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पंजाब में पाकिस्तान सीमा पर अवैध खनन जारी, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता का आरोप


चंडीगढ़। पंजाब में पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में हो रहे अवैध खनन से हाई कोर्ट चिंतित है। सेना व बीएसएफ पहले ही इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बता चुके हैं। इसके बाद हाई कोर्ट ने पठानकोट व गुरदासपुर में खनन पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि अभी भी यहां अवैध खनन जारी है।

अवैध खनन के मामले वीरवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अभी भी सीमावर्ती इलाकों में अवैध खनन जारी है। पंजाब सरकार ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि बीएसएफ के साथ मिलकर पुलिस खनन पर रोक लगा रही है। सेना और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी हलफनामा दायर कर अपना पक्ष रखा।

सेना ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पंजाब के सीमावर्ती जिलों में अवैध खनन, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी द्वारा प्रायोजित  सक्रिय ड्रग तस्करों, आतंकवादियों और राष्ट्र-विरोधी तत्वों के लिए सुविधाजनक स्थिति बना रहा है। सेना द्वारा यह भी दावा किया गया है कि अमृतसर में खनन के कारण सेना के बंकर को नुकसान हो रहा है।

अनियोजित और अनियंत्रित खनन से प्राकृतिक जल निकासी में परिवर्तन हो सकता है और यहां तक कि नदी की धारा भी बदल सकती है, जिसके परिणामस्वरूप सेना की चौकियां अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाढ़ की चपेट में आ सकती हैं। कोर्ट ने पठानकोट व गुरदासपुर में  खनन पर रोक के आदेश जारी रखते हुए सुनवाई की स्थगित की।

बता दें, इससे पहले सुनवाई में सेना व बीएसएफ ने अवैध खनन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। सीमा पर कई स्थानों पर इतना खनन हो चुका है कि वहां सुरंग बनाई जा सकती है।

पिछली सुनवाई में पंजाब सरकार द्वारा इस मामले में किए जा रहे सभी दावों की हाई कोर्ट ने हवा निकालते हुए पंजाब सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाए थे। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पठानकोट और गुरदासपुर में खनन पर पूरी तरह लगा दी थी।

हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को नए सिरे से ठोस जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। सोमवार को मामले में पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में जो जवाब दाखिल किया उससे हाई कोर्ट असंतुष्ट नजर आया और अब यहां अगले आदेशों तक खनन पूरी तरह से बंद करने के आदेश दे दिए थे।

कोर्ट ने कहा कि सरकार जमीनी स्तर पर कुछ नहीं कर रही केवल हाई कोर्ट में दिखावे के लिए फैंसी हलफनामा दायर कर रही है, जब कुछ करना ही नहीं तो ऐसे हलफनामे दायर करने का क्या फायदा। कोर्ट ने सवाल किया की क्या राष्ट्रीय सुरक्षा से भी कोई बड़ा मुद्दा हो सकता है।

पंजाब सरकार का क्या था जवाब

पंजाब सरकार की तरफ से कोर्ट में दायर जवाब में बताया गया कि उनकी और बीएसएफ के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी जिसमे बीएसएफ ने जो चिंता जताई थी, उस पर कार्रवाई की जा रही है, जैसे कि बीएसएफ कि मांग की थी स्टोन क्रशर का काम सुबह छह से शाम सात के बीच हो और रात को इस पर पाबंदी लगे, यहां काम रहे मजदूरों की शिनाख्त की जाए माइनिंग मटेरियल से बढे वाहन सिर्फ दिन में ही चलें और इनके बारे में बीएसएफ को जानकारी हो।

इसके अलावा सेना और बीएसएफ दोनों ने सीमा के साथ बह रही रावी नदी को लेकर भी चिंता जताई है। दोनों ने कहा कि बेलगाम माइनिंग के कारण नदी अब अपना रुख बदल रही है जो सीमा पर लगी तारबंदी के लिए नुकसानदायक है।

बीएसएफ व सेना ने रिपोर्ट में क्या कहा

बीएसएफ के साथ ही सेना भी हाई कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंप कहा था कि यहां चल रही अवैध माइनिंग इंटरनेशनल बार्डर के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि बेलगाम चल रही माइनिंग के कारण सीमा के करीब कई बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं जिसके कारण यहां रावी नदी अपना रुख बदल सकती है जो सीमा के लिए सीमा पर लगी तारबंदी के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। अवैध माइनिंग के कारण बने गड्ढे आतंकवादियों और असामाजिक तत्वों की पनाहगारें बन रही हैं ।

बीएसएफ की तरफ से बताया गया कि सीमा के पास चल रहे स्टोन क्रशरों की आवाज में पाकिस्तान की तरफ से आने वाले ड्रोन की आवाज दब जाती है जो यहां नशीले पदार्थ और हथियार गिरा रहे हैं।