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चंडीगढ़ मेयर चुनाव: दोबारा होगी वोटों की गिनती, अमान्य किए गए आठ वोट मान्य; SC की चंडीगढ़ मेयर चुनाव पर सख्त टिप्पणी


चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट में चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले की सुनवाई जारी है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित बैलेट पेपर्स और मतगणना (Chandigarh Mayor Election) के दिन का पूरा वीडियो फुटेज मंगलवार यानी आज कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था, ताकि मामले को तह से समझा जा सके। इस बाबत आज फिर मामले की सुनवाई जारी है।

 

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेवी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच कर रही है। इस बाबत चीफ जस्टिस ने बैलेट पेपर भी देखें। सीजेआई ने देखा कि सभी आठ में से सिर्फ कुलदीप कुमार के बैलेट पर मुहर लगी है, लेकिन बाद में लाइन खींची गई है।

अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतक के बीच बहस जारी है। चीफ जस्टिस ने कहा कि आठ वोटों को मान्य माना जाएगा और उन्हें गिनती में गिना जाएगा। वहीं, पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट कार्रवाई के आदेश दे सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगाई थी पूरी वीडियो

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया कि वह उनके पास सुरक्षित रखी गई चुनाव से संबंधित सामग्री और रिकॉर्ड में से बैलेट पेपर्स और मतगणना के दिन की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग सुप्रीम कोर्ट भेजें। कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश दिया कि वह रिकॉर्ड और वीडियो रिकार्डिंग पेशी के लिए आने के दौरान उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।

बैलेट पेपर्स विरूपित करने पर अधिकारी पर हो कार्रवाई: कोर्ट

पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने पीठासीन अधिकारी के वीडियो में दिख रहे आचरण पर नाराजगी जताते हुए तीखी टिप्पणियां की थीं। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि बैलेट पेपर्स विरूपित करने पर पीठासीन अधिकारी पर कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने पीठासीन अधिकारी को स्पष्टीकरण देने के लिए सोमवार को अदालत में तलब किया था और आदेश का पालन करते हुए मसीह कोर्ट में पेश हुए थे।

स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार एक पीठासीन अधिकारी से देश के प्रधान न्यायाधीश ने सवाल जवाब किए। याचिकाकर्ता कुलदीप के वकील का कहना था कि नए सिरे से मतगणना करा दी जाए, तब पीठ ने कहा- उसका मानना है कि नया पीठासीन अधिकारी नियुक्ति किया जाए जिसका किसी दल से संबंध न हो और उसकी देखरेख में मतगणना हो।

कोर्ट नए सिरे से चुनाव कराने का दे आदेश: तुषार मेहता

चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि कोर्ट दोबारा नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दे क्योंकि उन्हें जो जानकारी है, उसके मुताबिक कुछ मतपत्र फाड़ दिए गए थे। कोर्ट मत पत्रों को मंगाकर देखे। साथ ही कोर्ट को पूरी वीडियो रिकार्डिंग देखनी चाहिए ताकि सही वस्तुस्थिति पता चल सके।

इसके बाद कोर्ट ने बैलेट पेपर्स और वीडियो रिकार्डिंग पेश करने के आदेश दिए। कोर्ट ने मामले को मंगलवार को सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया, इस पर तुषार मेहता और कुछ अन्य वकीलों ने कोर्ट से किसी और दिन सुनवाई का अनुरोध किया, लेकिन कोर्ट ने मांग ठुकरा दी।

पीठासीन अधिकारी से सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट: यह अदालत है, यहां कोई राजनीति नहीं, पूछे गए सवालों के सही-सही जवाब देने होंगे, ऐसा नहीं होने पर कार्रवाई हो सकती है।

प्रधान न्यायाधीश : आप कैमरा क्यों देख रहे थे, जैसा कि वीडियो में नजर आ रहा है।

मसीह: सब शोर कर रहे थे। वहां बहुत सारे कैमरे थे, ऐसे में उन्होंने कैमरे की ओर देखा था।

सुप्रीम कोर्ट: वीडियो में दिख रहा है कि आप बैलेट पेपर्स पर क्रॉस का निशान लगा रहे हैं, क्या आपने बैलेट पेपर्स पर क्रॉस का निशान लगाया था।

मसीह: हां, पहले से विरूपित आठ बैलेट पेपर्स पर क्रॉस का निशान लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट: आपने ऐसा किस कानून के तहत किया।

मसीह: जैसे ही यह हुआ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता बैलेट पेपर्स लेकर भागने लगे, उन्होंने बैलेट पेपर्स फाड़ भी दिए, बाद में उन्हें मार्शल ने पकड़ा।

सुप्रीम कोर्ट: आप बैलेट पेपर्स विरूपित कैसे कर सकते हैं। नियम-11 तो कहता है कि आप सिर्फ उस पर हस्ताक्षर करेंगे तो फिर आपको क्रॉस लगाने का शक्ति कहां से मिली। आपने बैलेट पेपर्स विरूपित किए हैं और आप यह स्वीकार कर रहे हैं। इन पर तो मुकदमा चलना चाहिए।

यह है पूरा मामला

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी को 12 के मुकाबले 16 मतों से हराकर मेयर चुनाव जीत लिया था। इस चुनाव में पीठासीन अधिकारी ने कांग्रेस और आप के आठ मतों को अवैध ठहरा दिया था।

 

आम आदमी पार्टी के पार्षद कुलदीप कुमार ने गलत तरीके से आठ मतों को अवैध ठहराने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मेयर चुनाव पर सवाल उठाए हैं। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने मतगणना के वीडियो में पीठासीन अधिकारी के आचरण को देखकर कहा था कि वह मतपत्रों को विरूपित करता दिख रहा है, ये लोकतंत्र की हत्या है।