पटना (बिक्रम)। प्रखण्ड स्थित हरपुरा मे पाँचवें दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण एवं मनमोहक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। श्री स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज द्वारा कथा के पाँचवें दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण एवं मनमोहक प्रसंग प्रस्तुत करते हुये कहे की जब-जब संसार में अन्याय, अत्याचार एवं शोषण की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान दीनबंधु के रूप में अवतरित होकर धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं।
महाराज श्री ने अपने प्रवचन में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि उनका जन्म अधर्म के नाश, सज्जनों की रक्षा तथा धर्म की स्थापना के लिए हुआ। उन्होंने कंस के अत्याचारों का हृदयविदारक वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंदी बना लिया तथा देवकी के छह पुत्रों का निर्दयतापूर्वक वध कर दिया। महाराज श्री ने आगे बताया कि अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में, कारागार के कठोर बंधनों के बीच भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य अवतरण हुआ। जन्म लेते ही बंधन स्वतः खुल गए और चारों ओर अद्भुत प्रकाश फैल गया। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का पावन प्रसंग आया, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। कृष्ण भजनों की मधुर धुनों पर सभी श्रद्धालु झूम उठे और जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध गायक ज्ञानी जी द्वारा प्रस्तुत भजन “आनंद कंद घनश्यामा, जय-जय सियाराम” ने पूरे वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।




