पटना

पटना: 23 मार्च की घटना पर पक्ष और विपक्ष ने किया अफसोस जाहिर


      • आचार समिति कर रही है जांच, जरूर होगा न्याय, सचेत रहिये, किसी को हस्तक्षेप करने का मौका नहीं दीजिये : स्पीकर
      • सुप्रीम कोर्ट व हाइकोर्ट की टिप्पणी से सीख ले सरकार : तेजस्वी

(आज समाचार सेवा)

पटना। २३ मार्च की घटना संसदीय लोकतंत्र के लिए काला अध्याय था। इसकी जितनी भी निंदा की जाये वह कम नहीं है। इस घटना को लेकर पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने अफसोस प्रकट करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृति न हो, इसका ख्याल रखा जाना चाहिए। मंगलवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हल्की नोक झोक भी हुई, परंतु सदभावना के वातावरण में विवाद का समापन हो गया।

विधानसभाध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आचार समिति विडियो फूटेज के आधार पर जांच कर रही है। समिति की अनुशंसा को सदन के पटल पर रखा जायेगा। अधिकारियों की समितियों की प्रारंभिक रिपोर्ट के  आधार पर दो सिपाही का निलंबित किया गया है, अगर आवश्यकता हुई तो अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। निश्चिंत रहिये, जरूर न्याय होगा।

प्रश्नोत्तर काल समाप्त होते ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने स्पीकर से उनके द्वारा दिये गये प्रस्ताव पर नियमन के संदर्भ में जानना चाहा। अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रस्ताव नहीं सुझाव कहिये। इसी क्रम में पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने अपने सीटों पर खड़े होकर शोरगुल करने लगे। स्पीकर श्री सिन्हा ने कहा कि सदस्यों को उत्तेजित होने की जरूरत नहीं है। सदस्यों को अपनी बात रखने का पूर्ण अधिकार है। अगर आसन ने किसी को अपनी बात रखने की अनुमति दी है तो उसे सुना जाना चाहिए। २३ मार्च की घटना के बाद वे स्वयं पाश्चाताप कर रहे थे। आखिर ऐसी घटना क्यों और कैसे घटी।

उन्होंने कहा कि पूर्व में इस तरह की घटनाएं होती रही है। विधानसभा में कई सदस्यों द्वारा अमर्यादित आचरण किया था। उनके खिलाफ कार्रवाई हुई। ज्योति रश्मि और दिलीप वर्मा का मामला चर्चित रहा है। उन्होंने कहा कि २३ मार्च को काला धब्बा लग गया। अगर आप आसन का अपमान करेंगे। आसन को कमरे में बंद कर देंगे। इस तरह की घटना कभी नहीं घटी थी। अमर्यादित आचरण का मामला वीडियो फटेज के आधार पर आचार समिति को सौंपा गया है।

उन्होंने कहा कि अगर हत और आप सचेत नहीं होंगे तो दूसरों को हस्तक्षेप करने का मौका मिल जायेगा। आसन की गरिमा  नहीं होगी तो क्या बचेगा। संयमित आचरण करना जरूरी है। भ्रम की स्थिति न रहे। इतिहास को कलंकित करने से सबों को बचना चाहिए। सकारात्मक वातावरण तैयार कर स्वस्थ लोकतंत्र का गवाह बनें।

संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि २३ मार्च की घटना को लेकर आसन की जो रासय है उसके साथ सरकार है। उस दिन की घटना संसदीय लोकतंत्र को कलंकित करने वाला था। आखिर लोकतंत्र बसता कहां हैं। उन्होंने कहा कि पूरी देश दुनिया आज देख रहा है। जनता ने विश्वास देकर जनतंत्र की रक्षा के लिए भेजा है। हमारा आपका आचरण उसके आशा के अनुरूप होना चाहिए। सचेत होने का समय है अगर नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी हम सबों को माफ नहीं करेगी। हमें यह ख्याल रखना चाहिए कि लोकतंत्र के दूसरे अंग को विधायिका में हस्तक्षेप करने का मौका नहीं दें। केरल विधानसभा की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी चिंता का विष्य है। किसी विषय पर विमर्श के लिए राय रखने की स्वतंत्रता सबको है।

उन्होंने कहा कि हम अपने विधायिका  की इज्जत कर नयी ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं। सरकार व सत्ता पक्ष आसन  के साथ हैं। जो घटनायें हुई वह व्हाइट लाइन के अंदर हुई है। स्पीकर के क्षेत्राधिकार में सरकार की भूमिका नहीं। नेता प्रतिपक्ष ने जो कहा है वह सही कहा है। मामला आसन के संज्ञान में है। जो निर्णय लिजियेगा उसके साथ सरकार है।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि मंत्री जी की बातों से स्पष्ट होता है कि उस घटना के लिए अधिकारी जिम्मेवार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की व्याख्या की गयी है, परंतु हाइ कोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ टिप्पणी की है वह क्या है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिहार में कानून का राज नहीं पुलिस का राज है। हाइ कोर्ट कहती है बिहार सरकार माईंड लेस है। जिस घटना को लेकर विवाद हुआ, सरकार ऐसी दुखद घटना से बच सकती है। अगर विधेयक को समिति में अध्ययन के लिए भेज देती और इस सत्र में उसे पारित कराती तो क्या पहाड़ टूट जाता।