल्लेखनीय है कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दर्ज POCSO मामले में जांच पूरी होने के बाद शिकायतकर्ता यानी पीड़िता के पिता और स्वयं पीड़िता के बयानों के आधार पर मामले को रद्द करने का अनुरोध करते हुए धारा 173 CrPC के तहत कोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल की है।

अब कोर्ट तय करेगा कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पॉक्सो का केस चलेगा या नहीं। इस मामले में अगली सुनवाई अब 4 जुलाई को होगी।

क्या होती है कैंसिलेशन रिपोर्ट?

किसी मामले की जांच में सबूत ना मिलने या गलत पाए जाने पर पुलिस यह निष्कर्ष निकाल सकती है कि अपराध नहीं किया गया है और इसकी कैंसिलेशन रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर सकती है। इसके बाद अगर कोर्ट पुलिस की रिपोर्ट से सहमत है तो वो कार्यवाही बंद करने का निर्णय ले सकता है।