Post Views: 731 वी.के. जायसवाल ध्यान ऐसी क्रिया है जिसमें व्यक्ति शरीरसे अलग होनेका अनुभव कुछ उसी तरहसे करता है जिस प्रकारसे मृत्युके समय अनुभव किया जा सकता है। गहरे ध्यानकी क्रियाका अनुभव हो या मृत्युके समयका अनुभव हो दोनोंमें ही बहुत कुछ समानताएं है क्योंकि दोनोंमें ही शरीरको छोडऩेका अनुभव होता है बस अंतर […]
Post Views: 863 आनन्द शुक्ल भारतका राजनीतिक इतिहास चाचा-भतीजे, पिता-पुत्र, ससुर-दामाद और यहांतक कि सास-बहूके बीच सियासी विरासतको लेकर आपसी संघर्षोंकी घटनाओंसे भरा पड़ा है। राजनीतिक वारिसको लेकर वर्चस्वकी लड़ाईके कारण अबतक कई परिवार बिखर गये। पूर्व केन्द्रीयमंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवानकी लोक जनशक्ति पार्टीमें चाचा-भतीजेके बीच वर्चस्वको लेकर छिड़ी जंग उदाहरणके रूपमें सामने है। लोजपाके […]
Post Views: 2,142 अमेरिका फर्स्टकी पालिसीके तहत अमेरिका अपने हितोंकी रक्षा करनेके लिए किसी भी हदतक जा सकता है। अमेरिकाको इस बातसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसी दूसरे देशपर इससे क्या फर्क पड़ता है। बेशक अमेरिकी नीतिसे प्रभावित होनेवाला देश उसके मित्रोंकी सूचीमें ही क्यों न शामिल हो। कहनेको अमेरिका भारतको अपना दोस्त बताता […]