Post Views: 709 भारतमें जब भी लोकतंत्र और संसदीय प्रणालीकी चर्चा होती है, उसका स्रोत ब्रिटिश सरकारको ही जाता है। वर्तमान संसदीय प्रणाली आधारित हमारा लोकतंत्र लगभग ब्रिटिश प्रणालीपर आधारित है। जिस तरह ब्रिटेनमें कॉमन सभा और लार्ड सभाके रूपमें दो सदन है वैसे ही हमारे यहां लोकसभा एवं राज्यसभा है। अंग्रेजोंकी पूरी कल्पना और […]
Post Views: 818 जग्गी वासुदेव क्याआपने कभी ध्यान दिया है कि आप जब अलग-अलग तरहके विचारों और भावनाओंसे गुजरते हैं तो आपकी सांसकी बनावट अलग-अलग तरहकी होती है। जब आप क्रोधित अथवा शांत होते हैं तो दूसरे तरीकेसे सांस लेते हैं। यदि आप बहुत खुश या दुख होते हैं तो दूसरे तरीकेसे सांस लेते हैं। […]
Post Views: 753 हृदयनारायण दीक्षित मनोनुकूल वक्तव्य प्रिय लगते हैं। हम सब वरिष्ठोंके वक्तव्य सुनते हैं। वक्ता कभी-कभी हमारे मनकी बात भी कहते हैं। वक्ता मूलत: अपने मनकी बात करते हैं लेकिन उसके मनकी बात हमारे मनसे मिलती है। हम प्रसन्न होते हैं। हम मनोनुकूल वक्तव्य सुनकर ही वक्तासे प्रभावित होते हैं। दूसरेसे प्रभावित होनेका […]