पटना

महावीर जयंती पर 108 कलशों से अभिषेक, 108 दीपों की आरती


पटना (आससे)। जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान् महावीर स्वामी के 2620 वें जन्म जयंती पटना सहित पूरे देश में मनाई गयी। भगवान् महावीर ने संसार को सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह एवं ब्रह्मचर्य का सिद्धांत दिया। भगवान् महावीर ने ही जियो और जीने दो का सिद्धांत दुनिया को दिया।  महावीर स्वामी का जन्म वैशाली के निकट कुण्डग्राम में क्षत्रिय परिवार में हुआ था। बचपन का नाम वर्धमान था।

पिता सिद्धार्थ कुण्डग्राम के राजा थे एवं माता त्रिशला का संबन्ध भी राजघराने से था। राजपरिवार में जन्म होने के कारण महावीर स्वामी का प्रारम्भिक जीवन सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण बीता। पिता की मृत्यु के पश्चात 30 वर्ष की आयु में इन्होने सन्यास ग्रहण कर लिया और कठोर तप में लीन हो गये। 12 वर्ष के कठोर तपस्या के बाद ऋजुपालिका नदि के तट पर सालवृक्ष के नीचे उन्हे ‘कैवल्य’ ज्ञान (सर्वोच्च ज्ञान) की प्राप्ति हुई।

पंचशील सिद्धान्त के प्रर्वतक एवं जैन धर्म के चौबिसवें तीर्थकंर महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। जिस युग में हिंसा, पशुबलि, जाति-पाँति के भेदभाव का बोलबाला था उसी युग में भगवान महावीर ने जन्म लिया। उन्होंने दुनिया को सत्य, अहिंसा जैसे खास उपदेशों के माध्यम से सही राह दिखाने की कोशिश की। अपने अनेक प्रवचनों से मनुष्यों का सही मार्गदर्शन किया। 72 वर्ष की आयु में भगवान् महावीर का निर्वाण पावापुरी में हुआ।

जैन संघ के मीडिया सचिव एम पी जैन ने भगवान् महावीर जयंती के अवसर पर उद्गार व्यक्त किया और कहा कि कोरोना काल के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भगवान महावीर की शोभा यात्रा नहीं निकाली गयी। पूरे देश में करोना बिमारी की विभीषिका के कारण श्रद्धालुओं ने किसी भी प्रकार का सामूहिक आयोजन इस बार नहीं किया। मंदिरों में 108 कलश से भगवान महावीर का अभिषेक किया गया।

मीठापुर जैन समाज के अध्यक्ष विजय कासलीवाल ने बताया कि मीठापुर दिगम्बर जैन मंदिर में प्रात: छह बजे से श्रद्धालु पुजारियों द्वारा मूलनायक भगवान महावीर की प्रतिमा पर श्रद्धालुओं के नाम पर 108 कलश से अभिषेक किया गया। आज की प्रथम कलश एक साल के बच्चे ग्यानान्स जैन की ओर से किया गया। साथ ही भगवान पर 108 श्रीफल भी चढ़ाया गया। संध्या में भगवान की 108 दीपों से आरती की गई। अभिषेक कार्यक्रम का लाइव प्रसारण फेसबुक के माध्यम से किया गया जिसका श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से दर्शन किया।

कांग्रेस मैदान मंदिर में भगवान महावीर की भव्य सफेद संगमरमर की प्रतिमा पर 108 कलशों से श्रद्धालुओं के नाम से पूजा की गई। भगवान की शांतिधारा जिनेश जैन एवं विकास अग्रवाल ने किया। संध्या 108 दीपों से भगवान की आरती की गयी। मुरादपुर मंदिर में भी भगवान की शांतिधारा पुजारी सुबोध जैन फंटी ने किया। एमपी जैन ने बताया कि आज भगवान माहवीर जयंती पर सामूहिक कार्यक्रम नही होने के कारण श्रद्धालुओं ने अपने अपने घरों पर हीं पूजा किया। श्रद्धालुओं ने अपने घरों पर नया जैन ध्वज लगाया। कुछ श्रद्धालुओं ने घंटी, थाल इत्यादि बजाया। कुछ श्रद्धालुओं ने अपने अपने घरों में रंगोली बनाई।

कुछ ने भगवान को पालने पर बैठाकर झूलन झुलाया। कुछ ने महावीर चालीसा का पाठ किया।  इस महावीर जयंती पर पूरे जैन समाज के सभी घरों के श्रद्धालुओं ने भगवान् से प्रार्थना किया कि देश में कोरोना महामारी का खात्मा जल्द से जल्द हो। संध्या में सभी श्रद्धालुओं ने अपने अपने घरों के दरवाजे खोलकर तथा बालकनी में खड़े होकर भगवान महावीर स्वामी की आरती किये तथा अपने अपने घरों पर जैन ध्वज भी लगाया।