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भारत में मातृ मृत्युदर पहली बार 100 से नीचे, जान बचाने की दिशा में अहम उपलब्धि


 नई दिल्ली। भारत का मातृ मृत्युदर (एमएमआर) 97 पहुंच गया है। वैसे विभिन्न राज्यों के बीच इसमें भारी अंतर है। एक ओर जहां असम में यह अब भी 197 बना हुआ है, वहीं केरल जैसे राज्य में यह 19 तक पहुंच गया है। तो उत्तरप्रदेश में 167, मध्यप्रदेश में 173 और बिहार में 118 है। प्रजनन के दौरान प्रति एक लाख माताओं में से होने वाली मौतों को मातृ मृत्यु दर के रूप में आंका जाता है और वैश्विक सतत विकास लक्ष्य में इसे 70 से नीचे लाने का टारगेट रखा गया है।

2014-16 के बीच भारत में एमएमआर 130 था

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 2014-16 के बीच भारत में एमएमआर 130 था, जो 2018-20 के बीच हुए सर्वे के मुताबिक 97 पहुंच गया है। इसके पहले यह 2015-17 में 122, 2016-18 में 113 और 2017-19 में 103 था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मनडाविया ने गर्भवती महिलाओं की जान बचाने की दिशा में इसे अहम उपलब्धि करार दिया है। मातृ मृत्यु दर का आंकलन गृहमंत्रालय के मातहत आने वाले रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया देश में जन्म-मृत्यु दर के आंकलन के लिए किये जाने वाले सबसे बड़े सर्वे के दौरान करता है।

वैश्विक सतत विकास लक्ष्य 2030 के इस अहम गोल को हासिल कर सकता है भारत

मातृ मृत्यु दर में कमी इसी हिसाब से नीचे आती रही तो वैश्विक सतत विकास लक्ष्य 2030 के इस अहम गोल को भारत समय से पहले भी हासिल कर सकता है।वैसे तो एमएमआर में सतत विकास के लक्ष्य से भारत अभी काफी दूर है। लेकिन कई राज्य इस लक्ष्य को काफी पीछे छोड़ चुके हैं। एमएमआर में सतत विकास लक्ष्य से आगे रहने वालों राज्यों में दक्षिण के सभी राज्यों आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के साथ महाराष्ट्र, गुजरात और झारखंड भी शामिल है।