नई दिल्ली, । अमेरिका व यूरोप में मंदी की आशंका को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ गई है। इस मंदी के बीच अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रीट जनरल का एक सर्वे समाने आया है। सर्वे की रिपोर्ट चौंकाने वाली हैं। इस सर्वेक्षण में यह अनुमान लगाया गया है कि आर्थिक दृष्टि से अमेरिका में अगले 12 महीनें काफी अहम हैं। यह कहा गया है कि 12 महीनों में आर्थिक मंदी का दौर आ सकता है। चार दशकों के उच्च स्तर पर महंगाई ब्याज दरों में लगातार वृद्धि और बेरोजगारी दर 53 साल के निचले स्तर पर आना कुछ इसी ओर इशारा कर रही है।
अमेरिका में महंगाई 40 साल के उच्चतम स्तर पर
1- गौरतलब है कि अमेरिका में फिर से महंगाई 40 साल के उच्चतम स्तर पर जा पहुंची है। गुरुवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक खाने-पीने रहने और मेडिकल केयर पर खर्च में बढ़ोतरी के चलते सितंबर महीने में महंगाई दर 8.2 फीसद पर जा पहुंची है। अगस्त महीने में महंगाई दर 7.8 फीसद थी। अगस्त के मुकाबले महंगाई दर में चार फीसद की वृद्धि आई है। महंगाई के साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर मंदी का साया भी मंडरा रहा है! आईएमएफ ने कहा कि दुनिया को अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अभी और भी बुरे दौर का सामना करना पड़ सकता है और 2023 में मंदी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
2- अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और चीन में विकास की रफ्तार थम सकती है। आईएमएफ के अनुसार वर्ष 2022 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था का विकास दर 1.6 फीसद रहने का अनुमान है। वर्ष 2023 में यह एक फीसद तक गिर सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी माना कि मंदी देश में आ सकती है, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि इन चुनौतियों का सामना करने में उसे कोई दिक्कत नहीं आएगी।
डरावाने हैं सर्वेक्षण के आंकड़े और रिपोर्ट
1- इस सर्वेक्षण में अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अमेरिका के अगले 12 महीने काफी अहम हैं। उनका अनुमान है कि अमेरिका में आर्थिक मंदी की संभावना काफी बढ़ गई है। अर्थशास्त्रियों की यह चिंता बेवजह नहीं है, अमेरिका में महंगाई पर काबू पाने के लिए फेडरल रिजर्व लगातार ब्याज दरों में इजाफा कर रहा है। इसके पूर्व जुलाई में हुए सर्वेक्षण में इन अर्थशास्त्रियों ने मंदी की आशंका जताई थी। हालांकि, इस बार विशेषज्ञ मंदी को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। इस परेशानी की सबसे बड़ी वजह है कि इसका असर नौकरियों पर पड़ेगा। अमेरिका में कई बड़ी कंपनियों ने नौकरियों में कटौती है।
2- वर्ष 2023 के लिए सर्वेक्षण के पूर्वानुमान काफी निराश करने वाले हैं। बैंक आफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर में रोजगार का ग्राफ गिर सकता है। अनुमान लगाया गया है कि यह ग्राफ घटकर आधा रह सकता है। वर्ष 2023 में की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च में अमेरिका में महंगाई चरम पर होगी। इसको रोकने के लिए फेड रिजर्व ब्याज दरों को बढ़ा सकता है। इसका सीधा असर रोजगार और नौकरियों पर पड़ेगा। यह भी अनुमान है कि पहली तिमाही में पाच लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह कहा गया है कि रोजगार में गिरावट का यह सिलसिला पूरे वर्ष जारी रहेगा। यानी करीब 21 लाख लोग अपनी नौकरी गंवा सकते हैं।
3- अमेरिका में पिछले चार दशकों में सबसे ज्यादा महंगाई है। इस पर नियंत्रण पाने के लिए फेड रिजर्व भी ब्याज दरों में वृद्धि करेगा। फेड रिजर्व के मुताबिक उसका लक्ष्य महंगाई पर नियंत्रण पाना है। इसके असर से अर्थव्यवस्था के मंदी में आने का जोखिम भी लेना मजबूरी है। हालांकि, यह वर्ष 2008 या हाल में कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में बढ़ी बेरोजगारी की दर जैसे नहीं होगी। फिलहाल अभी बेरोजगारी दर 5.5 फीसद तक पहुंचने का अनुमान है। इसके पूर्व अप्रैल 2020 में अमेरिका में बेरोजगारी दर 15 फीसद तक पहुंच गई थी।
नौकरी पाने का ग्राफ 1969 के बाद सबसे निचले स्तर पर
बैंक आफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक अगले वर्ष की पिछली छमाही यानी जनवरी से जून में अमेरिका मंदी की गिरफ्त में आ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो देश में हर महीने 1.75 लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं। सितंबर में 2.63 लाख लोगों को नौकरियां मिलीं, जो 1969 के बाद से सबसे निचला स्तर है। रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि अमेरिका में बेरोजगारी दर 5 से 5.5 फीसद होने का अनुमान है। यह अनुमान इसलिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि फेड ने भी अगले वर्ष बेरोजगारी दर का अनुमान 4.4 फीसद लगाया है।
ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा असर
अमेरिका में महंगाई का हाल दुनिया के अन्य विकसित मुल्कों की तरह ही नजर आ रहा है। अमेरिका में लिए गए फैसलों का असर सिर्फ अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर ही नहीं बल्कि ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। बैंक आफ अमेरिका का कहना है कि ब्याज दरों में इजाफे का असर वर्ष 2023 की शुरुआत से दिखने लगेगा। हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि प्रत्येक महीने दो लाख से अधिक लोग बेरोजगार हो सकते हैं। बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार फेड रिजर्व जिस आक्रामक तरीके से ब्याज दरों में वृद्धि कर रहा है उससे जल्दी ही हर सामान की डिमांड घट सकती है।